भैंसों के लिए काटकर रखा गया हरा चारा — रोज़ का यही इंतज़ाम दूध की मात्रा तय करता है।
समस्या चारे की मात्रा नहीं, साल के खाली महीने हैं
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25–30 किलो
रोज़ प्रति दुधारू पशु
✂️
5–7 कटाई
एक बार बोई बरसीम से
⏳
45 दिन
नेपियर काटने की न्यूनतम उम्र
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भूमिका
दूध का सारा गणित एक ही बात पर टिका है — पशु को रोज़ हरा चारा मिल रहा है या नहीं। एक अच्छी दुधारू गाय या भैंस को दिन में लगभग 25–30 किलो हरा चारा चाहिए, और जिस दिन यह घटता है उसी दिन दूध गिरना शुरू हो जाता है। फिर उसकी भरपाई खली और दाने से करनी पड़ती है, जो कहीं ज़्यादा महँगा सौदा है।
ज़्यादातर पशुपालक चारा बोते ज़रूर हैं, पर साल के दो हिस्सों में खाली रह जाते हैं — मई-जून की गर्मी में और अक्टूबर-नवंबर के बदलाव में। इस लेख में साल भर का चारा कैलेंडर है: रबी में बरसीम और जई, गर्मी-बरसात में नेपियर, मक्का और लोबिया — बुवाई का समय, बीज की मात्रा, कटाई का क्रम और वे तीन ख़तरे जो हरे चारे को कभी-कभी ज़हर बना देते हैं।
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बरसीम — रबी का सबसे भरोसेमंद चारा
बरसीम दलहनी चारा है, यानी इसमें प्रोटीन ज़्यादा होता है और यह मिट्टी में नाइट्रोजन भी छोड़ जाता है। एक बार बोकर पाँच से सात बार तक कटाई मिलती है, और यह अक्टूबर से अप्रैल तक लगातार हरा चारा देता रहता है।
बात
ब्योरा
बुवाई का समय
अक्टूबर का पहला पखवाड़ा सबसे अच्छा; नवंबर तक चल जाता है
बीज दर
लगभग 8–10 किलो प्रति एकड़ (20–25 किलो प्रति हेक्टेयर)
बुवाई का तरीका
खेत में हल्का पानी भरकर छिटकवाँ बुवाई
पहली कटाई
बुवाई के लगभग 50–55 दिन बाद
आगे की कटाई
हर 25–30 दिन पर, कुल 5–7 कटाई
सिंचाई
हर कटाई के बाद; सर्दी में 10–15 दिन के अंतर पर
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पहली बार बरसीम बो रहे हैं तो बीज को राइज़ोबियम कल्चर से उपचारित कीजिए। इस फसल की जड़ों में गाँठें बनाने वाले जीवाणु नए खेत की मिट्टी में नहीं होते, और उनके बिना बरसीम न तो अपनी पूरी बढ़वार करती है और न मिट्टी को नाइट्रोजन देती है। कल्चर बहुत सस्ता है और कृषि विज्ञान केंद्र या बीज भंडार से मिल जाता है।
पहली कटाई का सुझाव: बरसीम के साथ थोड़ी सरसों या जई मिलाकर बोने से पहली कटाई जल्दी और ज़्यादा मिलती है, क्योंकि बरसीम शुरू में धीरे बढ़ती है।
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हाइब्रिड नेपियर — एक बार लगाइए, तीन-चार साल काटिए
नेपियर (बाजरा-नेपियर संकर) बहुवर्षीय चारा घास है। इसे बीज से नहीं, तने के टुकड़ों यानी जड़ वाली कलमों से लगाया जाता है, और एक बार लगाने के बाद यह तीन-चार साल तक चारा देती रहती है। पानी की सुविधा हो तो यह अकेली घास पूरे साल का सबसे बड़ा सहारा बन जाती है।
लगाने का समय: फरवरी-मार्च या जुलाई-अगस्त — यानी सर्दी और भीषण गर्मी को छोड़कर।
कलम कैसी हो: दो-तीन गाँठ वाली कलम, तिरछी लगाइए और एक गाँठ मिट्टी के नीचे रहने दीजिए।
दूरी: कतार से कतार लगभग 60–90 सेंटीमीटर, पौधे से पौधे 50–60 सेंटीमीटर।
पहली कटाई: लगाने के लगभग 60–75 दिन बाद, ज़मीन से 10–15 सेंटीमीटर ऊपर।
आगे की कटाई: हर 40–45 दिन पर — साल में लगभग 6–8 कटाई।
बीच में लोबिया लगाइए: नेपियर की कतारों के बीच लोबिया बोने से चारे में प्रोटीन का संतुलन बन जाता है, वरना अकेली घास सिर्फ़ पेट भरती है, दूध नहीं बढ़ाती।
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साल भर का चारा कैलेंडर
चारे की असली समस्या मात्रा की नहीं, खाली महीनों की है। यह तालिका उन्हीं को भरने के लिए है।
मौसम
क्या बोएँ
कब बोएँ
चारा कब मिलेगा
रबी
बरसीम
अक्टूबर
दिसंबर–अप्रैल, 5–7 कटाई
रबी
जई (ओट)
अक्टूबर–नवंबर
जनवरी–मार्च, 2–3 कटाई
गर्मी
चारे वाली मक्का, लोबिया
मार्च
मई–जून
खरीफ
ज्वार, बाजरा, लोबिया
जून–जुलाई
अगस्त–अक्टूबर
बहुवर्षीय
हाइब्रिड नेपियर
फरवरी–मार्च या जुलाई–अगस्त
पूरे साल, हर 40–45 दिन
सबसे कठिन महीने मई-जून और अक्टूबर-नवंबर हैं। मई-जून का जवाब नेपियर और गर्मी की मक्का है; अक्टूबर-नवंबर का जवाब खरीफ का बचा चारा सुखाकर या साइलेज बनाकर रखना है।
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हरे चारे के तीन ख़तरे — इन्हें ज़रूर जानिए
हरा चारा फ़ायदे का सौदा है, पर तीन स्थितियों में वही चारा पशु को नुकसान पहुँचा सकता है। तीनों से बचना आसान है, बस नियम पता होना चाहिए।
अफारा (ब्लोट) — अकेली बरसीम से: ओस या पानी लगी, बहुत मुलायम बरसीम भूखे पशु को अकेली खिला देने पर पेट में गैस भर जाती है और यह जानलेवा हो सकता है। बचाव सीधा है — पहले थोड़ा सूखा चारा (भूसा) खिलाइए, फिर हरा चारा दीजिए, और बरसीम में हमेशा कुछ भूसा मिलाकर दीजिए। ओस सूखने से पहले चराई मत कराइए।
ज्वार में हाइड्रोसायनिक अम्ल: ज्वार और चरी की बहुत छोटी फसल में और सूखा पड़ने या पाला लगने के तुरंत बाद यह ज़हर बढ़ जाता है। नियम यह है कि ज्वार को छोटी अवस्था में मत काटिए — इसे बालियाँ आने के आसपास की अवस्था तक बढ़ने दीजिए, और सूखे या पाले के तुरंत बाद कुछ दिन चराई रोक दीजिए।
नेपियर में ऑक्सलेट और नाइट्रेट: बहुत छोटी नेपियर घास में ऑक्सलेट ज़्यादा होता है, जो पशु के शरीर में कैल्शियम बाँध लेता है। इसलिए नेपियर को 45 दिन से पहले मत काटिए। इसी तरह भारी यूरिया देकर सूखे में उगाई घास में नाइट्रेट जमा हो सकता है — ऐसी घास अकेली खिलाने से बचिए।
⚠️
अफारा, अचानक कमज़ोरी या साँस लेने में तकलीफ़ दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाइए — घरेलू उपाय आज़माने में लगा समय ही जानलेवा साबित होता है। नई चारा फसल या नई किस्म शुरू करने से पहले नज़दीकी पशु चिकित्सालय या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह ले लीजिए; यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है।
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बचा हुआ चारा सँभालिए — साइलेज और सूखा चारा
खरीफ में चारा इतना हो जाता है कि आधा बर्बाद होता है, और तीन महीने बाद खरीदना पड़ता है। इसका हल भंडारण है।
साइलेज (अचारी चारा): चारे वाली मक्का या ज्वार को काटकर छोटे टुकड़ों में कतरिए, गड्ढे या मज़बूत प्लास्टिक बैग में कसकर दबाइए ताकि हवा बिल्कुल न रहे, और ऊपर से पूरी तरह बंद कर दीजिए। लगभग डेढ़-दो महीने में खट्टी महक वाला हरा चारा तैयार हो जाता है, जो कई महीने चलता है।
हवा ही दुश्मन है: साइलेज बिगड़ने का एक ही बड़ा कारण है — हवा का अंदर रह जाना। दबाना जितना कसकर होगा, नतीजा उतना अच्छा।
सूखा चारा (हे): बरसीम और जई की एक कटाई को छाया में सुखाकर रखना गर्मियों में काम आता है। तेज़ धूप में सुखाने से पत्तियाँ झड़ जाती हैं और पूरा पोषण उन्हीं पत्तियों में होता है।
चारा कतरनी का इस्तेमाल कीजिए: कटा हुआ चारा पशु पूरा खाता है; बिना कटा चारा आधा नीचे गिरकर बर्बाद होता है।
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ये गलतियाँ कभी न करें
भूखे पशु को अकेली मुलायम बरसीम खिलाना — अफारा का सबसे आम कारण; पहले भूसा, फिर हरा चारा।
ज्वार-चरी को छोटी अवस्था में काटना — छोटी फसल में हाइड्रोसायनिक अम्ल का ख़तरा रहता है।
नेपियर को 45 दिन से पहले काटना — कम उम्र की घास में ऑक्सलेट ज़्यादा होता है।
पहली बार बरसीम बोते समय कल्चर न लगाना — बढ़वार आधी रह जाती है।
सिर्फ़ घास खिलाना — नेपियर या ज्वार अकेले पेट भरते हैं; दूध के लिए साथ में बरसीम या लोबिया जैसा दलहनी चारा चाहिए।
खरीफ का अतिरिक्त चारा बर्बाद होने देना — साइलेज बनाकर वही चारा खाली महीनों में काम आता है।
बिना कतरे चारा डालना — बड़ा हिस्सा नीचे गिरकर बेकार जाता है।
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हिसाब — चारा उगाना सस्ता क्यों पड़ता है
बात
ब्योरा
एक दुधारू पशु की रोज़ की ज़रूरत
लगभग 25–30 किलो हरा चारा
दो पशुओं के लिए
रोज़ लगभग 50–60 किलो — यानी लगातार चलने वाला इंतज़ाम चाहिए
बरसीम से
एक बुवाई, 5–7 कटाई, पूरा रबी सीज़न
नेपियर से
एक बार लगाना, 3–4 साल, हर 40–45 दिन कटाई
चारा न होने पर
वही पोषण दाने-खली से खरीदना पड़ता है, जो कई गुना महँगा है
यही वजह है कि छोटे पशुपालक के लिए भी खेत का एक हिस्सा चारे के लिए तय कर देना सबसे तेज़ी से लौटने वाला निवेश है — और उसका सीधा असर दूध उत्पादन पर दिखता है।
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निष्कर्ष
तीन बातें याद रखिए। पहली — बरसीम अक्टूबर में बोइए; एक बुवाई पूरे रबी का चारा दे देती है। दूसरी — नेपियर एक बार लगाकर तीन-चार साल चलती है, पर 45 दिन से पहले मत काटिए। तीसरी — घास अकेली दूध नहीं बढ़ाती; उसके साथ बरसीम या लोबिया जैसा दलहनी चारा ज़रूर दीजिए।
दूध बाल्टी में नहीं, खेत के उस टुकड़े में बनता है जो चारे के लिए तय किया गया हो।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1बरसीम की बुवाई कब और कितने बीज से करें?
बरसीम अक्टूबर के पहले पखवाड़े में बोना सबसे अच्छा है, और बीज लगभग 8–10 किलो प्रति एकड़ लगता है। बुवाई खेत में हल्का पानी भरकर छिटकवाँ की जाती है; पहली कटाई 50–55 दिन बाद और उसके बाद हर 25–30 दिन पर मिलती है, यानी पूरे सीज़न में 5–7 कटाई।
2हाइब्रिड नेपियर कैसे लगाते हैं?
नेपियर बीज से नहीं, दो-तीन गाँठ वाली तने की कलमों से लगाई जाती है — कतार से कतार 60–90 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे 50–60 सेंटीमीटर। लगाने का सही समय फरवरी-मार्च या जुलाई-अगस्त है; पहली कटाई 60–75 दिन बाद और फिर हर 40–45 दिन पर, और एक बार लगाने पर यह तीन-चार साल चलती है।
3एक दुधारू पशु को रोज़ कितना हरा चारा चाहिए?
एक अच्छी दुधारू गाय या भैंस को रोज़ लगभग 25–30 किलो हरा चारा चाहिए, यानी दो पशुओं के लिए 50–60 किलो रोज़ का लगातार इंतज़ाम। यह मात्रा घटते ही दूध गिरना शुरू हो जाता है और उसकी भरपाई दाने-खली से करनी पड़ती है, जो कई गुना महँगी पड़ती है।
4बरसीम खिलाने से पशु को अफारा क्यों हो जाता है?
ओस या पानी लगी बहुत मुलायम बरसीम भूखे पशु को अकेली खिलाने से पेट में गैस भर जाती है, जो जानलेवा हो सकती है। बचाव सीधा है — पहले थोड़ा भूसा खिलाइए, फिर हरा चारा दीजिए, बरसीम में हमेशा कुछ सूखा चारा मिलाइए, और ओस सूखने से पहले चराई मत कराइए।
5नेपियर घास कितने दिन में काटनी चाहिए?
पहली कटाई लगाने के 60–75 दिन बाद और उसके बाद हर 40–45 दिन पर, ज़मीन से 10–15 सेंटीमीटर ऊपर से। इससे पहले, यानी 45 दिन से कम उम्र की घास में ऑक्सलेट ज़्यादा होता है जो पशु के शरीर में कैल्शियम बाँध लेता है, इसलिए बहुत छोटी नेपियर काटकर खिलाना ठीक नहीं।
6ज्वार या चरी का चारा कब ख़तरनाक होता है?
बहुत छोटी अवस्था की ज्वार-चरी में, और सूखा पड़ने या पाला लगने के तुरंत बाद — इन स्थितियों में उसमें हाइड्रोसायनिक अम्ल बढ़ जाता है। इसलिए ज्वार को छोटी अवस्था में मत काटिए, उसे बालियाँ आने के आसपास तक बढ़ने दीजिए, और सूखे या पाले के तुरंत बाद कुछ दिन चराई रोक दीजिए।
7साइलेज कैसे बनाते हैं?
चारे वाली मक्का या ज्वार को छोटे टुकड़ों में कतरकर गड्ढे या मज़बूत प्लास्टिक बैग में कसकर दबाइए ताकि हवा बिल्कुल न रहे, और ऊपर से पूरी तरह बंद कर दीजिए। लगभग डेढ़-दो महीने में खट्टी महक वाला हरा चारा तैयार हो जाता है जो कई महीने चलता है; साइलेज बिगड़ने का एक ही बड़ा कारण है — अंदर रह गई हवा।
8साल के कौन-से महीनों में हरा चारा सबसे कम पड़ता है?
मई-जून की गर्मी और अक्टूबर-नवंबर का बदलाव — यही दो खाली खिड़कियाँ हैं। मई-जून का जवाब हाइब्रिड नेपियर और गर्मी की चारा-मक्का है, और अक्टूबर-नवंबर का जवाब खरीफ का बचा चारा साइलेज या सूखे चारे के रूप में सँभालकर रखना है।
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