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🌾 धान 🗓️ अक्टूबर–दिसंबर ⚖️ खरीद मानक

धान में नमी और खरीद के मानक Paddy Moisture and Procurement Norms

17% से ऊपर नमी निकली तो ट्रॉली लौट जाती है — और यह मोल-भाव की बात नहीं, तय विनिर्देश है। पूरा नुकसान खलिहान में टाला जा सकता है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 8 मिनट पढ़ें 📅 सितंबर 2026

धान का भाव मंडी में नहीं, खलिहान में तय होता है

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17%
अधिकतम नमी, सरकारी खरीद में
🧹
1% + 1%
अकार्बनिक व कार्बनिक अपद्रव्य
💰
₹2,441
सामान्य धान MSP, 2026-27
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भूमिका

धान की पूरी मेहनत का हिसाब खरीद केंद्र के उस एक पल में होता है जब कर्मचारी बोरी में यंत्र डालकर नमी नापता है। अगर वह अंक 17 प्रतिशत से ऊपर निकला, तो ट्रॉली वापस लौटती है — और अक्सर उसी दिन वही धान गाँव के व्यापारी को समर्थन मूल्य से काफ़ी कम पर बेचना पड़ता है। यह मोल-भाव की बात नहीं है: नमी की यह सीमा सरकारी खरीद के तय विनिर्देश में लिखी है, और केंद्र का कर्मचारी उसे बदल नहीं सकता।

दुख की बात यह है कि यह नुकसान लगभग पूरी तरह टाला जा सकता है। खेत से केंद्र तक के तीन-चार दिनों में क्या किया गया, इसी से तय होता है कि धान पास होगा या लौटेगा। यह लेख वे सारे पैमाने एक जगह रखता है जिन पर धान परखा जाता है, नमी घटाने का सही तरीका बताता है, और वह घरेलू जाँच सिखाता है जिससे आप ट्रॉली भरने से पहले ही अंदाज़ा लगा सकते हैं।


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📊

धान किन पैमानों पर परखा जाता है

सरकारी खरीद में धान के लिए पूरे देश में एक जैसे विनिर्देश लागू होते हैं। नमी उनमें सबसे चर्चित है, पर अकेली नहीं — बाकी सीमाएँ भी उतनी ही सख़्ती से देखी जाती हैं।

पैमानाअधिकतम सीमाइसका मतलब
नमी17.0%सबसे आम कारण जिससे ट्रॉली लौटती है
अकार्बनिक अपद्रव्य1.0%मिट्टी, कंकड़, धूल
कार्बनिक अपद्रव्य1.0%पुआल, डंठल, खरपतवार के बीज
क्षतिग्रस्त, विवर्णित, अंकुरित व घुन लगे दाने5.0%बारिश में भीगा या ढेर में गरम हुआ धान
अपरिपक्व, सिकुड़े व झुर्रीदार दाने3.0%जल्दी काटी या कमज़ोर बढ़वार वाली फसल

धान की श्रेणी भी यहीं तय होती है। दाने की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 2.5 या उससे अधिक होने पर वह ग्रेड "A" माना जाता है, और उससे कम होने पर "सामान्य"। दोनों का समर्थन मूल्य अलग होता है।

💡
खरीफ विपणन सीज़न 2026-27 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य सामान्य ग्रेड ₹2,441 और ग्रेड "A" ₹2,461 प्रति क्विंटल तय हुआ है, जो पिछले साल के ₹2,369 से ₹72 अधिक है। ये दरें केंद्र सरकार हर साल घोषित करती है — बेचने से पहले चालू सीज़न की दर अपने खरीद केंद्र या ज़िला विपणन कार्यालय से पक्की कर लीजिए।

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घर पर नमी का अंदाज़ा कैसे लगाएँ

यंत्र हर किसान के पास नहीं होता, पर मोटा अंदाज़ा घर पर भी लग जाता है। ट्रॉली भरने से पहले ये तीनों जाँच कर लीजिए।


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नमी घटाने का सही तरीका

कटाई के समय धान में नमी सामान्यतः 20 प्रतिशत से ऊपर होती है। उसे 17 प्रतिशत या नीचे लाना ही पूरा काम है — पर जल्दबाज़ी में सुखाया गया धान टूटने लगता है, और टूटा दाना अपनी अलग कटौती लाता है।


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बाकी पैमाने — सफ़ाई, कटाई और भंडारण


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खरीद केंद्र पर बेचने की तैयारी

⚠️
विनिर्देश, समर्थन मूल्य, पंजीकरण की तारीख़ें और खरीद केंद्रों की सूची हर सीज़न बदलती है और राज्यवार अलग होती है। ट्रॉली भरने से पहले अपने खरीद केंद्र, ज़िला विपणन कार्यालय या खाद्य एवं रसद विभाग से चालू सीज़न की शर्तें पक्की कर लीजिए। KrashiMitra खरीद नहीं करता, किसी केंद्र का एजेंट नहीं है, और भुगतान में कोई भूमिका नहीं निभाता।

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ये गलतियाँ कभी न करें


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कटाई से बिक्री तक — क्रम

चरणज़रूरी काम
खरीद सीज़न से पहलेऑनलाइन पंजीकरण; बैंक खाता आधार से जुड़ा है या नहीं, जाँचिए
कटाईबालियों के लगभग 80% दाने सख़्त होने पर काटिए
मड़ाईतिरपाल पर; ओसाई करके पुआल और धूल अलग कीजिए
सुखाई (2–3 दिन)5–6 सेंटीमीटर परत, हर 1–2 घंटे पलटाई, रात में ढकाव
ट्रॉली भरने से पहलेदाँत और मुट्ठी की जाँच; संदेह हो तो थोड़ा धान पहले ले जाइए
खरीद केंद्र परनमी की रीडिंग पूछिए; तौल पर्ची और रसीद लीजिए
बिक्री के बादभुगतान खाते में आया या नहीं, देखिए; पर्चियाँ सँभालकर रखिए

निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — 17 प्रतिशत नमी की सीमा तय विनिर्देश है, उस पर मोल-भाव नहीं होता। दूसरी — सुखाई तिरपाल पर, पतली परत में और बार-बार पलटाई के साथ; रात में ढककर। तीसरी — नमी अकेला पैमाना नहीं है — अपद्रव्य 1–1 प्रतिशत, क्षतिग्रस्त दाने 5 प्रतिशत और कच्चे दाने 3 प्रतिशत की सीमाएँ भी उतनी ही सख़्त हैं

धान का भाव मंडी में नहीं, खलिहान में तय होता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1धान में नमी कितनी होनी चाहिए?
सरकारी खरीद के विनिर्देश के अनुसार धान में अधिकतम 17.0 प्रतिशत नमी स्वीकार की जाती है। इससे ऊपर नमी होने पर खरीद केंद्र धान नहीं लेता, और यह छूट देने का अधिकार केंद्र के कर्मचारी के पास नहीं होता — इसलिए ट्रॉली भरने से पहले सुखाई पूरी कर लेना ही एकमात्र रास्ता है।
2धान की सुखाई का सही तरीका क्या है?
तिरपाल पर 5–6 सेंटीमीटर मोटी पतली परत में फैलाइए और हर एक-दो घंटे में पलटाई कीजिए, आम तौर पर दो-तीन दिन में नमी सीमा के भीतर आ जाती है। दोपहर की बहुत कड़ी धूप से बचिए क्योंकि उसमें दाना बाहर से सूखकर भीतर गीला रह जाता है और टूटता है, और रात में धान ढककर रखिए वरना ओस से नमी लौट आती है।
3धान के लिए सरकारी खरीद के बाकी मानक क्या हैं?
नमी 17% के अलावा — अकार्बनिक अपद्रव्य 1%, कार्बनिक अपद्रव्य 1%, क्षतिग्रस्त-विवर्णित-अंकुरित व घुन लगे दाने 5%, और अपरिपक्व-सिकुड़े दाने 3% तक। यही वजह है कि सिर्फ़ सुखाई काफी नहीं होती; ओसाई करके पुआल, धूल और खरपतवार के बीज निकालना भी उतना ही ज़रूरी है।
4धान का MSP 2026-27 कितना है?
खरीफ विपणन सीज़न 2026-27 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य सामान्य ग्रेड ₹2,441 और ग्रेड "A" ₹2,461 प्रति क्विंटल तय हुआ है, जो पिछले साल के ₹2,369 से ₹72 अधिक है। दर हर साल केंद्र सरकार घोषित करती है, इसलिए बेचने से पहले चालू सीज़न की दर अपने खरीद केंद्र से पक्की कर लीजिए।
5बिना यंत्र के धान की नमी कैसे जाँचें?
कुछ दाने छीलकर दाँत से दबाइए — सूखा दाना "कट्ट" की आवाज़ के साथ टूटेगा, और गीला दाना दबकर पिचक जाएगा। दूसरी जाँच मुट्ठी की है: मुट्ठी भर धान कसकर दबाकर छोड़िए, अगर दाने आपस में चिपके रहें या हथेली पर नमी लगे तो सुखाना बाकी है।
6धान ग्रेड A और सामान्य में क्या फर्क है?
फर्क दाने की बनावट का है — लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 2.5 या उससे अधिक होने पर धान ग्रेड "A" माना जाता है, और उससे कम होने पर "सामान्य"। दोनों का न्यूनतम समर्थन मूल्य अलग होता है, और श्रेणी खरीद केंद्र पर ही तय की जाती है।
7धान बेचने के लिए कौन-से कागज़ चाहिए?
आम तौर पर ऑनलाइन पंजीकरण संख्या, खतौनी या भूमि का विवरण, आधार और आधार से जुड़ा चालू बैंक खाता। भुगतान सीधे बैंक खाते में आता है, इसलिए खाता बंद या आधार से न जुड़ा होना भुगतान अटकने का सबसे आम तकनीकी कारण है; पंजीकरण की खिड़की सीज़न शुरू होने से पहले खुलती है।
8अगर खरीद केंद्र पर नमी ज़्यादा निकल जाए तो क्या करें?
धान वापस ले जाकर दोबारा सुखाइए और नमी की जो रीडिंग केंद्र पर आई थी, वह पूछकर लिख लीजिए — उसी अंक से पता चलता है कि कितनी सुखाई और चाहिए। अगली बार पूरी ट्रॉली भरने के बजाय पहले थोड़ा धान ले जाकर जाँच करा लेना कहीं सस्ता पड़ता है।
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