उत्तर प्रदेश में सरसों की खेती — सम्पूर्ण रबी मार्गदर्शिका
Complete Mustard Farming Guide for UP Farmers — Seed to Market
UP में सरसों गेहूँ के बाद दूसरी सबसे महत्वपूर्ण रबी फसल है। सही किस्म, सही बुवाई समय और माहू कीट पर नियंत्रण रखने से एक एकड़ में 10–12 क्विंटल तक उपज और ₹40,000 से अधिक मुनाफा संभव है।
✍️ KrashiMitra.in⏱️ 8 मिनट पढ़ें📅 2025–26
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UP के सरसों के खेत — आगरा, मथुरा, इटावा, कानपुर और बरेली UP के प्रमुख सरसों उत्पादक जिले हैं
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10°–25°C
उपयुक्त तापमान
📅
1–25 अक्टूबर
बुवाई का समय
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1.5–2 किग्रा/एकड़
बीज की मात्रा
🌼
8–12 क्विं./एकड़
उपज
💧
2–3 बार
सिंचाई
⏳
120–140 दिन
फसल अवधि
📖
परिचय — UP में सरसों की खेती क्यों फायदेमंद है?
उत्तर प्रदेश में आगरा, मथुरा, इटावा, कानपुर, बरेली, बदायूँ और शाहजहाँपुर जिलों में सरसों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। रबी सीजन में यह फसल गेहूँ के साथ या उससे पहले बोई जाती है।
सरसों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी, कम लागत और कम समय में तैयार हो जाती है। तेल के लिए बाजार में हमेशा माँग रहती है और सरकार MSP का भी समर्थन देती है।
💰
अच्छी आय
MSP ₹5,650/क्विंटल (2025-26) पर 10 क्विंटल उपज से एक एकड़ में ₹40,000+ शुद्ध मुनाफा संभव।
💧
कम सिंचाई
सरसों को मात्र 2–3 सिंचाई की जरूरत होती है — गेहूँ की तुलना में आधा पानी। जल संकट में बेहतर विकल्प।
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तेल की माँग
भारत में खाद्य तेल का आयात घटाने के लिए सरकार सरसों उत्पादन को बढ़ावा दे रही है — भाव हमेशा स्थिर।
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खली से आय
तेल निकालने के बाद बची सरसों की खली पशु आहार और जैविक खाद के रूप में ₹1,500–₹2,000/क्विंटल बिकती है।
💰
सरसों का सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) — रबी 2025-26
₹5,650 / क्विंटल
पिछले वर्ष से ₹300 अधिक | खुले बाजार में ₹5,800–₹6,500 तक संभव
⚠️ MSP पर बिक्री के लिए नजदीकी NAFED/UP सहकारी केंद्र पर पंजीकरण जरूर करवाएं।
🌿
UP के लिए उपयुक्त सरसों की किस्में
सरसों की किस्म का चुनाव उपज, तेल की मात्रा और रोग प्रतिरोधकता पर सीधा असर डालता है। नीचे UP के लिए ICAR और UP कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित किस्में दी गई हैं।
किस्म
प्रकार
अवधि (दिन)
उपज (क्विं./एकड़)
विशेषता
Pusa Bold (B-9)
अगेती
125–130
8–10
सबसे लोकप्रिय, 42% तेल, माहू प्रतिरोधी
Pusa Mustard-25
मध्यम
130–135
10–12
उच्च उपज, सफेद रोली प्रतिरोधी
Pusa Mustard-30
मध्यम
128–133
10–12
अधिक तेल (44%), UP के लिए विशेष
RH-749
पछेती
135–140
9–11
देर से बुवाई के लिए, कम पाले का असर
Rohini (Bio-902)
अगेती
120–125
8–9
तेज पकने वाली, सिंचित और असिंचित दोनों
Kranti
मध्यम
130–135
9–10
रोग प्रतिरोधी, UP के पूर्वी जिलों के लिए
* अपने जिले के KVK से बीज उपलब्धता और अनुशंसित किस्म की जानकारी लें।
💡
UP के लिए सर्वोत्तम:Pusa Mustard-25 और Pusa Bold — UP के मैदानी क्षेत्रों में सबसे अधिक उपज और तेल की मात्रा देती हैं। हमेशा प्रमाणित बीज (Certified Seed) ही खरीदें — कृषि विभाग या IFFCO की दुकान से।
🚜
खेत तैयारी और बुवाई का सही तरीका
सरसों की कूड़ विधि से बुवाई — कतार से कतार 45 सेमी, पौधे से पौधे 15 सेमी
1
खेत की तैयारी
खरीफ फसल की कटाई के बाद एक गहरी जुताई (मिट्टी पलटने वाले हल से) और 2–3 हल्की जुताई करें। मिट्टी भुरभुरी और समतल बनाएं। 10 टन गोबर की खाद प्रति एकड़ आखिरी जुताई से पहले मिलाएं।
2
बुवाई का सही समय
UP के मैदानी क्षेत्रों में 1–25 अक्टूबर सर्वोत्तम समय है। इससे पहले बोने पर फूल आते समय गर्मी होती है और माहू का प्रकोप बढ़ता है। देर से बोने पर पाला नुकसान करता है।
3
बीज उपचार
बुवाई से पहले बीज को थीरम 2.5 ग्राम/किग्रा बीज की दर से उपचारित करें। इससे आर्द्रगलन (Damping Off) और बीजोढ़ रोगों से बचाव होता है। उपचारित बीज छाँव में सुखाएं, धूप में नहीं।
4
बुवाई विधि और दूरी
कतार से कतार: 45 सेमी और पौधे से पौधे: 15 सेमी। बीज 3–4 सेमी गहरा बोएं। 1.5–2 किग्रा बीज प्रति एकड़ पर्याप्त है। अधिक बीज से पौधे पतले और कमजोर होते हैं।
5
पतलाई (Thinning)
बुवाई के 15–20 दिन बाद अतिरिक्त पौधे निकाल दें — दो पौधों के बीच 15 सेमी की दूरी रखें। पतलाई न करने पर पौधे आपस में पोषण के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं और उपज घटती है।
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🧪
खाद और पोषण प्रबंधन
सरसों एक तिलहनी फसल है जिसे सल्फर (S) की विशेष आवश्यकता होती है — यह तेल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ाता है। सल्फर के लिए DAP की जगह SSP का उपयोग फायदेमंद है।
🧪 खाद की मात्रा — प्रति एकड़
पोषक तत्व
अनुशंसित मात्रा
स्रोत/खाद
कब डालें
नाइट्रोजन (N)
40 किग्रा
यूरिया (87 किग्रा)
आधी बुवाई पर, आधी पहली सिंचाई पर
फास्फोरस (P)
20 किग्रा
SSP (125 किग्रा) या DAP (43 किग्रा)
पूरी मात्रा बुवाई के समय
पोटाश (K)
20 किग्रा
MOP (33 किग्रा)
पूरी मात्रा बुवाई के समय
सल्फर (S)
20 किग्रा
SSP (सल्फर सहित) या जिप्सम
बुवाई के समय मिट्टी में मिलाएं
जिंक (Zn)
10–15 किग्रा
जिंक सल्फेट (21%)
बुवाई से पहले आखिरी जुताई में
* सरसों में SSP का उपयोग DAP से बेहतर है — फास्फोरस के साथ सल्फर भी मिलता है।
🌟
सल्फर का महत्व: सरसों में सल्फर की कमी से तेल की मात्रा 5–8% तक घट जाती है। SSP (Single Super Phosphate) एक ही बार में फास्फोरस और सल्फर दोनों देता है — और DAP से सस्ता भी है (₹400 vs ₹1,350/बोरी)।
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सिंचाई प्रबंधन
सरसों एक अर्ध-शुष्क (semi-arid) फसल है जिसे केवल 2–3 सिंचाई की जरूरत होती है। सही समय पर सिंचाई देने से उपज में 20–30% तक बढ़ोतरी होती है।
सिंचाई
बुवाई के बाद
फसल की अवस्था
महत्व
पहली (अनिवार्य)
30–35 दिन
शाखाएं निकलना (Branching)
सबसे जरूरी — यह न दें तो उपज आधी हो सकती है
दूसरी
70–75 दिन
फूल आना (Flowering)
फली बनने और दाने भरने के लिए आवश्यक
तीसरी (वैकल्पिक)
90–95 दिन
दाना भरना (Grain Filling)
मिट्टी सूखी हो तो दें — उपज और तेल बढ़ता है
* फूल आते समय तेज सिंचाई न दें — फूल झड़ सकते हैं। हल्की सिंचाई पर्याप्त है।
⚠️
सावधानी: सरसों में जल-भराव बिल्कुल सहन नहीं होता। खेत में पानी रुका तो जड़ें सड़ जाती हैं और फसल पीली पड़ जाती है। हमेशा हल्की सिंचाई दें और जल-निकासी का ध्यान रखें।
🔍
प्रमुख रोग और कीट — पहचान और उपाय
UP में सरसों की फसल को सबसे अधिक नुकसान माहू कीट (Mustard Aphid) से होता है — जो फरवरी में तेजी से फैलता है। समय पर नियंत्रण न करने पर 30–50% उपज नष्ट हो सकती है।
🦟
माहू कीट (Aphid)
छोटे हरे-पीले कीट पत्तियों का रस चूसते हैं। इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली/लीटर का छिड़काव करें। जनवरी-फरवरी में निगरानी जरूरी।
⬜
सफेद रोली (White Rust)
पत्तियों पर सफेद फफोले बनते हैं। मैनकोजेब 2.5 ग्राम/लीटर का छिड़काव करें। ठंड और नमी में अधिक।
लाल-काले धब्बेदार कीट — दाने चूसते हैं। क्विनलफॉस 1.5 मिली/लीटर का छिड़काव करें।
सरसों में माहू कीट (Aphid) का प्रकोप — जनवरी-फरवरी में सर्वाधिक
🚨
माहू नियंत्रण — Golden Rule: जब प्रति पौधा 10–15 माहू कीट दिखें तभी छिड़काव करें। इससे पहले नहीं — क्योंकि माहू के प्राकृतिक शत्रु (Lady Bird Beetle) उन्हें खा जाते हैं। अनावश्यक छिड़काव से ये उपकारी कीट भी मर जाते हैं।
✅
क्या करें — क्या न करें
✅ यह जरूर करें
प्रमाणित बीज खरीदें और बीज उपचार करें
अक्टूबर के पहले–तीसरे हफ्ते में बोएं
SSP का उपयोग करें — सल्फर भी मिलेगा
पहली सिंचाई 30–35 दिन पर जरूर दें
फरवरी में माहू के लिए नियमित निगरानी करें
MSP पर बिक्री के लिए पंजीकरण कराएं
बुवाई के 15–20 दिन बाद पतलाई करें
❌ यह गलती न करें
15 अक्टूबर के बाद बुवाई न करें
अधिक बीज न डालें — उपज घटेगी
फूल आते समय तेज सिंचाई न दें
खेत में जल-भराव न होने दें
माहू दिखते ही बिना गिने न छिड़कें
कच्ची (हरी) फलियाँ न काटें
DAP का एकमात्र विकल्प न मानें — SSP बेहतर
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कटाई और भंडारण
सरसों की फलियाँ जब पीली-भूरी हो जाएं और दाना सख्त हो जाए तब कटाई करें। बहुत देर करने पर फलियाँ चटक जाती हैं और दाना झड़ कर उपज घटती है।
कटाई का समय: फसल बोने के 120–140 दिन बाद — फरवरी के अंत से मार्च तक।
कटाई विधि: सुबह के समय (ओस में) काटें — दोपहर में फलियाँ अधिक चटकती हैं।
सुखाना: कटी फसल को 5–7 दिन खेत में या खलिहान में सुखाएं।
मड़ाई: ट्रैक्टर या थ्रेशर से दाना अलग करें। झड़कर बचे दाने भी उठाएं।
भंडारण: 8% से कम नमी पर ही भंडारण करें — नमी अधिक होने पर दाना फफूंद लग जाता है।
💡
मंडी टिप: सरसों को तुरंत बेचने की जल्दी न करें। फरवरी–मार्च में भाव कम होते हैं क्योंकि सभी बेचते हैं। मई–जून तक रोककर बेचने पर ₹500–₹800/क्विंटल अधिक भाव मिल सकता है।
💰
लागत और आय का अनुमान — प्रति एकड़
मद
अनुमानित खर्च (₹)
बीज (2 किग्रा)
₹500–₹700
खाद (SSP + यूरिया + MOP + जिंक)
₹3,500–₹4,500
जुताई + बुवाई
₹3,000–₹4,000
सिंचाई (2–3 बार)
₹1,500–₹2,000
कीटनाशक + फफूंदनाशी
₹1,000–₹1,500
कटाई + मड़ाई + मजदूरी
₹4,000–₹5,000
अन्य (परिवहन आदि)
₹1,500–₹2,000
कुल लागत
₹15,000–₹20,000
आय (10 क्विं. × ₹5,650 MSP)
₹56,500
शुद्ध मुनाफा
₹36,500–₹41,500
* खली से ₹3,000–₹5,000 अतिरिक्त आय संभव। बाजार भाव MSP से अधिक होने पर मुनाफा और बढ़ेगा।
📋
निष्कर्ष
सरसों UP के किसानों के लिए एक कम लागत, कम पानी और अच्छे मुनाफे वाली रबी फसल है। अक्टूबर में सही समय पर बुवाई, SSP से सल्फर की पूर्ति और फरवरी में माहू पर सतर्क नजर — ये तीन बातें आपकी फसल को सफल बनाएंगी।
सही किसान — सही समय — सही फैसला।
❓
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1UP में सरसों बोने का सबसे सही समय कौन सा है?
UP के मैदानी क्षेत्रों में 1–25 अक्टूबर सर्वोत्तम है। इससे पहले बोने पर माहू का प्रकोप बढ़ता है, देर से बोने पर पाला नुकसान करता है।
2सरसों में माहू (Aphid) का उपाय क्या है?
जब प्रति पौधा 10–15 माहू दिखें तब इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली/लीटर या थायमेथोक्सेम 0.3 ग्राम/लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। हल्की सिंचाई से भी माहू झड़ते हैं।
3सरसों में DAP की जगह SSP क्यों बेहतर है?
SSP में फास्फोरस के साथ सल्फर (S) भी होता है जो सरसों में तेल की मात्रा बढ़ाता है। SSP सस्ता भी है — ₹400 vs DAP ₹1,350 प्रति बोरी।
4एक एकड़ सरसों में कितना मुनाफा होता है?
10 क्विंटल उपज और ₹5,650 MSP से ₹56,500 आय। कुल लागत ₹15,000–₹20,000 निकालकर ₹36,000–₹41,000 शुद्ध मुनाफा संभव है।
5सरसों में कितनी सिंचाई जरूरी है?
केवल 2–3 सिंचाई पर्याप्त है — पहली 30–35 दिन पर (अनिवार्य), दूसरी फूल आते समय (70–75 दिन), तीसरी दाना भरते समय (90–95 दिन) — वैकल्पिक।
6UP में सरसों का MSP 2025-26 में क्या है?
रबी 2025-26 में सरसों का MSP ₹5,650 प्रति क्विंटल है। MSP पर बिक्री के लिए नजदीकी NAFED या UP सहकारी केंद्र पर पंजीकरण जरूरी है।
7सरसों की कटाई कब और कैसे करें?
जब 80–85% फलियाँ पीली-भूरी हो जाएं तब सुबह के समय काटें। देर करने पर फलियाँ चटक जाती हैं। 5–7 दिन सुखाकर थ्रेशर से मड़ाई करें।
8सरसों के बीज को कैसे उपचारित करें?
बुवाई से पहले थीरम 2.5 ग्राम/किग्रा बीज की दर से उपचारित करें। इससे बीजोढ़ रोग और आर्द्रगलन से बचाव होता है। उपचारित बीज छाँव में सुखाएं।
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