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🦠 वायरस रोग 🗓️ जुलाई–सितंबर 📍 मध्य प्रदेश · सोया पट्टी

सोयाबीन में पीला मोज़ेक रोग Yellow Mosaic Disease in Soybean — Whitefly Control & Management

सोयाबीन की ऊपर वाली नई पत्तियों पर पीले-हरे चितकबरे धब्बे और नीचे बैठी सफेद मक्खी — यह पीला मोज़ेक वायरस है। ग्रस्त पौधा कभी ठीक नहीं होता, इसलिए इलाज मक्खी का करना पड़ता है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 जुलाई 2026

मध्य प्रदेश की सोया पट्टी का सबसे महँगा रोग — पीला मोज़ेक

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सफेद मक्खी
वायरस का इकलौता वाहक
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फंगीसाइड
इस रोग पर बेकार
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125 मि.ली./हे.
थायामेथोक्सम + लैम्ब्डा
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भूमिका

सोयाबीन का खेत अच्छा खड़ा है, और अगस्त आते-आते ऊपर की नई पत्तियों पर बिखरे हुए पीले धब्बे दिखने लगते हैं। कुछ दिन में ये धब्बे फैलकर पत्ती को पीला-हरा चितकबरा (मोज़ेक) बना देते हैं, फिर पूरी पत्ती पीली पड़ जाती है, पौधा बौना रह जाता है और फलियों में दाना या तो बनता ही नहीं या सिकुड़ा हुआ निकलता है। यही है सोयाबीन का पीला मोज़ेक रोग (Yellow Mosaic Disease) — मध्य प्रदेश की "सोया प्रदेश" पट्टी का सबसे महँगा रोग।

इसे समझने के लिए एक बात सबसे पहले जान लीजिए: यह फफूंद का रोग नहीं, वायरस का रोग है — और यह वायरस अपने आप नहीं फैलता, इसे सफेद मक्खी (व्हाइट फ्लाई) एक पौधे से दूसरे पौधे तक ले जाती है। इसका सीधा मतलब यह है कि फफूंदनाशक (फंगीसाइड) डालने से यह रोग कभी नहीं रुकेगा। रुकेगा तो सिर्फ दो चीज़ों से — सफेद मक्खी का नियंत्रण और रोगग्रस्त पौधों को तुरंत उखाड़ना। इस लेख में पहचान, सफेद मक्खी की निगरानी, ICAR-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (इंदौर) की सलाह के अनुसार दवा और डोज़, और चक्र भृंग (गर्डल बीटल) का एक साथ प्रबंधन — सब आसान हिंदी में।


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पीला मोज़ेक रोग क्या है?

पीला मोज़ेक जेमिनीवायरस समूह के मुंगबीन येलो मोज़ेक इंडिया वायरस (MYMIV) से होता है। यह वायरस सोयाबीन के अलावा मूंग, उड़द और कई जंगली फलीदार पौधों पर भी रहता है — इसीलिए मूंग-उड़द के पास लगी सोयाबीन में यह रोग ज़्यादा मिलता है।

वायरस को फैलाने का काम सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) करती है। यह मक्खी रोगी पौधे का रस चूसती है, वायरस उसके शरीर में चला जाता है, और फिर वह जिस भी स्वस्थ पौधे पर बैठती है उसे संक्रमित कर देती है। एक बात ध्यान रखें — यह रोग छूने से, औज़ार से या हवा से नहीं फैलता, और बीज से भी नहीं फैलता। इसका एकमात्र रास्ता सफेद मक्खी है।

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यह रोग किस मौसम में फूटता है? जब मानसून में लंबा खिंचाव (ड्राई स्पेल) आता है और मौसम गर्म-सूखा हो जाता है, तब सफेद मक्खी की संख्या तेज़ी से बढ़ती है — और उसी के पीछे-पीछे पीला मोज़ेक फैलता है। मध्य प्रदेश में यह ज़्यादातर फूल आने से लेकर फली बनने की अवस्था (R1–R3) में दिखता है।

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पहचान — खेत में क्या देखें

पहचान बिंदु✅ स्वस्थ सोयाबीन❌ पीला मोज़ेक ग्रस्त
पीलापन कहाँ से शुरूकहीं नहींऊपर की नई पत्तियों से
पत्ती का नमूनाएकसार गहरी हरीपीले-हरे चितकबरे धब्बे
पत्ती की बनावटचौड़ी, सपाटछोटी, मोटी, नीचे मुड़ी
पौधे की ऊँचाईसामान्यबौना, कमज़ोर
फलियाँभरी, दानेदारकम, छोटी, दाना सिकुड़ा
पत्ती के नीचेसाफसफेद मक्खी मौजूद
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पीला मोज़ेक है या पीलिया (आयरन/सल्फर की कमी)? कमी से होने वाला पीलापन पूरे खेत में एकसार होता है और पत्ती की नसें हरी रहती हैं। पीला मोज़ेक टुकड़ों में, पौधे-दर-पौधे मिलता है और उसमें पीले-हरे धब्बे बेतरतीब होते हैं। यह फर्क समझ लेने से गलत इलाज पर खर्च होने वाला पैसा बच जाता है।

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असली निशाना — सफेद मक्खी की निगरानी

पीला मोज़ेक का इलाज असल में सफेद मक्खी का इलाज है। और मक्खी को दवा से पहले पीले चिपचिपे ट्रैप (yellow sticky trap) से पकड़ना और गिनना चाहिए।


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दवा और सही मात्रा (सफेद मक्खी + चक्र भृंग)

नीचे दी गई सिफ़ारिशें ICAR-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर द्वारा किसानों के लिए जारी की जाने वाली सलाह पर आधारित हैं। बड़ी सुविधा यह है कि इनमें से कुछ पूर्व-मिश्रित (premix) दवाएँ सफेद मक्खी और चक्र भृंग (गर्डल बीटल) दोनों पर एक साथ काम करती हैं।

दवा (तकनीकी नाम)मात्रा प्रति हेक्टेयरकिस पर काम करती है
थायामेथोक्सम + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन (premix)लगभग 125 मि.ली.सफेद मक्खी + चक्र भृंग + पत्ती खाने वाली इल्लियाँ
बीटासाइफ्लूथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड (premix)लगभग 350 मि.ली.सफेद मक्खी (वायरस का वाहक)
एसीटामिप्रिड 25% + बाइफेंथ्रिन 25% WGलगभग 250 ग्रामसफेद मक्खी + अन्य रस चूसक कीट
नीम तेल 1500 ppm (जैविक)लगभग 3–5 मि.ली./लीटर पानीशुरुआती अवस्था — मक्खी को रोकने के लिए
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ऊपर दी गई मात्राएँ सामान्य अनुशंसा हैं। खरीदने से पहले डिब्बे के लेबल पर "सोयाबीन" और "सफेद मक्खी / व्हाइट फ्लाई" लिखा है या नहीं ज़रूर देखें — CIB&RC लेबल के बाहर का प्रयोग सही नहीं है। अंतिम मात्रा, दवा का चुनाव और छिड़काव का समय अपने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या जिला कृषि विभाग से पुष्टि करके ही तय करें। छिड़काव करते समय नोज़ल पत्तियों के नीचे की ओर रखें — मक्खी वहीं बैठती है — और कटाई से पहले की प्रतीक्षा अवधि (PHI) का पालन करें।

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अगले साल की तैयारी — किस्म का चुनाव

जिस खेत में हर साल पीला मोज़ेक आता है, वहाँ सबसे टिकाऊ हल किस्म बदलना है। मध्य प्रदेश के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर अनुशंसित सोयाबीन किस्मों में NRC 142, NRC 138, NRC 150, NRC 152, JS 20-116, JS 21-72 और RVSM 2011-35 जैसी किस्में शामिल रही हैं।

⚠️
किस्मों की अनुशंसित सूची हर साल बदलती है और कोई भी किस्म हमेशा के लिए रोग-प्रतिरोधी नहीं रहती। इसलिए बीज खरीदने से पहले अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या ICAR-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर से इस साल की सूची और उसमें पीला मोज़ेक सहनशीलता की पुष्टि ज़रूर करें। प्रमाणित बीज ही खरीदें और बिल लें।

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ये गलतियाँ कभी न करें


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मध्य प्रदेश के लिए कैलेंडर — कब क्या करें

समयज़रूरी काम
जून (बुवाई से पहले)KVK से इस साल की अनुशंसित किस्म लें, प्रमाणित बीज खरीदें, खेत व मेड़ की सफाई
बुवाई (मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद)समय से और उचित दूरी पर बुवाई; मूंग-उड़द से सटाकर न लगाएँ
बुवाई + 20–25 दिनपीले स्टिकी ट्रैप लगाएँ; सुबह पत्ती पलटकर सफेद मक्खी की जाँच शुरू करें
फूल आने की अवस्था (R1)पहला पीला पौधा दिखते ही उखाड़ें; मक्खी बढ़ रही हो तो नीम/सिफ़ारिश की दवा
फली बनने की अवस्था (R3) — सबसे खतरनाकहर 3–4 दिन पर खेत का चक्कर; रोगिंग जारी; ज़रूरत पर premix छिड़काव
मानसून में लंबा खिंचाव आने परविशेष सतर्कता — सूखे-गर्म दिनों में सफेद मक्खी सबसे तेज़ बढ़ती है
कटाई के बादअवशेष और जंगली फलीदार खरपतवार नष्ट करें; अगले साल किस्म बदलने की योजना

निष्कर्ष

पीला मोज़ेक को हराने का रास्ता सीधा है — वायरस पर नहीं, उसके वाहक पर वार करें। तीन बातें याद रखें: पहला पीला पौधा दिखते ही उखाड़कर खेत से बाहर नष्ट करें, सफेद मक्खी को पीले स्टिकी ट्रैप से पहले ही पकड़ लें, और छिड़काव करें तो पत्तियों के नीचे, सही premix दवा के साथ

सोयाबीन में पीलापन दिखने के बाद इलाज नहीं होता — इसलिए असली मुकाबला सफेद मक्खी से है, पीली पत्ती से नहीं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1सोयाबीन में पीला मोज़ेक रोग की पहचान कैसे करें?
पहचान ऊपर की नई पत्तियों पर बिखरे पीले धब्बों से शुरू होती है, जो फैलकर पत्ती को पीला-हरा चितकबरा (मोज़ेक) बना देते हैं; पत्तियाँ छोटी और नीचे मुड़ जाती हैं, पौधा बौना रहता है और फलियाँ कम व दाना सिकुड़ा हुआ बनता है। पत्ती पलटने पर सफेद मक्खी मिलना इसकी पुष्टि करता है।
2सोयाबीन में पीला मोज़ेक किससे फैलता है?
यह MYMIV नाम के वायरस से होता है और इसे सिर्फ सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) फैलाती है। यह रोग छूने से, औज़ार से, हवा से या बीज से नहीं फैलता। इसीलिए इसका पूरा नियंत्रण सफेद मक्खी को रोकने और रोगी पौधों को खेत से हटाने पर टिका है।
3पीला मोज़ेक के लिए कौन सी दवा डालें और कितनी मात्रा में?
ICAR-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर की सलाह के अनुसार सफेद मक्खी रोकने के लिए थायामेथोक्सम + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन लगभग 125 मि.ली./हेक्टेयर या बीटासाइफ्लूथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड लगभग 350 मि.ली./हेक्टेयर का छिड़काव किया जाता है; एसीटामिप्रिड 25% + बाइफेंथ्रिन 25% WG लगभग 250 ग्राम/हेक्टेयर भी प्रयोग होता है। मात्रा और लेबल की पुष्टि अपने KVK से ज़रूर करें।
4क्या पीला मोज़ेक पर फफूंदनाशक (फंगीसाइड) काम करता है?
नहीं — पीला मोज़ेक वायरस का रोग है, फफूंद का नहीं, इसलिए किसी भी फफूंदनाशक का इस पर कोई असर नहीं होता और वह पैसा पूरी तरह बेकार जाता है। असली इलाज है रोगी पौधे उखाड़ना और सफेद मक्खी का नियंत्रण करना
5क्या पीला मोज़ेक से ग्रस्त पौधा दोबारा ठीक हो सकता है?
नहीं — एक बार संक्रमित पौधा कभी ठीक नहीं होता और वह पूरे मौसम सफेद मक्खी के लिए वायरस का भंडार बना रहता है। इसीलिए सलाह यह है कि ऐसे पौधों को तुरंत जड़ समेत उखाड़कर खेत से बाहर नष्ट कर दें — मेड़ पर फेंकने से वायरस वापस खेत में लौट आता है।
6सोयाबीन में पीला मोज़ेक और पोषक तत्व की कमी में क्या फर्क है?
पोषक तत्व की कमी का पीलापन पूरे खेत में एकसार होता है और उसमें पत्ती की नसें हरी रहती हैं। पीला मोज़ेक टुकड़ों में, पौधे-दर-पौधे मिलता है, उसके धब्बे बेतरतीब होते हैं, पौधा बौना रहता है और पत्ती पलटने पर सफेद मक्खी मिलती है।
7मध्य प्रदेश में पीला मोज़ेक किस समय सबसे ज़्यादा आता है?
मध्य प्रदेश में यह ज़्यादातर फूल आने से फली बनने की अवस्था (R1–R3), यानी अगस्त के आसपास दिखता है। सबसे बड़ा खतरा तब बनता है जब मानसून में लंबा खिंचाव (ड्राई स्पेल) आ जाए — गर्म-सूखे दिनों में सफेद मक्खी की संख्या तेज़ी से बढ़ती है और उसी के साथ रोग फैलता है।
8क्या सोयाबीन के साथ चक्र भृंग (गर्डल बीटल) का इलाज एक साथ हो सकता है?
हाँ — थायामेथोक्सम + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन (लगभग 125 मि.ली./हेक्टेयर) जैसी पूर्व-मिश्रित दवा सफेद मक्खी, चक्र भृंग और पत्ती खाने वाली इल्लियों — तीनों पर एक साथ काम करती है, जिससे एक ही छिड़काव में दोनों समस्याएँ सधती हैं। लेबल पर सोयाबीन और लक्षित कीट का नाम ज़रूर देखें।
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