कृषिमित्र हेल्पलाइन: +91 9870951001
🤝 सरकारी योजना 🗓️ पूरे साल 💰 ₹15 लाख तक इक्विटी ग्रांट

FPO — किसान उत्पादक संगठन Farmer Producer Organisation (FPO) — Formation & Government Support

अकेले किसान से मंडी में भाव पूछा जाता है, दो हज़ार किसानों के संगठन से भाव तय होता है। FPO ठीक यही फर्क पैदा करता है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 10 मिनट पढ़ें 📅 अगस्त 2026

किसानों की अपनी कंपनी — और सरकार की तीन तरह की मदद

💼
₹18 लाख
प्रबंधन खर्च, 3 साल
🤝
₹2,000
प्रति सदस्य इक्विटी ग्रांट
🏦
₹2 करोड़
ऋण गारंटी सीमा
📖

भूमिका

अकेला किसान मंडी में सबसे कमजोर आदमी होता है। वह 20 क्विंटल लेकर जाता है, इसलिए भाव उसे बताया जाता है, वह भाव तय नहीं करता। खाद-बीज भी वह खुदरा दाम पर खरीदता है, और ट्रैक्टर-थ्रेशर जैसी मशीन उसके लिए अकेले खरीदना घाटे का सौदा है।

किसान उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organisation — FPO) इसी समस्या का सीधा जवाब है — यह किसानों की अपनी कंपनी है, जो सैकड़ों किसानों की उपज एक साथ लेकर सौदा करती है। तब मंडी में जाने वाला 20 क्विंटल नहीं, 2,000 क्विंटल होता है — और भाव पूछा नहीं, तय किया जाता है। सरकार ने इसीलिए 10,000 नए FPO बनाने की केंद्रीय योजना चलाई, जिसमें बनने वाले हर FPO को पूँजी, ऋण-गारंटी और प्रबंधन खर्च तीनों की मदद मिलती है। इस लेख में FPO क्या है, बनता कैसे है, कितना पैसा मिलता है और कौन-सी गलतियाँ FPO को डुबो देती हैं — आसान हिंदी में।


विज्ञापन
🤝

FPO क्या है — और सहकारी समिति से कैसे अलग है?

FPO किसानों का ऐसा संगठन है जो कंपनी अधिनियम के तहत "प्रोड्यूसर कंपनी" के रूप में या सहकारी/सोसाइटी कानून के तहत पंजीकृत होता है। इसके शेयरधारक सिर्फ किसान होते हैं, और मुनाफ़ा उन्हीं के बीच बँटता है।

बिंदु✅ FPO (प्रोड्यूसर कंपनी)❌ अकेला किसान
बेचने की ताकतसैकड़ों किसानों की उपज एक साथथोड़ी मात्रा, भाव पर कोई पकड़ नहीं
खाद-बीज की खरीदथोक दाम, सीधे कंपनी सेखुदरा दुकान का दाम
मशीनसाझा — कस्टम हायरिंग सेंटरअकेले खरीदना घाटे का सौदा
प्रसंस्करण व ब्रांडछँटाई, पैकिंग, अपना ब्रांड संभवकच्ची उपज, कच्चा दाम
बैंक ऋणऋण-गारंटी सुविधा उपलब्धसिर्फ अपनी ज़मीन के भरोसे
सरकारी सहायताइक्विटी ग्रांट व प्रबंधन खर्चव्यक्तिगत योजनाओं तक सीमित
💡
सबसे बड़ा फर्क — FPO कंपनी की तरह चलता है। इसमें बोर्ड, हिसाब-किताब, ऑडिट और एक वेतनभोगी CEO होता है, इसलिए यह पेशेवर ढंग से कारोबार कर सकता है। सहकारी समिति की तुलना में इसमें सरकारी दखल कम और कारोबारी आज़ादी ज़्यादा होती है — पर ज़िम्मेदारी भी उतनी ही ज़्यादा है।

🏛️

10,000 FPO योजना — क्या-क्या मिलता है

केंद्रीय क्षेत्र की योजना "10,000 नए किसान उत्पादक संगठनों का गठन एवं संवर्धन" 29 फरवरी 2020 को शुरू हुई थी, जिसका कुल परिव्यय ₹6,865 करोड़ रखा गया। इसके तहत बनने वाले FPO को तीन तरह की मदद मिलती है:

सहायताकितनीकिसलिए
प्रबंधन खर्च₹18 लाख तक प्रति FPO, 3 साल के लिएCEO का वेतन, दफ्तर, हिसाब-किताब, शुरुआती खर्च
मैचिंग इक्विटी ग्रांट₹2,000 प्रति सदस्य, अधिकतम ₹15 लाख प्रति FPOकिसानों की लगाई पूँजी के बराबर सरकारी पूँजी
ऋण गारंटी सुविधापरियोजना ऋण पर ₹2 करोड़ तक प्रति FPOबिना गारंटी बैंक ऋण मिलने में आसानी

विज्ञापन

पात्रता — कौन बना सकता है

⚠️
योजना के नियम, न्यूनतम सदस्य संख्या और सहायता की राशि समय-समय पर संशोधित होती रहती है, और लागू करने वाली एजेंसी राज्य के अनुसार अलग हो सकती है। शुरू करने से पहले NABARD, SFAC, NCDC या अपने ज़िले के कृषि/सहकारिता विभाग से मौजूदा दिशा-निर्देश की पुष्टि ज़रूर करें। KrashiMitra किसी योजना का एजेंट नहीं है, FPO पंजीकरण नहीं कराता, और "FPO बनवा देंगे" कहकर पैसे माँगने वाले किसी भी व्यक्ति से सावधान रहें

📝

FPO कैसे बनाएँ — कदम दर कदम

  1. किसानों का समूह बनाएँ: एक ही इलाके और एक जैसी फसल वाले किसानों को जोड़ें। शुरुआत में 10–15 सक्रिय किसानों की एक कोर टीम काफी है।
  2. कारोबार तय करें: FPO करेगा क्या — उपज इकट्ठा करके बेचेगा? खाद-बीज की दुकान चलाएगा? कस्टम हायरिंग सेंटर? प्रसंस्करण? यह पहले तय करें, पंजीकरण बाद में।
  3. CBBO से जुड़ें: लागू करने वाली एजेंसी (NABARD/SFAC/NCDC) से संपर्क करें और अपने क्षेत्र का CBBO पता करें — वही पूरी प्रक्रिया में मदद करता है।
  4. सदस्य जोड़ें और शेयर पूँजी इकट्ठा करें: हर सदस्य से तय शेयर राशि; इसका पक्का रिकॉर्ड रखें।
  5. पंजीकरण कराएँ: प्रोड्यूसर कंपनी के रूप में MCA में या सहकारी/सोसाइटी कानून के तहत; बायलॉज़, बोर्ड और निदेशक तय करें।
  6. ज़रूरी रजिस्ट्रेशन लें: PAN, TAN, बैंक खाता, GST (लागू हो तो), खाद-बीज बेचना है तो लाइसेंस, और मंडी/e-NAM पंजीकरण।
  7. कारोबार शुरू करें, फिर ग्रांट लें: इक्विटी ग्रांट और ऋण गारंटी के लिए आवेदन करें; असली कारोबार दिखने पर बैंक और खरीदार दोनों भरोसा करते हैं।
  8. हिसाब-किताब पारदर्शी रखें: हर लेनदेन का रिकॉर्ड, समय पर ऑडिट और सदस्यों के सामने खुली बैठक — FPO यहीं जीतते या हारते हैं।

💼

FPO कमाता कैसे है

💡
पहले साल एक ही काम पूरे मन से करें। जो FPO पहले साल में एक साथ दुकान, मशीन, गोदाम और प्रोसेसिंग शुरू करता है, वह आमतौर पर तीनों में कमजोर रह जाता है। सबसे सफल FPO वे हैं जिन्होंने एक फसल की सामूहिक बिक्री से शुरुआत की, उसमें भरोसा और नकदी बनाई, और उसके बाद अगला काम जोड़ा।

🚫

ये गलतियाँ FPO को डुबो देती हैं


🗓️

पहले साल का रास्ता

चरणक्या करें
महीना 1–2सक्रिय किसानों की कोर टीम; कारोबार का विचार तय करें
महीना 2–3NABARD/SFAC/NCDC से संपर्क; अपने क्षेत्र का CBBO पता करें
महीना 3–5सदस्य जोड़ें, शेयर पूँजी इकट्ठा करें, बायलॉज़ तैयार करें
महीना 5–6पंजीकरण; PAN, बैंक खाता, ज़रूरी लाइसेंस
महीना 6–9पहला कारोबार शुरू करें — एक फसल की सामूहिक बिक्री
महीना 9–12इक्विटी ग्रांट व ऋण गारंटी के लिए आवेदन; हिसाब और ऑडिट
दूसरा सालदूसरा कारोबार जोड़ें — इनपुट दुकान, CHC या भंडारण

निष्कर्ष

FPO कागज़ का संगठन नहीं, किसानों की अपनी कंपनी है — और वह उतना ही चलता है जितना उसका कारोबार चलता है। तीन बातें याद रखिए: पहले कारोबार तय करें, पंजीकरण बाद में, सदस्यों की अपनी पूँजी ज़रूर लगवाएँ — ₹2,000 प्रति सदस्य का मैचिंग ग्रांट इसी पर मिलता है, और हिसाब-किताब पहले दिन से पारदर्शी रखें

अकेले किसान से भाव पूछा जाता है; दो हज़ार किसानों के संगठन से भाव तय होता है।

विज्ञापन

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1FPO क्या होता है?
FPO यानी किसान उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organisation) — किसानों की अपनी कंपनी, जो प्रोड्यूसर कंपनी, सहकारी समिति या सोसाइटी के रूप में पंजीकृत होती है और जिसके शेयरधारक सिर्फ किसान होते हैं। इसका मुख्य काम है सैकड़ों किसानों की उपज एक साथ लेकर सौदा करना, ताकि मंडी में भाव पूछा नहीं, तय किया जा सके। मुनाफ़ा सदस्यों के बीच ही बँटता है।
2FPO बनाने पर सरकार से कितना पैसा मिलता है?
"10,000 नए FPO" योजना के तहत तीन तरह की मदद मिलती है — प्रबंधन खर्च के लिए ₹18 लाख तक प्रति FPO (3 साल के लिए), मैचिंग इक्विटी ग्रांट ₹2,000 प्रति सदस्य, अधिकतम ₹15 लाख प्रति FPO, और परियोजना ऋण पर ₹2 करोड़ तक की ऋण गारंटी सुविधा। योजना 29 फरवरी 2020 को ₹6,865 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू हुई थी।
3FPO बनाने के लिए कम से कम कितने सदस्य चाहिए?
न्यूनतम सदस्य संख्या क्षेत्र के अनुसार तय होती है — मैदानी इलाकों में ज़्यादा और पहाड़ी तथा पूर्वोत्तर क्षेत्रों में कम। साथ ही योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार कम से कम 50% शेयरधारक लघु, सीमांत और भूमिहीन बटाईदार किसान होने चाहिए, और महिला किसानों को शेयरधारक बनाने को प्राथमिकता दी जाती है। अपने राज्य की मौजूदा सीमा NABARD, SFAC या NCDC से पुष्टि करें।
4FPO कैसे बनाया जाता है?
क्रम यह है — पहले एक ही इलाके और एक जैसी फसल वाले किसानों की कोर टीम बनाएँ, फिर तय करें कि FPO करेगा क्या (सामूहिक बिक्री, इनपुट दुकान, कस्टम हायरिंग या प्रसंस्करण)। उसके बाद अपने क्षेत्र के CBBO से जुड़ें, सदस्यों से शेयर पूँजी इकट्ठा करें, प्रोड्यूसर कंपनी/सहकारी के रूप में पंजीकरण कराएँ, PAN-बैंक खाता-लाइसेंस लें, और कारोबार शुरू करने के बाद इक्विटी ग्रांट के लिए आवेदन करें।
5FPO और सहकारी समिति में क्या फर्क है?
सबसे बड़ा फर्क यह है कि FPO कंपनी की तरह चलता है — इसमें बोर्ड, हिसाब-किताब, ऑडिट और आमतौर पर एक वेतनभोगी CEO होता है, जिससे यह पेशेवर ढंग से कारोबार कर सकता है। सहकारी समिति की तुलना में इसमें सरकारी दखल कम और कारोबारी आज़ादी ज़्यादा होती है, पर ज़िम्मेदारी और अनुपालन का बोझ भी उतना ही ज़्यादा रहता है।
6FPO पैसे कैसे कमाता है?
मुख्य रास्ते हैं — सदस्यों की उपज इकट्ठा करके थोक में बेचना (एग्रीगेशन), खाद-बीज-दवा थोक में खरीदकर सदस्यों को देना, कस्टम हायरिंग सेंटर चलाना, छँटाई-ग्रेडिंग-दाल मिल जैसी प्रसंस्करण इकाई लगाना, गोदाम और e-NWR के ज़रिए भंडारण, प्रमाणित बीज उत्पादन, और अपना ब्रांड बनाकर सीधे उपभोक्ता तक बेचना। पहले साल एक ही काम पूरे मन से करना सबसे सफल तरीका पाया गया है।
7क्या FPO का सदस्य बनने के लिए ज़मीन होना ज़रूरी है?
नहीं — योजना के दिशा-निर्देशों में भूमिहीन बटाईदार किसानों को भी शेयरधारक बनाने की बात कही गई है, और यह भी कि कम से कम 50% शेयरधारक लघु, सीमांत और भूमिहीन बटाईदार किसान हों। सदस्य बनने के लिए मुख्य शर्त यह है कि आप बायलॉज़ के अनुसार शेयर पूँजी लगाएँ — क्योंकि मैचिंग इक्विटी ग्रांट किसानों की लगाई पूँजी के बराबर ही मिलता है।
8FPO क्यों फेल हो जाते हैं?
सबसे बड़ी वजह है सिर्फ ग्रांट के लिए FPO बनाना — जो संगठन असली कारोबार नहीं करता, वह ग्रांट खत्म होते ही बंद हो जाता है। इसके बाद आते हैं — हिसाब-किताब में गड़बड़ी, एक-दो लोगों का कब्ज़ा, सदस्यों का अपनी उपज FPO को न देकर बाहर बेच देना, अच्छे CEO पर खर्च न करना, और शुरुआत में ही बहुत बड़ा कर्ज़ ले लेना। पारदर्शी खाता और छोटा-सा चलता हुआ कारोबार ही FPO को टिकाते हैं।
🌾

KrashiMitra.in — आपका विश्वसनीय कृषि साथी

मंडी भाव, सरकारी योजनाएं, बीज-खाद की जानकारी और फसल रोग उपचार — सब कुछ हिंदी में।

KrashiMitra.in पर जाएं →
📰 संबंधित लेख सभी लेख देखें →

📌 इससे जुड़ी और जानकारी

🤖
AI से रोग पहचान करें
फोटो भेजें — तुरंत इलाज जानें
🛒
दवा ऑनलाइन खरीदें
फफूंदनाशक, कीटनाशक — COD
🌤️
आज का मौसम देखें
छिड़काव के लिए सही समय जानें
AI सहायक AI सहायक