दुनिया की सबसे जिद्दी खरपतवारों में गिनी जाने वाली मोथा घास हर साल गेहूं, धान, गन्ने और सब्जियों की उपज को भारी नुकसान पहुंचाती है। सही पहचान और समय पर नियंत्रण से इसे काबू में किया जा सकता है।
✍️ KrashiMitra.in⏱️ 8 मिनट पढ़ें📅 अपडेट: जुलाई 2026
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मोथा घास (नागरमोथा) — फसल के बीच उगी जिद्दी खरपतवार
📉
30–50%
उपज में नुकसान
☀️
गर्मी का मौसम
सबसे कारगर नियंत्रण समय
🌱
100+ कंद
एक ही पौधे से बनते हैं
📖
भूमिका
उत्तर प्रदेश के लगभग हर खेत में किसानों ने एक ऐसी घास जरूर देखी होगी जो जुताई और निराई के बावजूद बार-बार उग आती है — यही है मोथा घास, जिसे नागरमोथा या नट ग्रास (Nut Grass) भी कहा जाता है।
वैज्ञानिकों द्वारा इसे दुनिया की सबसे जिद्दी खरपतवारों में गिना जाता है, क्योंकि यह जमीन के अंदर बने छोटे-छोटे कंदों (tubers) के जरिए फैलती है और सामान्य निराई-गुड़ाई से भी जड़ से खत्म नहीं होती। इस लेख में हम आपको मोथा घास (Motha Grass / Cyperus rotundus) की पूरी जानकारी देंगे — सरल हिंदी में, जो हर किसान आसानी से समझ सके।
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मोथा घास क्या है?
मोथा घास (Motha Grass) एक बहुवर्षीय (Perennial) सेज़ पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम Cyperus rotundus है। यह साइप्रेसी (Cyperaceae) कुल का सदस्य है और यह सामान्य घास (Grass family) नहीं, बल्कि एक अलग वर्ग का पौधा है।
पौधा 15 से 75 सेंटीमीटर तक ऊँचा हो सकता है। इसका तना सीधा, तिकोना (त्रिकोणीय) और बिना गांठ वाला होता है। जमीन के अंदर धागेनुमा प्रकंदों (rhizomes) से जुड़े काले-भूरे रंग के छोटे, गोल और सुगंधित कंद (tubers) बनते हैं — यही कंद इसके तेजी से फैलने का मुख्य कारण हैं।
मोथा घास की बनावट — तना, पत्तियां और भूमिगत कंद
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पहचान के लक्षण — कैसे पहचानें मोथा घास को?
🍃 पत्तियों पर लक्षण
पत्तियाँ पतली, चमकदार और गहरे हरे रंग की होती हैं।
पत्तियां तने के आधार से तीन कतारों में निकलती हैं।
पत्तियों का मध्य भाग हल्का उभरा हुआ (V-आकार) दिखता है।
🌾 तने और फूल पर लक्षण
तना सीधा, चिकना और तिकोना (त्रिकोणीय) होता है — यह मोथा घास की सबसे बड़ी पहचान है।
तने की चोटी पर हल्के भूरे-बैंगनी रंग के छोटे फूलों के गुच्छे लगते हैं।
पौधा साल भर हरा रह सकता है, पर बारिश में सबसे ज्यादा बढ़ता है।
🌱 जड़ों पर लक्षण
जड़ में काले-भूरे रंग के छोटे, अखरोट जैसे कंद (tubers) पाए जाते हैं।
ये कंद धागे जैसी जड़ों (rhizomes) की एक शृंखला से आपस में जुड़े रहते हैं।
एक भी पौधा उखाड़ने पर अगर कंद जमीन में रह जाए, तो वहीं से नया पौधा उग आता है।
📊
यह इतनी खतरनाक क्यों है?
⚠️
एक बार खेत में जड़ जमा ले, तो मोथा घास साल-दर-साल लौटती रहती है। यह फसल के लिए जरूरी पानी, पोषक तत्व और धूप को खींच लेती है, जिससे फसल की बढ़वार रुक जाती है और उपज में भारी कमी आती है।
पहचान बिंदु
✅ सामान्य खेत
❌ मोथा प्रभावित खेत
फसल की बढ़वार
सामान्य, घनी
रुकी हुई, कमजोर
पानी व पोषक तत्व
पूरी तरह फसल को मिलते हैं
मोथा घास खींच लेती है
निराई-गुड़ाई की लागत
सामान्य
2–3 गुना अधिक
मिट्टी में कंदों की संख्या
नियंत्रण में
हजारों प्रति एकड़
उपज
पूरी, बाजार योग्य
30–50% तक कम
💨
मोथा घास कैसे फैलती है?
भूमिगत कंद: यही सबसे बड़ा कारण है — एक ही पौधे से 100 से अधिक नए कंद बन सकते हैं, जो जमीन में फैलकर अलग-अलग पौधे बनाते हैं।
जुताई के औजार: संक्रमित खेत में इस्तेमाल किए गए हल, कल्टीवेटर बिना साफ किए दूसरे खेत में ले जाने से।
सिंचाई का पानी: संक्रमित खेत से बहकर कंद पड़ोसी खेत में पहुंच जाते हैं।
अधपकी गोबर खाद: ठीक से न सड़ी खाद में मौजूद कंद खेत में मिल जाते हैं।
हवा से बीज: कम मात्रा में, लेकिन बीज भी हवा के जरिए फैलते हैं।
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🌾
किन फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान?
फसल
संभावित उपज हानि
सबसे संवेदनशील अवस्था
धान
40–50%
रोपाई के 30–45 दिन बाद
गन्ना
25–35%
शुरुआती 90 दिन (अंकुरण अवस्था)
मक्का
20–30%
प्रारंभिक बढ़वार
गेहूं
15–25%
कल्ले फूटने की अवस्था
सब्जियां
20–40%
पौध रोपाई के तुरंत बाद
🛡️
रोकथाम के उपाय
गर्मी में गहरी जुताई करें: खेत खाली रखकर 2–3 बार गहरी जुताई करें, ताकि कंद ऊपर आकर तेज धूप में सूखकर नष्ट हो जाएं।
साफ-सुथरा बीज व पौध लगाएं: मोथा-मुक्त खेत से लिए गए बीज और पौध का ही प्रयोग करें।
खेत के औजार साफ रखें: एक खेत से दूसरे खेत में मिट्टी और कंद न ले जाएं।
सिंचाई नालियां साफ रखें: ताकि पानी के साथ कंद बहकर दूसरे खेत में न पहुंचे।
पूरी तरह सड़ी गोबर खाद ही डालें: अधपकी खाद में जीवित कंद हो सकते हैं।
फसल चक्र अपनाएं: धान-गेहूं चक्र के बीच दलहनी या चौड़ी पत्ती वाली फसल लगाएं, जिसमें अलग खरपतवारनाशी असरदार होते हैं।
🚜
यांत्रिक व जैविक नियंत्रण
🌱
जैविक और यांत्रिक तरीके धीमे जरूर हैं, लेकिन टिकाऊ हैं। गर्मी की गहरी जुताई इनमें सबसे असरदार और सबसे सस्ता उपाय मानी जाती है।
बार-बार हाथ से निराई: पौधे में फूल आने से पहले ही उखाड़ दें, ताकि नए कंद न बन पाएं।
गहरी जुताई कर कंद बाहर निकालना: निकले कंदों को इकट्ठा कर खेत से बाहर हटाएं या जलाएं।
मल्चिंग (सोलराइजेशन): काली पॉलीथीन शीट या फसल अवशेष से खेत ढककर धूप की गर्मी से कंदों को नष्ट करें।
घनी छाया देने वाली फसलें: ढैंचा, सनई जैसी तेजी से बढ़ने वाली फसलें मोथा घास की बढ़वार को दबा देती हैं।
🧪
रासायनिक नियंत्रण
दवाई का नाम
फसल
मात्रा
हैलोसल्फ्यूरॉन-मिथाइल 75% WG
गन्ना, मक्का
36 ग्राम/एकड़ (3–4 पत्ती अवस्था में)
2,4-डी सोडियम साल्ट
गेहूं
500 ग्राम/हेक्टेयर (बुवाई के 30–35 दिन बाद)
पैराक्वाट डाइक्लोराइड 24% SL
खाली/परती खेत
340–500 मिली/एकड़ (बुवाई से पहले)
ग्लाइफोसेट 41% SL
गैर-फसली क्षेत्र, मेड़ें
800 मिली–1 लीटर/एकड़
⚠️
किसी भी खरपतवारनाशी का प्रयोग करने से पहले नजदीकी KVK या कृषि विभाग से सलाह जरूर लें। रसायन का चयन हमेशा फसल के अनुसार ही करें — गलत खरपतवारनाशी फसल को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
👨🌾
विशेषज्ञ सलाह
💡
पौधे में फूल आने से पहले ही उखाड़ दें, वरना बीज और कंद और तेजी से फैलेंगे।
गर्मी की गहरी जुताई सबसे सस्ता और सबसे असरदार उपाय है — इसे हर साल जरूर अपनाएं।
हर साल एक ही खरपतवारनाशी न दोहराएं, रसायन बदल-बदल कर प्रयोग करें।
खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ नजदीकी KVK से मिट्टी परीक्षण भी करवाएं।
किसान कॉल सेंटर: +91 9870951001 — निःशुल्क।
✅
निष्कर्ष
मोथा घास भले ही जड़ से खत्म करना कठिन हो, लेकिन सही समय पर गहरी जुताई, साफ-सुथरी खेती के तरीके और जरूरत पड़ने पर उचित खरपतवारनाशी अपनाकर इसे काबू में रखा जा सकता है।
धैर्य और निरंतर प्रयास से ही मोथा घास पर काबू पाया जा सकता है।
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❓
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1मोथा घास किस कुल का पौधा है?
मोथा घास साइप्रेसी (Cyperaceae) कुल का बहुवर्षीय सेज़ पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम Cyperus rotundus है। इसे नागरमोथा और नट ग्रास भी कहा जाता है।
2मोथा घास की पहचान कैसे करें?
तिकोना सीधा तना, पतली चमकदार गहरी हरी पत्तियां और जमीन के अंदर काले-भूरे छोटे सुगंधित कंद — यही मोथा घास की मुख्य पहचान है।
3मोथा घास खेत से जड़ से क्यों नहीं जाती?
जमीन के अंदर बने कंदों की लंबी शृंखला के कारण। एक भी कंद खेत में रह जाए तो उससे नया पौधा उग आता है।
4मोथा घास के लिए कौन सी दवा डालें?
गन्ना और मक्का में हैलोसल्फ्यूरॉन-मिथाइल असरदार है। गेहूं में 2,4-डी और परती खेत में पैराक्वाट/ग्लाइफोसेट का प्रयोग होता है — छिड़काव से पहले विशेषज्ञ सलाह जरूर लें।
5मोथा घास कब सबसे ज्यादा फैलती है?
जून से सितंबर — बारिश और नमी वाले खरीफ सीजन में यह सबसे तेजी से फैलती है।
6क्या साधारण जुताई से मोथा घास खत्म हो जाती है?
नहीं, इससे कंद टूटकर और फैल सकते हैं। गर्मी में गहरी जुताई कर खेत खुला छोड़ने से कंद धूप से सूखकर नष्ट होते हैं।
7किन फसलों को मोथा घास सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है?
धान, गन्ना, मक्का, गेहूं और सब्जियों वाली फसलों में उपज में भारी कमी ला सकती है।
8क्या मोथा घास के कोई फायदे भी हैं?
हाँ, आयुर्वेद में इसके कंद (नागरमोथा) का औषधीय उपयोग होता है, लेकिन खेत की फसल के लिए यह हानिकारक खरपतवार ही मानी जाती है।
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