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धुळे जिले की चीनी मिलें

महाराष्ट्र · सहकारी रजिस्टर
6 सहकारी मिलें

गन्ने का दाम महाराष्ट्र में हर मिल पर एक ही है — ₹402 प्रति क्विंटल। मिल चुनने से रेट नहीं बदलता, पर पेराई क्षमता से यह तय होता है कि सीजन में कितनी जल्दी नंबर आता है।

6सहकारी चीनी मिलें
16,250कुल पेराई क्षमता (TCD)
₹402गन्ना रेट · 2026-27
ℹ️यह सूची सहकारी चीनी मिलों की हैसाखर आयुक्तालय, महाराष्ट्र के सहकारी रजिस्टर से। धुळे जिले की निजी (प्राइवेट) चीनी मिलें इस रजिस्टर में दर्ज नहीं होतीं, इसलिए वे यहां नहीं दिखेंगी।

मिलें — पेराई क्षमता के हिसाब से

पट्टी की लंबाई = मिल की रोज़ की पेराई क्षमता (TCD)। सबसे बड़ी मिल सबसे ऊपर।

श्री सातपूडा तापी सहकारी साखर कारखाना लि. पुरषोत्तमनगर, ता.शहादा, जि. नंदुरबार-425 424
5,000 TCDनोंदणी 09-05-1969
पांझराकान सहकारी साखर कारखाना लि. भाडणे, ता.साक्री, जि.धुळे-
2,500 TCDनोंदणी 14-05-1966
शिरपूर सहकारी साखर कारखाना लि. शिवाजीनगर, दहिवद, ता.शिरपूर, जि.धुळे-425 405
2,500 TCDनोंदणी 14-04-1982
संजय सहकारी साखर कारखाना लि. विजयनगर, ता.जि.धुळे
2,500 TCDनोंदणी 29-07-1981
सिंदखेडा सहकारी साखर कारखाना म,विखुर्ले, ता.सिंदखेडा, जि.धुळे
2,500 TCDनोंदणी 29-08-1989
आण्णासो.चुडामण पाटिल सहकारी साखर कारखाना म. नेर , जि.धुळे
1,250 TCDनोंदणी 17-04-2001

महाराष्ट्र के दूसरे जिले

सोलापूरकोल्हापूरसांगलीअहिल्यानगरपुणेसाताराबीडउस्मानाबादनांदेडछ. संभाजीनगरलातूरजळगांव

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

धुळे जिले में कितनी चीनी मिलें हैं?
साखर आयुक्तालय, महाराष्ट्र के सहकारी रजिस्टर में धुळे जिले की 6 सहकारी चीनी मिलें दर्ज हैं। निजी मिलें इस रजिस्टर में नहीं आतीं, इसलिए जिले में कुल मिलें इससे ज़्यादा हो सकती हैं।
पेराई क्षमता (TCD) का क्या मतलब है?
TCD यानी Tonnes Crushed per Day — मिल एक दिन में कितने टन गन्ना पेर सकती है। बड़ी क्षमता वाली मिल सीजन में ज़्यादा गन्ना लेती है, इसलिए वहां पर्ची और तौल का इंतज़ार आमतौर पर कम रहता है।
धुळे में गन्ने का रेट क्या है?
महाराष्ट्र में गन्ने का दाम ₹402 प्रति क्विंटल है — यह पूरे राज्य में एक जैसा लागू होता है, जिला या मिल के हिसाब से नहीं बदलता। पूरी जानकारी महाराष्ट्र के पेज पर है।
मिल भुगतान न करे तो कहां शिकायत करें?
गन्ना नियंत्रण आदेश के तहत मिल को तौल के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। देर होने पर जिला गन्ना अधिकारी या राज्य के साखर आयुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।