🌱 बुवाई व रोपाई · Paddy Transplanter
धान रोपाई मशीन एक एकड़ की रोपाई 2–3 घंटे में कर देती है, जिसमें हाथ से 8–10 मज़दूर पूरा दिन लगते हैं — और रोपाई के सीज़न में मज़दूर मिलना ही सबसे बड़ी दिक़्क़त होती है। मशीन कतार और दूरी एक-सी रखती है, जिससे निराई और छिड़काव आसान हो जाता है और हवा-रोशनी बराबर मिलने से रोग कम लगते हैं। इसकी एक शर्त कड़ी है: पौध सामान्य क्यारी की नहीं, मैट नर्सरी (चटाई वाली पौध) की चाहिए, इसलिए मशीन बुक करते समय ही तय कर लें कि नर्सरी आप तैयार करेंगे या मालिक।
रेंज सरकारी कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की रेट लिस्ट और किसानों से मिले किराये के आँकड़ों को मिलाकर बनाई गई है। यह अनुमान है, तय भाव नहीं — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से किराया घटता-बढ़ता है।
सरकार ने हर ब्लॉक में यंत्रों के किराया केंद्र बनाए हैं, जहाँ मशीनें बाज़ार से सस्ते किराये पर मिलती हैं। सरकारी FARMS ऐप पर अपने आसपास का CHC ढूँढकर सीधे बुकिंग की जा सकती है।
ज़्यादातर सौदे आज भी गाँव में ही होते हैं — पड़ोसी किसान, सहकारी समिति या FPO के पास। रेट पूछने से पहले ऊपर दी रेंज देख लीजिए, ताकि आपको पता हो कि सही दाम क्या है। सीज़न के पीक हफ़्ते से 8–10 दिन पहले बात कर लेना सबसे सस्ता पड़ता है।
कौन-सी मशीन आपके ब्लॉक में कहाँ उपलब्ध है और उस पर कितनी सब्सिडी चल रही है — इसकी सही जानकारी यहीं मिलती है। यंत्र खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी का हिसाब भी एक बार ज़रूर देख लीजिए।
धान रोपाई मशीन का किराया आमतौर पर ₹2000–₹3500 प्रति एकड़ (रोपाई) रहता है। अलग-अलग हिसाब से यह ₹2000 से ₹5000 के बीच पड़ता है। यह अनुमानित रेंज है — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से रेट बदलता है।
मैट नर्सरी आपको तैयार करनी है या किराये में शामिल है — यही असली दाम का फ़र्क़ है। इसके अलावा मशीन की हालत खुद देख लें और रेट में क्या-क्या शामिल है — डीज़ल, चालक, ढुलाई — यह पहले ही साफ़ कर लें।
आमतौर पर प्रशिक्षित चालक सहित होती है और ईंधन मालिक का लगता है। यह हर मालिक के साथ बदलता है, इसलिए सौदा तय करते समय यही सबसे पहले पूछिए — किराये को लेकर सबसे ज़्यादा झगड़े इसी बात पर होते हैं।
जून–जुलाई में माँग सबसे ज़्यादा रहती है और तभी रेट भी चढ़ता है। उस दौर से 8–10 दिन पहले बुकिंग कर लेने पर मशीन भी मिलती है और किराया भी कम लगता है।