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🐛 कीट प्रकोप 🗓️ जुलाई–सितंबर 📍 मध्य प्रदेश · सोया पट्टी

सोयाबीन में इल्ली और चक्र भृंग Soybean Semilooper, Girdle Beetle & Stem Fly — Identification and Control

पत्ती जालीदार, एक शाखा नीचे लटकी और तना अंदर से खोखला — ये तीन अलग कीट हैं, एक नहीं। पहचान गलत हुई तो दवा का पूरा पैसा बेकार जाता है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 10 मिनट पढ़ें 📅 अगस्त 2026

मध्य प्रदेश की सोया पट्टी के तीन सबसे महँगे कीट

🌿
3 कीट
अलग पहचान, अलग इलाज
✂️
लटकी शाखा
तोड़ना ही सबसे सस्ता इलाज
💉
200 मि.ली./हे.
क्लोरएंट्रा. + लैम्ब्डा
📖

भूमिका

अगस्त का महीना है, सोयाबीन घुटने तक खड़ी है और खेत में घुसते ही पत्तियाँ छलनी दिखती हैं। नीचे झुककर देखिए — हरे रंग की इल्ली जो चलते समय पीठ का बीच वाला हिस्सा ऊपर उठाकर लूप बनाती है। यह सेमीलूपर है। पास ही किसी पौधे की एक शाखा नीचे लटकी मिलेगी, और उसके तने पर दो साफ गोल छल्ले कटे होंगे — वह चक्र भृंग (गर्डल बीटल) का काम है। और जो पौधा बिना किसी वजह के मुरझाकर बैठ गया, उसका तना चीरकर देखिए — अंदर एक पीली सुरंग मिलेगी, वह तना मक्खी है।

मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य है, और यहाँ सबसे ज़्यादा नुकसान इसी बात से होता है कि किसान तीनों कीटों को एक ही समस्या समझकर एक ही दवा बार-बार डाल देता है। पत्ती खाने वाली इल्ली ऊपर बैठती है, चक्र भृंग और तना मक्खी तने के अंदर रहते हैं — और तने के अंदर बैठे कीड़े पर छिड़काव तब तक बेकार है जब तक वह अंदर घुसने से पहले न मारा जाए। यह लेख यही तीन चीज़ें सिखाता है: किसे कैसे पहचानें, कब छिड़कें, और एक ही छिड़काव में तीनों कैसे सधें


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🔍

कौन-सा कीट है? — तीनों की अलग पहचान

सोयाबीन में इस मौसम में तीन तरह के कीट एक साथ रहते हैं। इलाज तय करने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि आपके खेत में कौन बैठा है, क्योंकि पत्ती खाने वाले और तना छेदने वाले कीटों का इलाज एक जैसा नहीं होता

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तीस सेकंड का टेस्ट: जिस पौधे की एक शाखा लटकी है उसे तोड़कर लंबाई में चीर दीजिए। अंदर सफेद इल्ली और मल भरा हुआ मिले तो चक्र भृंग है। पतली साफ सुरंग मिले तो तना मक्खी। तना अंदर से बिल्कुल साफ हो तो समस्या तने की है ही नहीं — पत्ती वाली इल्ली या पानी की कमी देखिए।

📊

स्वस्थ पौधा बनाम ग्रस्त पौधा

पहचान बिंदु✅ स्वस्थ सोयाबीन❌ कीट ग्रस्त
पत्तियाँपूरी, गहरी हरीजालीदार, कटी-फटी, सिर्फ नसें बची
शाखाएँसीधी, तनी हुईएक-दो शाखा नीचे लटकी, ऊपर से सूखी
तना (चीरने पर)अंदर सफेद, ठोससुरंग, लाल-भूरा रंग, अंदर इल्ली
तने पर निशानकोई नहींदो समानांतर कटे छल्ले
फलियाँभरी, बंदछेद, अंदर दाना खाया हुआ
पौधे का खड़ा रहनामज़बूतबिना बीमारी के मुरझाकर बैठा

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🛡️

बिना पैसे खर्च किए रोकथाम

चक्र भृंग के लिए यह हिस्सा सबसे ज़्यादा मायने रखता है, क्योंकि एक बार इल्ली तने के अंदर उतर गई तो कोई भी छिड़काव उस पौधे को नहीं बचा सकता। बचत सिर्फ अगले पौधे की होती है।


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दवा और सही मात्रा — एक छिड़काव में तीनों

ICAR-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर की सलाह का सार यह है: जहाँ पत्ती खाने वाली इल्ली, तना मक्खी और चक्र भृंग एक साथ हों, वहाँ अलग-अलग दवाएँ मिलाने के बजाय एक पूर्व-मिश्रित (रेडीमिक्स) दवा इस्तेमाल करें। यह सस्ता भी पड़ता है और छिड़काव भी एक ही लगता है।

दवा (तकनीकी नाम)मात्रा प्रति हेक्टेयरकिन कीटों पर
क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 9.3% + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 4.6% ZC200 मि.ली.इल्लियाँ + तना मक्खी + चक्र भृंग
थायामेथोक्सम + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन ZC125 मि.ली.इल्लियाँ + तना मक्खी + सफेद मक्खी
बीटासाइफ्लूथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड350 मि.ली.इल्लियाँ + रस चूसने वाले कीट
नोवालूरॉन + इंडोक्साकार्ब850 मि.ली.तम्बाकू व चने की इल्ली (छोटी अवस्था)
टेट्रानिलिप्रोल 18.18% SC250–300 मि.ली.चक्र भृंग (शुरुआती अवस्था)
थायाक्लोप्रिड 21.7% SC650 मि.ली.चक्र भृंग
प्रोफेनोफॉस 50% EC1,250 मि.ली.चक्र भृंग
क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC150 मि.ली.पत्ती खाने वाली इल्लियाँ
इंडोक्साकार्ब 15.8% EC333 मि.ली.पत्ती खाने वाली इल्लियाँ
फ्लूबेंडियामाइड 39.35% SC150 मि.ली.इल्लियाँ (फूल अवस्था में भी)
स्पिनेटोरम 11.7% SC450 मि.ली.इल्लियाँ (फूल अवस्था में भी)

पानी की मात्रा भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी दवा की। नैपसेक पंप से लगभग 450–500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर रखें — कम पानी में दवा पत्तियों के नीचे और तने तक नहीं पहुँचती, और वही छिड़काव "दवा ने काम नहीं किया" कहलाता है।

⚠️
ऊपर दी गई मात्राएँ ICAR-IISR इंदौर की प्रकाशित सलाह पर आधारित हैं, पर हर पैकिंग का फॉर्मूलेशन और प्रतिशत अलग होता है। खरीदते समय डिब्बे के लेबल पर सोयाबीन का नाम और उसी कीट का नाम लिखा है या नहीं यह ज़रूर देखें, और मात्रा अपने KVK या कृषि विभाग से पक्की कर लें। बिना लेबल वाली या दुकानदार के कहने पर बनाई गई "मिक्स दवा" कभी न लें।

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छिड़काव का सही समय


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ये गलतियाँ कभी न करें


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मध्य प्रदेश के लिए महीनेवार कैलेंडर

समय / फसल अवस्थाज़रूरी काम
बुवाई से पहले (जून)गहरी जुताई, कम प्रकोप वाली किस्म (NRC-268 / NRC-269 / JS 25-06) चुनें
बुवाई के 15–20 दिन बादतना मक्खी की पहली निगरानी — मुरझाए पौधे का तना चीरकर देखें
25–35 दिन (जुलाई)फेरोमोन ट्रैप व T खूँटियाँ लगाएँ; छोटी इल्ली दिखते ही पहला छिड़काव
35–50 दिन (अगस्त)चक्र भृंग का चरम — लटकी शाखाएँ तोड़ें, भृंग दिखते ही छिड़काव
फूल अवस्था (अगस्त–सितंबर)सेमीलूपर व तम्बाकू इल्ली का चरम; फूल-सुरक्षित दवा चुनें
फली भरने की अवस्था (सितंबर)चने की इल्ली पर नज़र — फली में छेद दिखते ही कदम उठाएँ
कटाई से पहलेलेबल पर लिखा प्रतीक्षा काल पूरा करें, तभी कटाई

निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — पहले पहचानिए, फिर पंप उठाइए; पत्ती वाला कीट और तने वाला कीट एक दवा से नहीं सधते। दूसरी — चक्र भृंग की लटकी शाखा तोड़ना सबसे सस्ता और सबसे असरदार इलाज है, और वह मुफ्त है। तीसरी — छोटी इल्ली पर किया गया एक सही छिड़काव, बड़ी इल्ली पर किए गए तीन छिड़कावों से बेहतर है

खेत का चक्कर लगाना दवा से सस्ता है — और अक्सर उससे ज़्यादा काम का।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1सोयाबीन में इल्ली की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?
जहाँ इल्लियाँ, तना मक्खी और चक्र भृंग एक साथ हों वहाँ ICAR-IISR इंदौर की सलाह के अनुसार क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 9.3% + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 4.6% ZC लगभग 200 मि.ली./हेक्टेयर या थायामेथोक्सम + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 125 मि.ली./हेक्टेयर सबसे उपयुक्त रहती है, क्योंकि एक ही छिड़काव में तीनों कीट सधते हैं। सिर्फ पत्ती खाने वाली इल्ली हो तो क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC 150 मि.ली./हे. या इंडोक्साकार्ब 15.8% EC 333 मि.ली./हे. पर्याप्त है।
2सोयाबीन में चक्र भृंग (गर्डल बीटल) की पहचान कैसे करें?
पहचान तने या डंठल पर कटे हुए दो समानांतर गोल छल्लों से होती है, जिनके ऊपर वाला हिस्सा सूखकर लटक जाता है। शाखा को लंबाई में चीरने पर अंदर सफेद इल्ली और भरा हुआ मल मिलता है — यही चक्र भृंग की पक्की पहचान है।
3चक्र भृंग की दवा और मात्रा क्या है?
शुरुआती अवस्था में टेट्रानिलिप्रोल 18.18% SC 250–300 मि.ली./हेक्टेयर, या थायाक्लोप्रिड 21.7% SC 650 मि.ली./हेक्टेयर, या प्रोफेनोफॉस 50% EC 1,250 मि.ली./हेक्टेयर का छिड़काव किया जाता है। छिड़काव तभी काम करता है जब भृंग दिखते ही किया जाए — शाखा लटकने के बाद इल्ली तने के अंदर पहुँच चुकी होती है और उस पौधे को बचाया नहीं जा सकता।
4सेमीलूपर और तम्बाकू की इल्ली में क्या फर्क है?
सेमीलूपर हल्के हरे रंग की होती है और चलते समय शरीर का बीच वाला हिस्सा मेहराब जैसा उठाकर लूप बनाती है, तथा पत्ती को खुरचकर जालीदार कर देती है। तम्बाकू की इल्ली शुरू में झुंड में एक ही पत्ती पर मिलती है, बड़ी होकर काली-भूरी हो जाती है, दिन में मिट्टी की दरारों में छिपती है और रात में निकलकर खाती है।
5सोयाबीन में तना मक्खी का पता कैसे चलेगा?
पता मुरझाए पौधे का तना लंबाई में चीरकर चलता है — अंदर एक पतली लाल-भूरी सुरंग मिलती है। ऊपर से पौधा कई दिन तक सामान्य दिखता रहता है, इसलिए बुवाई के 15–20 दिन बाद से ही मुरझाए पौधों को चीरकर देखना शुरू कर देना चाहिए।
6सोयाबीन में छिड़काव के लिए कितना पानी लगता है?
नैपसेक पंप से लगभग 450–500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर लगता है। दवा की मात्रा तय रहती है, पानी की नहीं — कम पानी में गाढ़ा घोल पत्तियों के नीचे और तने तक नहीं पहुँचता, और यही सबसे आम वजह है जिससे लोगों को लगता है कि दवा ने काम नहीं किया।
7क्या इल्ली के लिए बिना दवा के भी कुछ किया जा सकता है?
हाँ — प्रति हेक्टेयर लगभग 15 फेरोमोन ट्रैप (7–8 प्रति एकड़) लगाकर पतंगों की निगरानी करें और फसल से डेढ़-दो फीट ऊपर T आकार की खूँटियाँ गाड़ दें, जिन पर बैठकर पक्षी इल्लियाँ चुगते हैं। चक्र भृंग के लिए सबसे असरदार मुफ्त उपाय है लटकी हुई शाखाओं को तोड़कर खेत से बाहर नष्ट करना
8मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कौन सी किस्म में कीट कम लगते हैं?
ICAR-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर के परीक्षणों में NRC-268 में चक्र भृंग और तना मक्खी का प्रकोप सबसे कम मिला, उसके बाद NRC-269 और JS 25-06 का स्थान रहा। किस्म बदलना हर साल किए जाने वाले छिड़कावों से काफी सस्ता पड़ता है, इसलिए अगली बुवाई के लिए बीज चुनते समय यह ज़रूर देखें।
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