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🗓️ अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 📍 पूरे भारत में 💰 प्रीमियम सिर्फ 2%

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY) 2026 — Enrolment, Premium & Claims

खरीफ 2026 के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है और किसान का प्रीमियम सिर्फ 2% है। तारीख निकलने के बाद उस सीज़न के लिए बीमा नहीं होता, चाहे बाद में कितना भी नुकसान हो।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 8 मिनट पढ़ें 📅 जुलाई 2026

31 जुलाई तक का मौका — खरीफ 2026 का फसल बीमा

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31 जुलाई
खरीफ 2026 की अंतिम तिथि
⏱️
72 घंटे
नुकसान की सूचना का नियम
💰
2%
खरीफ में किसान का प्रीमियम
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भूमिका

खरीफ की फसल खेत में खड़ी है, और सबसे बड़ा डर वही पुराना है — एक रात की तेज़ बारिश, ओले, या तीन हफ्ते का सूखा, और पूरे सीज़न की मेहनत खत्म। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) इसी डर के लिए बनी है: आप प्रीमियम का सिर्फ एक छोटा हिस्सा देते हैं, बाकी केंद्र और राज्य सरकार भरती है, और फसल खराब होने पर बीमा कंपनी से मुआवज़ा मिलता है।

सबसे ज़रूरी बात पहले — खरीफ 2026 के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। पूरे देश में 1 से 31 जुलाई तक "फसल बीमा माह" चलाया गया है, और इसी अवधि में किसान के खाते से प्रीमियम कटता है। तारीख निकलने के बाद उस सीज़न के लिए बीमा नहीं होता — चाहे बाद में कितना भी नुकसान हो जाए। खरीफ फसलों के लिए किसान को बीमित राशि का अधिकतम 2% ही देना होता है। इस लेख में पात्रता, प्रीमियम, ज़रूरी कागज़, आवेदन कहाँ करें, और नुकसान होने पर 72 घंटे का वह नियम जिसे न जानने से ज़्यादातर क्लेम फेल होते हैं — सब आसान हिंदी में।

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तारीख आखिरी है, इसलिए आज ही जाँचें। खरीफ 2026 के लिए प्रीमियम कटौती की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। कुछ राज्य अपनी अधिसूचना में तारीख आगे-पीछे कर सकते हैं, इसलिए अपने बैंक शाखा, CSC या जिला कृषि कार्यालय से आज की स्थिति ज़रूर पूछ लें

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है?

यह भारत सरकार की फसल बीमा योजना है, जिसमें प्राकृतिक आपदा से हुए फसल नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान का प्रीमियम कानूनी रूप से सीमित (capped) है — बाकी पूरा प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भरते हैं।

एक और बड़ा बदलाव जो कई किसान अब तक नहीं जानते — खरीफ 2020 से यह योजना सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक (voluntary) है। पहले KCC या फसल ऋण लेने वाले किसान का बीमा अपने आप हो जाता था; अब वह भी चाहे तो मना कर सकता है, लेकिन उसके लिए कट-ऑफ तारीख से कम से कम 7 दिन पहले बैंक में लिखित घोषणा-पत्र देना पड़ता है। यानी अगर आपने मना नहीं किया है, तो ऋणी किसान का प्रीमियम अपने आप कट जाएगा।

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"बीमित राशि" (Sum Insured) क्या होती है? यह वह रकम है जिस पर बीमा होता है और जिस पर आपका 2% प्रीमियम बनता है। यह हर फसल और हर ज़िले के लिए अलग तय होती है और आमतौर पर उस फसल की प्रति हेक्टेयर लागत के आधार पर राज्य सरकार अधिसूचित करती है। इसीलिए एक ही 2% अलग-अलग फसलों में अलग रकम बनता है।

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किस-किस नुकसान पर मुआवज़ा मिलता है?

स्थिति✅ कवर होता है❌ कवर नहीं होता
खड़ी फसल में नुकसानसूखा, लंबा खिंचाव, बाढ़, जलभराव, कीट-रोग का व्यापक प्रकोप
बुवाई ही न हो पानाबारिश न होने या मौसम के कारण बुवाई रोकनी पड़े (prevented sowing)
स्थानीय आपदाओलावृष्टि, भूस्खलन, बादल फटना, खेत में पानी भरना, प्राकृतिक आग
कटाई के बादखेत में सुखाने के लिए रखी फसल का बेमौसम बारिश/चक्रवात से नुकसान (सीमित दिनों तक)
युद्ध, परमाणु जोखिमकवर नहीं
जानवरों/पक्षियों से नुकसानआमतौर पर कवर नहीं
लापरवाही या दुर्भावनापूर्ण नुकसानकवर नहीं
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खड़ी फसल का नुकसान अलग तरीके से आँका जाता है। पूरे इलाके में हुए व्यापक नुकसान का आकलन फसल कटाई प्रयोग (Crop Cutting Experiments) से होता है, यानी क्लेम खेत-दर-खेत नहीं बल्कि अधिसूचित इकाई (गाँव/पटवारी हल्का) के औसत पर तय होता है। जबकि ओले, भूस्खलन या खेत में पानी भरने जैसी स्थानीय आपदा में आपके अपने खेत का सर्वे होता है — और उसी के लिए 72 घंटे वाला नियम लागू है।

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पात्रता और ज़रूरी कागज़

योजना में अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल उगाने वाला हर किसान भाग ले सकता है — चाहे वह ज़मीन का मालिक हो, बटाईदार हो या किरायेदार। बटाईदार और किरायेदार किसानों को अपनी बुवाई और खेत पर अधिकार का प्रमाण देना पड़ता है, और यही वह जगह है जहाँ ज़्यादातर आवेदन अटकते हैं।

कागज़क्यों ज़रूरी है
आधार कार्डपहचान और सीधे खाते में भुगतान के लिए
बैंक पासबुक (IFSC सहित)क्लेम की रकम इसी खाते में आती है — खाता चालू और आधार से जुड़ा होना चाहिए
ज़मीन के कागज़ (खसरा / खतौनी / 7-12 / जमाबंदी)खेत और रकबा साबित करने के लिए
बुवाई प्रमाण-पत्र या स्व-घोषणायह साबित करने के लिए कि उस खेत में वही फसल बोई गई है
बटाई/किरायानामा (अगर लागू हो)बटाईदार किसान के लिए ज़रूरी
मोबाइल नंबरSMS से आवेदन और क्लेम की स्थिति मिलती रहती है

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आवेदन कहाँ और कैसे करें?

  1. बैंक शाखा: अगर आपने KCC या फसल ऋण लिया है, तो उसी शाखा में जाएँ। ऋणी किसान का प्रीमियम आमतौर पर खाते से अपने आप कटता है — फिर भी कटौती हुई या नहीं, यह ज़रूर पुष्टि करें
  2. कॉमन सर्विस सेंटर (CSC): गैर-ऋणी किसानों के लिए सबसे आसान रास्ता। कागज़ ले जाएँ, वहीं ऑनलाइन आवेदन हो जाता है।
  3. आधिकारिक पोर्टल pmfby.gov.in: किसान खुद भी "Farmer Corner" से पंजीकरण कर सकता है और आवेदन तथा क्लेम की स्थिति देख सकता है।
  4. बीमा कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि या कृषि विभाग: जिले में तैनात प्रतिनिधि से भी नामांकन कराया जा सकता है।
  5. रसीद हर हाल में लें: आवेदन के बाद मिलने वाली पॉलिसी रसीद / आवेदन संख्या संभालकर रखें। क्लेम के समय सबसे पहले यही माँगी जाती है।
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आवेदन के बाद यह ज़रूर जाँचें: पोर्टल पर अपनी पॉलिसी में फसल का नाम, खेत का रकबा, गाँव और बैंक खाता — चारों सही हैं या नहीं। गलत फसल या गलत रकबा दर्ज हो जाना क्लेम खारिज होने का सबसे आम कारण है, और इसे सीज़न के बीच में सुधारना बहुत मुश्किल होता है।

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सबसे ज़रूरी नियम — नुकसान के 72 घंटे

ओले पड़ जाएँ, खेत में पानी भर जाए, या कटी हुई फसल बेमौसम बारिश में भीग जाए — ऐसे स्थानीय और कटाई-उपरांत नुकसान की सूचना बीमा कंपनी तक 72 घंटे के भीतर पहुँचनी चाहिए। यही एक नियम है जिसे न जानने से सबसे ज़्यादा क्लेम फेल होते हैं।


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ये गलतियाँ कभी न करें


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कब क्या करें — साल भर का कैलेंडर

समयज़रूरी काम
1 – 31 जुलाई (फसल बीमा माह)खरीफ 2026 का नामांकन — अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026
नामांकन के तुरंत बादपॉलिसी रसीद लें; पोर्टल पर फसल, रकबा और खाता जाँचें
पूरे खरीफ सीज़ननुकसान होते ही 72 घंटे के भीतर सूचना; फोटो और शिकायत संख्या सुरक्षित रखें
कटाई के समयखेत में सुखाने रखी फसल भी सीमित दिनों तक कवर होती है — भीगने पर तुरंत सूचना दें
रबी सीज़न (आमतौर पर दिसंबर के आसपास कट-ऑफ)रबी फसलों का नामांकन, किसान का हिस्सा अधिकतम 1.5%
क्लेम लंबित रहने परबीमा कंपनी, बैंक और जिला कृषि कार्यालय में लिखित शिकायत; शिकायत संख्या लें
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योजना के नियम, कट-ऑफ तारीखें, अधिसूचित फसलें और बीमा कंपनी हर राज्य और हर सीज़न में बदलती हैं। यहाँ दी गई जानकारी सामान्य समझ के लिए है — नामांकन से पहले pmfby.gov.in, अपनी बैंक शाखा या जिला कृषि कार्यालय से अपने ज़िले की अधिसूचना ज़रूर देखें। कृषि मित्र न कोई बीमा एजेंट है, न कोई पॉलिसी बेचता है और न ही क्लेम दिलाता है — यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है।

निष्कर्ष

फसल बीमा कोई कमाई की योजना नहीं है — यह एक बुरे साल को बर्बाद साल बनने से रोकने का तरीका है। तीन बातें याद रखें: 31 जुलाई 2026 से पहले नामांकन करा लें, पॉलिसी रसीद और उसमें दर्ज फसल-रकबा-खाता ज़रूर जाँचें, और नुकसान होते ही 72 घंटे के भीतर सूचना दें

खरीफ का प्रीमियम सिर्फ 2% है — यह पूरे साल की मेहनत का सबसे सस्ता बीमा है, बशर्ते तारीख निकलने से पहले करा लिया जाए।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1खरीफ 2026 के लिए फसल बीमा की आखिरी तारीख क्या है?
खरीफ 2026 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नामांकन और प्रीमियम कटौती की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है — पूरे देश में 1 से 31 जुलाई तक "फसल बीमा माह" मनाया गया है। तारीख निकलने के बाद उस सीज़न के लिए बीमा नहीं होता, इसलिए अपनी बैंक शाखा या CSC से आज ही पुष्टि कर लें।
2फसल बीमा में किसान को कितना प्रीमियम देना पड़ता है?
किसान का हिस्सा तय (capped) है — खरीफ फसलों पर बीमित राशि का अधिकतम 2%, रबी फसलों पर अधिकतम 1.5%, और वाणिज्यिक व बागवानी फसलों पर अधिकतम 5%। इससे ऊपर का पूरा प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भरती हैं।
3फसल खराब होने पर क्लेम के लिए कितने समय में सूचना देनी होती है?
ओलावृष्टि, जलभराव, भूस्खलन या कटाई के बाद भीगने जैसे स्थानीय नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देना अनिवार्य है — बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर, PMFBY पोर्टल/ऐप, बैंक शाखा या कृषि अधिकारी के ज़रिए। सूचना की शिकायत संख्या (docket number) ज़रूर लें और सर्वे होने तक खेत में कुछ न बदलें।
4फसल बीमा के लिए कौन-कौन से कागज़ चाहिए?
मुख्य रूप से आधार कार्ड, बैंक पासबुक (IFSC सहित), ज़मीन के कागज़ (खसरा/खतौनी/7-12/जमाबंदी), बुवाई प्रमाण-पत्र या स्व-घोषणा और मोबाइल नंबर चाहिए। बटाईदार या किरायेदार किसान को बटाई/किरायानामा भी देना पड़ता है। बैंक खाता चालू और आधार से जुड़ा होना ज़रूरी है, वरना मंज़ूर क्लेम का पैसा भी अटक जाता है।
5क्या KCC या फसल ऋण लेने वाले किसान का बीमा अपने आप हो जाता है?
खरीफ 2020 से यह योजना सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक है। ऋणी किसान का प्रीमियम आमतौर पर खाते से अपने आप कटता है, लेकिन वह चाहे तो कट-ऑफ तारीख से कम से कम 7 दिन पहले बैंक में लिखित घोषणा देकर बाहर रह सकता है। इसलिए मान लेने की बजाय बैंक से पुष्टि करें कि कटौती हुई है या नहीं।
6फसल बीमा में आवेदन कहाँ करें?
आवेदन बैंक शाखा, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), आधिकारिक पोर्टल pmfby.gov.in के "Farmer Corner", या बीमा कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि/कृषि विभाग — इनमें से कहीं भी किया जा सकता है। आवेदन के बाद पॉलिसी रसीद या आवेदन संख्या ज़रूर लें, क्योंकि क्लेम के समय सबसे पहले वही माँगी जाती है।
7फसल बीमा में किन नुकसानों पर मुआवज़ा नहीं मिलता?
आमतौर पर युद्ध और परमाणु जोखिम, जानवरों या पक्षियों से हुआ नुकसान, तथा लापरवाही या जानबूझकर किया गया नुकसान कवर नहीं होता। योजना मुख्य रूप से सूखा, बाढ़, जलभराव, ओलावृष्टि, भूस्खलन, बादल फटना, प्राकृतिक आग, व्यापक कीट-रोग प्रकोप, बुवाई न हो पाना और कटाई के बाद खेत में रखी फसल के नुकसान को कवर करती है।
8क्लेम कैसे तय होता है — खेत-दर-खेत या पूरे गाँव का औसत?
यह नुकसान के प्रकार पर निर्भर करता है। व्यापक नुकसान (जैसे सूखा) का आकलन फसल कटाई प्रयोगों से, अधिसूचित इकाई (गाँव/पटवारी हल्का) के औसत पर होता है — इसलिए क्लेम पूरे इलाके के आधार पर बनता है। जबकि ओले, जलभराव या भूस्खलन जैसे स्थानीय नुकसान में आपके अपने खेत का व्यक्तिगत सर्वे होता है, और उसी के लिए 72 घंटे में सूचना देना ज़रूरी है।
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