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🐛 गुलाबी सुंडी 🗓️ बुवाई: अप्रैल–जुलाई 📍 गुजरात · महाराष्ट्र · तेलंगाना

कपास की खेती Cotton Farming — Sowing, Spacing & Pink Bollworm

गुलाबी सुंडी बंद टिंडे के अंदर रहती है — खेत बाहर से हरा दिखता है और अंदर फसल खोखली होती जाती है। पर उसकी एक कमज़ोरी है, और वही आपका सबसे बड़ा हथियार है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 11 मिनट पढ़ें 📅 अगस्त 2026

तीन फैसले बुवाई से पहले

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खड़ी कपास
सुंडी का घर
🛡️
रेफ्यूजिया
बॉर्डर ज़रूर बोएँ
🧺
साफ चुनाई
दाम यहीं बनता है
📖

भूमिका

कपास को "सफेद सोना" कहा जाता है, और यह भारत के लाखों किसानों की मुख्य नकदी फसल है। पर पिछले कुछ सालों में यह फसल मुश्किल भी हुई है — गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) का हमला बढ़ा है, और कई किसान लागत निकालने में ही उलझ जाते हैं।

सच यह है कि कपास में सफलता तीन फैसलों पर टिकी है, और तीनों बुवाई से पहले लिए जाते हैं: सही किस्म, सही समय, और सही दूरी। इसके बाद पूरे सीज़न की कहानी एक ही चीज़ के इर्द-गिर्द घूमती है — कीट प्रबंधन। इस लेख में बुवाई से चुनाई तक की पूरी विधि, और वह एक नियम जिसे मानने भर से गुलाबी सुंडी का चक्र टूट जाता है।


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ज़मीन, जलवायु और क्षेत्र


🌱

बुवाई — समय, दूरी और बीज

बातसिंचित क्षेत्रवर्षा आधारित क्षेत्र
बुवाई का समयअप्रैल–मई (उत्तर भारत)मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद (जून–जुलाई)
कतार से कतार90–120 से.मी.60–90 से.मी.
पौधे से पौधा45–60 से.मी.30–45 से.मी.
बीज (Bt संकर)आम तौर पर लगभग 450 ग्राम प्रति एकड़ (एक पैकेट), किस्म के अनुसार
गहराई3–5 से.मी. — ज़्यादा गहरा बीज नहीं जमता
⚠️
रेफ्यूजिया (Refugia) लगाना कानूनी और तकनीकी दोनों रूप से ज़रूरी है। Bt कपास के हर पैकेट के साथ आने वाले गैर-Bt बीज को खेत के चारों ओर बॉर्डर के रूप में ज़रूर बोइए। इसका मकसद यह है कि कीट में Bt के प्रति प्रतिरोध (रेज़िस्टेंस) न बने। यह क़दम छोड़ना ही वह वजह है जिससे गुलाबी सुंडी इतनी ताकतवर हुई — यानी इसे छोड़ना अपनी ही अगली फसल को नुकसान पहुँचाना है।

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🐛

गुलाबी सुंडी — वह एक नियम जो चक्र तोड़ता है

गुलाबी सुंडी की सबसे बड़ी ख़ूबी (और किसान के लिए सबसे बड़ी मुसीबत) यह है कि वह बंद टिंडे के अंदर रहती है — बाहर से खेत हरा-भरा दिखता है और अंदर फसल खोखली हो रही होती है। छिड़काव का असर भी इसीलिए सीमित रहता है।

पर इसकी एक कमज़ोरी है, और वही आपका सबसे बड़ा हथियार है: इसे जीवित रहने के लिए लगातार कपास चाहिए। अगर कुछ महीने खेत में कपास ही न हो, तो इसका जीवन-चक्र टूट जाता है।

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वह एक नियम: कपास को ज़्यादा समय तक खेत में मत खड़ा रखिए। आखिरी चुनाई के बाद फसल तुरंत उखाड़ दीजिए, बचे टिंडे और डंठल नष्ट कर दीजिए, और खेत को कुछ महीने कपास-मुक्त रखिए। साथ में गाँव के सभी किसान यह करें तो असर कई गुना होता है। फरवरी-मार्च तक खेत में खड़ी कपास अगली फसल की गुलाबी सुंडी का घर है।

बाकी ज़रूरी क़दम:

⚠️
कीटनाशक का नाम, मात्रा और छिड़काव का समय इस लेख में जानबूझकर नहीं दिया गया है — यह कीट की अवस्था, फसल की उम्र और राज्य की संस्तुति के अनुसार बदलता है, और गलत दवा से कीट में प्रतिरोध बढ़ता है। छिड़काव से पहले अपने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या ज़िला कृषि अधिकारी से संस्तुत दवा और मात्रा लिखवाकर लीजिए, और हमेशा CIB&RC पंजीकृत लेबल के निर्देश मानिए। बिना ज़रूरत के बार-बार छिड़काव सबसे महँगी गलती है।

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सिंचाई, खाद और देखभाल


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चुनाई और गुणवत्ता — दाम यहीं बनता है


🗓️

कब क्या करें

समयज़रूरी काम
बुवाई से पहलेKVK से संस्तुत किस्म पूछें; बिल के साथ बीज लें; खेत की तैयारी व मेड़-नाली
बुवाई के समयसही दूरी; रेफ्यूजिया (गैर-Bt) बॉर्डर ज़रूर बोएँ; आधार खाद
0–60 दिनखेत खरपतवार-मुक्त रखें; नाइट्रोजन की पहली किश्त
45 दिन सेफेरोमोन ट्रैप लगाएँ; हर हफ्ते टिंडे तोड़कर जाँच शुरू करें
फूल व टिंडे की अवस्थापानी की कमी न हो; गुलाबी (बंद) फूल तोड़कर नष्ट करें
चुनाईपूरी तरह खुले टिंडे, ओस सूखने के बाद, साफ और अलग-अलग ग्रेड में
आखिरी चुनाई के बादफसल तुरंत उखाड़ें, डंठल व बचे टिंडे नष्ट करें — यह सबसे ज़रूरी काम है

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निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — रेफ्यूजिया बॉर्डर ज़रूर बोइए; इसे छोड़ना ही वह वजह है जिससे गुलाबी सुंडी आज इतनी ताकतवर है। दूसरी — आखिरी चुनाई के बाद खेत तुरंत खाली कीजिए; खड़ी कपास अगले साल की सुंडी का घर है। तीसरी — दाम रुई की सफाई पर बनता है, इसलिए कचरा और नमी दोनों से बचिए।

कपास में मुनाफ़ा दवा के छिड़काव से नहीं, समय पर की गई निगरानी और सीज़न के अंत में की गई सफाई से बनता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1कपास की बुवाई का सही समय क्या है?
यह क्षेत्र पर निर्भर करता है। उत्तर भारत के सिंचित क्षेत्रों में अप्रैल–मई, और वर्षा आधारित मध्य व दक्षिण भारत में मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद, यानी जून–जुलाई। समय से बहुत देर की बुवाई में कीट का दबाव बढ़ जाता है और उपज गिरती है।
2एक एकड़ में कपास का कितना बीज लगता है?
Bt संकर किस्मों में आम तौर पर लगभग 450 ग्राम प्रति एकड़ (एक पैकेट), किस्म और दूरी के अनुसार। बीज हमेशा लाइसेंसी दुकान से, पक्के बिल के साथ लें — नकली बीज कपास में सबसे बड़ी ठगी है और बिल के बिना कोई शिकायत दर्ज नहीं हो सकती।
3रेफ्यूजिया (Refugia) क्या है और क्यों ज़रूरी है?
Bt कपास के पैकेट के साथ आने वाला गैर-Bt बीज, जिसे खेत के चारों ओर बॉर्डर के रूप में बोया जाता है। इसका मकसद यह है कि कीट में Bt के प्रति प्रतिरोध (रेज़िस्टेंस) न बने। इसी क़दम को छोड़ने की वजह से गुलाबी सुंडी इतनी ताकतवर हुई है — यानी इसे छोड़ना अपनी ही अगली फसल को नुकसान पहुँचाना है। यह कानूनी रूप से भी ज़रूरी है।
4गुलाबी सुंडी से बचाव का सबसे कारगर तरीका क्या है?
आखिरी चुनाई के बाद फसल तुरंत उखाड़ देना और खेत को कुछ महीने कपास-मुक्त रखना। गुलाबी सुंडी को जीवित रहने के लिए लगातार कपास चाहिए — कपास न मिले तो उसका जीवन-चक्र टूट जाता है। फरवरी-मार्च तक खेत में खड़ी कपास अगले साल की सुंडी का घर है। साथ में फेरोमोन ट्रैप, हर हफ्ते टिंडे तोड़कर जाँच, और बंद "गुलाबी फूल" तोड़कर नष्ट करना।
5कपास में गुलाबी सुंडी का पता कैसे चलता है?
बाहर से नहीं चलता — यही समस्या है। सुंडी बंद टिंडे के अंदर रहती है और खेत ऊपर से हरा-भरा दिखता है। इसलिए हर हफ्ते 10–20 टिंडे यादृच्छिक रूप से तोड़कर अंदर देखना ज़रूरी है। दूसरा संकेत है "रोज़ेट फ्लावर" — ऐसा फूल जिसकी पंखुड़ियाँ आपस में चिपककर बंद रह जाएँ; उसके अंदर अक्सर सुंडी होती है।
6कपास में सिंचाई कब सबसे ज़रूरी है?
फूल आने और टिंडे बनने के समय — इन्हीं दो अवस्थाओं पर उपज टिकी है, और यहीं पानी की कमी सबसे ज़्यादा नुकसान करती है। कपास ठहरा पानी बिल्कुल नहीं सहती, इसलिए भारी मिट्टी में मेड़-नाली विधि अपनाएँ। ड्रिप सिंचाई कपास में सबसे फायदेमंद रहती है।
7कपास का दाम अच्छा पाने के लिए चुनाई में क्या ध्यान रखें?
पूरी तरह खुले टिंडे ही चुनें, ओस सूखने के बाद चुनाई करें, और रुई में पत्तियाँ-डंठल न जाने दें — कचरा (ट्रैश) ही वह चीज़ है जिस पर सबसे ज़्यादा दाम कटता है। दागी और साफ रुई अलग-अलग रखें, और प्लास्टिक की नहीं, कपड़े की बोरी इस्तेमाल करें, क्योंकि प्लास्टिक के रेशे रुई में मिलकर गुणवत्ता खराब कर देते हैं।
8कपास में पौधा बढ़ रहा है पर टिंडे कम लग रहे हैं, क्या करें?
यह आम तौर पर ज़रूरत से ज़्यादा नाइट्रोजन का संकेत है — पौधा सारी ताकत पत्तियाँ और तना बनाने में लगा देता है। आगे की नाइट्रोजन रोकिए और अपने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से सलाह लीजिए। इसीलिए कपास में नाइट्रोजन हमेशा किश्तों में देनी चाहिए, एक साथ पूरी नहीं।
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