💧 सिंचाई · Pump Set
पंप सेट किराये पर लेना उस किसान के लिए है जिसके पास अपना ट्यूबवेल या बिजली कनेक्शन नहीं है, या जिसका पंप ऐन सिंचाई के वक़्त बैठ गया है। डीज़ल पंप कहीं भी ले जाया जा सकता है — नहर, तालाब, नाले या पड़ोसी के बोर से — और यही इसकी सबसे बड़ी ताक़त है। किराया घंटे के हिसाब से चलता है और डीज़ल लगभग हमेशा किसान का अपना लगता है, इसलिए असली खर्च किराया और डीज़ल दोनों जोड़कर ही निकलता है। सूखे के दिनों में रेट तेज़ी से चढ़ता है, इसलिए मई से पहले बात कर लेना सस्ता पड़ता है।
रेंज सरकारी कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की रेट लिस्ट और किसानों से मिले किराये के आँकड़ों को मिलाकर बनाई गई है। यह अनुमान है, तय भाव नहीं — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से किराया घटता-बढ़ता है।
सरकार ने हर ब्लॉक में यंत्रों के किराया केंद्र बनाए हैं, जहाँ मशीनें बाज़ार से सस्ते किराये पर मिलती हैं। सरकारी FARMS ऐप पर अपने आसपास का CHC ढूँढकर सीधे बुकिंग की जा सकती है।
ज़्यादातर सौदे आज भी गाँव में ही होते हैं — पड़ोसी किसान, सहकारी समिति या FPO के पास। रेट पूछने से पहले ऊपर दी रेंज देख लीजिए, ताकि आपको पता हो कि सही दाम क्या है। सीज़न के पीक हफ़्ते से 8–10 दिन पहले बात कर लेना सबसे सस्ता पड़ता है।
कौन-सी मशीन आपके ब्लॉक में कहाँ उपलब्ध है और उस पर कितनी सब्सिडी चल रही है — इसकी सही जानकारी यहीं मिलती है। यंत्र खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी का हिसाब भी एक बार ज़रूर देख लीजिए।
पंप सेट का किराया आमतौर पर ₹150–₹300 प्रति घंटा रहता है। अलग-अलग हिसाब से यह ₹150 से ₹1500 के बीच पड़ता है। यह अनुमानित रेंज है — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से रेट बदलता है।
किराये में डीज़ल है या नहीं — 5 HP का पंप लगभग 1 लीटर डीज़ल प्रति घंटा पीता है। इसके अलावा मशीन की हालत खुद देख लें और रेट में क्या-क्या शामिल है — डीज़ल, चालक, ढुलाई — यह पहले ही साफ़ कर लें।
आमतौर पर बिना चालक होती है और डीज़ल/बिजली किसान की लगता है। यह हर मालिक के साथ बदलता है, इसलिए सौदा तय करते समय यही सबसे पहले पूछिए — किराये को लेकर सबसे ज़्यादा झगड़े इसी बात पर होते हैं।
पूरे साल — मई–जून और सूखे में सबसे ज़्यादा में माँग सबसे ज़्यादा रहती है और तभी रेट भी चढ़ता है। उस दौर से 8–10 दिन पहले बुकिंग कर लेने पर मशीन भी मिलती है और किराया भी कम लगता है।