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🎋 गन्ना · चीनी उद्योग 🗓️ पेराई सत्र 2025–26 📍 उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन — सम्पूर्ण मार्गदर्शिका Sugar Production in Uttar Pradesh — Complete Guide for Farmers & Industry

गन्ना उत्पादन से लेकर चीनी मिलों, SAP मूल्य, सरकारी योजनाओं और किसानों की आमदनी तक — UP के चीनी उद्योग की पूरी जानकारी एक जगह।

✍️ KrashiMitra.in ⏱️ 8 मिनट पढ़ें 📅 जून 2026 अपडेट
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~250 लाख टन
वार्षिक गन्ना उत्पादन
🏭
119 मिलें
UP में चीनी मिलें
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~110 लाख टन
वार्षिक चीनी उत्पादन
👨‍🌾
45 लाख+
गन्ना किसान परिवार
💰
₹370/क्विंटल
SAP 2025-26 (सामान्य)
🇮🇳
~35%
देश के कुल उत्पादन में हिस्सा
📋 इस लेख में क्या है
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UP और चीनी उद्योग — एक परिचय

किसान भाइयों और उद्योग जगत के साथियों, उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक और चीनी उत्पादक राज्य है। देश में उत्पादित हर तीन किलो चीनी में से लगभग एक किलो UP से आती है। गन्ना यहाँ केवल एक फसल नहीं — यह 45 लाख से अधिक किसान परिवारों की जीवनरेखा है।

पश्चिमी UP का गन्ना पट्टा — जिसमें मुज़फ़्फ़रनगर, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर और बुलंदशहर जैसे जिले आते हैं — देश के सबसे उत्पादक कृषि क्षेत्रों में गिना जाता है। पूर्वी UP में भी गोरखपुर, देवरिया और बस्ती जिलों में चीनी उद्योग तेज़ी से विकसित हो रहा है।

UP में चीनी उद्योग का महत्व केवल कृषि तक सीमित नहीं — यह लाखों श्रमिकों, ट्रांसपोर्टरों, आढ़तियों और छोटे व्यापारियों की आजीविका से भी सीधे जुड़ा है। एथेनॉल उत्पादन और बिजली उत्पादन (बायोमास) के जरिए यह उद्योग अब ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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क्या आप जानते हैं? UP में चीनी का पहला आधुनिक कारखाना 1903 में प्रतापगढ़ में स्थापित हुआ था। आज UP में 119 से अधिक चीनी मिलें हैं — जो देश में सबसे अधिक हैं।

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गन्ना उत्पादन — प्रमुख जिले और आंकड़े

UP में गन्ने की खेती लगभग 27–28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होती है। राज्य को मुख्यतः दो उत्पादन क्षेत्रों में बाँटा जाता है:

🗺️ पश्चिमी UP — मुख्य गन्ना पट्टा

यह क्षेत्र उत्पादकता और गन्ने की गुणवत्ता दोनों में अग्रणी है। यहाँ की गंगा-यमुना दोआब की उपजाऊ मिट्टी गन्ने के लिए आदर्श है।

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मुज़फ़्फ़रनगर
पश्चिमी UP
UP का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक जिला। यहाँ औसत उपज 75–80 टन/हे. है।
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बिजनौर
पश्चिमी UP
गंगा तट पर स्थित, उच्च रिकवरी दर के लिए प्रसिद्ध। कई बड़ी मिलें यहाँ हैं।
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सहारनपुर
पश्चिमी UP
ऐतिहासिक चीनी उत्पादन केंद्र। यहाँ की मिलें 100+ वर्षों से काम कर रही हैं।
मेरठ
पश्चिमी UP
आधुनिक चीनी और एथेनॉल उत्पादन दोनों में अग्रणी।
🌿
शाहजहाँपुर
मध्य UP
मध्य UP का प्रमुख गन्ना केंद्र। KRIBHCO की बड़ी इकाई यहाँ स्थित है।
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गोरखपुर
पूर्वी UP
पूर्वी UP का उभरता गन्ना क्षेत्र। यहाँ उत्पादन में तेज़ वृद्धि हो रही है।
🌳
देवरिया
पूर्वी UP
नई मिलों की स्थापना से पूर्वी UP में उत्पादन क्षमता बढ़ी है।
🎯
लखीमपुर खीरी
तराई क्षेत्र
तराई की नमीयुक्त भूमि गन्ने के लिए उत्तम। यहाँ उपज 85 टन/हे. तक पहुँचती है।
28 लाख हे.
कुल बुआई क्षेत्र
75–85 टन/हे.
औसत उपज (पश्चिमी UP)
10.5–11%
औसत शर्करा रिकवरी
💡
किसान सुझाव: CO 0238, CO 0118 और UP 0097 जैसी उन्नत किस्मों का उपयोग करें — ये किस्में रोग-प्रतिरोधी हैं और इनकी उपज और रिकवरी दोनों अधिक होती है।

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UP की प्रमुख चीनी मिलें — क्षेत्र और क्षमता

UP में कुल 119 चीनी मिलें हैं — जिनमें सरकारी, सहकारी और निजी तीनों क्षेत्र शामिल हैं। प्रमुख मिल समूहों का विवरण:

मिल / समूह क्षेत्र क्षमता (TCD) विशेषता
बजाज हिंदुस्तान शुगर पश्चिमी UP 70,000+ भारत की सबसे बड़ी चीनी कंपनी
बलरामपुर चीनी मिल्स पूर्वी UP 76,500 उच्च रिकवरी + एथेनॉल
त्रिवेणी इंजीनियरिंग पश्चिमी UP 61,000+ आधुनिक तकनीक, को-जेनरेशन
UPCL (सरकारी) पूरे UP विभिन्न 25 सरकारी मिलें — छोटे किसानों का आधार
KRIBHCO शाहजहाँपुर 12,500 सहकारी मिल, किसान हितैषी
मवाना शुगर्स मेरठ 15,000 ऐतिहासिक मिल, 1933 से संचालित
धामपुर शुगर बिजनौर 18,000 एथेनॉल + बिजली उत्पादन
⚠️
ध्यान दें: अपने क्षेत्र की मिल का गन्ना सर्वेक्षण (Survey) जरूर कराएं। बिना सर्वेक्षण के गन्ना मिल नहीं स्वीकार करती। सर्वेक्षण हर साल अगस्त–सितंबर में होता है।

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गन्ने से चीनी बनने की प्रक्रिया

गन्ने की कटाई से लेकर सफेद चीनी बनने तक कई चरण होते हैं। एक आधुनिक चीनी मिल में यह प्रक्रिया इस प्रकार होती है:

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चरण 1 — गन्ने की कटाई व आपूर्ति
✦ अक्टूबर–अप्रैल (पेराई सत्र)
  • किसान मिल के पर्ची (Purchi) प्रणाली के अनुसार गन्ना लाते हैं।
  • ट्रॉली या ट्रैक्टर से मिल गेट पर तौल होती है।
  • गन्ने की बरीक्ता (Brix/Pol) जाँच होती है — इससे रिकवरी तय होती है।
  • 10–12% शर्करा वाले गन्ने को उत्तम माना जाता है।
🔨
चरण 2 — पेराई (Crushing)
✦ रस निकासी
  • गन्ने को कटर-कम-फाइबराइज़र से छोटे टुकड़ों में काटा जाता है।
  • भारी रोलर मिलों से गन्ने को दबाकर रस (juice) निकाला जाता है।
  • बचा हुआ खोई (Bagasse) बायलर में जलाकर बिजली बनाई जाती है।
  • रस को तुरंत आगे प्रसंस्करण के लिए भेजा जाता है।
🧪
चरण 3 — शुद्धिकरण (Clarification)
✦ रस की सफाई
  • कच्चे रस में चूना (Milk of Lime) और सल्फर डाइऑक्साइड मिलाया जाता है।
  • गर्म करने पर अशुद्धियाँ नीचे बैठ जाती हैं — यह प्रेस-मड (Press Mud) बनता है।
  • साफ रस को आगे वाष्पीकरण के लिए भेजा जाता है।
♨️
चरण 4 — वाष्पीकरण और क्रिस्टलीकरण
✦ चीनी क्रिस्टल बनाना
  • रस को बहु-प्रभाव वाष्पीकरण (Multiple Effect Evaporator) से गाढ़ा किया जाता है।
  • वैक्यूम पैन में उबालकर चीनी के क्रिस्टल तैयार होते हैं।
  • सेंट्रीफ्यूज मशीन से चीनी और शीरा (Molasses) अलग होते हैं।
  • शीरे से एथेनॉल और खाद भी बनाई जाती है।
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चरण 5 — पैकेजिंग और भंडारण
✦ अंतिम उत्पाद
  • चीनी को सुखाकर (Drying) नमी 0.05% से कम की जाती है।
  • 50 किग्रा जूट या HDPE बोरियों में भरकर गोदाम में रखा जाता है।
  • FCI और राज्य सरकार के कोटे के अनुसार वितरण होता है।
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उप-उत्पाद से आमदनी: आधुनिक मिलें खोई से बिजली, शीरे से एथेनॉल, और प्रेस-मड से जैव-खाद बनाती हैं। इससे मिल की कुल आमदनी 20–30% बढ़ जाती है और किसान को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ती है।

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SAP मूल्य और भुगतान व्यवस्था

UP सरकार हर साल गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP — State Advised Price) तय करती है, जो केंद्र सरकार के FRP (Fair & Remunerative Price) से अधिक होता है।

📋 SAP 2025-26 (पेराई सत्र)

गन्ने की किस्म SAP मूल्य (₹/क्विंटल) पिछले वर्ष से वृद्धि
सामान्य किस्म ₹370 +₹10
अगेती किस्म (Early Variety) ₹380 +₹10
अस्वीकृत किस्म ₹355 +₹10
केंद्रीय FRP 2025-26 ₹340 (रिकवरी 10.25% पर) +₹25

⏰ भुगतान की समय-सीमा

UP गन्ना विकास अधिनियम के अनुसार मिलों को गन्ना खरीदने के 14 दिन के भीतर किसान के बैंक खाते में भुगतान करना अनिवार्य है। देर से भुगतान पर 15% वार्षिक ब्याज मिलता है।

14 दिन
भुगतान की कानूनी सीमा
15%
विलंब पर ब्याज दर
DBT
सीधे बैंक में भुगतान
🚨
अपना अधिकार जानें: अगर मिल 14 दिन में भुगतान न करे, तो आप जिला गन्ना अधिकारी (DCO) के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं। गन्ना विभाग का हेल्पलाइन नंबर 1800-121-3203 पर कॉल करें — यह सेवा निःशुल्क है।

📜

सरकारी योजनाएं और किसान समर्थन

केंद्र और UP सरकार गन्ना किसानों के लिए कई योजनाएं चलाती हैं। प्रमुख योजनाओं की जानकारी:

🌱
गन्ना विकास निधि योजना
✦ उत्पादन में सुधार के लिए
  • उन्नत बीज गन्ना और नर्सरी प्रोत्साहन के लिए अनुदान।
  • प्रति हेक्टेयर ₹2,000–5,000 तक की सहायता।
  • ड्रिप सिंचाई अपनाने पर अतिरिक्त सब्सिडी।
एथेनॉल संवर्धन योजना
✦ किसानों को अतिरिक्त लाभ
  • केंद्र सरकार ने 2025–26 में एथेनॉल की कीमत ₹71.86/लीटर तय की है।
  • एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से मिलें किसानों को बेहतर दाम दे पाती हैं।
  • UP में 100+ एथेनॉल डिस्टिलरी स्थापित हैं।
💳
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) — गन्ना
✦ सस्ता ऋण
  • गन्ना किसानों को 4% वार्षिक ब्याज पर KCC ऋण मिलता है।
  • ₹3 लाख तक का ऋण बिना गारंटी के।
  • समय पर चुकाने पर 3% की अतिरिक्त छूट।
🔬
ICAR/UPCSR — अनुसंधान सहायता
✦ उन्नत किस्में और तकनीक
  • लखनऊ स्थित ICAR-IISR (गन्ना अनुसंधान संस्थान) से उन्नत बीज।
  • UPCSR शाहजहाँपुर द्वारा UP की जलवायु के अनुकूल किस्में विकसित।
  • किसान प्रशिक्षण शिविर — मुफ्त पंजीकरण।
PM-KISAN का लाभ लें: गन्ना किसान PM-KISAN योजना के तहत ₹6,000 वार्षिक सहायता के भी पात्र हैं। eKYC अपडेट रखें — बिना eKYC के किस्त रुक जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1UP में गन्ने का SAP और FRP में क्या अंतर है?
FRP (Fair & Remunerative Price) केंद्र सरकार तय करती है — यह न्यूनतम मूल्य है जो देशभर में मान्य है। SAP (State Advised Price) UP सरकार FRP से ऊपर तय करती है — UP किसानों को SAP ही मिलता है, जो 2025-26 में ₹370/क्विंटल है।
2गन्ने का भुगतान नहीं आया — क्या करें?
पहले अपनी मिल के गन्ना केंद्र में शिकायत दर्ज करें। फिर जिला गन्ना अधिकारी (DCO) कार्यालय में लिखित आवेदन दें। UP गन्ना विभाग की हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर भी कॉल कर सकते हैं। 14 दिन से अधिक देरी पर 15% ब्याज आपका कानूनी अधिकार है।
3गन्ने की सबसे अधिक उपज देने वाली किस्म कौन सी है?
UP की जलवायु में CO 0238 सबसे लोकप्रिय है — यह 80–90 टन/हे. उपज और 11%+ रिकवरी देती है। नई किस्म CO 0118 भी रेड रॉट रोग-प्रतिरोधी है और तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है। IISR लखनऊ से सलाह लेकर अपने क्षेत्र के लिए उचित किस्म चुनें।
4पेराई सत्र कब शुरू और खत्म होता है?
UP में पेराई सत्र आमतौर पर अक्टूबर–नवंबर में शुरू होता है और अप्रैल–मई तक चलता है। अगेती (Early Season) किस्मों की पेराई अक्टूबर में और पछेती किस्मों की अप्रैल तक होती है।
5एथेनॉल के कारण चीनी उत्पादन पर क्या असर पड़ता है?
जब एथेनॉल की कीमत अच्छी होती है तो मिलें शीरे और B-heavy मोलेसेस से एथेनॉल बनाना पसंद करती हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है और चीनी स्टॉक घटता है, जिससे चीनी की कीमतें स्थिर रहती हैं। किसान को इससे सीधा फायदा होता है क्योंकि मिल की आर्थिक स्थिति बेहतर रहती है।
6क्या मैं सीधे मंडी में गन्ना बेच सकता हूँ?
नहीं — UP में गन्ने की खरीद सिर्फ पंजीकृत चीनी मिलों द्वारा की जाती है। किसान को अपनी मिल से गन्ना सर्वेक्षण (Survey) और पर्ची लेनी होती है। खुले बाजार में गन्ना बेचना कानूनन वर्जित है।
7गन्ना बोने का सबसे अच्छा समय कब है?
UP में गन्ने की बुआई के लिए फरवरी–मार्च (वसंतकालीन) सबसे अच्छा समय है — इसमें उपज और रिकवरी दोनों अधिक होती है। शरद ऋतु में अक्टूबर में भी बोआई होती है, पर इसमें नमी प्रबंधन ज़रूरी है।

✅ मुख्य बातें — याद रखें
  • UP देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक — 35% राष्ट्रीय उत्पादन
  • 119 मिलें, 45 लाख+ किसान परिवार — गन्ना UP की जीवनरेखा
  • SAP 2025-26: सामान्य किस्म ₹370, अगेती ₹380 प्रति क्विंटल
  • 14 दिन में भुगतान न मिले तो DCO या हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर शिकायत करें
  • CO 0238 और CO 0118 किस्में — उच्च उपज और रोग-प्रतिरोधी
  • एथेनॉल और बिजली उत्पादन से मिलों की आमदनी बढ़ी — किसान को फायदा
  • KCC पर 4% ब्याज दर — समय पर लेकर लागत घटाएं
  • गन्ना सर्वेक्षण (Survey) हर साल अगस्त–सितंबर में जरूर कराएं
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