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🥭 आम · बागवानी 🗓️ सीजन अप्रैल–जुलाई 2026 📍 उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में आम की खेती — सम्पूर्ण मार्गदर्शिका Mango Cultivation in Uttar Pradesh — Complete Guide for Farmers

दशहरी, लंगड़ा और चौसा से लेकर बाग लगाने, सिंचाई, रोग प्रबंधन, तुड़ाई और सरकारी सहायता तक — UP के आम बागवानों के लिए सब कुछ एक जगह।

✍️ KrashiMitra.in ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 जून 2026 अपडेट
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~25 लाख हे.
आम के बाग (बागान)
🥭
~45 लाख टन
वार्षिक उत्पादन
🏆
#1 राज्य
भारत में आम उत्पादन
🌏
GI टैग
दशहरी, लंगड़ा, चौसा
💰
₹30–120/kg
मंडी मूल्य (किस्म अनुसार)
👨‍🌾
30 लाख+
बागवान किसान परिवार
📋 इस लेख में क्या है
🥭

UP और आम — फलों का राजा, किसानों की पहचान

किसान भाइयों, उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा आम उत्पादक राज्य है। यहाँ का दशहरी आम दुनिया भर में प्रसिद्ध है और मलिहाबाद (लखनऊ) को "दशहरी की राजधानी" कहा जाता है। लंगड़ा, चौसा, सफेदा और रटौल जैसी किस्में भी अपनी अद्वितीय मिठास और सुगंध के लिए जानी जाती हैं।

UP में आम की खेती लखनऊ, हरदोई, उन्नाव, सहारनपुर, मुज़फ़्फ़रनगर, वाराणसी और मिर्ज़ापुर जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर होती है। राज्य के कुल फल उत्पादन में आम का हिस्सा 60% से अधिक है। यह फसल केवल खेती नहीं — यह UP की सांस्कृतिक विरासत भी है।

एक परिपक्व आम का बाग प्रति हेक्टेयर ₹1.5–4 लाख तक की वार्षिक आमदनी दे सकता है — बशर्ते सही किस्म, सही देखभाल और सही बाजार तक पहुँच हो।

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GI टैग का महत्व: UP के दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम को भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त है। GI टैग वाले आम को निर्यात बाजार में प्रीमियम मूल्य मिलता है और नकली उत्पादों से सुरक्षा भी होती है।

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UP की प्रमुख आम किस्में

UP में आम की 1,000 से अधिक किस्में पाई जाती हैं। नीचे सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक किस्मों की जानकारी दी गई है:

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दशहरी
🗓️ जून – जुलाई
मलिहाबाद की पहचान। मीठा, रेशे रहित। GI टैग प्राप्त। निर्यात में सर्वाधिक माँग।
🍋
लंगड़ा
🗓️ जुलाई – अगस्त
वाराणसी की विशेषता। पीला-हरा, सुगंधित। GI टैग। उत्तरी भारत में बेहद लोकप्रिय।
🌕
चौसा
🗓️ अगस्त – सितंबर
हरदोई–कासगंज क्षेत्र। देर से पकता है। सबसे मीठी किस्मों में से एक।
🍊
सफेदा (लखनऊ)
🗓️ मई – जून
अगेती किस्म। हल्का पीला, मध्यम मिठास। प्रसंस्करण (Juice) के लिए उत्तम।
🌸
रटौल
🗓️ जून – जुलाई
बागपत–मुज़फ़्फ़रनगर क्षेत्र। बेहद सुगंधित। छोटा आकार, उच्च मूल्य।
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तोतापरी
🗓️ जून
लंबा, तोते की चोंच जैसा। निर्यात और प्रसंस्करण दोनों में पसंदीदा।
मल्लिका
🗓️ जून – जुलाई
IARI विकसित हाइब्रिड। नियमित फलन, उच्च उपज। नए बागों के लिए आदर्श।
💚
आम्रपाली
🗓️ जुलाई – अगस्त
बौनी किस्म — घनी बागवानी के लिए। हर साल फलन, छोटे बागों में भी उपयुक्त।
💡
नए बाग के लिए सुझाव: व्यावसायिक खेती के लिए दशहरी + मल्लिका + आम्रपाली का मिश्रण लगाएं। इससे अलग-अलग समय में फल तैयार होते हैं और पूरे सीजन आमदनी बनी रहती है।

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बाग लगाना और देखभाल — पूरी विधि

आम का बाग एक दीर्घकालिक निवेश है। सही शुरुआत से ही 50–60 साल तक उत्पादन मिलता है।

🌍
मिट्टी और भूमि का चुनाव
✦ बाग लगाने से पहले
  • दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है। pH 5.5–7.5 होना चाहिए।
  • जलभराव वाली भूमि से बचें — जड़ सड़न (Root Rot) का खतरा होता है।
  • बाग लगाने से पहले गहरी जुताई (2–3 बार) करें और मिट्टी की जाँच कराएं।
  • ढलानदार जमीन में बागवानी के लिए समतलीकरण जरूरी है।
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पौध रोपण — सही समय और तरीका
✦ जुलाई–अगस्त (मानसून में रोपण सर्वोत्तम)
  • साधारण बागवानी में 10×10 मीटर की दूरी पर रोपण (100 पेड़/हेक्टेयर)।
  • घनी बागवानी (आम्रपाली) में 2.5×2.5 मीटर तक (1600 पेड़/हेक्टेयर)।
  • गड्ढे का आकार: 1×1×1 मीटर। गोबर खाद + सुपरफॉस्फेट भरें।
  • ग्राफ्टेड (कलमी) पौध चुनें — 3–4 साल में फल मिलते हैं, बीजू में 8–10 साल लगते हैं।
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सिंचाई प्रबंधन
✦ सही समय पर सही पानी
  • नव-रोपित पौधों को हर 2–3 दिन में सिंचाई करें जब तक जड़ें न पकड़ें।
  • परिपक्व पेड़ों में दिसंबर से फरवरी तक सिंचाई बंद रखें — यह मंजर (Flowering) के लिए जरूरी है।
  • ड्रिप सिंचाई अपनाने से 40% पानी की बचत और फलों की गुणवत्ता बेहतर होती है।
  • फल विकास के समय (मार्च–मई) नियमित सिंचाई करें।
🌿
खाद और उर्वरक प्रबंधन
✦ उम्र के अनुसार मात्रा
  • 1–3 वर्ष के पौधे: 10 kg गोबर खाद + 100g N + 50g P + 100g K प्रति वर्ष।
  • परिपक्व पेड़ (10+ वर्ष): 50 kg गोबर खाद + 1 kg N + 500g P + 1 kg K।
  • खाद जून–जुलाई और फरवरी–मार्च में दो बार दें।
  • मंजर (Mango flowering) के बाद DAP 200g + पोटाश 200g का छिड़काव करें।
✂️
छँटाई (Pruning) और आकार प्रबंधन
✦ अक्टूबर–नवंबर में करें
  • फसल के बाद सूखी, रोगी और अनावश्यक शाखाएं काटें।
  • पेड़ का आकार खुला रखें — अंदर तक धूप और हवा पहुँचे।
  • कटाई के बाद घाव पर बोर्डो पेस्ट (चूना + नीला थोथा) लगाएं।
  • युवा पेड़ों में पहले 3 साल फूल न आने दें — पेड़ को मजबूती मिलेगी।
3–4 साल
कलमी पौध में पहला फल
100–200 kg
परिपक्व पेड़ प्रति उपज
50–60 साल
बाग की उत्पादक आयु

💰
आम का आज का मंडी भाव — LIVE अपडेट मलिहाबाद, लखनऊ, वाराणसी और दिल्ली मंडी में दशहरी, लंगड़ा और चौसा का भाव
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प्रमुख रोग और कीट — पहचान व उपाय

आम की फसल में कई रोग और कीट नुकसान पहुँचाते हैं। समय पर पहचान से बड़ा नुकसान बचाया जा सकता है:

🍂
चूर्णिल आसिता (Powdery Mildew)
फफूंद रोग
मंजर और पत्तियों पर सफेद चूर्ण। फूल झड़ जाते हैं। सर्दियों के अंत में अधिक। उपाय: वेटेबल सल्फर 2g/L या हेक्साकोनाजोल का छिड़काव।
🔥
एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose)
फफूंद रोग
फलों पर काले-भूरे धब्बे। भंडारण में फल जल्दी सड़ते हैं। उपाय: मैन्कोजेब 2.5g/L + कॉपर ऑक्सीक्लोराइड।
🌊
जड़ सड़न (Root Rot)
फफूंद रोग
जलभराव वाली जमीन में। पत्तियां पीली पड़कर झड़ती हैं। उपाय: जल निकासी सुधारें, फोसेटिल-AL का मिट्टी उपचार।
🐛
मिली बग (Mealybug)
कीट
मंजर और तने पर सफेद रुई जैसा कीट। रस चूसता है। उपाय: तने पर क्लोरपाइरीफोस का छिड़काव, चिकना पट्टा बांधें।
🍎
फल मक्खी (Fruit Fly)
कीट
पकते फलों में अंडे देती है। फल अंदर से सड़ जाता है। उपाय: Methyl Eugenol फेरोमोन ट्रैप, पीला चिपचिपा जाल।
🦟
पत्ती काटने वाला कीट (Leaf Webber)
कीट
पत्तियों को जाले से ढक देता है। नई कोपलें खाता है। उपाय: क्लोरपाइरीफोस 2ml/L का छिड़काव।
⚠️
मंजर बचाना सबसे जरूरी: फरवरी–मार्च में जब मंजर (Flowering) आता है, उस समय पावडरी मिल्ड्यू का खतरा सबसे अधिक होता है। मंजर निकलते ही वेटेबल सल्फर का छिड़काव शुरू करें — एक बार पौध झड़ गए तो फसल नहीं होगी।
🌿
देसी उपाय — नीम तेल: नीम तेल 5ml + साबुन 2g प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर सुबह या शाम छिड़काव करें। यह मिली बग, लीफ वेबर और कई फफूंद रोगों पर कारगर है और फल की गुणवत्ता भी नहीं बिगड़ती।

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तुड़ाई, भंडारण और बाजार

सही समय पर तुड़ाई और उचित भंडारण से आमदनी 20–30% तक बढ़ सकती है।

⏰ तुड़ाई का सही समय

किस्म तुड़ाई समय पहचान अधिकतम मूल्य
सफेदा मई – जून हल्का पीलापन, डंठल से रस न टपके ₹25–40/kg
दशहरी जून – जुलाई कंधे पर पीला रंग, सुगंध आए ₹40–80/kg
लंगड़ा जुलाई – अगस्त हरे-पीले रंग का मिश्रण ₹35–70/kg
चौसा अगस्त – सितंबर पूरा पीला, मीठी सुगंध ₹50–120/kg

📦 भंडारण और पकाना

🛒 बाजार और निर्यात

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स्थानीय और राज्य मंडी
✦ सबसे आसान बाजार
  • लखनऊ की मलिहाबाद आम मंडी एशिया की सबसे बड़ी आम मंडियों में से एक है।
  • दिल्ली के आज़ादपुर मंडी में UP के आम की बड़ी माँग है।
  • ई-नाम (e-NAM) पोर्टल पर ऑनलाइन बिक्री करें — बेहतर भाव और पारदर्शिता।
✈️
निर्यात बाजार
✦ सर्वाधिक आमदनी
  • दशहरी आम यूके, UAE, कनाडा और अमेरिका में निर्यात होता है।
  • APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) से पंजीकरण करें।
  • निर्यात के लिए ग्लोबल GAP सर्टिफिकेशन होने पर प्रीमियम मूल्य मिलता है।

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सरकारी योजनाएं और अनुदान

बागवान किसान इन योजनाओं का लाभ उठाकर लागत में 30–50% तक बचत कर सकते हैं:

योजना लाभ कहाँ आवेदन करें
राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) नया बाग लगाने पर ₹25,000–50,000/हे. अनुदान जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय
ड्रिप सिंचाई सब्सिडी (PMKSY) ड्रिप/स्प्रिंकलर पर 75–90% अनुदान उद्यान विभाग, upagripardarshi.gov.in
आम उत्कृष्टता केंद्र नि:शुल्क प्रशिक्षण, उन्नत पौध, तकनीकी सहायता CISH लखनऊ, IARI पूसा
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) 4% ब्याज पर ₹3 लाख तक ऋण नजदीकी बैंक शाखा
PM Fasal Bima (PMFBY) ओला, तूफान, सूखे से फसल बीमा बैंक या CSC केंद्र — प्रीमियम 5%
कोल्ड चेन सब्सिडी कोल्ड स्टोरेज/रेफर वाहन पर 35–50% अनुदान NAFED, NHB, MoFPI
CISH लखनऊ का लाभ लें: केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH), रहमानखेड़ा, लखनऊ — आम किसानों के लिए नि:शुल्क प्रशिक्षण शिविर, उन्नत पौध और मृदा जाँच की सुविधा देता है। वेबसाइट: cish.res.in

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1आम के पेड़ में हर साल फल क्यों नहीं आते?
यह एकांतर फलन (Alternate Bearing) की समस्या है — दशहरी और लंगड़ा में यह सबसे आम है। एक साल अच्छी फसल के बाद अगले साल कम फल आते हैं। समाधान: फसल के बाद तुरंत छँटाई, जुलाई में खाद, सर्दियों में सिंचाई बंद — इससे नियमित फलन सुधरता है। आम्रपाली किस्म में यह समस्या कम होती है।
2मंजर झड़ने से कैसे बचाएं?
मंजर झड़ने के मुख्य कारण हैं — पावडरी मिल्ड्यू रोग, कड़ी धूप, और सिंचाई की कमी। उपाय: मंजर निकलते ही वेटेबल सल्फर 2g/L का छिड़काव करें। सुबह जल्दी या शाम को छिड़काव करें। मंजर के समय (फरवरी) हल्की सिंचाई जरूर करें।
3कलमी पौध कहाँ से खरीदें?
UP में उन्नत कलमी पौध के लिए CISH रहमानखेड़ा लखनऊ, राजकीय उद्यान नर्सरी और जिला उद्यान विभाग से संपर्क करें। सरकारी नर्सरी के पौध प्रमाणित और रोगमुक्त होते हैं — बाज़ार से सस्ते पौध लेने में धोखा हो सकता है।
4क्या आम की घनी बागवानी (High Density Planting) UP में सफल है?
हाँ! आम्रपाली और मल्लिका किस्में घनी बागवानी (2.5×2.5 या 5×5 मीटर) के लिए सबसे उपयुक्त हैं। CISH ने सिद्ध किया है कि घनी बागवानी में प्रति हेक्टेयर उत्पादन 4–5 गुना अधिक हो सकता है। इसके लिए नियमित छँटाई जरूरी है।
5आम का निर्यात करने के लिए क्या करना होगा?
निर्यात के लिए: (1) APEDA में पंजीकरण कराएं, (2) बाग का EurepGAP/Global GAP सर्टिफिकेशन लें, (3) फल पर Hot Water Treatment (48°C) कराएं, (4) FSSAI प्रमाणीकरण लें। APEDA की वेबसाइट apeda.gov.in पर पूरी जानकारी उपलब्ध है।
6आम में फल मक्खी से कैसे बचाएं?
फल मक्खी से बचाव के लिए: मई से जुलाई तक प्रति हेक्टेयर 10–15 Methyl Eugenol फेरोमोन ट्रैप लगाएं। गिरे हुए फलों को तुरंत जमीन में दबाएं। पेड़ के नीचे नियमित सफाई रखें। पेड़ पर कवर बैगिंग (Fruit Bagging) से 95% तक सुरक्षा मिलती है।
7दशहरी और लंगड़ा में कौन सा अधिक फायदेमंद है?
दशहरी का उत्पादन अधिक होता है और निर्यात माँग ज़्यादा है, इसलिए मात्रा के हिसाब से यह बेहतर है। लंगड़ा का मूल्य प्रति किग्रा अधिक मिलता है लेकिन पकने का समय कम होता है। व्यावसायिक दृष्टि से दोनों का मिश्रण आदर्श है ताकि पूरे सीजन आमदनी बनी रहे।

✅ मुख्य बातें — याद रखें
  • UP भारत का नंबर 1 आम उत्पादक — दशहरी, लंगड़ा और चौसा को GI टैग प्राप्त
  • कलमी पौध लगाएं — 3–4 साल में फल, बीजू में 8–10 साल लगते हैं
  • दिसंबर–फरवरी में सिंचाई बंद रखें — अच्छी मंजर आएगी
  • मंजर निकलते ही वेटेबल सल्फर छिड़कें — पावडरी मिल्ड्यू से बचाव
  • फल मक्खी के लिए फेरोमोन ट्रैप और Fruit Bagging अपनाएं
  • NHM योजना से नए बाग पर ₹50,000/हे. तक अनुदान लें
  • ड्रिप सिंचाई पर 75–90% सब्सिडी — PMKSY योजना के तहत
  • निर्यात के लिए APEDA में पंजीकरण और Hot Water Treatment जरूरी
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