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बकरी पालन कैसे शुरू करें Goat Farming — Breeds, Housing, Vaccination & Subsidy

कम जगह, कम पूँजी और साल भर बनी रहने वाली माँग — बकरी छोटे किसान की सबसे भरोसेमंद अतिरिक्त आमदनी है। पर असफलता की वजह लगभग हमेशा वही तीन होती हैं।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 जुलाई 2026

"गरीब की गाय" — पर सफलता तीन बातों पर टिकी है

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PPR
सबसे ज़रूरी टीका
🏠
10–12 वर्ग फुट
प्रति बकरी जगह
🗓️
3 महीने
कृमिनाशक का अंतराल
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भूमिका

बकरी को यूँ ही "गरीब की गाय" नहीं कहा जाता। कम जगह, कम पूँजी, कम चारे में पल जाती है; साल में दो बार बच्चे देती है; बीमार होने पर भी उसे बेचकर पैसा निकाला जा सकता है; और सबसे बड़ी बात — बकरे-बकरी के माँस की माँग साल भर बनी रहती है और भाव शायद ही कभी गिरता है। यही वजह है कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह सबसे भरोसेमंद अतिरिक्त आमदनी में गिना जाता है।

लेकिन बकरी पालन में असफल होने वाले किसान भी कम नहीं, और उनकी वजहें लगभग हमेशा वही तीन होती हैं: बिना जाँच के बीमार बकरियाँ खरीद लेना, टीकाकरण न कराना, और गीले-सीलन भरे बाड़े में पशु रखना। इन तीनों का इलाज महँगा नहीं है — बस जानकारी का है। इस लेख में नस्ल का चुनाव, बाड़े का सही डिज़ाइन, टीकाकरण और कृमिनाशक का कार्यक्रम, चारे की व्यवस्था, और राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) की 50% तक सब्सिडी की सही जानकारी — आसान हिंदी में।


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नस्ल का चुनाव — अपने इलाके की नस्ल सबसे अच्छी

यह पहला और सबसे बड़ा फैसला है। दूर से मँगाई गई महँगी नस्ल आपके इलाके की गर्मी, नमी और चारे में अक्सर नहीं टिकती। अपने क्षेत्र में पहले से सफल नस्ल चुनना लगभग हमेशा बेहतर रहता है।

नस्लमुख्य क्षेत्रखासियत
सिरोहीराजस्थान, गुजरातकठोर जलवायु में मज़बूत, माँस के लिए बहुत लोकप्रिय
बरबरीउत्तर प्रदेश, राजस्थानछोटे आकार की, बाड़े में पालने (स्टॉल फीडिंग) के लिए उपयुक्त
जमुनापारीउत्तर प्रदेश (इटावा क्षेत्र)बड़े आकार की, दूध और माँस दोनों के लिए
बीटलपंजाब, हरियाणाअच्छा दूध और अच्छी बढ़वार
ब्लैक बंगालपश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशाछोटी पर बहुत उपजाऊ; खाल की गुणवत्ता प्रसिद्ध
उस्मानाबादीमहाराष्ट्र, कर्नाटकमाँस के लिए, सूखे इलाकों में अच्छी
मालाबारी / तोतापरीदक्षिण भारतस्थानीय परिस्थितियों में अनुकूल
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खरीदते समय ये पाँच बातें ज़रूर देखें: पशु की आँखें और नाक साफ हों (बहती नाक = बीमारी), दाँत देखकर उम्र का अंदाज़ा लगाएँ, थन और पिछला हिस्सा साफ हो (दस्त की निशानी न हो), चाल में लंगड़ाहट न हो, और टीकाकरण का रिकॉर्ड माँगें। सिर्फ मंडी में देखकर, बिना जाँच, बड़ी संख्या में पशु खरीदना सबसे महँगी गलती है।

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बाड़ा — सूखा फर्श ही आधी सफलता है

बकरी गर्मी, सर्दी और बारिश सह लेती है — पर गीलापन और सीलन बिल्कुल नहीं। गीले फर्श पर खड़ी बकरी को निमोनिया और खुरपका जैसी समस्याएँ सबसे जल्दी घेरती हैं। इसीलिए बाड़े का पहला नियम है: फर्श हमेशा सूखा रहे।


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टीकाकरण और कृमिनाशक — सबसे सस्ता बीमा

बकरी पालन में सबसे बड़ा नुकसान बीमारी से होने वाली मौत का होता है — और उसमें भी सबसे बड़ा नाम है PPR (पी.पी.आर., जिसे "बकरी प्लेग" कहा जाता है), जो एक बार फैलने पर पूरे झुंड को ले जा सकता है। इसका टीका सस्ता है और सरकारी पशु चिकित्सा विभाग से उपलब्ध रहता है।

⚠️
टीकों का कार्यक्रम, दोहराने का अंतराल और दवाओं की मात्रा पशु की उम्र, वज़न, गाभिन अवस्था और क्षेत्र की बीमारियों के अनुसार बदलती है। इसलिए कोई भी टीका या दवा देने से पहले अपने पशु चिकित्सक या नज़दीकी पशु चिकित्सालय से ही सलाह लें — किसी दुकानदार या साथी किसान की बात पर पूरे झुंड को दवा न दें। कृषि मित्र कोई पशु चिकित्सा सलाह नहीं देता; यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है।

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चारा — खर्च यहीं सबसे ज़्यादा बचता है


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सरकारी सहायता — राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM)

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत भेड़-बकरी पालन की परियोजनाओं पर परियोजना लागत की 50% तक सब्सिडी दी जाती है, जो बड़ी इकाइयों (लगभग 500 बकरी/भेड़ तक) के लिए अधिकतम ₹50 लाख तक हो सकती है। छोटी इकाइयों के लिए सब्सिडी उसी अनुपात में कम होती है।

⚠️
"बकरी पालन लोन दिला दूँगा" कहने वाले एजेंटों से सावधान रहें। किसी भी सरकारी योजना में आवेदन के लिए फोन पर पैसे नहीं माँगे जाते। आवेदन सरकारी वेबसाइट (.gov.in / .nic.in) या ज़िला पशुपालन कार्यालय से ही करें। योजना की शर्तें, सब्सिडी का प्रतिशत और इकाई का आकार समय-समय पर और राज्य के अनुसार बदलते हैं, इसलिए आवेदन से पहले मौजूदा दिशानिर्देश ज़रूर पढ़ें या विभाग से पुष्टि करें।

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ये गलतियाँ कभी न करें


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शुरुआत कैसे करें — क्रम से

चरणक्या करें
पहला महीनाअपने इलाके के सफल बकरी पालकों से मिलें; पशुपालन विभाग/KVK का प्रशिक्षण लें
शुरू करने से पहलेबाड़ा बनाएँ — ऊँचा सूखा फर्श, प्रति पशु 10–12 वर्ग फुट, हवादार
चारे की योजनामेड़ पर चारा-पेड़ लगाएँ; बरसीम/मक्का/नेपियर की व्यवस्था करें
पशु खरीदक्षेत्र की नस्ल, स्वस्थ पशु, टीकाकरण रिकॉर्ड सहित; कम संख्या से शुरू
पहले 2–3 हफ्तेनए पशुओं को अलग रखें; कृमिनाशक और ज़रूरी टीके पशु चिकित्सक की सलाह से
हर 3 महीनेकृमिनाशक; बाड़े की सफाई; वज़न और बढ़वार का रिकॉर्ड
बिक्री के समयत्योहारों के आसपास माँग और भाव दोनों ऊँचे रहते हैं — बिक्री की योजना पहले से बनाएँ

निष्कर्ष

बकरी पालन में मुनाफा महँगी नस्ल से नहीं, कम मौतों से आता है। तीन बातें याद रखें: अपने इलाके की नस्ल, स्वस्थ पशु और कम संख्या से शुरुआत करें, बाड़े का फर्श हमेशा सूखा रखें और नए पशु को 2–3 हफ्ते अलग रखें, और PPR का टीका तथा हर 3 महीने पर कृमिनाशक कभी न छोड़ें

बकरी पालन में जो किसान बीमारी रोक लेता है, वही कमाता है — बाकी सब उसके बाद की बात है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1बकरी पालन के लिए कौन सी नस्ल सबसे अच्छी है?
सबसे अच्छी नस्ल वही है जो आपके अपने इलाके में पहले से सफल हो — दूर से मँगाई गई महँगी नस्ल अक्सर स्थानीय गर्मी, नमी और चारे में नहीं टिकती। प्रचलित नस्लें हैं — सिरोही (राजस्थान-गुजरात), बरबरी और जमुनापारी (उत्तर प्रदेश), बीटल (पंजाब-हरियाणा), ब्लैक बंगाल (बंगाल-बिहार-झारखंड) और उस्मानाबादी (महाराष्ट्र-कर्नाटक)
2बकरी पालन में सरकार से कितनी सब्सिडी मिलती है?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत भेड़-बकरी पालन परियोजनाओं पर परियोजना लागत की 50% तक सब्सिडी मिलती है, जो बड़ी इकाइयों (लगभग 500 पशु तक) के लिए अधिकतम ₹50 लाख तक हो सकती है। ध्यान रखें कि यह नकद अनुदान नहीं, बैंक ऋण से जुड़ी परियोजना आधारित सब्सिडी है।
3एक बकरी के लिए बाड़े में कितनी जगह चाहिए?
एक वयस्क बकरी के लिए लगभग 10–12 वर्ग फुट जगह रखनी चाहिए। इससे कम जगह में भीड़ हो जाती है, बीमारी तेज़ी से फैलती है और बढ़वार रुक जाती है। सबसे अच्छा तरीका है ज़मीन से लगभग एक-डेढ़ फुट ऊँचा जालीदार (मचान वाला) फर्श बनाना, जिससे मल-मूत्र नीचे गिर जाए और ऊपर हमेशा सूखा रहे।
4बकरियों को कौन-कौन से टीके लगवाने चाहिए?
सबसे ज़रूरी है PPR (बकरी प्लेग) का टीका, क्योंकि यह बीमारी एक बार फैलने पर पूरे झुंड को ले जा सकती है। इसके अलावा ई.टी. (एंटरोटॉक्सिमिया), तथा क्षेत्र की स्थिति के अनुसार खुरपका-मुँहपका (FMD) और बकरी चेचक के टीके लगवाए जाते हैं। टीकों का सही समय और अंतराल हमेशा अपने पशु चिकित्सक से ही तय कराएँ
5बकरियों को कृमिनाशक (पेट के कीड़े की दवा) कब देनी चाहिए?
आमतौर पर हर 3 महीने पर, और बरसात के बाद ज़रूर, क्योंकि नमी में कीड़ों का संक्रमण सबसे ज़्यादा बढ़ता है। पेट के कीड़े चुपचाप बढ़वार और वज़न दोनों खा जाते हैं और बाहर से पशु ठीक दिखता रहता है। मात्रा पशु के वज़न पर निर्भर करती है, इसलिए दवा पशु चिकित्सक की सलाह से ही दें।
6बकरी पालन शुरू करने के लिए कितनी बकरियों से शुरुआत करें?
शुरुआत 10–20 बकरियों जैसी छोटी संख्या से करना सबसे सुरक्षित है। पहले साल में बाड़ा, चारा, बीमारी और बिक्री — चारों का अनुभव मिल जाता है, और गलती की कीमत भी कम रहती है। एक साथ बड़ी संख्या से शुरू करने वाले ज़्यादातर नए पालक बीमारी और चारे के प्रबंधन में ही उलझ जाते हैं।
7बकरी को क्या खिलाना चाहिए?
बकरी घास से ज़्यादा पेड़-झाड़ी की पत्तियाँ पसंद करती है — सुबबूल, नीम, बबूल, शहतूत आदि; खेत की मेड़ पर लगाए ऐसे पेड़ सालों तक मुफ्त चारा देते हैं। हरे चारे के साथ सूखा चारा (भूसा) देना ज़रूरी है, और गाभिन, दूध देने वाली तथा बढ़ते बच्चों को थोड़ा दाना मिश्रण एवं खनिज मिश्रण देने से बढ़वार व प्रजनन दोनों सुधरते हैं। साफ पानी हमेशा उपलब्ध रहे।
8नई खरीदी बकरी को सीधे झुंड में मिला सकते हैं?
नहीं — बाहर से लाए गए हर पशु को कम से कम 2–3 हफ्ते अलग (क्वारंटीन) रखना चाहिए। यह बकरी पालन की सबसे आम और सबसे महँगी गलती है: एक बीमार पशु पूरे झुंड को संक्रमित कर देता है। इस अवधि में उसे कृमिनाशक और ज़रूरी टीके पशु चिकित्सक की सलाह से दिलवा लें, फिर ही झुंड में मिलाएँ।
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