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कपास में गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) Pink Bollworm in Cotton (Pectinophora gossypiella) — Identification, Damage & Control

कपास का फूल गुलाब की कली जैसा बंद रह जाए और टिंडे के अंदर गुलाबी इल्ली मिले — तो यह गुलाबी सुंडी है। यह अंदर छिपकर खाती है, इसलिए खेत बाहर से हरा-भरा दिखता है और उपज 40–60% तक गिर जाती है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 जुलाई 2026

कपास का सबसे महँगा दुश्मन — गुलाबी सुंडी

📉
40–60%
उपज में नुकसान
🌸
रोज़ेट फूल
सबसे पक्की पहचान
🪤
8–10
फेरोमोन ट्रैप / एकड़
📖

भूमिका

कपास का फूल खिलने की बजाय गुलाब की कली जैसा बंद रह जाए, और टिंडा तोड़ने पर अंदर गुलाबी रंग की छोटी इल्ली तथा आपस में चिपके हुए बीज मिलें — तो समझ लीजिए खेत में गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) आ चुकी है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना — हर कपास बेल्ट में यह आज सबसे बड़ी चिंता है।

इस कीट की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह नुकसान अंदर बैठकर करता है। बाहर से खेत हरा-भरा और भरपूर टिंडों वाला दिखता है, लेकिन अंदर रुई सड़ चुकी होती है। और दूसरी बड़ी बात — Bt कपास अब इस पर पूरी तरह असरदार नहीं रही, क्योंकि गुलाबी सुंडी ने Bt प्रोटीन के विरुद्ध प्रतिरोध (resistance) विकसित कर लिया है। इस लेख में हम इसकी पक्की पहचान, फेरोमोन ट्रैप से निगरानी, सही दवा और डोज़, तथा वे कदम जो असल में इसे रोकते हैं — आसान हिंदी में समझाएंगे।


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गुलाबी सुंडी क्या है?

गुलाबी सुंडी (Pectinophora gossypiella) एक छोटे पतंगे की इल्ली है जो सिर्फ कपास और उसके नज़दीकी पौधों पर पलती है। यही इसकी कमज़ोरी भी है और ताक़त भी — कमज़ोरी इसलिए कि कपास खेत से हटा दें तो इसका भोजन खत्म; और ताक़त इसलिए कि यह कपास के बीज के अंदर महीनों तक सुप्त (diapause) पड़ी रह सकती है और अगले सीज़न में फिर जाग जाती है।

पूरी उम्र की इल्ली लगभग 11–13 मि.मी. लंबी होती है और उस पर गुलाबी रंग की पट्टियाँ साफ दिखती हैं — इसी से इसका नाम पड़ा। छोटी अवस्था में यह सफेद-सी होती है, इसलिए शुरुआत में इसे पहचानना मुश्किल होता है।

⚠️
Bt कपास लगाने के बाद भी यह क्यों लगती है? Bt कपास शुरुआत में गुलाबी सुंडी को रोकती थी, लेकिन लगातार एक ही तकनीक के इस्तेमाल से कीट ने Bt प्रोटीन (Cry1Ac तथा बाद में Cry2Ab) के विरुद्ध प्रतिरोध विकसित कर लिया — भारत में इसकी पहली रिपोर्ट गुजरात से आई थी। इसलिए आज "Bt लगा दी है, अब कुछ नहीं होगा" सोचना सबसे बड़ी भूल है।

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पहचान — खेत में क्या देखें

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घर पर जाँच का 2 मिनट का तरीका: खेत के अलग-अलग हिस्सों से 20 टिंडे तोड़ें और उन्हें बीच से चीरकर देखें। अगर 20 में 2 टिंडों में भी इल्ली या जुड़े हुए बीज मिलें (यानी 10%), तो तुरंत कार्रवाई का समय आ गया है।

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जीवन चक्र और डायपॉज़ — यह हर साल क्यों लौट आती है

गर्म मौसम में गुलाबी सुंडी का पूरा चक्र 25–35 दिन में पूरा हो जाता है, यानी एक कपास सीज़न में इसकी 4–6 पीढ़ियाँ तक बन सकती हैं। हर पीढ़ी के साथ संख्या और नुकसान दोनों बढ़ते जाते हैं।

अवस्थाकितने दिनकहाँ मिलेगीक्या करें
अंडा3–5 दिनकली, टिंडे के डंठल और पत्ती के नीचेट्राइकोग्रामा कार्ड छोड़ें
छोटी इल्ली3–5 दिनकली/टिंडे में घुसने से पहले, बाहरयही दवा का सही समय
बड़ी इल्ली10–14 दिनटिंडे के अंदर, बीज खाती हुईदवा नहीं पहुँचती
प्यूपा6–9 दिनगिरे टिंडों, अवशेष या मिट्टी मेंअवशेष नष्ट करें, गहरी जुताई
सुप्त अवस्था (Diapause)6 महीने+बिनौले (बीज) और अनखिले टिंडों के अंदरबीज और कपास-अवशेष का सही निपटान
⚠️
असली जड़ यहीं है: गुलाबी सुंडी खेत में नहीं, बल्कि बिनौले, अनखिले टिंडों, कपास के डंठलों और जिनिंग मिल के आसपास पड़े कचरे में सुप्त पड़ी सर्दियाँ काटती है। जो किसान अवशेष नष्ट नहीं करता, वह अगले साल के लिए खुद कीट पाल रहा होता है।

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नुकसान — क्यों यह कपास का सबसे महँगा कीट है

भारी प्रकोप की स्थिति में गुलाबी सुंडी उपज में 40% से 60% तक की कमी कर सकती है, और कई मामलों में इससे भी ज़्यादा। लेकिन नुकसान सिर्फ मात्रा का नहीं होता — रेशे की लंबाई, मज़बूती और बिनौले का तेल भी घट जाता है, जिससे मंडी में कपास का ग्रेड गिरता है और भाव कम मिलता है।

पहचान बिंदु✅ स्वस्थ कपास❌ गुलाबी सुंडी ग्रस्त
फूलपूरा खुला, पंखुड़ियाँ फैलीगुलाब जैसा बंद, पंखुड़ियाँ सिली हुई
टिंडा (बाहर से)चिकना, बिना छेदसूई जैसा बारीक छेद, कहीं-कहीं गोंद
टिंडा (अंदर से)साफ, बीज अलग-अलगगुलाबी इल्ली, दो बीज जुड़े हुए
रुईसफेद, लंबा मज़बूत रेशापीली-भूरी, गुठलीदार, कमज़ोर
टिंडे का खुलनापककर पूरा खुलता हैअधपका जल्दी चटकता है
उपज व भावसामान्य, अच्छा ग्रेड40–60% तक कम, ग्रेड और भाव दोनों गिरे

🪤

फेरोमोन ट्रैप और छिड़काव की सीमा (ETL)

गुलाबी सुंडी अंदर छिपकर खाती है, इसलिए "दिख जाए तब छिड़कें" वाला तरीका हमेशा देर कर देता है। इसका सही जवाब है गॉसीप्लूर फेरोमोन ट्रैप — यह मादा की गंध की नक़ल करके नर पतंगों को फँसाता है और आपको पहले ही बता देता है कि कीट आ चुका है।

उद्देश्यकितने ट्रैप / एकड़कब लगाएं
निगरानी (monitoring)2 ट्रैपबुवाई के 40–45 दिन बाद, कली बनते ही
मास ट्रैपिंग (नर पकड़ना)8–10 ट्रैपपहला पतंगा फँसते ही
ल्योर बदलनाहर 21 दिन में

छिड़काव कब करें (ETL):

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मेटिंग डिसरप्शन (PBKnot / गॉसीप्लूर डिस्पेंसर): यह तकनीक खेत में मादा की गंध चारों ओर फैला देती है, जिससे नर पतंगा मादा तक पहुँच ही नहीं पाता और अंडे बनते ही नहीं। रसायन-मुक्त होने के कारण यह अब भारत में तेज़ी से अपनाई जा रही है — इसे पूरे गाँव में एक साथ लगाने पर सबसे अच्छा असर मिलता है।

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रोकथाम — जो असल में काम करती है

गुलाबी सुंडी का प्रबंधन दवा से नहीं, कीट का चक्र तोड़ने से होता है। नीचे दिए कदम लगभग मुफ़्त हैं और किसी भी छिड़काव से ज़्यादा असरदार:


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जैविक और देसी उपाय

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शुरुआती अवस्था (कली बनने से पहले) में जैविक उपाय ही अपनाएँ। जल्दी तेज़ रसायन डालने से मित्र-कीट मर जाते हैं और सफेद मक्खी तथा माहू का प्रकोप उल्टा बढ़ जाता है।

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रासायनिक नियंत्रण — दवा और सही मात्रा

ETL पार होने के बाद ही रसायन का प्रयोग करें, और दवा को कली, फूल तथा टिंडों पर लक्षित करें — सिर्फ पत्तियों पर नहीं। मात्रा प्रति लीटर पानी के हिसाब से दी गई है:

दवा (तकनीकी नाम)मात्रा / लीटर पानीकब उपयुक्त
क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC0.3 मि.ली.शुरुआती प्रकोप, लंबा असर
इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG0.4 ग्रामछोटी इल्लियाँ, कली अवस्था
प्रोफेनोफॉस 50% EC2 मि.ली.मध्यम–तेज़ प्रकोप
क्विनालफॉस 25% EC2 मि.ली.मध्यम प्रकोप
थायोडिकार्ब 75% WP2 ग्रामटिंडा अवस्था
स्पिनोसैड 45% SC0.33 मि.ली. (1 मि.ली./3 लीटर)मित्र-कीट पर कम असर
फ्लूबेंडियामाइड 20% WG0.25 ग्रामतेज़ प्रकोप, टिंडा अवस्था
⚠️
सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड (साइपरमेथ्रिन, फेनवैलरेट आदि) शुरुआत में न डालें। ये मित्र-कीटों को मारकर सफेद मक्खी और माहू का प्रकोप उल्टा बढ़ा देते हैं, और गुलाबी सुंडी में प्रतिरोध भी तेज़ी से बनाते हैं। इन्हें केवल फसल के अंतिम चरण में, और वह भी ज़रूरत पड़ने पर ही उपयोग करें। हर दवा CIB&RC पंजीकृत हो, लेबल पर "कपास / गुलाबी सुंडी" लिखा हो, और पक्का बिल लें। अंतिम सलाह के लिए अपने ज़िले के KVK या कृषि विभाग से पुष्टि करें।

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ये 6 गलतियाँ भारी पड़ती हैं


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बुवाई से कटाई तक — महीनेवार क्या करें

समय / अवस्थाज़रूरी काम
बुवाई से पहले (अप्रैल–मई)पिछली फसल के डंठल-अवशेष नष्ट, गहरी जुताई, प्रमाणित बीज + रिफ्यूजिया की व्यवस्था
बुवाई (मई–जून)समय पर और गाँव में एक साथ बुवाई; मेढ़ पर non-Bt रिफ्यूजिया कतारें
40–45 दिन (कली बनना)2 फेरोमोन ट्रैप/एकड़ लगाएं; ट्राइकोग्रामा कार्ड शुरू करें
60–90 दिन (फूल–टिंडा)हफ्ते में रोज़ेट फूल गिनें; पहला पतंगा फँसते ही मास ट्रैपिंग 8–10 ट्रैप; नीम स्प्रे
90–120 दिन (टिंडा भरना)20 टिंडे तोड़कर जाँच; ETL पार होने पर ही रसायन, दवा बदल-बदलकर
चुनाई (अक्टूबर–दिसंबर)गिरे टिंडे व अनखिले टिंडे इकट्ठा कर नष्ट करें
दिसंबर के बादफसल समाप्त करें — खेत खाली करें, डंठल नष्ट करें, गहरी जुताई

निष्कर्ष

गुलाबी सुंडी को सिर्फ दवा से नहीं हराया जा सकता — इसे हराने का तरीका है इसका चक्र तोड़ना। तीन बातें याद रखें: फेरोमोन ट्रैप से जल्दी पता लगाएं, रोज़ेट फूल और गिरे टिंडे तुरंत नष्ट करें, और सबसे ज़रूरी — दिसंबर के बाद फसल न खींचें और डंठल-अवशेष पूरी तरह नष्ट करें

यह कीट पूरे गाँव का साझा दुश्मन है — अकेले लड़ने से नहीं, मिलकर लड़ने से हारता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1कपास में गुलाबी सुंडी की पहचान कैसे करें?
सबसे पक्की पहचान है गुलाब जैसा बंद फूल (rosette flower) — इल्ली पंखुड़ियों को रेशम के धागे से सिल देती है, जिससे फूल खिल नहीं पाता। दूसरी पहचान: टिंडा तोड़ने पर अंदर 11–13 मि.मी. की गुलाबी इल्ली और आपस में जुड़े दो बीज मिलते हैं। टिंडे पर सूई जैसा बारीक छेद भी दिखता है।
2Bt कपास लगाने के बाद भी गुलाबी सुंडी क्यों लगती है?
क्योंकि गुलाबी सुंडी ने Bt प्रोटीन (पहले Cry1Ac, फिर Cry2Ab) के विरुद्ध प्रतिरोध विकसित कर लिया है — भारत में इसकी शुरुआती रिपोर्ट गुजरात से आई थी। लगातार एक ही तकनीक का प्रयोग और रिफ्यूजिया (non-Bt कतारें) न लगाना इसकी मुख्य वजहें हैं। इसलिए Bt कपास में भी निगरानी और प्रबंधन ज़रूरी है।
3गुलाबी सुंडी के लिए फेरोमोन ट्रैप कितने और कब लगाएं?
निगरानी के लिए 2 ट्रैप प्रति एकड़ बुवाई के 40–45 दिन बाद (कली बनते ही) लगाएं। पहला पतंगा फँसते ही मास ट्रैपिंग के लिए इन्हें 8–10 ट्रैप प्रति एकड़ तक बढ़ा दें। ट्रैप का ल्योर हर 21 दिन में बदलना ज़रूरी है, वरना ट्रैप काम करना बंद कर देता है।
4छिड़काव कब शुरू करें?
जब इनमें से कोई एक स्थिति बने — लगातार 3 रातों तक 8 या अधिक नर पतंगे प्रति ट्रैप फँसें, खेत में 10% रोज़ेट फूल दिखें, या तोड़े गए 20 टिंडों में 2 या अधिक ग्रस्त मिलें। इससे पहले नीम, ट्राइकोग्रामा और रोज़ेट फूल तोड़ना ही काफी है।
5गुलाबी सुंडी की सबसे असरदार दवा कौन सी है?
शुरुआती अवस्था में क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC (0.3 मि.ली./लीटर) या इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (0.4 ग्राम/लीटर); मध्यम–तेज़ प्रकोप में प्रोफेनोफॉस 50% EC या क्विनालफॉस 25% EC (2 मि.ली./लीटर) और थायोडिकार्ब 75% WP (2 ग्राम/लीटर)। हर छिड़काव में दवा बदलें और लेबल पर कपास/गुलाबी सुंडी लिखा हो, यह ज़रूर देखें।
6क्या साइपरमेथ्रिन जैसी दवाएँ शुरुआत में डाल सकते हैं?
नहीं। सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड (साइपरमेथ्रिन, फेनवैलरेट आदि) मित्र-कीटों को मार देते हैं, जिससे सफेद मक्खी और माहू का प्रकोप उल्टा बढ़ जाता है और गुलाबी सुंडी में प्रतिरोध भी तेज़ी से बनता है। इन्हें केवल फसल के अंतिम चरण में और ज़रूरत पड़ने पर ही उपयोग करें।
7गुलाबी सुंडी हर साल वापस कैसे आ जाती है?
यह बिनौले (बीज), अनखिले कड़े टिंडों, कपास के डंठलों और जिनिंग मिल के आसपास पड़े कचरे में सुप्त अवस्था (diapause) में 6 महीने से ज़्यादा ज़िंदा रह सकती है। इसीलिए कटाई के बाद अवशेष नष्ट करना और गहरी जुताई करना अगली फसल का असली बीमा है।
8फसल कब तक खेत में रखनी चाहिए?
कपास को दिसंबर के बाद खेत में न रखें। हर अतिरिक्त चुनाई कीट को एक और पीढ़ी बनाने और अगले सीज़न तक टिके रहने का मौका देती है। समय पर फसल समाप्त करना, डंठल नष्ट करना और गहरी जुताई करना — यही तीन कदम गुलाबी सुंडी के प्रबंधन का सबसे सस्ता और सबसे असरदार हिस्सा हैं।
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