कृषिमित्र ईमेल: [email protected]
📍 डिंडोरी–मंडला, MP 🗓️ बुवाई जून–जुलाई ☠️ भीगा दाना ज़हरीला

कोदो-कुटकी की खेती Kodo & Kutki Millet Cultivation

पथरीली ढलान की वह फसल जो सालों रखी जा सकती है — और वह एक ख़तरा जो कटाई के समय की बारिश साथ लाती है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 10 मिनट पढ़ें 📅 सितंबर 2026

जहाँ धान नहीं उगता, वहाँ की फसल

🌱
8–10 किलो
बीज प्रति हेक्टेयर
🌾
15–18 क्विं.
उपज प्रति हेक्टेयर
💰
₹1,000
बोनस प्रति क्विंटल
📖

भूमिका

डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर और शहडोल की पथरीली, ढलान वाली ज़मीन पर पीढ़ियों से दो फसलें उगती आई हैं — कोदो और कुटकी। ये वहाँ उगती हैं जहाँ धान नहीं उगता, बहुत कम पानी में तैयार हो जाती हैं, और इनका दाना सालों तक बिना घुन के रखा जा सकता है।

पर इस फसल के साथ दो बातें ऐसी हैं जो हर किसान को पता होनी चाहिए। पहली — मध्य प्रदेश सरकार अब इन्हें समर्थन मूल्य पर खरीदती है और ऊपर से प्रति क्विंटल बोनस देती है, पर वह पैसा सिर्फ़ उन्हें मिलता है जिन्होंने समय पर पंजीयन कराया। दूसरी, और ज़्यादा ज़रूरी — कटाई के समय बारिश में भीगा कोदो ज़हरीला हो सकता है। यह कोई गाँव की सुनी-सुनाई बात नहीं, वैज्ञानिक रूप से दर्ज तथ्य है। यह लेख दोनों बातें, और बीच की पूरी खेती समझाता है।


विज्ञापन
⚖️

कोदो-कुटकी किस खेत की फसल है

इन्हें धान या गेहूं से उपज में मत तौलिए। इनकी जगह वह खेत है जहाँ बाक़ी कुछ टिकता ही नहीं — पतली मिट्टी, ढलान, पत्थर, और अनिश्चित बारिश।

बातधानकोदो / कुटकी
पानी की ज़रूरतबहुत ज़्यादाबहुत कम — बारानी में भी
मिट्टीअच्छी, समतलपथरीली, ढलान वाली, पतली भी चलेगी
खाद का खर्चऊँचाबहुत कम
भंडारणघुन जल्दी लगता हैकई साल तक रखा जा सकता है, कीट नहीं लगता
उपजज़्यादा15–18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक
पशु चारापुआल30–40 क्विंटल भूसा प्रति हेक्टेयर
बड़ा जोखिमपानी का टूटनाकटाई के समय की बारिश
💡
कोदो की सबसे बड़ी और सबसे कम पहचानी गई ख़ूबी भंडारण है। दाने में कीट नहीं लगता, इसलिए इसे सालों रखा जा सकता है — यानी यह अकेली ऐसी फसल है जिसे आप भाव देखकर, अपनी मर्ज़ी के दिन बेच सकते हैं। मजबूरी में औने-पौने बेचने वाली फसल यह नहीं है।

🌱

बुवाई — समय, बीज दर और दूरी

बुवाई मानसून की शुरुआत से जुलाई के आख़िरी हफ़्ते तक की जाती है। बहुत देर से बोई फसल का पकाव सितंबर की बारिश में फँस जाता है — और आगे बताया गया है कि यह क्यों सिर्फ़ उपज का नहीं, सुरक्षा का सवाल है।

बातसिफारिश
बुवाई का समयमानसून की शुरुआत – जुलाई का आख़िरी हफ़्ता
बीज दर — कतार में8–10 किलो प्रति हेक्टेयर
बीज दर — छिटकवाँलगभग 15 किलो प्रति हेक्टेयर
बीज की गहराई2–3 सेंटीमीटर
पौधों की संख्या — कोदो6–8 लाख प्रति हेक्टेयर
पौधों की संख्या — कुटकी8–9 लाख प्रति हेक्टेयर
खाद — कोदो40 किलो नाइट्रोजन + 20 किलो फॉस्फोरस प्रति हेक्टेयर
खाद — कुटकी20 किलो नाइट्रोजन + 20 किलो फॉस्फोरस प्रति हेक्टेयर
⚠️
ऊपर की मात्राएँ सामान्य सिफारिश हैं। असली मात्रा और इस साल की सिफारिश की गई किस्म अपने कृषि विज्ञान केंद्र या ज़िले के कृषि विभाग से पूछकर तय कीजिए — मिट्टी और इलाक़े के हिसाब से यह बदलती है।

विज्ञापन
☠️

भीगा हुआ कोदो — यह हिस्सा सबसे ज़रूरी है

कोदो के साथ एक सचमुच का ख़तरा जुड़ा है, जिसे गाँवों में "मतौना कोदो" या "मलोना" कहा जाता है। जब कटाई या पकाव के समय बारिश हो जाए और दाना गीला रह जाए, तो उस पर कुछ ख़ास फफूँद पनप जाती हैं — और वे दाने में एक ज़हरीला पदार्थ (साइक्लोपियाज़ोनिक एसिड) बना देती हैं। इसी तरह बाली में दाने की जगह बनने वाली एर्गट की काली सख़्त गाँठें भी ज़हरीली होती हैं।

ऐसा दाना खाने पर आदमी और पशु दोनों में जी मिचलाना, उल्टी, चक्कर, लड़खड़ाहट, बेहोशी जैसे लक्षण आते हैं, और गंभीर मामलों में यह जिगर पर असर करता है। यह अफ़वाह नहीं, दर्ज किया गया तथ्य है।

देखने की बात✅ सुरक्षित दाना❌ ख़तरे वाला दाना
रंगएक-सा भूरा-सलेटीकाला-हरा या धब्बेदार
बाली मेंसिर्फ़ दानेदाने की जगह काली सख़्त गाँठें (एर्गट)
गंधकोई नहींसीलन या फफूँद जैसी
कटाई का मौसमसूखा रहाकटाई-पकाव के समय बारिश हुई
भंडारणपूरी तरह सुखाकर, बंदनमी के साथ बोरे में भरा

🏛️

सरकारी खरीद और बोनस — पंजीयन ही असली काम है

मध्य प्रदेश ने कोदो-कुटकी की सरकारी खरीद शुरू की है, जो रानी दुर्गावती श्री-अन्न प्रोत्साहन योजना के तहत होती है। इसमें दो चीज़ें मिलती हैं।

⚠️
खरीद की दर, बोनस और पंजीयन की तारीख़ें हर साल सरकारी आदेश से तय होती हैं और बदलती रहती हैं। इस साल की सही स्थिति अपने तहसील/उपार्जन केंद्र, कृषि विभाग या ई-उपार्जन पोर्टल से ही पुष्टि कीजिए। KrashiMitra किसी योजना का एजेंट नहीं है और न ही कोई पंजीयन या भुगतान करवाता है — कोई व्यक्ति पंजीयन के नाम पर पैसा माँगे तो वह धोखा है।

🚫

ये गलतियाँ कभी न करें


🗓️

कब क्या करें

समयज़रूरी काम
मई–जूनखेत की तैयारी; बीज और किस्म का इंतज़ाम
मानसून की शुरुआत – जुलाई का आख़िरकतार में बुवाई, 8–10 किलो प्रति हेक्टेयर, 2–3 सेंटीमीटर गहराई
बुवाई के 25–30 दिन बादनिराई — उपज पर सबसे बड़ा असर इसी का है
अगस्तखरपतवार और जल-निकास पर नज़र
सितंबरपकाव; मौसम की चेतावनी देखते रहिए
सितंबर–अक्टूबरसूखे मौसम में कटाई; बारिश की चेतावनी हो तो फसल तुरंत उठाइए
अक्टूबरछँटाई और पूरी सुखाई; उपार्जन के लिए पंजीयन
अक्टूबर के बादबंद-सूखा भंडारण; भाव देखकर बिक्री

निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — कटाई के समय भीगा कोदो ज़हरीला हो सकता है; काले, धब्बेदार और गाँठ वाले दाने छाँटकर अलग कीजिए और शक हो तो न खाइए, न बेचिए। दूसरी — सरकारी खरीद और ₹1,000 प्रति क्विंटल बोनस सिर्फ़ पंजीकृत किसान को मिलता है, इसलिए कटाई के तुरंत बाद पंजीयन की तारीख़ जाँचिए। तीसरी — कतार में बोइए और निराई मत छोड़िए; इस फसल की कम उपज मिट्टी की नहीं, उपेक्षा की देन है।

कोदो अकेली ऐसी फसल है जिसे आप सालों रख सकते हैं — यानी अकेली ऐसी फसल जिसे बेचने का दिन आप चुनते हैं, बाज़ार नहीं।

विज्ञापन

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1कोदो-कुटकी की बुवाई कब और कितने बीज से करें?
बुवाई मानसून की शुरुआत से जुलाई के आख़िरी हफ़्ते तक की जाती है, और बीज दर कतार में बोने पर 8–10 किलो प्रति हेक्टेयर तथा छिटकवाँ विधि में लगभग 15 किलो प्रति हेक्टेयर रहती है। बीज 2–3 सेंटीमीटर से ज़्यादा गहरा मत डालिए, क्योंकि दाना बहुत छोटा है और गहरा गिरने पर ऊपर नहीं आता। कतार में बुवाई करने पर बीज कम लगता है, निराई आसान होती है और उपज बेहतर मिलती है।
2कोदो-कुटकी की उपज प्रति हेक्टेयर कितनी होती है?
सही तरीक़े से खेती करने पर 15 से 18 क्विंटल दाना और 30 से 40 क्विंटल भूसा प्रति हेक्टेयर तक मिल सकता है। भूसा अच्छा पशु चारा है और उसकी अपनी कीमत है, इसलिए उसे हिसाब से बाहर मत रखिए। कम उपज की सबसे बड़ी वजह यह मान लेना है कि यह फसल "अपने आप हो जाती है" — खाद और समय पर निराई मिलने पर अंतर साफ़ दिखता है।
3क्या कोदो खाने से ज़हर हो सकता है?
हाँ, एक ख़ास स्थिति में — जब कटाई या पकाव के समय बारिश हो जाए और दाना गीला रह जाए, तो उस पर पनपने वाली कुछ फफूँद दाने में साइक्लोपियाज़ोनिक एसिड नाम का ज़हरीला पदार्थ बना देती हैं, और बाली में दाने की जगह बनने वाली एर्गट की काली सख़्त गाँठें भी ज़हरीली होती हैं। इससे जी मिचलाना, उल्टी, चक्कर, लड़खड़ाहट और बेहोशी जैसे लक्षण आते हैं। काले, धब्बेदार और गाँठ वाले दाने छाँटकर अलग कीजिए, पूरी तरह सुखाकर ही भंडारण कीजिए, और शक हो तो न खाइए, न पशु को खिलाइए, न बेचिए।
4कोदो-कुटकी की सरकारी खरीद पर कितना बोनस मिलता है?
मध्य प्रदेश में कोदो-कुटकी की खरीद रानी दुर्गावती श्री-अन्न प्रोत्साहन योजना के तहत होती है, जिसमें इन्हें रागी के बराबर भाव पर खरीदने का प्रावधान किया गया और उसके ऊपर ₹1,000 प्रति क्विंटल का बोनस दिया जाता है। यह लाभ सिर्फ़ पंजीकृत किसानों को मिलता है। दर, बोनस और तारीख़ें हर साल सरकारी आदेश से तय होती हैं, इसलिए इस साल की स्थिति अपने उपार्जन केंद्र या कृषि विभाग से पुष्टि कीजिए।
5कोदो-कुटकी बेचने के लिए पंजीयन कब कराना होता है?
पंजीयन की खिड़की हर साल घोषित होती है और पिछले वर्षों में यह अक्टूबर के आख़िर तक रही है — इसलिए कटाई के तुरंत बाद, सितंबर-अक्टूबर में इसकी जाँच कर लेना सबसे ज़रूरी काम है। बिना पंजीयन के सरकारी खरीद नहीं होती और ₹1,000 प्रति क्विंटल का बोनस भी साथ ही चला जाता है। पंजीयन MP की ई-उपार्जन व्यवस्था से होता है और उसके लिए कोई बिचौलिया ज़रूरी नहीं है।
6कोदो-कुटकी में कितनी खाद डालनी चाहिए?
सामान्य सिफारिश है — कोदो के लिए 40 किलो नाइट्रोजन और 20 किलो फॉस्फोरस प्रति हेक्टेयर, तथा कुटकी के लिए 20 किलो नाइट्रोजन और 20 किलो फॉस्फोरस प्रति हेक्टेयर। यह मात्रा धान-गेहूं की तुलना में बहुत कम है, पर इसे बिल्कुल छोड़ देना ही इस फसल की कम उपज की बड़ी वजह है। असली मात्रा मिट्टी जाँच रिपोर्ट और अपने कृषि विज्ञान केंद्र की सिफारिश से तय कीजिए।
7कोदो का भंडारण कितने समय तक किया जा सकता है?
कोदो को कई साल तक रखा जा सकता है, क्योंकि इसके दाने में घुन और कीट नहीं लगते — यह इस फसल की सबसे बड़ी और सबसे कम पहचानी गई ख़ूबी है। इसका सीधा मतलब यह है कि यह अकेली ऐसी फसल है जिसे भाव देखकर, अपनी मर्ज़ी के दिन बेचा जा सकता है। शर्त सिर्फ़ एक है: भंडारण से पहले दाना पूरी तरह सूखा होना चाहिए, वरना नमी में फफूँद पनपती है।
8कोदो-कुटकी की खेती मध्य प्रदेश में कहाँ होती है?
मध्य प्रदेश में यह मुख्य रूप से डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर और शहडोल जैसे ज़िलों की पथरीली, ढलान वाली ज़मीन पर होती है, जहाँ धान या गेहूं टिकते नहीं। यही इस फसल की असली जगह है — बहुत कम पानी, पतली मिट्टी और अनिश्चित बारिश वाले खेत। इसे धान से उपज में तौलना ग़लत तुलना है; इसकी तुलना उस विकल्प से कीजिए जो उस खेत में और क्या उग सकता था।
🌾

KrashiMitra.in — आपका विश्वसनीय कृषि साथी

मंडी भाव, सरकारी योजनाएं, बीज-खाद की जानकारी और फसल रोग उपचार — सब कुछ हिंदी में।

KrashiMitra.in पर जाएं →
📰 संबंधित लेख सभी लेख देखें →

📌 इससे जुड़ी और जानकारी

🤖
AI से रोग पहचान करें
फोटो भेजें — तुरंत इलाज जानें
🛒
दवा ऑनलाइन खरीदें
फफूंदनाशक, कीटनाशक — COD
🌤️
आज का मौसम देखें
छिड़काव के लिए सही समय जानें
AI सहायक AI सहायक