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🗓️ 15 सितंबर – 31 अक्टूबर 📍 उत्तर प्रदेश 🌿 गन्ना

शरदकालीन गन्ना बुवाई Autumn Sugarcane Planting — Timing, Seed Rate and Intercropping

बसंत में बोया गन्ना खेत में 10 महीने रहता है, शरद में बोया 13–14 महीने। यही अंतर उपज, चीनी परता और एक पूरी सहफसल में बदलता है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 सितंबर 2026

एक ही खेत से गन्ना और सर्दी की एक फसल

🗓️
15 सित – 31 अक्टू
बुवाई की खिड़की
📏
120 सेमी
ट्रेंच से ट्रेंच की दूरी
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35–40 हज़ार
तीन आँख वाले टुकड़े / हेक्टेयर
📖

भूमिका

उत्तर प्रदेश में गन्ना बोने के दो समय हैं — शरदकालीन (सितंबर–अक्टूबर) और बसंतकालीन (फरवरी–मार्च)। ज़्यादातर किसान बसंत में बोते हैं, क्योंकि तब खेत खाली रहता है और काम आसान लगता है। पर जिन किसानों की पर्ची और भुगतान सबसे ऊपर रहते हैं, वे शरद में बोते हैं।

वजह सीधी है। शरद में बोया गन्ना सर्दी आने से पहले जड़ पकड़ लेता है, फरवरी–मार्च में कल्ले फूटने का पूरा मौसम पाता है, और मिल तक पहुँचते-पहुँचते उसकी लंबाई, वज़न और चीनी परता — तीनों बसंत वाले गन्ने से बेहतर होते हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि शरद के गन्ने के बीच आलू, सरसों, मसूर या लहसुन बोकर गन्ने की पूरी लागत उसी साल निकाली जा सकती है। यह लेख वही तरीका, समय-सारणी और मात्राएँ बताता है।


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⚖️

शरदकालीन बुवाई बसंत से बेहतर क्यों है

अंतर सिर्फ़ महीने का नहीं है। दोनों फसलों को खेत में मिलने वाला समय ही अलग है — और गन्ना उसी समय का पैसा बनाता है।

बातबसंतकालीन (फरवरी–मार्च)शरदकालीन (सितंबर–अक्टूबर)
खेत में कुल समयलगभग 10–11 महीनेलगभग 13–14 महीने
जड़ पकड़ने का मौसमगर्मी शुरू होते हीठंड से पहले, नमी में
कल्ले फूटनागर्मी में, कमफरवरी–अप्रैल में, भरपूर
सहफसल की गुंजाइशलगभग नहींआलू, सरसों, मसूर, लहसुन, मटर
उपजअच्छे प्रबंधन में 700–800 कुंतल/हेक्टेयरअच्छे प्रबंधन में 1200–1300 कुंतल/हेक्टेयर तक
चीनी परतासामान्यबेहतर — मिल जल्दी पर्ची देती है
पानी की माँगगर्मी में शुरुआती सिंचाई ज़रूरीसर्दी में कम, अप्रैल से बढ़ती है
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शरदकालीन गन्ने की असली कमाई सहफसल है। गन्ना 120 सेंटीमीटर की दूरी पर बोया जाए तो बीच की जगह सर्दी भर खाली पड़ी रहती है — उसी जगह आलू या सरसों की एक पूरी फसल निकल आती है, और गन्ने की उपज घटती नहीं।

🗓️

सही समय — और देर होने पर क्या होता है

शरदकालीन गन्ने की बुवाई 15 सितंबर से 31 अक्टूबर के बीच की जाती है। उत्तर प्रदेश की परिस्थितियों में 15 से 30 अक्टूबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है — तब तक धान या धान के खेत की नमी सधी रहती है और पाला अभी दूर है।


🚜

ट्रेंच विधि — नाप जो याद रखनी है

ट्रेंच (नाली) विधि में गन्ना समतल खेत में नहीं, एक उथली नाली में बोया जाता है। इससे शुरुआती नमी नाली में टिकती है, हवा-पानी के तेज़ झोंके में गन्ना गिरता कम है, और बीच की चौड़ी जगह सहफसल के लिए मिल जाती है।

नापसिफारिश
नाली की चौड़ाईलगभग एक फुट (30 सेंटीमीटर)
नाली की गहराई25–30 सेंटीमीटर
नाली से नाली की दूरी120 सेंटीमीटर (4 फुट)
परंपरागत कूँड़ विधि में दूरी90 सेंटीमीटर (3 फुट)
टुकड़ा रखने का तरीकानाली की तली में, आँख दाएँ-बाएँ, सिरे से सिरा मिलाकर
मिट्टी की परत3–5 सेंटीमीटर — इससे ज़्यादा नहीं
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120 सेंटीमीटर की दूरी सुनने में ज़्यादा लगती है और पहली नज़र में "गन्ना कम हो जाएगा" जैसा डर देती है। होता उल्टा है — चौड़ी दूरी पर धूप हर लाइन तक पहुँचती है, कल्ले ज़्यादा फूटते हैं, और बीच में एक पूरी सहफसल आ जाती है। लाइन पास-पास रखने से सिर्फ़ बीज का खर्च बढ़ता है।

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बीज — किस्म, टुकड़ा और बीज दर

गन्ने में "बीज" अलग से नहीं खरीदा जाता, गन्ना ही बीज है — इसलिए बीज चुनने में की गई लापरवाही पूरे साल साथ चलती है।

बीज दरमात्रा (प्रति हेक्टेयर)
तीन आँख वाले टुकड़ेलगभग 35,000–40,000 टुकड़े
दो आँख वाले टुकड़ेलगभग 50,000–60,000 टुकड़े
वज़न के हिसाब सेमोटाई के अनुसार लगभग 75–80 कुंतल
⚠️
किस्म का चुनाव अपने क्षेत्र के हिसाब से कीजिए। उत्तर प्रदेश में को-0238 पर लाल सड़न के दबाव के बाद राज्य ने अगेती श्रेणी में को-0118, को-15023, कोएलके-14201 जैसी किस्मों को बढ़ावा दिया है। इस साल आपके ज़िले के लिए संस्तुत किस्म कौन-सी है, यह ज़िला गन्ना अधिकारी या अपनी चीनी मिल के गन्ना विभाग से पूछकर ही तय कीजिए — संस्तुति हर साल बदलती है। लाल सड़न की पहचान और बचाव अलग लेख में है।

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बीज उपचार — 15 मिनट का काम

टुकड़ों को बुवाई से पहले घोल में डुबोना शरदकालीन गन्ने का सबसे सस्ता बीमा है। यह जमाव सुधारता है और शुरुआती फफूँद-कीट दोनों से बचाता है।

घोल में क्यामात्रा (1000 लीटर पानी में)किसलिए
कार्बेन्डाजिम500 ग्रामफफूँदजनित रोगों से बचाव
मैलाथियान2000 मि.ली.दीमक व शल्क कीट
यूरिया5–7 किलोतेज़ और एकसार अंकुरण
डुबोने का समयकम से कम 15 मिनट, फिर तुरंत बुवाई
⚠️
ऊपर की मात्राएँ सामान्य संस्तुति हैं। दवा का नाम, मात्रा और उसका फसल पर अनुमोदन पैकेट के लेबल (CIB&RC पंजीकरण) पर देख लीजिए और अपने कृषि विज्ञान केंद्र या गन्ना विकास निरीक्षक से पुष्टि कर लीजिए। घोल बनाते समय दस्ताने पहनिए और बचा हुआ घोल खेत के किनारे, तालाब या नाली में मत बहाइए।

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खाद — कितनी, और कब

शरदकालीन गन्ना खेत में लगभग सवा साल रहता है और साथ में सहफसल भी खाता है, इसलिए इसकी खुराक बसंतकालीन से ज़्यादा रखी जाती है। उत्तर प्रदेश के लिए आम संस्तुति यह है:

पोषक तत्वमात्रा (प्रति हेक्टेयर)कब देना है
नाइट्रोजनलगभग 280 किलोएक-तिहाई बुवाई पर, बाक़ी दो बराबर हिस्सों में फरवरी–जून के बीच
फॉस्फोरसलगभग 80 किलोपूरी मात्रा बुवाई के समय
पोटाशलगभग 180 किलोपूरी मात्रा बुवाई के समय
जिंक सल्फेटलगभग 25 किलोबुवाई के समय, मिट्टी में मिलाकर
गोबर/कम्पोस्ट खाद10–15 टनअंतिम जुताई से पहले
⚠️
यह सामान्य संस्तुति है, आपके खेत की नहीं। मिट्टी परीक्षण कराए बिना पूरी मात्रा डालना पैसा फेंकना है — कई खेतों में पोटाश पहले से पर्याप्त निकलता है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाइए और अंतिम मात्रा अपने कृषि विभाग/KVK से तय कराइए। सहफसल को दी गई खाद अलग से गिनिए, उसे गन्ने की खुराक में मत जोड़िए।

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सहफसल — जहाँ से गन्ने की लागत निकलती है

शरदकालीन गन्ने में सहफसल कोई अतिरिक्त शौक़ नहीं, यही इस विधि का मुख्य तर्क है। गन्ना पहले 4–5 महीने धीरे बढ़ता है और 120 सेंटीमीटर की दूरी पर बीच की ज़मीन खाली रहती है। उसी जगह सर्दी की एक पूरी फसल तैयार होकर निकल जाती है — उससे पहले कि गन्ने को उस जगह की ज़रूरत पड़े

सहफसलबुवाईखेत खाली होगाध्यान रखने की बात
आलूअक्टूबरजनवरी–फरवरीसबसे ज़्यादा कमाई; खुदाई के समय गन्ने की जड़ें बचाइए
सरसोंअक्टूबरफरवरी–मार्चकम पानी, कम लागत; लाइन गन्ने से दूर रखिए
मसूर / मटरअक्टूबर–नवंबरफरवरी–मार्चदलहन होने से मिट्टी को नाइट्रोजन का फ़ायदा
लहसुनअक्टूबरमार्चऊँचा दाम, पर सिंचाई ज़्यादा माँगता है
धनियाअक्टूबर–नवंबरफरवरीछोटी अवधि, हरे धनिये की बिक्री भी चलती है

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सिंचाई, सर्दी और शुरुआती देखभाल


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ये गलतियाँ कभी न करें


📅

कब क्या करें — शरदकालीन गन्ने का साल

समयज़रूरी काम
सितंबर का पहला पखवाड़ाखेत की तैयारी, गोबर खाद, बीज और किस्म का इंतज़ाम, ज़िला गन्ना अधिकारी से संस्तुत किस्म की पुष्टि
15 सितंबर – 31 अक्टूबरट्रेंच बनाना, बीज उपचार, बुवाई, बुवाई के बाद पहली सिंचाई
अक्टूबर–नवंबरसहफसल (आलू, सरसों, मसूर, लहसुन) की बुवाई
दिसंबर–जनवरीहल्की सिंचाई, पाले से बचाव, सहफसल की देखभाल
जनवरी–फरवरीसहफसल की कटाई/खुदाई, गन्ने में नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा
मार्च–अप्रैलकल्ले फूटने का समय — सिंचाई नियमित, निराई, अंकुर छेदक पर नज़र
मई–जूननाइट्रोजन की आख़िरी मात्रा, मिट्टी चढ़ाना, बाँधना
जुलाई–सितंबरजल निकासी का इंतज़ाम, चोटी बेधक व अन्य कीटों की निगरानी
नवंबर से आगेपर्ची के अनुसार कटाई, फिर पेड़ी का प्रबंधन

निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — समय: 15 सितंबर से 31 अक्टूबर, इसके बाद हर हफ़्ता जमाव खाता है। दूसरी — दूरी: 120 सेंटीमीटर की ट्रेंच, क्योंकि वही सहफसल की जगह बनाती है। तीसरी — बीज: स्वस्थ खेत का 8–10 महीने का गन्ना, तीन आँख का टुकड़ा, और 15 मिनट का उपचार।

शरदकालीन गन्ना अकेली फसल नहीं है — यह गन्ना और एक सर्दी की फसल, एक ही खेत से, एक ही साल में।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1शरदकालीन गन्ने की बुवाई का सही समय क्या है?
शरदकालीन गन्ना 15 सितंबर से 31 अक्टूबर के बीच बोया जाता है, और उत्तर प्रदेश में 15 से 30 अक्टूबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। नवंबर में बोने पर ठंड के कारण अंकुरण रुक जाता है और जमाव काफ़ी गिर जाता है, इसलिए देर हो जाए तो बसंतकालीन बुवाई की तैयारी करना बेहतर है।
2शरदकालीन गन्ने में बीज कितना लगता है?
तीन आँख वाले टुकड़े बोने पर लगभग 35,000–40,000 टुकड़े प्रति हेक्टेयर लगते हैं, और दो आँख वाले टुकड़ों में यह संख्या 50,000–60,000 हो जाती है। वज़न के हिसाब से गन्ने की मोटाई के अनुसार लगभग 75–80 कुंतल बीज प्रति हेक्टेयर बैठता है।
3ट्रेंच विधि में लाइन से लाइन की दूरी कितनी रखें?
ट्रेंच विधि में नाली से नाली की दूरी 120 सेंटीमीटर (4 फुट) रखी जाती है, नाली लगभग एक फुट चौड़ी और 25–30 सेंटीमीटर गहरी होती है। यही चौड़ी दूरी सहफसल की जगह बनाती है और हर लाइन तक धूप पहुँचाती है।
4शरदकालीन गन्ने के साथ कौन सी फसल बोई जा सकती है?
गन्ने की लाइनों के बीच आलू, सरसों, मसूर, मटर, लहसुन या धनिया बोई जा सकती है। शर्त एक ही है — सहफसल फरवरी–मार्च तक खेत खाली कर दे, क्योंकि उसके बाद गन्ने को पूरी जगह और पूरी धूप चाहिए।
5शरदकालीन गन्ने में खाद की मात्रा कितनी होती है?
आम संस्तुति लगभग 280 किलो नाइट्रोजन, 80 किलो फॉस्फोरस, 180 किलो पोटाश और 25 किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की है। नाइट्रोजन का एक-तिहाई बुवाई पर और बाक़ी दो बराबर हिस्सों में फरवरी से जून के बीच दिया जाता है, पर अंतिम मात्रा मिट्टी परीक्षण और KVK की सलाह से ही तय कीजिए।
6गन्ने का बीज उपचार कैसे करें?
1000 लीटर पानी में 500 ग्राम कार्बेन्डाजिम, 2000 मि.ली. मैलाथियान और 5–7 किलो यूरिया का घोल बनाकर टुकड़ों को कम से कम 15 मिनट डुबोया जाता है, फिर तुरंत बुवाई की जाती है। दवा का नाम और मात्रा पैकेट के लेबल पर देखकर और कृषि विभाग से पुष्टि करके ही इस्तेमाल कीजिए।
7शरदकालीन गन्ने से कितनी उपज मिलती है?
अच्छे प्रबंधन में शरदकालीन गन्ने से 1200–1300 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक उपज ली जाती है, जबकि बसंतकालीन गन्ना आमतौर पर 700–800 कुंतल पर रहता है। अंतर की वजह खेत में मिलने वाला 13–14 महीने का समय और फरवरी–अप्रैल में कल्ले फूटने का पूरा मौसम है।
8क्या शरदकालीन गन्ने की पेड़ी (रैटून) भी अच्छी होती है?
हाँ, शरदकालीन गन्ने की पेड़ी सबसे सस्ती फसल मानी जाती है क्योंकि उसमें बीज और बुवाई का खर्च नहीं लगता। शर्त यह है कि कटाई ज़मीन से सटाकर की जाए और फरवरी में समय से खाद-पानी दिया जाए, वरना कल्ले कमज़ोर निकलते हैं।
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