💧 सिंचाई · Sprinkler Set
स्प्रिंकलर बारिश की तरह पानी छिड़कता है, इसलिए क्यारी बनाने और मेड़ बाँधने की ज़रूरत नहीं पड़ती और ऊँच-नीच वाले खेत में भी पानी बराबर पहुँचता है। बाढ़ सिंचाई के मुक़ाबले पानी 30–40% तक बचता है, जो उन इलाक़ों में सीधा पैसा है जहाँ डीज़ल से पानी चलता है। गेहूँ, चना, सरसों, मूँगफली और सब्ज़ियों में यह सबसे ज़्यादा चलता है। किराये पर पूरा सेट — पाइप, नोज़ल और राइज़र — एक साथ मिलता है, पर पंप का इंतज़ाम आमतौर पर किसान का अपना होता है।
रेंज सरकारी कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की रेट लिस्ट और किसानों से मिले किराये के आँकड़ों को मिलाकर बनाई गई है। यह अनुमान है, तय भाव नहीं — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से किराया घटता-बढ़ता है।
सरकार ने हर ब्लॉक में यंत्रों के किराया केंद्र बनाए हैं, जहाँ मशीनें बाज़ार से सस्ते किराये पर मिलती हैं। सरकारी FARMS ऐप पर अपने आसपास का CHC ढूँढकर सीधे बुकिंग की जा सकती है।
ज़्यादातर सौदे आज भी गाँव में ही होते हैं — पड़ोसी किसान, सहकारी समिति या FPO के पास। रेट पूछने से पहले ऊपर दी रेंज देख लीजिए, ताकि आपको पता हो कि सही दाम क्या है। सीज़न के पीक हफ़्ते से 8–10 दिन पहले बात कर लेना सबसे सस्ता पड़ता है।
कौन-सी मशीन आपके ब्लॉक में कहाँ उपलब्ध है और उस पर कितनी सब्सिडी चल रही है — इसकी सही जानकारी यहीं मिलती है। यंत्र खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी का हिसाब भी एक बार ज़रूर देख लीजिए।
स्प्रिंकलर सेट का किराया आमतौर पर ₹700–₹1500 प्रति एकड़ प्रति सिंचाई रहता है। अलग-अलग हिसाब से यह ₹700 से ₹7000 के बीच पड़ता है। यह अनुमानित रेंज है — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से रेट बदलता है।
सेट कितने एकड़ का है और कितने पाइप मिलेंगे। इसके अलावा मशीन की हालत खुद देख लें और रेट में क्या-क्या शामिल है — डीज़ल, चालक, ढुलाई — यह पहले ही साफ़ कर लें।
आमतौर पर बिना चालक होती है और पंप व डीज़ल किसान का लगता है। यह हर मालिक के साथ बदलता है, इसलिए सौदा तय करते समय यही सबसे पहले पूछिए — किराये को लेकर सबसे ज़्यादा झगड़े इसी बात पर होते हैं।
रबी सिंचाई, गर्मी की फसल में माँग सबसे ज़्यादा रहती है और तभी रेट भी चढ़ता है। उस दौर से 8–10 दिन पहले बुकिंग कर लेने पर मशीन भी मिलती है और किराया भी कम लगता है।