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🚜 सरकारी योजना 🗓️ पोर्टल खुलने पर 💰 40–50% सहायता

कृषि यंत्र सब्सिडी (SMAM) Farm Machinery Subsidy (SMAM) — Rates, Documents & Application

ट्रैक्टर, रोटावेटर या थ्रेशर पर आधी तक सब्सिडी मिल सकती है — पर सिर्फ तब, जब आप खरीदने से पहले आवेदन करें।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 अगस्त 2026

पहले आवेदन, फिर खरीद — यही पूरी योजना की चाबी है

💰
50%
SC/ST · लघु · महिला
💵
40%
अन्य किसान
📝
पहले आवेदन
खरीद बाद में
📖

भूमिका

एक ट्रैक्टर, एक रोटावेटर, एक सीड ड्रिल या एक थ्रेशर — इनके बिना आज खेती करना मुश्किल है, लेकिन इनका पूरा दाम चुका पाना छोटे किसान के बस में नहीं। इसी खाई को पाटने के लिए सरकार कृषि यंत्रों पर सब्सिडी देती है, जिसकी सबसे बड़ी योजना है कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (Sub-Mission on Agricultural Mechanization — SMAM)

पर यहाँ दो बातें ज़्यादातर किसान नहीं जानते। पहली — सब्सिडी की दर सबके लिए एक नहीं होती: अनुसूचित जाति/जनजाति, लघु-सीमांत और महिला किसानों को ज़्यादा मिलती है। दूसरी और उससे भी बड़ी — यंत्र खरीदने से पहले पोर्टल पर आवेदन और अनुमोदन ज़रूरी है; पहले बिल बनवाकर बाद में सब्सिडी माँगने पर आमतौर पर कुछ नहीं मिलता। इस लेख में सब्सिडी की दरें, आवेदन का पूरा तरीका, कस्टम हायरिंग सेंटर का रास्ता और वे गलतियाँ जिनसे आवेदन रद्द होता है — आसान हिंदी में।


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🏛️

SMAM क्या है?

कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM) केंद्र सरकार की वह योजना है जो किसानों तक खेती के यंत्र पहुँचाने के लिए चलाई जाती है। इसका मुख्य लक्ष्य उन छोटे और सीमांत किसानों तक मशीन पहुँचाना है जिनके पास अपना यंत्र खरीदने की क्षमता नहीं

💡
अगर यंत्र खरीदना बहुत महँगा है, तो CHC का रास्ता देखिए। एक हैप्पी सीडर या कंबाइन हार्वेस्टर अकेले किसान के लिए बेकार का खर्च है, पर वही मशीन किराए पर लेने से लागत का छोटा हिस्सा ही लगता है। और अगर आप समूह/FPO बनाकर CHC खोलते हैं, तो वह अपने आप में एक कमाई का धंधा है।

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सब्सिडी कितनी मिलती है?

SMAM के तहत यंत्र की लागत का सामान्यतः 40% से 50% तक सहायता दी जाती है, और यह इस बात पर निर्भर करता है कि किसान किस श्रेणी में आता है:

किसान की श्रेणीसामान्य सहायता दर
अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजातिलगभग 50%
लघु एवं सीमांत किसानलगभग 50%
महिला किसानलगभग 50%
अन्य (सामान्य) किसानलगभग 40%
⚠️
सब्सिडी की दरें, यंत्रों की सूची और अधिकतम सीमा हर साल और हर राज्य में बदलती है। ऊपर दी गई दरें सामान्य ढाँचा बताती हैं, अंतिम नहीं। आवेदन से पहले अपने ज़िले के कृषि विभाग, कृषि यंत्र पोर्टल या KVK से मौजूदा दर और सीमा की पुष्टि ज़रूर करें। KrashiMitra किसी योजना का एजेंट नहीं है और आवेदन नहीं कराता।

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📝

आवेदन कैसे करें — क्रम बहुत ज़रूरी है

यह वह हिस्सा है जहाँ सबसे ज़्यादा किसान चूकते हैं। नियम सीधा है — पहले आवेदन और अनुमोदन, फिर खरीद। उल्टा करने पर बिल मान्य नहीं होता।

  1. पंजीकरण करें: केंद्र का कृषि यंत्रीकरण पोर्टल agrimachinery.nic.in या अपने राज्य का कृषि यंत्र पोर्टल (हर राज्य का अपना है) — जहाँ आपका राज्य आवेदन लेता हो।
  2. यंत्र चुनें और आवेदन करें: सूची में से यंत्र चुनकर आवेदन जमा करें। कई राज्यों में इस समय एक टोकन/जमानत राशि भी देनी होती है।
  3. चयन का इंतज़ार करें: बजट के अनुसार चयन होता है (लॉटरी या पहले आओ-पहले पाओ)। चयन का संदेश SMS पर आता है।
  4. स्वीकृति (परमिट) मिलने के बाद ही यंत्र खरीदें: पंजीकृत डीलर से, पक्के बिल (GST सहित) के साथ।
  5. दस्तावेज़ अपलोड करें: बिल, यंत्र की फोटो (कई राज्यों में किसान के साथ फोटो), सीरियल नंबर और बैंक विवरण।
  6. भौतिक सत्यापन: कृषि विभाग का कर्मचारी यंत्र देखकर सत्यापन करता है।
  7. सब्सिडी आपके खाते में: सत्यापन के बाद रकम सीधे आधार से जुड़े बैंक खाते (DBT) में आती है।

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ज़रूरी दस्तावेज़

दस्तावेज़किसलिए
आधार कार्डपहचान और DBT के लिए — बैंक खाते से जुड़ा होना ज़रूरी
खतौनी / भूमि अभिलेखज़मीन का प्रमाण और लघु-सीमांत श्रेणी तय करने के लिए
बैंक पासबुक की कॉपीसब्सिडी सीधे इसी खाते में आती है
जाति प्रमाण पत्रSC/ST की ऊँची दर का लाभ लेने के लिए
पासपोर्ट साइज़ फोटोआवेदन के साथ
मोबाइल नंबरOTP और चयन का SMS इसी पर आता है — चालू नंबर दें
यंत्र का पक्का बिलस्वीकृति के बाद, पंजीकृत डीलर से GST सहित

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कस्टम हायरिंग सेंटर — किराए का धंधा

अगर आपके पास पूँजी और थोड़ी जगह है, तो CHC खोलना अपने आप में एक कमाई का रास्ता है। इसमें आप यंत्रों का समूह खरीदते हैं और गाँव के किसानों को किराए पर देते हैं।

💡
यंत्र खरीदने से पहले उसे एक बार किराए पर लेकर चलाइए। बहुत से किसान सब्सिडी के लालच में ऐसा यंत्र खरीद लेते हैं जो उनकी मिट्टी, उनके ट्रैक्टर की क्षमता (HP) या उनकी फसल के लिए ठीक नहीं बैठता — और वह सालों खड़ा जंग खाता है। सब्सिडी का मतलब सस्ती मशीन है, ज़रूरी मशीन नहीं।

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ये गलतियाँ आवेदन रद्द करा देती हैं


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शुरू से सब्सिडी मिलने तक

चरणक्या करें
1. तय करेंकौन सा यंत्र वाकई चाहिए; हो सके तो पहले किराए पर चलाकर देखें
2. जानकारी लेंज़िला कृषि विभाग/KVK से इस साल की दर, सीमा और पोर्टल खुलने की तारीख
3. दस्तावेज़ तैयारआधार, खतौनी, बैंक पासबुक, जाति प्रमाण पत्र, फोटो
4. आवेदनपोर्टल पर पंजीकरण और आवेदन; ज़रूरत हो तो टोकन राशि
5. चयनSMS का इंतज़ार; स्वीकृति मिलने पर ही आगे बढ़ें
6. खरीदपंजीकृत डीलर से, GST वाले पक्के बिल के साथ
7. अपलोड व सत्यापनबिल, फोटो, सीरियल नंबर; विभाग का भौतिक सत्यापन
8. भुगतानसब्सिडी सीधे आधार से जुड़े बैंक खाते में (DBT)

निष्कर्ष

कृषि यंत्र की सब्सिडी मिलती उसे है जो क्रम सही रखता है। तीन बातें याद रखिए: पहले आवेदन और स्वीकृति, फिर खरीद, SC/ST, लघु-सीमांत और महिला किसानों को ऊँची दर (लगभग 50%) मिलती है, और पक्का GST बिल तथा आधार से जुड़ा बैंक खाता अनिवार्य है

और अगर यंत्र साल में सिर्फ कुछ दिन चलना है — तो उसे खरीदने से बेहतर है किराए पर लेना, या खुद CHC खोलकर दूसरों को देना।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1कृषि यंत्र पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
SMAM के तहत यंत्र की लागत का सामान्यतः 40% से 50% तक सहायता मिलती है — अनुसूचित जाति/जनजाति, लघु एवं सीमांत तथा महिला किसानों को लगभग 50% और अन्य किसानों को लगभग 40%। हर यंत्र पर रुपये में एक अधिकतम सीमा भी तय होती है, इसलिए महँगे यंत्र में असली सहायता प्रतिशत से कम पड़ सकती है। दरें हर साल और हर राज्य में बदलती हैं — ज़िला कृषि विभाग से पुष्टि करें।
2कृषि यंत्र सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें?
केंद्र के कृषि यंत्रीकरण पोर्टल agrimachinery.nic.in या अपने राज्य के कृषि यंत्र पोर्टल पर पंजीकरण करके आवेदन करें। क्रम बहुत ज़रूरी है — पहले आवेदन और स्वीकृति, उसके बाद ही यंत्र की खरीद। चयन बजट के अनुसार लॉटरी या पहले-आओ-पहले-पाओ से होता है, और स्वीकृति का संदेश SMS पर आता है। आवेदन खुद या नज़दीकी जन सेवा केंद्र (CSC) से करें।
3क्या यंत्र पहले खरीदकर बाद में सब्सिडी ली जा सकती है?
आमतौर पर नहीं — यही सबसे बड़ी और सबसे आम गलती है। ज़्यादातर राज्यों में स्वीकृति (परमिट) मिलने से पहले का बिल मान्य नहीं होता, इसलिए पहले खरीदा गया यंत्र सब्सिडी से बाहर रह जाता है। सही क्रम है — पोर्टल पर आवेदन → चयन/स्वीकृति → पंजीकृत डीलर से GST वाले पक्के बिल पर खरीद → दस्तावेज़ अपलोड → भौतिक सत्यापन → DBT से भुगतान।
4कृषि यंत्र सब्सिडी के लिए कौन से दस्तावेज़ चाहिए?
मुख्य दस्तावेज़ हैं — आधार कार्ड, खतौनी या भूमि अभिलेख, आधार से जुड़ी बैंक पासबुक की कॉपी, पासपोर्ट साइज़ फोटो और चालू मोबाइल नंबर। SC/ST की ऊँची दर के लिए जाति प्रमाण पत्र भी चाहिए। स्वीकृति के बाद पंजीकृत डीलर का GST सहित पक्का बिल और यंत्र की फोटो अपलोड करनी होती है। नाम आधार और भूमि अभिलेख में एक जैसा होना ज़रूरी है।
5कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) क्या है और कौन खोल सकता है?
CHC यंत्रों का किराया केंद्र है, जहाँ से किसान घंटे या एकड़ के हिसाब से मशीन किराए पर लेते हैं। इसे व्यक्तिगत किसान, स्वयं सहायता समूह (SHG), FPO, सहकारी समिति और ग्राम पंचायत खोल सकते हैं, और परियोजना लागत पर सहायता मिलती है। इसका पूरा गणित यह है कि जो यंत्र आप अकेले साल में 10 दिन चलाते, वह किराए पर 100 दिन चलता है। सरकार का FARMS ऐप किसानों को आसपास के CHC से बुकिंग की सुविधा देता है।
6क्या सब्सिडी सीधे खाते में आती है?
हाँ — भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद सब्सिडी की रकम प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से सीधे आपके आधार से जुड़े बैंक खाते में आती है। इसीलिए आवेदन से पहले यह जाँच लेना ज़रूरी है कि आपका बैंक खाता आधार से जुड़ा (सीडेड) है — यह न होने पर भुगतान अटक जाता है, जो देरी का सबसे आम कारण है।
7सब्सिडी दिलाने के नाम पर पैसे माँगे जाएँ तो क्या करें?
किसी भी दलाल या बिचौलिए को पैसे न दें — आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और आप इसे खुद या नज़दीकी जन सेवा केंद्र (CSC) से कर सकते हैं। सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आती है, किसी व्यक्ति के हाथ से नहीं। ऐसा कोई भी दावा कि "पैसे देने पर चयन पक्का करा देंगे" पूरी तरह धोखा है — शिकायत अपने ज़िला कृषि अधिकारी से करें।
8कौन सा कृषि यंत्र खरीदना चाहिए?
वही जो आपकी फसल, मिट्टी और आपके ट्रैक्टर की क्षमता (HP) के हिसाब से बैठता हो। सलाह यह है कि खरीदने से पहले उसी यंत्र को एक बार किराए पर लेकर अपने खेत में चलाकर देखें। बहुत से किसान सब्सिडी के लालच में ऐसा भारी यंत्र खरीद लेते हैं जो उनके ट्रैक्टर से चलता ही नहीं और सालों खड़ा जंग खाता है — सब्सिडी का मतलब सस्ती मशीन है, ज़रूरी मशीन नहीं।
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