📞 कृषिमित्र हेल्पलाइन: +91 9870951001
🥜 फसल मार्गदर्शिका ☀️ खरीफ सीजन 📍 राजस्थान

राजस्थान में मूंगफली की खेती — सम्पूर्ण गाइड Complete Groundnut Farming Guide for Rajasthan Farmers — Seed to Market

राजस्थान में मूंगफली (Groundnut) खरीफ की सबसे लाभदायक तिलहनी फसल है। बलुई-दोमट मिट्टी, कम पानी और अच्छी धूप — राजस्थान की जलवायु मूंगफली के लिए एकदम सही है। सही किस्म, जिप्सम का उपयोग और टिक्का रोग नियंत्रण से एक एकड़ में ₹35,000+ मुनाफा संभव है।

✍️ KrashiMitra.in ⏱️ 8 मिनट पढ़ें 📅 2025–26
विज्ञापन · Advertisement
🌡️
25°–35°C
उपयुक्त तापमान
📅
जून अंत–जुलाई
बुवाई का समय
🌱
40–50 किग्रा/एकड़
बीज (गिरी) की मात्रा
🥜
12–18 क्विं./एकड़
औसत उपज (फली)
💧
3–5 बार
सिंचाई (वर्षा पर निर्भर)
110–130 दिन
फसल अवधि
📖

परिचय — राजस्थान में मूंगफली क्यों सबसे अच्छी?

राजस्थान भारत का चौथा सबसे बड़ा मूंगफली उत्पादक राज्य है। जोधपुर, बाड़मेर, जालोर, नागौर, पाली, बीकानेर और चूरू जिलों में यह फसल बड़े पैमाने पर होती है। रेतीली-दोमट मिट्टी, लंबी धूप और शुष्क वातावरण — ये सब मूंगफली के लिए आदर्श हैं।

मूंगफली एक दलहनी-तिलहनी फसल है जो मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती है। एक एकड़ में लगभग ₹25–₹35 किग्रा जैविक नाइट्रोजन मिट्टी में जोड़ती है — यानी अगली फसल के लिए मिट्टी खुद-ब-खुद तैयार हो जाती है।

🏜️
कम पानी में उपज
मूंगफली को 500–700 मिमी वर्षा पर्याप्त है। राजस्थान के अधिकांश जिलों में यह वर्षा मानसून में हो जाती है — सिंचाई की जरूरत कम।
🌱
मिट्टी सुधारक
जड़ों में Rhizobium bacteria नाइट्रोजन स्थिर करते हैं — अगली फसल गेहूँ/ज्वार के लिए मिट्टी तैयार। रासायनिक खाद पर निर्भरता कम।
💰
MSP + बाजार माँग
₹7,014/क्विंटल MSP (2025-26) और खुले बाजार में ₹6,500–₹8,000 तक। तेल मिलों और निर्यातकों की स्थिर माँग — भाव कभी बहुत नहीं गिरते।
🛢️
तेल और खल
मूंगफली में 48–50% तेल। तेल निकालने के बाद खल ₹1,800–₹2,200/क्विंटल बिकती है — यह भी अच्छी कमाई का स्रोत।
💰
मूंगफली का सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) — खरीफ 2025-26
₹7,014 / क्विंटल (गिरी सहित)
खुला बाजार: ₹6,500–₹8,000 | राजकोट (गुजरात) भाव: राजस्थान किसानों का प्रमुख संदर्भ
⚠️ MSP पर बिक्री के लिए NAFED / राज्य खरीद केंद्र पर पंजीकरण जरूरी। किस्से भाव पर बेचें — Rajkot NCDEX भाव देखें।

🌿

राजस्थान के लिए उपयुक्त मूंगफली की किस्में

राजस्थान में मुख्यतः गुच्छेदार (Bunch Type) और फैलने वाली (Spreading Type) दोनों किस्में उगाई जाती हैं। शुष्क क्षेत्रों के लिए Bunch Type बेहतर है।

किस्म प्रकार अवधि (दिन) उपज (क्विं./एकड़) तेल (%) विशेषता
GG-20 (गुजरात) Bunch 110–115 14–18 50% राजस्थान में सर्वाधिक लोकप्रिय, सूखा सहनशील
TG-37A Bunch 105–110 12–16 49% टिक्का रोग प्रतिरोधी, शुष्क क्षेत्रों के लिए
ICGV-86325 Bunch 108–112 14–17 50% ICRISAT विकसित, सूखे में भी उपज
HNG-10 Bunch 115–120 15–18 51% HAU विकसित, बड़े दाने, अच्छा बाजार भाव
SB-XI Spreading 120–130 12–16 48% पानी अधिक मिले तो उपयुक्त, दाना बड़ा
CASANOVA (M-13) Bunch 100–105 10–14 47% अगेती किस्म — अगस्त में बुवाई के लिए
* राजस्थान कृषि विभाग और CAZRI (जोधपुर) से अनुशंसित किस्म की जानकारी लें।
💡
राजस्थान के लिए सर्वोत्तम: GG-20 और TG-37A — जोधपुर, बाड़मेर, जालोर और नागौर में सर्वाधिक उपज और तेल प्रतिशत देती हैं। दोनों सूखा-सहनशील हैं और कम पानी में भी अच्छी उपज देती हैं।

🚜

मिट्टी तैयारी, बुवाई और बीज उपचार

1
सही मिट्टी — बलुई-दोमट सर्वोत्तम
मूंगफली को अच्छी जल-निकासी वाली बलुई-दोमट (Sandy Loam) मिट्टी पसंद है। pH 6.0–7.0 आदर्श। भारी या चिकनी मिट्टी में फलियाँ ठीक से नहीं बनतीं। खेत समतल और भुरभुरा हो।
2
खेत की तैयारी
मानसून से पहले एक गहरी जुताई (20–25 सेमी) करें। 2–3 हल्की जुताइयाँ करके मिट्टी भुरभुरी बनाएं। 8–10 टन गोबर की खाद + 2 टन जिप्सम आखिरी जुताई में मिलाएं — जिप्सम राजस्थान में अनिवार्य है।
3
बुवाई का सही समय
जून 20 से जुलाई 10 — पहली अच्छी बारिश के बाद। बहुत पहले बोने पर अंकुरण खराब और बहुत देर से बोने पर फसल अवधि घट जाती है। मिट्टी में नमी हो तभी बोएं।
4
बीज उपचार — तीन चरणों में
Step 1: Carbendazim 2 ग्राम/किग्रा — फफूंद से बचाव
Step 2: Thiram 3 ग्राम/किग्रा — बीज सड़न से बचाव
Step 3: Rhizobium Culture 200 ग्राम/10 किग्रा बीज — जड़ में नाइट्रोजन बैक्टीरिया के लिए अनिवार्य
5
बुवाई विधि और दूरी
Bunch किस्म: कतार से कतार 30 सेमी, पौधे से पौधे 10–15 सेमी। बीज 5–6 सेमी गहरा बोएं। 40–50 किग्रा गिरी (छिलका उतरे बीज) प्रति एकड़ पर्याप्त है।
🪨
जिप्सम — राजस्थान में क्यों जरूरी? मूंगफली की फलियाँ जमीन में बनती हैं — इस प्रक्रिया में कैल्शियम (Ca) की जरूरत होती है। राजस्थान की मिट्टी में अक्सर Ca की कमी होती है। 2 टन जिप्सम (CaSO₄) प्रति एकड़ — फूल आने के बाद मिट्टी पर छिड़काव करें। इससे फलियाँ भरी और दाना भारी होता है।

🧪

खाद और पोषण प्रबंधन

मूंगफली दलहनी फसल है — Rhizobium की मदद से खुद नाइट्रोजन बनाती है। इसलिए नाइट्रोजन (N) की मात्रा कम रखी जाती है। फास्फोरस, पोटाश, जिप्सम और सल्फर — ये मुख्य पोषक हैं।

पोषक तत्व मात्रा (किग्रा/एकड़) स्रोत कब डालें
नाइट्रोजन (N) 10–12 किग्रा (केवल Starter) यूरिया 22 किग्रा या DAP के साथ बुवाई के समय — बाद में न डालें
फास्फोरस (P) 20–25 किग्रा SSP (125 किग्रा) — सल्फर भी मिलता है बुवाई के समय पूरी मात्रा
पोटाश (K) 15–20 किग्रा MOP (25–33 किग्रा) बुवाई के समय पूरी मात्रा
जिप्सम (Ca+S) 100–200 किग्रा जिप्सम पाउडर फूल आने पर (35–40 दिन) — मिट्टी पर छिड़कें
सल्फर (S) 10–15 किग्रा SSP या Bentonite Sulphur बुवाई के समय — तेल प्रतिशत बढ़ाता है
बोरॉन (B) 1–1.5 किग्रा Borax फूल आने पर छिड़काव — फलियाँ पूरी भरती हैं
* मूंगफली में DAP की जगह SSP बेहतर है — सल्फर मिलता है और सस्ता भी है।
💡
Rhizobium Culture अनिवार्य: बीज उपचार में Rhizobium Culture (ICAR/KVK से उपलब्ध) जरूर लगाएं। इससे जड़ में नाइट्रोजन-फिक्सिंग बैक्टीरिया बनते हैं। यूरिया की जरूरत आधी हो जाती है और उपज 10–15% बढ़ती है।

विज्ञापन · Advertisement

💧

सिंचाई — कम पानी, ज्यादा सावधानी

राजस्थान में मूंगफली मुख्यतः वर्षा आधारित (Rainfed) खेती है। जहाँ सिंचाई सुविधा है वहाँ 3–5 हल्की सिंचाई देने से उपज 30–40% बढ़ती है।

सिंचाई अवस्था महत्व
पहली बुवाई के 30–35 दिन बाद (फूल आना शुरू) फूल बनने और परागण के लिए नमी जरूरी
दूसरी ⭐ 50–55 दिन (Pegging — फली जमीन में जाना) सबसे महत्वपूर्ण — पानी की कमी से फलियाँ खाली रहती हैं
तीसरी 70–75 दिन (Podding) फलियों में दाना भरने के लिए
चौथी–पाँचवीं 90–110 दिन (Maturation) दाने का भार और तेल प्रतिशत बढ़ता है
* खुदाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद करें — मिट्टी सूखने पर खुदाई आसान होती है।
🚨
जल-भराव से बचाएं: मूंगफली जल-भराव बिल्कुल सहन नहीं करती। अत्यधिक बारिश में खेत से पानी निकालने का जुगाड़ पहले से रखें। 48 घंटे से अधिक पानी भरा रहने पर फलियाँ सड़ जाती हैं।

🔍

रोग और कीट नियंत्रण

मूंगफली टिक्का रोग
टिक्का रोग (Early Leaf Spot) — पत्तियों पर गोल काले-भूरे धब्बे — राजस्थान में मूंगफली का सबसे आम रोग
🍂
टिक्का रोग (Tikka / Leaf Spot)
पत्तियों पर गोल काले-भूरे धब्बेMancozeb 2.5 ग्राम/लीटर का छिड़काव 35 और 50 दिन पर करें। नमी में तेजी से फैलता है।
🌿
रोजेट रोग (Rosette)
माहू (Aphid) फैलाता है — पत्तियाँ सिकुड़ जाती हैं। Imidacloprid 0.5 मिली/लीटर छिड़काव से माहू नियंत्रण करें।
🐛
सफेद ग्रब (White Grub)
मिट्टी में फलियाँ खाता है। जुताई में नीम की खली 100 किग्रा/एकड़ मिलाएं। Chlorpyrifos granules का उपयोग करें।
🍄
तना सड़न (Stem Rot)
तने के नीचे सफेद फफूंद — पौधा सूख जाता है। Carbendazim 1 ग्राम/लीटर जड़ के पास छिड़काव। जल-निकासी सुधारें।
🦟
थ्रिप्स (Thrips)
पत्तियों का रस चूसते हैं — पत्तियाँ मुड़ जाती हैं। Spinosad 0.3 मिली/लीटर या Dimethoate 1.5 मिली/लीटर का छिड़काव।
🪱
Aflatoxin (भंडारण)
नम फलियों पर Aspergillus फफूंद — जहरीला Aflatoxin। 12% से कम नमी पर ही भंडारित करें। अफ्लाटॉक्सिन से बाजार में दाम गिरते हैं।
⚠️
टिक्का रोग का राजस्थान टिप: पहला छिड़काव 30–35 दिन पर अनिवार्य — लक्षण दिखें या न दिखें। मानसून की उमस में यह रोग बहुत तेजी से फैलता है। देर होने पर पत्तियाँ झड़ जाती हैं और उपज 30–40% घट सकती है।

क्या करें — क्या न करें

✅ यह जरूर करें
  • Rhizobium Culture से बीज उपचार करें
  • जिप्सम फूल आने पर जरूर डालें
  • SSP का उपयोग करें — सल्फर भी मिलेगा
  • टिक्का रोग के लिए 35 दिन पर छिड़काव
  • Pegging (50–55 दिन) पर सिंचाई अनिवार्य
  • खुदाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद करें
  • 12% से कम नमी पर भंडारित करें
❌ यह गलती न करें
  • अधिक नाइट्रोजन न डालें — पत्तियाँ बढ़ेंगी, फलियाँ नहीं
  • जल-भराव न होने दें
  • बुवाई के बाद Rhizobium Culture न छोड़ें
  • कच्ची (नम) मूंगफली भंडारित न करें
  • टिक्का रोग के लक्षण दिखने का इंतजार न करें
  • भारी मिट्टी में बुवाई न करें
  • जिप्सम को भूलें नहीं — फलियाँ खाली रहेंगी

विज्ञापन · Advertisement

🥜

खुदाई, सुखाई और लागत-आय

मूंगफली की खुदाई सही समय पर करना बेहद जरूरी है — कच्ची खुदाई से उपज कम और नमी अधिक होती है, पकी खुदाई पर फलियाँ जमीन में रह जाती हैं।

  • खुदाई का सही समय: जब 80–85% फलियाँ पकी हो जाएं — फली के अंदर की परत पर काली धारियाँ बनें और दाना भरा-भरा हो।
  • खुदाई से पहले: हल या ट्रैक्टर से मिट्टी ढीली करें — हाथ से जड़ समेत खींचें।
  • सुखाना: 3–5 दिन धूप में उल्टा रखकर सुखाएं। फलियों में नमी 12% से कम हो।
  • Aflatoxin से बचाव: बारिश में भींगी मूंगफली तुरंत बेचें — भंडारित न करें।

💰 लागत और आय — प्रति एकड़

मदअनुमानित खर्च (₹)
बीज (गिरी — 40–50 किग्रा)₹4,000–₹5,500
खाद (SSP + यूरिया + MOP + जिप्सम)₹4,000–₹5,000
जुताई + बुवाई₹3,000–₹4,000
सिंचाई (3–4 बार)₹2,000–₹3,000
कीटनाशक + फफूंदनाशी₹2,000–₹2,500
खुदाई + सुखाई + मजदूरी₹4,000–₹5,500
कुल लागत₹19,000–₹25,500
आय (15 क्विं. × ₹7,000)₹1,05,000
शुद्ध मुनाफा₹79,500–₹86,000
* खल से ₹5,000–₹8,000 अतिरिक्त आय। भाव ₹6,500 (न्यूनतम MSP) से ₹8,000 (बाजार) के बीच।

📋

निष्कर्ष

मूंगफली राजस्थान के किसानों के लिए कम पानी, मिट्टी सुधार और उच्च मुनाफे का अद्भुत संयोजन है। Rhizobium Culture से बीज उपचार, जिप्सम का समय पर उपयोग और टिक्का रोग की रोकथाम — ये तीन आदतें आपकी मूंगफली की उपज और गुणवत्ता दोनों बढ़ाएंगी।

राजस्थान की धरती, मूंगफली की ताकत — सही खेती से सोना उगाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1राजस्थान में मूंगफली बोने का सही समय कौन सा है?
राजस्थान में मूंगफली की बुवाई जून 20 से जुलाई 10 तक — पहली अच्छी बारिश के बाद। मिट्टी में नमी हो तभी बोएं। बहुत जल्दी बोने पर अंकुरण खराब होता है।
2मूंगफली में जिप्सम क्यों जरूरी है?
मूंगफली की फलियाँ जमीन में बनती हैं और उन्हें कैल्शियम (Ca) की जरूरत होती है। जिप्सम (CaSO₄) इसका सबसे अच्छा स्रोत है। 100–200 किग्रा जिप्सम फूल आने पर (35–40 दिन) मिट्टी पर छिड़कें — फलियाँ भरी और दाना भारी होगा।
3मूंगफली का MSP 2025-26 में क्या है?
खरीफ 2025-26 में मूंगफली का MSP ₹7,014 प्रति क्विंटल (गिरी सहित) है। खुले बाजार में ₹6,500–₹8,000 तक मिल सकता है।
4टिक्का रोग (Tikka Disease) का उपाय क्या है?
पहला छिड़काव 30–35 दिन पर और दूसरा 15 दिन बाद — चाहे लक्षण हों या न हों। Mancozeb 2.5 ग्राम/लीटर या Chlorothalonil 2 ग्राम/लीटर का छिड़काव करें।
5Rhizobium Culture क्या है और कहाँ मिलेगा?
Rhizobium एक बैक्टीरिया है जो मूंगफली की जड़ों में नाइट्रोजन स्थिर करता है। नजदीकी KVK, कृषि विभाग कार्यालय या ICAR केंद्र से मिलता है — ₹50–₹100 में। इससे यूरिया की जरूरत आधी हो जाती है।
6मूंगफली की खुदाई कब करें?
जब 80–85% फलियाँ पक जाएं — फली के अंदर काली धारियाँ बनें और दाना भरा-भरा हो। खुदाई से पहले 15 दिन सिंचाई बंद करें। बहुत जल्दी खुदाई से उपज कम और नमी अधिक होती है।
7मूंगफली को Aflatoxin से कैसे बचाएं?
फलियों में नमी 12% से कम होने पर ही भंडारित करें। बारिश में भींगी मूंगफली तुरंत बेचें। साफ, सूखे बोरों में रखें और ऊँचे स्थान पर संग्रहित करें।
8GG-20 और TG-37A में कौन सी किस्म बेहतर है?
GG-20 — अधिक उपज (14–18 क्विं./एकड़), 50% तेल, राजस्थान में सबसे लोकप्रिय। TG-37A — टिक्का रोग प्रतिरोधी, शुष्क क्षेत्रों के लिए, कम बारिश में भी अच्छी उपज। बहुत कम पानी हो तो TG-37A बेहतर।
🥜

KrashiMitra.in — मूंगफली की हर समस्या का हल

टिक्का रोग उपाय, जिप्सम सलाह, मंडी भाव, मौसम — हिंदी में, मुफ्त, 24×7

AI कृषि सहायक से बात करें →
📰 संबंधित लेख सभी लेख देखें →
AI सहायक AI सहायक