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🦠 वायरस रोग 🗓️ बरसात के बाद 📍 गाय व भैंस

पशुओं में लंपी स्किन रोग Lumpy Skin Disease (LSD) in Cattle — Symptoms, Prevention & Vaccine

गाय-भैंस के शरीर पर गोल कड़ी गाँठें, तेज़ बुखार और दूध में अचानक गिरावट। लंपी छूने से नहीं, मक्खी-मच्छर से फैलता है — और यही उसकी कमज़ोरी भी है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 अगस्त 2026

गाँठें, बुखार और गिरता दूध — लंपी को समय पर पहचानिए

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गोल गाँठें
मुख्य पहचान
🦟
मक्खी-मच्छर
फैलाव का रास्ता
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1962
पशुधन हेल्पलाइन
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भूमिका

गाय या भैंस के शरीर पर अचानक गोल, कड़ी गाँठें उभर आएँ, तेज़ बुखार हो, आँख-नाक से पानी बहे और दूध एकदम गिर जाए — तो यह लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease — LSD) हो सकता है। किसान इसे "गठान रोग" या "ढेलेदार त्वचा रोग" कहते हैं।

2022 में इस बीमारी ने भारत के कई राज्यों में लाखों पशुओं को चपेट में लिया था। 2023–24 में मामले घटे, लेकिन 2025 के मानसून के बाद कई राज्यों में यह फिर लौटी — और यही इसका पैटर्न है: बरसात और उसके तुरंत बाद, जब मक्खी-मच्छर और चिचड़ी सबसे ज़्यादा होते हैं। इस लेख में पहचान, यह फैलता कैसे है, टीके की मौजूदा स्थिति, घर पर की जाने वाली सही देखभाल और वे गलतियाँ जो पशु की जान ले लेती हैं — सब आसान हिंदी में।

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यह लेख जानकारी के लिए है, पशु चिकित्सक की जगह नहीं। लंपी में इलाज लक्षणों के अनुसार होता है और उसमें दी जाने वाली दवाएँ सिर्फ पंजीकृत पशु चिकित्सक ही तय कर सकते हैं। गाँठें दिखते ही तुरंत नज़दीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें या पशुधन हेल्पलाइन 1962 पर कॉल करें। बिना सलाह अपने आप एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड देना पशु के लिए खतरनाक है।

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लंपी स्किन रोग क्या है?

लंपी स्किन डिजीज एक वायरस जनित रोग है, जो कैप्रीपॉक्स वायरस समूह के लंपी स्किन डिजीज वायरस (LSDV) से होता है। यह मुख्यतः गाय और भैंस को होता है — गाय ज़्यादा संवेदनशील है, भैंस में लक्षण अक्सर हल्के रहते हैं।

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दूध पीना सुरक्षित है या नहीं? लंपी वायरस मनुष्यों को संक्रमित नहीं करता। फिर भी सामान्य नियम यही है कि दूध को अच्छी तरह उबालकर ही इस्तेमाल करें — यह हर स्थिति में सुरक्षित तरीका है। बीमार पशु के दूध के बारे में अंतिम सलाह अपने पशु चिकित्सक से लें, क्योंकि पशु को दी जा रही दवाओं की भी अपनी अवधि होती है।

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पहचान — क्या-क्या दिखता है

पहचान बिंदु✅ स्वस्थ पशु❌ लंपी ग्रस्त पशु
त्वचाचिकनी, चमकदारगोल कड़ी गाँठें, बाद में घाव
तापमानसामान्यतेज़ बुखार
दूधसामान्य मात्राअचानक भारी गिरावट
आँख-नाकसाफलगातार पानी और लार
चालसामान्यटाँगों में सूजन, लंगड़ाहट
भूखपूरीचारा छोड़ देना, सुस्ती

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बचाव — जो आप आज से कर सकते हैं

चूँकि यह रोग काटने वाले कीड़ों से फैलता है, इसलिए बचाव की पूरी रणनीति दो शब्दों में है — कीड़े घटाइए और बीमार पशु अलग कीजिए


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टीका — आज की स्थिति क्या है

2021–22 से भारत में लंपी के खिलाफ बड़े पैमाने पर बकरी माता (गोटपॉक्स) का टीका इस्तेमाल किया गया, क्योंकि वह उपलब्ध था और दोनों वायरस एक ही समूह के हैं। लेकिन खेत-स्तर के अध्ययनों में इसकी प्रभावशीलता कम पाई गई — एक अध्ययन में टीकाकृत और बिना टीके वाले पशुओं में बीमारी की दर लगभग बराबर मिली।

इसीलिए भारत ने अपना खुद का टीका बनाया — लंपी-प्रोवैकइंड (Lumpi-ProVacInd), जिसे ICAR-राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार और भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली ने मिलकर विकसित किया। परीक्षणों में यह सुरक्षित पाया गया और टीकाकरण के लगभग 30 दिन बाद पशुओं में पूरी सुरक्षा दिखी। 2024 में CDSCO ने इसके व्यावसायिक उत्पादन को मंज़ूरी दी

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टीका खुद न लगाएँ। कौन सा टीका, कितनी मात्रा और कब — यह पूरी तरह पशु चिकित्सक और राज्य के पशुपालन विभाग का विषय है, और यह प्रकोप की स्थिति के अनुसार बदलता है। ज़्यादातर राज्यों में सरकारी टीकाकरण अभियान निःशुल्क चलता है — अपने ब्लॉक के पशु चिकित्सालय या हेल्पलाइन 1962 से पूछें कि आपके क्षेत्र में अभियान कब है। बीमार पशु को टीका नहीं लगाया जाता; टीका स्वस्थ पशुओं को बचाने के लिए है।

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बीमार पशु की देखभाल — जो आप कर सकते हैं

वायरस को सीधे मारने वाली कोई दवा नहीं है। इलाज सहायक (supportive) होता है — यानी बुखार, दर्द, घाव और दूसरे जीवाणु संक्रमण को संभालना, ताकि पशु का अपना शरीर वायरस से लड़ सके। दवाएँ पशु चिकित्सक तय करेंगे; आपकी भूमिका देखभाल की है:


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ये गलतियाँ कभी न करें


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कब क्या करें

समय / स्थितिज़रूरी काम
बरसात से पहले (मई–जून)बाड़े की सफाई, जल-निकासी ठीक करें; टीकाकरण अभियान की जानकारी लें
बरसात और उसके बाद (जुलाई–अक्टूबर)सबसे ज़्यादा जोखिम — मच्छर-मक्खी नियंत्रण, चिचड़ी की जाँच, रोज़ पशु का निरीक्षण
पहला लक्षण दिखते हीपशु अलग करें; पशु चिकित्सक/1962 को तुरंत सूचित करें
बीमारी के दौरानमुलायम चारा, साफ पानी, घाव की सफाई, मक्खियों से बचाव
ठीक होने के बादकमजोरी दूर करने के लिए संतुलित आहार; दूध लौटने में हफ्तों लगते हैं
नया पशु खरीदने परकम से कम 2–3 हफ्ते अलग रखें, फिर झुंड में मिलाएँ
पूरे सालबाड़ा सूखा, गोबर रोज़ हटाया हुआ, पानी जमा नहीं

निष्कर्ष

लंपी को हराने का रास्ता दवा की दुकान से नहीं, बाड़े की सफाई और समय पर टीके से होकर जाता है। तीन बातें याद रखिए: गाँठ दिखते ही पशु को अलग करें और पशु चिकित्सक को बुलाएँ, मक्खी-मच्छर-चिचड़ी घटाना ही असली रोकथाम है, और स्वस्थ पशुओं का सरकारी टीकाकरण कभी न छोड़ें

बीमार पशु का इलाज पशु चिकित्सक करेंगे — पर उसे बीमार होने से रोकना आपके हाथ में है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1लंपी स्किन रोग की पहचान कैसे करें?
सबसे पक्की पहचान है — पशु के शरीर पर 2–5 से.मी. की गोल, कड़ी गाँठें (गर्दन, पीठ, थन और टाँगों पर), साथ में तेज़ बुखार, आँख-नाक से पानी और दूध में अचानक भारी गिरावट। कई बार बुखार गाँठों से 1–2 दिन पहले शुरू हो जाता है। लक्षण दिखते ही पशु को अलग करें और पशु चिकित्सक या हेल्पलाइन 1962 से संपर्क करें।
2लंपी रोग कैसे फैलता है?
यह छूने से नहीं, बल्कि काटने वाले कीड़ों — मक्खी, मच्छर और चिचड़ी (टिक) — से फैलता है, इसीलिए बरसात और उसके तुरंत बाद इसका प्रकोप सबसे ज़्यादा होता है। संक्रमित पशु के साथ रखा जाना, साझा चरागाह, पशु मेला और बिना अलग रखे नया पशु झुंड में मिलाना — ये सब फैलाव के मुख्य कारण हैं।
3क्या लंपी रोग इंसानों में फैलता है?
नहीं — लंपी स्किन डिजीज मनुष्यों में नहीं फैलता। यह एक पशु रोग है जो कैप्रीपॉक्स समूह के वायरस से गाय और भैंस को होता है। फिर भी सामान्य सावधानी के तौर पर दूध को अच्छी तरह उबालकर ही इस्तेमाल करें, और बीमार पशु के दूध के बारे में अंतिम सलाह अपने पशु चिकित्सक से लें।
4लंपी का टीका कौन सा लगता है?
भारत में 2021–22 से बड़े पैमाने पर बकरी माता (गोटपॉक्स) का टीका इस्तेमाल हुआ, पर खेत-स्तर के अध्ययनों में उसकी प्रभावशीलता कम पाई गई। इसके बाद ICAR-NRCE हिसार और IVRI बरेली ने स्वदेशी टीका लंपी-प्रोवैकइंड (Lumpi-ProVacInd) विकसित किया, जिसके व्यावसायिक उत्पादन को 2024 में मंज़ूरी मिली। टीका कौन सा और कब लगेगा, यह पशु चिकित्सक और राज्य पशुपालन विभाग तय करते हैं।
5लंपी रोग में पशु को क्या खिलाएँ?
मुलायम हरा चारा, दलिया और भिगोया हुआ दाना दें, क्योंकि मुँह में छाले होने पर पशु सख्त चारा नहीं खा पाता। साफ पानी हमेशा सामने रखें — बुखार में पानी की कमी सबसे बड़ा खतरा है। खनिज मिश्रण और लिवर टॉनिक पशु चिकित्सक की सलाह पर दें। ठीक होने के बाद भी दूध पूरी तरह लौटने में कई हफ्ते लगते हैं।
6लंपी से बचाव के लिए बाड़े में क्या करें?
मक्खी, मच्छर और चिचड़ी घटाना ही असली बचाव है। गोबर रोज़ हटाएँ, फर्श सूखा रखें, नाली और बर्तनों में पानी जमा न होने दें, शाम को नीम की पत्तियों का धुआँ करें और खिड़कियों पर जाली लगाएँ। बीमार पशु को तुरंत अलग बाड़े में रखें, और प्रकोप के समय पशु मेला तथा साझा चरागाह से बचें।
7लंपी में पशु को खुद कौन सी दवा दे सकते हैं?
कोई भी दवा अपने आप नहीं देनी चाहिए। लंपी में वायरस को मारने वाली कोई दवा नहीं होती — इलाज सहायक होता है (बुखार, दर्द, घाव और दूसरे जीवाणु संक्रमण को संभालना), और वह सिर्फ पंजीकृत पशु चिकित्सक तय कर सकते हैं। खुद एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड लगाना, या गाँठों को फोड़ना-दागना, पशु की जान के लिए खतरनाक है।
8नया पशु खरीदने पर कितने दिन अलग रखना चाहिए?
कम से कम 2–3 हफ्ते अलग रखने के बाद ही झुंड में मिलाएँ। प्रकोप के दौरान बिना अलग रखे नया पशु मिलाना संक्रमण का सबसे आम कारण है, क्योंकि पशु बीमारी के शुरुआती दिनों में सामान्य दिख सकता है। इसी अवधि में पशु चिकित्सक से जाँच करवा लें और अपने क्षेत्र के सरकारी टीकाकरण अभियान की जानकारी हेल्पलाइन 1962 से लें।
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