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🗓️ जुलाई–सितंबर (कटाई-सड़ाई) 📍 कोलकाता · पश्चिम बंगाल 💰 MSP ₹5,925/क्विंटल

जूट (पाट) की सड़ाई और बेहतर ग्रेड Jute Retting & Fibre Grading — Guide for Kolkata & West Bengal

एक ही गाँव के दो किसान, एक जैसी फसल — पर एक का रेशा सुनहरा और दूसरे का काला। फर्क बीज का नहीं, सड़ाई का होता है, और यही फर्क प्रति क्विंटल सैकड़ों रुपये तय करता है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 जुलाई 2026

पाट का दाम खेत में नहीं, तालाब के बीस दिनों में तय होता है

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मिट्टी का वज़न
रेशा काला करने की #1 वजह
🗓️
120 दिन
कटाई का सही समय
💰
₹5,925
MSP 2026-27 (TD-3)
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भूमिका

पाट (जूट) की खेती में एक बात ज़्यादातर किसान बहुत देर से समझते हैं — जूट का दाम खेत में नहीं, पानी में तय होता है। एक ही गाँव के दो किसान, एक ही किस्म, एक ही दिन बोई गई फसल — लेकिन एक का रेशा चमकदार सुनहरा और दूसरे का काला-भूरा। फर्क बीज या खाद का नहीं होता; फर्क कटाई के सही दिन और सड़ाई (retting) के तरीके का होता है। और यही फर्क प्रति क्विंटल सैकड़ों से हज़ार रुपये तक का होता है।

पश्चिम बंगाल देश के कच्चे जूट का करीब तीन-चौथाई हिस्सा पैदा करता है, और कोलकाता–हुगली पट्टी सदियों से इसका व्यापार और मिल केंद्र रही है। सरकार ने 2026-27 सीज़न के लिए कच्चे जूट (TD-3 ग्रेड) का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹5,925 प्रति क्विंटल तय किया है — पिछले सीज़न के ₹5,650 से ₹275 ज़्यादा। लेकिन ध्यान दीजिए: यह दाम TD-3 ग्रेड के लिए है। अगर आपका रेशा सड़ाई की गलती से TD-5 या TD-6 पर आ गया, तो MSP आपके काम नहीं आएगा। इस लेख में कटाई का सही दिन, सड़ाई की पूरी विधि, ICAR-CRIJAF की "क्रीजाफ सोना" तकनीक, और ग्रेड सुधारकर बेहतर दाम पाने का पूरा तरीका — आसान हिंदी में।


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जूट का दाम किस बात पर तय होता है?

कच्चे जूट की खरीद ग्रेड के हिसाब से होती है। तोसा (Tossa) जूट के ग्रेड TD-1 से TD-8 तक होते हैं — TD-1 सबसे अच्छा, TD-8 सबसे नीचे। सफेद (White) जूट के लिए यही क्रम W-1 से W-8 तक चलता है। MSP हमेशा TD-3 ग्रेड पर घोषित होता है, और उससे ऊपर-नीचे के ग्रेड पर दाम घटता-बढ़ता है।

ग्रेड तय करने वाली बातें बहुत सीधी हैं — रंग, चमक, रेशे की लंबाई, मज़बूती, जड़ वाले हिस्से की कठोरता, और गाँठ-कचरे की मात्रा। इनमें से लगभग सब कुछ सड़ाई की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

गुण✅ अच्छी सड़ाई का रेशा❌ खराब सड़ाई का रेशा
रंगसुनहरा, चमकदारकाला-भूरा, दागदार
अलग होनाछाल आसानी से पूरी उतरती हैछाल चिपकी रहती है, टूटती है
मज़बूतीपूरी, खिंचाव सहने वालाकमज़ोर, हाथ से टूट जाता है
जड़ वाला हिस्सामुलायम, साफकड़ा, लकड़ी जैसा
कचरा और गाँठबहुत कमछाल के टुकड़े और गाँठें
ग्रेड और दामऊँचा ग्रेड, MSP या उससे बेहतरनीचे का ग्रेड, MSP से कम

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कटाई का सही दिन — यहीं आधी लड़ाई है

जूट की कटाई का सबसे अच्छा समय बुवाई के लगभग 120 दिन बाद, जब पौधे में छोटी-छोटी फलियाँ (small pod) बनने लगें, माना जाता है। इस अवस्था में रेशे की मात्रा और मज़बूती दोनों सबसे अच्छे संतुलन में होती हैं।

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कटाई के बाद पत्ते झाड़ना (defoliation) न भूलें: काटे गए पौधों को बंडल बनाकर खेत में ही 1–2 दिन खड़ा रहने दें, ताकि पत्तियाँ झड़ जाएँ। पत्ते सहित पानी में डाले गए बंडल पानी को जल्दी गंदा करते हैं और रेशे पर दाग छोड़ते हैं। झड़ी हुई पत्तियाँ खेत में ही रहने दें — यह अगली फसल के लिए बढ़िया जैविक खाद है।

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सड़ाई (Retting) — पूरी विधि, कदम दर कदम

सड़ाई का मतलब है — पानी में मौजूद सूक्ष्म जीवाणुओं से तने की पेक्टिन और गोंद जैसी परत गलवाना, ताकि छाल का रेशा लकड़ी से अलग हो जाए। इसमें सावधानी यह रखनी है कि गोंद गले, पर रेशा न गले — ज़्यादा सड़ाई रेशे को कमज़ोर और काला कर देती है।

  1. साफ और धीरे बहता पानी चुनें: साफ, हल्का बहता पानी सबसे अच्छा है। रुके हुए गंदे तालाब का काला पानी रेशे पर स्थायी दाग छोड़ देता है।
  2. बंडल (जाक) छोटे बनाएँ: बहुत मोटे बंडल के बीच का हिस्सा ठीक से नहीं गलता और बाहर का हिस्सा ज़्यादा गल जाता है — दोनों तरफ से नुकसान।
  3. पानी और पौधे का अनुपात ठीक रखें: एक ही जगह ज़रूरत से ज़्यादा फसल न डुबोएँ। पानी कम पड़ने पर वह जल्दी सड़कर बदबूदार हो जाता है और रेशा काला पड़ता है।
  4. बंडल पानी में पूरी तरह डूबे रहें: ऊपर तैरता हुआ हिस्सा हवा और धूप में लाल-भूरा हो जाता है। बंडल को पानी की सतह से थोड़ा नीचे रखें।
  5. वज़न के लिए मिट्टी या कीचड़ कभी न रखें: यह सबसे आम और सबसे महँगी गलती है — मिट्टी रेशे पर स्थायी काला दाग छोड़ देती है। इसकी जगह कंक्रीट के टुकड़े, लकड़ी के लट्ठे या केले के तने का प्रयोग करें।
  6. पहले दो-तीन दिन में एक बार पलट दें: इससे सड़ाई एकसार होती है।
  7. रोज़ जाँच करें: आमतौर पर सड़ाई 12 से 21 दिन में पूरी होती है, पर यह पानी के तापमान और गुणवत्ता पर निर्भर करता है। इसलिए दिन गिनने से बेहतर है — जाँच करना।
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सड़ाई पूरी हुई या नहीं — जाँच का आसान तरीका: एक तना निकालकर बीच से थोड़ा दबाएँ और छाल खींचें। अगर छाल पूरी लंबाई में एक साथ, आसानी से और बिना टूटे उतर जाए, तो सड़ाई पूरी हो चुकी है — उसी दिन निकाल लें। अगर छाल जगह-जगह चिपकी रह जाए तो 1–2 दिन और रुकें। "एक-दो दिन और पड़ा रहने दो" वाली सोच से हर साल हज़ारों किसानों का रेशा एक ग्रेड नीचे चला जाता है।

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"क्रीजाफ सोना" — कम दिन, कम पानी, बेहतर ग्रेड

कोलकाता के पास बैरकपुर स्थित ICAR-केंद्रीय पटसन एवं समवर्गीय रेशा अनुसंधान संस्थान (CRIJAF) ने सड़ाई के लिए एक सूक्ष्मजीवी मिश्रण बनाया है — क्रीजाफ सोना (CRIJAF SONA)। यह Bacillus समूह के कुछ चुने हुए जीवाणुओं का मिश्रण है, जो पेक्टिन (गोंद) को तेज़ी से गलाते हैं लेकिन सेल्युलोज़ यानी असली रेशे को नुकसान नहीं पहुँचाते

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क्रीजाफ सोना की सही मात्रा, पैकेट का आकार और डालने का तरीका पैकेट पर लिखे निर्देशों के अनुसार ही अपनाएँ, और इसे ICAR-CRIJAF, अपने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (JCI) के जूट-आईकेयर कार्यक्रम जैसे भरोसेमंद स्रोत से ही खरीदें। बाज़ार में मिलने वाले नकली "रेटिंग पाउडर" से बचें — गलत उत्पाद रेशा सुधारने की बजाय खराब कर सकता है। ऊपर दिए गए आँकड़े संस्थान के प्रकाशित परिणामों पर आधारित हैं; असल नतीजे पानी, मौसम और तरीके पर निर्भर करते हैं।

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पानी कम हो तो क्या करें?


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निकालना, धुलाई और सुखाई


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MSP और बिक्री — कोलकाता की भूमिका

कच्चे जूट पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की खरीद का काम जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (JCI) करती है, जिसका मुख्यालय कोलकाता में है। जब बाज़ार भाव MSP से नीचे चला जाता है, तब JCI अपने खरीद केंद्रों के ज़रिए किसानों से सीधे खरीद करती है।

बातब्यौरा
MSP सीज़न 2026-27 (TD-3 ग्रेड)₹5,925 प्रति क्विंटल
पिछला सीज़न (2025-26)₹5,650 प्रति क्विंटल
इस बार की बढ़ोतरी₹275 प्रति क्विंटल
खरीद एजेंसीजूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (JCI), मुख्यालय कोलकाता
ग्रेड का पैमानातोसा जूट: TD-1 (सर्वोत्तम) से TD-8 तक; MSP TD-3 पर
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MSP, खरीद केंद्र, भुगतान की प्रक्रिया और ज़रूरी दस्तावेज़ (आधार, बैंक खाता, ज़मीन का रिकॉर्ड) समय-समय पर बदलते रहते हैं। बेचने से पहले अपने नज़दीकी JCI खरीद केंद्र या जिला कृषि कार्यालय से मौजूदा नियम और भाव की पुष्टि ज़रूर करें। कृषि मित्र न तो कोई खरीद एजेंट है और न ही खरीद-बिक्री कराता है — यहाँ दी गई जानकारी सिर्फ समझने के लिए है।

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ये गलतियाँ कभी न करें


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पश्चिम बंगाल के लिए कैलेंडर — कब क्या करें

समयज़रूरी काम
मार्च – अप्रैलबुवाई; प्रमाणित बीज और उचित दूरी
मई – जूननिराई-गुड़ाई, थिनिंग, पोषण प्रबंधन
जून के अंत तकसड़ाई के लिए तालाब/गड्ढा तैयार करें; क्रीजाफ सोना की व्यवस्था करें
जुलाई – अगस्त (कटाई)लगभग 120 दिन / छोटी फली अवस्था पर, ज़मीन के पास से कटाई
कटाई + 1–2 दिनबंडल खड़े करके पत्ते झाड़ें, फिर पानी में डुबोएँ
सड़ाई के 12–21 दिनरोज़ छाल खींचकर जाँच; पूरी होते ही उसी दिन निकालें
अगस्त – सितंबरसाफ पानी में धुलाई, बाँस पर सुखाई, ग्रेड के अनुसार अलग बाँधना
सितंबर के बादभाव देखकर बिक्री; भाव MSP से नीचे हो तो JCI खरीद केंद्र से संपर्क

निष्कर्ष

जूट में मुनाफा बढ़ाने का सबसे सस्ता रास्ता ज़्यादा खाद या ज़्यादा मेहनत नहीं, बेहतर ग्रेड है। तीन बातें याद रखें: लगभग 120 दिन पर, छोटी फली अवस्था में कटाई करें, साफ पानी में सड़ाई करें और वज़न के लिए मिट्टी कभी न रखें, और छाल आसानी से उतरते ही उसी दिन बाहर निकाल लें

जूट का असली दाम खेत में नहीं, तालाब के उन बीस दिनों में तय होता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

12026-27 सीज़न में कच्चे जूट का MSP कितना है?
सरकार ने 2026-27 सीज़न के लिए कच्चे जूट (TD-3 ग्रेड) का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹5,925 प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले सीज़न के ₹5,650 से ₹275 ज़्यादा है। ध्यान रखें कि यह दाम TD-3 ग्रेड के लिए है — इससे नीचे के ग्रेड पर दाम कम मिलता है, इसलिए सड़ाई की गुणवत्ता सीधे आपकी कमाई तय करती है।
2जूट (पाट) की कटाई का सही समय क्या है?
जूट की कटाई का सबसे अच्छा समय बुवाई के लगभग 120 दिन बाद, छोटी फली (small pod) बनने की अवस्था है — इसमें रेशे की मात्रा और मज़बूती दोनों सबसे अच्छे संतुलन में रहती हैं। जल्दी काटने पर उपज कम मिलती है और देर से काटने पर तना कड़ा होकर रेशा मोटा-खुरदरा हो जाता है। कटाई हमेशा ज़मीन के पास से करें ताकि पूरी लंबाई मिले।
3जूट की सड़ाई (retting) में कितने दिन लगते हैं?
सामान्य पानी में सड़ाई 12 से 21 दिन में पूरी होती है, लेकिन यह पानी के तापमान और गुणवत्ता पर निर्भर करता है — इसलिए दिन गिनने की बजाय रोज़ जाँच करें। क्रीजाफ सोना जैसे सूक्ष्मजीवी मिश्रण से यह अवधि लगभग 6–7 दिन तक घट जाती है
4सड़ाई पूरी हुई या नहीं, यह कैसे पहचानें?
एक तना निकालकर छाल खींचें — अगर छाल पूरी लंबाई में एक साथ, आसानी से और बिना टूटे उतर जाए, तो सड़ाई पूरी हो चुकी है और उसी दिन बंडल बाहर निकाल लेने चाहिए। छाल जगह-जगह चिपकी रह जाए तो 1–2 दिन और रुकें। ज़रूरत से ज़्यादा दिन पानी में रखने पर रेशा कमज़ोर और काला पड़ जाता है।
5जूट का रेशा काला क्यों पड़ जाता है?
सबसे बड़ी वजह है बंडलों पर वज़न के लिए मिट्टी या कीचड़ रखना — इससे रेशे पर स्थायी काला दाग पड़ जाता है। दूसरी वजहें हैं गंदे या दोबारा इस्तेमाल किए गए पानी में सड़ाई, पत्ते सहित बंडल डुबोना, ज़रूरत से ज़्यादा दिन पानी में रखना और रेशे को ज़मीन पर सुखाना। वज़न के लिए हमेशा कंक्रीट के टुकड़े या लकड़ी का प्रयोग करें।
6क्रीजाफ सोना (CRIJAF SONA) क्या है और इससे क्या फायदा है?
यह ICAR-CRIJAF, बैरकपुर (कोलकाता के पास) द्वारा बनाया गया Bacillus जीवाणुओं का मिश्रण है, जो सड़ाई के दौरान गोंद (पेक्टिन) तेज़ी से गलाता है पर असली रेशे को नुकसान नहीं पहुँचाता। इससे सड़ाई लगभग 6–7 दिन जल्दी पूरी होती है, रेशे का ग्रेड 2–3 पायदान बेहतर होता है, उपज करीब 8–10% बढ़ती है और पानी की ज़रूरत लगभग 35% घट जाती है। इसे KVK, CRIJAF या JCI जैसे भरोसेमंद स्रोत से ही खरीदें।
7पानी कम हो तो जूट की सड़ाई कैसे करें?
पानी की कमी में रिबन रेटिंग सबसे अच्छा तरीका है — कटाई के तुरंत बाद रिबनर मशीन से तने की छाल उतारकर सिर्फ छाल को पानी में डाला जाता है, जिससे पूरे पौधे की तुलना में बहुत कम पानी लगता है। दूसरा तरीका है खेत में गड्ढा खोदकर उसमें प्लास्टिक शीट बिछाकर पानी भरना, जिससे रेशा मिट्टी के संपर्क में भी नहीं आता।
8जूट के ग्रेड कैसे तय होते हैं और MSP किस ग्रेड पर मिलता है?
तोसा जूट के ग्रेड TD-1 (सर्वोत्तम) से TD-8 (सबसे नीचे) तक होते हैं और सफेद जूट के W-1 से W-8 तक; MSP TD-3 ग्रेड पर घोषित होता है। ग्रेड रेशे के रंग, चमक, लंबाई, मज़बूती, जड़ वाले हिस्से की कठोरता और कचरे की मात्रा से तय होता है — और ये लगभग सभी बातें सड़ाई की गुणवत्ता पर निर्भर करती हैं।
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