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🐛 फसल कीट 🗓️ जुलाई–अक्टूबर सबसे तेज़ 📍 पश्चिमी उत्तर प्रदेश · गन्ना पट्टी

गन्ने में चोटी बेधक (Top Borer) Top Borer in Sugarcane — Identification, Trichocard & Control

गन्ने की ऊपरी पत्तियाँ छोटी और गुच्छे जैसी, मिडरिब में लाल सुरंग और बढ़वार रुकी हुई — यह चोटी बेधक है। पौधा मरता नहीं, बस बढ़ना बंद कर देता है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 जुलाई 2026

बरसात में गन्ने की लंबाई और परता खाने वाला कीट

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गुच्छेदार चोटी
सबसे पक्की पहचान
🔄
4–5
पीढ़ियाँ हर साल
🪳
15 दिन
ट्राइकोकार्ड का अंतराल
📖

भूमिका

गन्ने का खेत दूर से हरा-भरा दिखता है, पर पास जाकर देखिए — कुछ पौधों की ऊपर की पत्तियाँ छोटी, गुच्छे जैसी और झाड़ीनुमा हो गई हैं, और गन्ना ऊपर की ओर बढ़ना ही बंद कर चुका है। पत्ती को रोशनी की तरफ करके देखिए, बीच की मोटी नस (मिडरिब) में लाल-भूरी सुरंग दिखेगी, और पत्ती पर एक कतार में छेद। यही है चोटी बेधक (Top Borer) — पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गन्ना पट्टी का सबसे महँगा कीट।

इस कीट की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह गन्ने की सबसे ऊपरी बढ़ती हुई कली (ग्रोइंग पॉइंट) को ही मार देता है। पौधा मरता नहीं — बस बढ़ना बंद कर देता है और बगल से कमज़ोर कल्ले निकालने लगता है। इससे गन्ने की लंबाई, वज़न और चीनी परता (शुगर रिकवरी) तीनों गिर जाते हैं। साल में इसकी चार-पाँच पीढ़ियाँ बनती हैं, और बरसात वाली पीढ़ियाँ (जुलाई से अक्टूबर) सबसे ज़्यादा नुकसान करती हैं। इस लेख में पक्की पहचान, अंकुर बेधक से फर्क, ट्राइकोकार्ड से जैविक नियंत्रण और उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग की सलाह के अनुसार दवा — आसान हिंदी में।


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पहचान — खेत में क्या देखें

पहचान बिंदु✅ स्वस्थ गन्ना❌ चोटी बेधक ग्रस्त
ऊपर की पत्तियाँलंबी, फैली हुईछोटी, गुच्छे जैसी (bunchy top)
पत्ती की मिडरिबसाफ हरीलाल-भूरी सुरंग
नई पत्तीपूरीएक कतार में आर-पार छेद
तने की बढ़वारलगातार लंबाई बढ़ती हैरुक जाती है, गाँठें पास-पास
पत्ती के नीचेसाफसुनहरे रोओं से ढका अंडा समूह
असरपूरा वज़न और परतालंबाई, वज़न और चीनी परता तीनों कम

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चोटी बेधक या अंकुर बेधक? — फर्क पहचानिए

दोनों कीट "डेड हार्ट" बनाते हैं, इसलिए किसान अक्सर एक को दूसरा समझ लेते हैं — और गलत समय पर गलत इलाज कर बैठते हैं। फर्क पहचानने का सबसे आसान तरीका सूँघना है।

बातचोटी बेधक (Top Borer)अंकुर बेधक (Early Shoot Borer)
डेड हार्ट की गंधगंध नहीं आतीतेज़ सड़ी हुई दुर्गंध आती है
मुख्य समयमार्च से अक्टूबर, बरसात में सबसे ज़्यादामुख्यतः शुरुआती अवस्था (मार्च–जून)
बड़े गन्ने पर असरहाँ — गुच्छेदार चोटी बनती हैनहीं — यह छोटे कल्लों को मारता है
घुसने का रास्ताऊपर से, पत्ती की मिडरिब के रास्तेज़मीन के पास से, तने में छेद करके
पहचानमिडरिब में लाल सुरंग, छेदों की कतारज़मीन के पास तने में छेद और मल
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दो सेकंड की जाँच: सूखी गोभ खींचकर सूँघिए। बदबू आए तो अंकुर बेधक, बदबू न आए तो चोटी बेधक। यह एक जाँच पूरे सीज़न की रणनीति बदल देती है, क्योंकि दोनों का इलाज और समय अलग है।

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यह साल भर क्यों लौटता रहता है?

चोटी बेधक की एक साल में चार से पाँच पीढ़ियाँ बनती हैं। मादा पतंगा पत्ती के नीचे अंडों का समूह देती है और उसे अपने शरीर के सुनहरे-भूरे रोओं से ढक देती है, ताकि परजीवी और पक्षी उन्हें न पहचानें।


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ट्राइकोकार्ड — सबसे भरोसेमंद जैविक उपाय

ट्राइकोग्रामा एक बहुत छोटी परजीवी ततैया है जो चोटी बेधक के अंडों के अंदर अपना अंडा दे देती है — यानी इल्ली बनने से पहले ही कीट खत्म। यह गन्ने की फसल को कोई नुकसान नहीं पहुँचाती और इसका कोई अवशेष भी नहीं रहता।


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रासायनिक नियंत्रण — दवा और सही तरीका

चोटी बेधक की इल्ली गन्ने के अंदर बैठकर खाती है, इसलिए ऊपर से किया गया साधारण छिड़काव इस पर काम नहीं करता। उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग की सलाह में इसके लिए जड़ के पास दवा डालकर (ड्रेंचिंग) उसके तुरंत बाद सिंचाई करने की विधि बताई जाती है, ताकि दवा जड़ से पौधे के अंदर पहुँचे।

दवा (तकनीकी नाम)मात्रा (प्रति हेक्टेयर, 1000 लीटर पानी में)तरीका
क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 18.5% SCलगभग 375 मि.ली.जड़ क्षेत्र में ड्रेंचिंग, तुरंत बाद सिंचाई
फिप्रोनिल 40% + इमिडाक्लोप्रिड 40% WGलगभग 500 ग्रामजड़ क्षेत्र में ड्रेंचिंग
क्लोरएंट्रानिलिप्रोल + थायामेथोक्सम (संयुक्त)लगभग 600 ग्राम/मि.ली.जड़ क्षेत्र में ड्रेंचिंग
ट्राइकोकार्ड (जैविक)15 दिन के अंतर पर बार-बारपत्ती के नीचे पिन से लगाएँ
⚠️
ऊपर दी गई मात्राएँ सामान्य अनुशंसा हैं और ये ड्रेंचिंग (जड़ में डालने) के लिए हैं, सामान्य छिड़काव के लिए नहीं — मात्रा और तरीका दोनों गलत हो जाएँ तो न असर होगा, न पैसा वापस आएगा। खरीदने से पहले लेबल पर "गन्ना" और "चोटी बेधक" लिखा है या नहीं ज़रूर देखें, और अंतिम मात्रा तथा समय अपने गन्ना विकास निरीक्षक, चीनी मिल की गन्ना समिति या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से पुष्टि करके ही तय करें। दवा डालने के आसपास ट्राइकोकार्ड न लगाएँ।

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ये गलतियाँ कभी न करें


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उत्तर प्रदेश के लिए कैलेंडर

समयज़रूरी काम
फरवरी – मार्च (बुवाई)स्वस्थ बीज गन्ना, बीज उपचार; पेड़ी में ठूँठ ज़मीन के बराबर काटें
मार्च – अप्रैलपहली पीढ़ी की निगरानी; ट्राइकोकार्ड लगाना शुरू करें
अप्रैल – मईज़रूरत पर जड़ में ड्रेंचिंग और तुरंत सिंचाई
जुलाई – अक्टूबर (सबसे खतरनाक)हर हफ्ते खेत का चक्कर; अंडा समूह और गुच्छेदार चोटी तुरंत हटाएँ; ट्राइकोकार्ड 15 दिन के अंतर पर
अगस्त – सितंबरडीट्रैशिंग; बाँधना (टाई करना); जल निकासी
कटाई के बादअवशेष और ठूँठ नष्ट करें — यही अगले साल का असली बचाव है

निष्कर्ष

चोटी बेधक को दवा से नहीं, लगातार नज़र और सही समय से हराया जाता है। तीन बातें याद रखें: पत्ती के नीचे दिखने वाले रोएँदार अंडा समूह तुरंत तोड़ें, ट्राइकोकार्ड 15 दिन के अंतर पर बार-बार लगाएँ, और दवा डालनी हो तो जड़ में डालें और उसके तुरंत बाद सिंचाई करें

गुच्छेदार चोटी बन जाने के बाद वह गन्ना कभी पूरा नहीं होता — इसलिए असली काम उससे पहले का है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1गन्ने में चोटी बेधक की पहचान कैसे करें?
सबसे पक्की पहचान है गुच्छेदार चोटी (bunchy top) — ऊपर की पत्तियाँ छोटी और गुच्छे जैसी हो जाती हैं और गन्ने की लंबाई बढ़ना रुक जाता है। साथ में पत्ती की बीच वाली नस (मिडरिब) में लाल-भूरी सुरंग, नई पत्ती पर एक कतार में आर-पार छेद, और पत्ती के नीचे सुनहरे रोओं से ढका अंडों का समूह मिलता है।
2चोटी बेधक और अंकुर बेधक में क्या फर्क है?
सबसे आसान जाँच है सूखी गोभ (डेड हार्ट) को सूँघनाअंकुर बेधक में तेज़ सड़ी हुई दुर्गंध आती है, चोटी बेधक में कोई गंध नहीं आती। इसके अलावा अंकुर बेधक ज़मीन के पास से तने में घुसता है और मुख्यतः छोटे कल्लों को मारता है, जबकि चोटी बेधक ऊपर से पत्ती की मिडरिब के रास्ते घुसता है और बड़े गन्ने में गुच्छेदार चोटी बनाता है।
3चोटी बेधक के लिए कौन सी दवा और कितनी मात्रा में डालें?
उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग की सलाह में क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC लगभग 375 मि.ली. प्रति हेक्टेयर, 1000 लीटर पानी में घोलकर जड़ क्षेत्र में ड्रेंचिंग और उसके तुरंत बाद सिंचाई करने को कहा जाता है। विकल्प के रूप में फिप्रोनिल 40% + इमिडाक्लोप्रिड 40% WG लगभग 500 ग्राम/हेक्टेयर भी प्रयोग होता है। यह ड्रेंचिंग की मात्रा है, सामान्य छिड़काव की नहीं।
4क्या ऊपर से छिड़काव करने से चोटी बेधक मर जाता है?
नहीं — इल्ली गन्ने के तने के अंदर बैठकर खाती है, इसलिए ऊपर से किया गया साधारण छिड़काव उस तक पहुँचता ही नहीं। इसीलिए इसके लिए जड़ के पास दवा डालकर तुरंत सिंचाई करने (ड्रेंचिंग) की विधि बताई जाती है, ताकि दवा जड़ के रास्ते पूरे पौधे में फैले।
5ट्राइकोकार्ड क्या है और इसे कैसे लगाएँ?
ट्राइकोकार्ड एक छोटा गत्ते का टुकड़ा होता है जिस पर ट्राइकोग्रामा नाम की परजीवी ततैया के अंडे चिपके रहते हैं — यह ततैया चोटी बेधक के अंडों के अंदर अपना अंडा देकर उसे इल्ली बनने से पहले ही खत्म कर देती है। कार्ड को टुकड़ों में काटकर पत्ती के नीचे की तरफ, शाम के समय पिन से लगाएँ और लगभग 15 दिन के अंतर पर बार-बार दोहराएँ। इसके आसपास कीटनाशक का छिड़काव न करें।
6चोटी बेधक का प्रकोप किस महीने सबसे ज़्यादा होता है?
साल में इसकी चार-पाँच पीढ़ियाँ बनती हैं, और जुलाई से अक्टूबर तक की बरसाती पीढ़ियाँ सबसे ज़्यादा नुकसान करती हैं — इसी दौर में गुच्छेदार चोटी बनती है और गन्ने की लंबाई, वज़न तथा चीनी परता तीनों गिरते हैं। इसलिए इन महीनों में हर हफ्ते खेत का चक्कर लगाना ज़रूरी है।
7क्या पेड़ी (रैटून) फसल में चोटी बेधक ज़्यादा लगता है?
हाँ — कीट कटाई के बाद बचे ठूँठ और फसल अवशेषों में सुप्त अवस्था में सर्दी काटता है और अगले साल वहीं से सक्रिय हो जाता है, इसलिए पेड़ी फसल में इसका प्रकोप ज़्यादा मिलता है। बचाव यह है कि कटाई के बाद ठूँठ ज़मीन के बराबर काटें और अवशेष खेत में सड़ने न दें
8चोटी बेधक से गन्ने की उपज पर क्या असर पड़ता है?
यह कीट पौधे को मारता नहीं, बल्कि सबसे ऊपर की बढ़ती हुई कली को खत्म कर देता है, जिससे गन्ने की लंबाई, वज़न और चीनी परता (शुगर रिकवरी) तीनों घट जाते हैं। ऊपर की कली मरने के बाद पौधा बगल से कमज़ोर कल्ले निकालता है, जो कभी अच्छा गन्ना नहीं बनते — इसलिए नुकसान वज़न और मिल में मिलने वाले दाम, दोनों पर पड़ता है।
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