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ड्रोन से छिड़काव Agricultural Drone Spraying

एक एकड़ का छिड़काव दस मिनट में और 200 लीटर की जगह 10 लीटर पानी में — पर यह हर कीट और हर छिड़काव का जवाब नहीं है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 सितंबर 2026

सही सवाल यह नहीं कि ड्रोन खरीदें या नहीं

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5–10 लीटर
घोल प्रति एकड़
💰
₹300–700
किराया प्रति एकड़
🏛️
80% / ₹8 लाख
नमो ड्रोन दीदी सहायता
📖

भूमिका

पिछले दो-तीन साल में गाँवों में एक नया दृश्य आम हुआ है — खेत के ऊपर उड़ता हुआ ड्रोन और दस मिनट में एक एकड़ का छिड़काव पूरा। किसान के मन में इससे दो सवाल उठते हैं: क्या यह मेरी फसल के लिए सही है, और इसका खर्च कितना बैठेगा?

इस लेख का सबसे ज़रूरी हिस्सा वह है जो बिक्री करने वाला नहीं बताता — ड्रोन हर छिड़काव के लिए नहीं है। यह पानी, समय और मज़दूरी ज़बरदस्त बचाता है, पर पत्ती के नीचे छिपे थ्रिप्स और सफ़ेद मक्खी पर एक अच्छे नैपसैक जितना असर नहीं करता। साथ ही इसे उड़ाने के लिए लाइसेंस, पंजीकरण और CIB&RC की SOP — तीनों ज़रूरी हैं, और सब्सिडी की सबसे बड़ी योजना असल में महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए है। पूरा हिसाब नीचे है।


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📊

ड्रोन बनाम नैपसैक — असली अंतर

सबसे बड़ा अंतर पानी का है। ड्रोन बहुत कम पानी में बहुत बारीक बूँदें बनाता है, जबकि नैपसैक या ट्रैक्टर वाला स्प्रे बहुत ज़्यादा पानी में मोटी बूँदें।

बातनैपसैक / ट्रैक्टर स्प्रेड्रोन छिड़काव
पानी प्रति एकड़लगभग 150–200 लीटरलगभग 5–10 लीटर
समय प्रति एकड़कई घंटेलगभग 10 मिनट
मज़दूरीज़्यादा, और मज़दूर मिलना मुश्किलएक ऑपरेटर
किसान का दवा से संपर्कसीधा — सबसे बड़ा स्वास्थ्य जोखिमलगभग शून्य
खड़ी लंबी फसल मेंभीतर घुसना मुश्किल, फसल टूटती हैऊपर से आसानी से
पत्ती के नीचे पहुँचबेहतर, अगर ठीक से किया जाएकमज़ोर
ज़मीन पर डालने वाली दवासंभवसंभव नहीं
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सीधा नियम यह है — जहाँ दवा को पत्ती के ऊपर पहुँचाना है, वहाँ ड्रोन बहुत अच्छा है; जहाँ पत्ती के नीचे या तने की जड़ तक पहुँचाना है, वहाँ नहीं। इसलिए खरपतवारनाशी, फफूँदनाशक और ऊपर बैठने वाले कीटों पर यह बढ़िया चलता है, जबकि थ्रिप्स, सफ़ेद मक्खी और माहू जैसे नीचे छिपने वाले कीटों पर एक अच्छा नैपसैक अब भी बेहतर है।

📏

छिड़काव की SOP — भारत में तय नियम

कृषि में ड्रोन छिड़काव के लिए भारत में मानक कार्य-विधि (SOP) तय है, और उसका पालन सिर्फ़ कानून की बात नहीं — असर की भी बात है।

बाततय मानक
उड़ान की ऊँचाईफसल की चोटी से लगभग 2–3 मीटर ऊपर
घोल की मात्रालगभग 5–10 लीटर प्रति एकड़
दवासिर्फ़ CIB&RC से स्वीकृत, ड्रोन के लिए लेबल पर अनुमोदित दवाएँ
ड्रोनDGCA से टाइप-सर्टिफाइड, डिजिटल स्काई पर UIN के साथ पंजीकृत
पंजीकरण शुल्क (UIN)₹100
पायलटDGCA-मान्यता प्राप्त RPTO से रिमोट पायलट सर्टिफिकेट (RPC)

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💰

खर्च कितना — किराए पर बुलाना या ख़ुद खरीदना

ज़्यादातर किसानों के लिए सही रास्ता किराए पर सेवा लेना है, ख़रीदना नहीं। बाज़ार में ड्रोन छिड़काव की दर आम तौर पर ₹300 से ₹700 प्रति एकड़ के बीच रहती है, और धान-गेहूं जैसी बड़ी-सपाट फसलों में यह नीचे के हिस्से में होती है।

⚠️
ये दरें बाज़ार की सामान्य दरें हैं, कोई सरकारी दर नहीं — ये इलाक़े, फसल, रकबे और ऑपरेटर के हिसाब से बदलती हैं। किसी भी सेवा-प्रदाता से लिखित में दर, उसमें शामिल चीज़ें और उसका RPC व ड्रोन पंजीकरण देख लीजिए।

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सब्सिडी — नमो ड्रोन दीदी और SMAM

ड्रोन पर सबसे बड़ी सरकारी मदद नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत मिलती है, और यह बात साफ़ समझ लेनी चाहिए कि यह योजना व्यक्तिगत किसान के लिए नहीं, महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिए है

बातब्यौरा
योजनानमो ड्रोन दीदी — केंद्रीय क्षेत्र की योजना
किसे मिलती हैचुने गए महिला स्वयं सहायता समूह
कितनी सहायताड्रोन पैकेज की लागत का 80%, अधिकतम ₹8 लाख
बाक़ी रकमकृषि अवसंरचना वित्त सुविधा से ऋण, 3% वार्षिक ब्याज छूट के साथ
लक्ष्य15,000 ड्रोन, ₹1,261 करोड़ के परिव्यय के साथ (2023-24 से 2025-26)
व्यक्तिगत किसान व CHCकृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM) के तहत — 30 नवंबर 2025 तक 2,122 ड्रोन स्वीकृत
⚠️
सरकारी योजनाओं के नियम, राशि और आवेदन की तारीख़ें समय-समय पर बदलती रहती हैं। आवेदन से पहले अपने ज़िले के कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या NRLM/आजीविका मिशन कार्यालय से मौजूदा स्थिति की पुष्टि ज़रूर कीजिए। KrashiMitra किसी योजना का एजेंट नहीं है, न ही कोई आवेदन या ड्रोन दिलवाता है। कोई भी व्यक्ति सब्सिडी दिलाने के नाम पर पैसा माँगे तो वह धोखा है।

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ये गलतियाँ कभी न करें


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ड्रोन बुलाने से पहले की जाँच सूची

कबक्या कीजिए
बुकिंग से पहलेऑपरेटर का RPC और ड्रोन का पंजीकरण देखिए; दर में क्या-क्या शामिल है, लिखवाइए
दवा तय करते समयलेबल पर उसी फसल और ड्रोन छिड़काव की अनुमति व मात्रा देखिए
एक दिन पहलेमौसम देखिए — तेज़ हवा या बारिश की चेतावनी हो तो टाल दीजिए
एक दिन पहलेपड़ोसी को बता दीजिए, ख़ासकर अगर पास में मधुमक्खी के बक्से हों
छिड़काव के दिनखेत की सीमा और बिजली के तार ऑपरेटर को दिखा दीजिए
छिड़काव के दिनसुबह जल्दी या शाम का शांत समय चुनिए; बच्चों और पशुओं को दूर रखिए
छिड़काव के बाद2–3 दिन बाद खेत में जाकर असर देखिए — पत्ती नीचे से भी
कटाई से पहलेदवा की प्रतीक्षा अवधि (PHI) का पालन कीजिए

निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — ड्रोन पानी, समय और आपका स्वास्थ्य बचाता है, क्योंकि एक एकड़ का काम 150–200 लीटर की जगह 5–10 लीटर में और घंटों की जगह मिनटों में हो जाता है। दूसरी — यह हर छिड़काव का जवाब नहीं है; पत्ती के नीचे बैठने वाले कीटों पर एक अच्छा नैपसैक अब भी बेहतर है। तीसरी — सबसे बड़ी सब्सिडी महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए है, जिसमें ड्रोन पैकेज की लागत का 80% और अधिकतम ₹8 लाख तक की सहायता मिलती है।

ज़्यादातर किसानों के लिए सही सवाल "ड्रोन खरीदूँ या नहीं" नहीं है — सही सवाल यह है कि इस छिड़काव के लिए ड्रोन सही औज़ार है या नहीं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1ड्रोन से छिड़काव का खर्च प्रति एकड़ कितना आता है?
बाज़ार में ड्रोन छिड़काव की दर आम तौर पर ₹300 से ₹700 प्रति एकड़ के बीच रहती है, और धान-गेहूं जैसी बड़ी-सपाट फसलों में यह इस दायरे के नीचे के हिस्से में होती है। बुकिंग से पहले यह साफ़ पूछिए कि दर में दवा शामिल है या सिर्फ़ उड़ान का पैसा है, क्योंकि दोनों तरह के ऑपरेटर मिलते हैं। गाँव के कई किसान एक दिन का काम इकट्ठा कर लें तो दर काफ़ी नीचे आ जाती है।
2ड्रोन से छिड़काव में कितना पानी लगता है?
ड्रोन में लगभग 5–10 लीटर घोल प्रति एकड़ लगता है, जबकि नैपसैक या ट्रैक्टर वाले स्प्रे में यह लगभग 150–200 लीटर होता है। यही इस तकनीक का सबसे बड़ा फ़ायदा है — पानी ढोने का श्रम और समय दोनों लगभग ख़त्म हो जाते हैं। पर इसका मतलब यह भी है कि घोल बहुत सांद्र होता है, इसलिए मात्रा का हिसाब नैपसैक वाला नहीं, लेबल पर लिखा ड्रोन वाला ही लगाइए।
3क्या ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस चाहिए?
हाँ — कृषि में ड्रोन से छिड़काव के लिए तीन चीज़ें ज़रूरी हैं: DGCA से टाइप-सर्टिफाइड ड्रोन जो डिजिटल स्काई पर UIN के साथ पंजीकृत हो (शुल्क ₹100), DGCA-मान्यता प्राप्त RPTO से लिया गया रिमोट पायलट सर्टिफिकेट (RPC), और CIB&RC की छिड़काव SOP का पालन। RPC का कोर्स सामान्यतः 5–7 दिन का होता है और उसकी फ़ीस लगभग ₹40,000–₹80,000 तक बताई जाती है। किसी ऑपरेटर से छिड़काव कराने से पहले उसका RPC और ड्रोन पंजीकरण देख लीजिए।
4नमो ड्रोन दीदी योजना में कितनी सब्सिडी मिलती है?
नमो ड्रोन दीदी योजना में चुने गए महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन पैकेज की लागत का 80%, अधिकतम ₹8 लाख तक केंद्रीय वित्तीय सहायता मिलती है, और बची हुई रकम कृषि अवसंरचना वित्त सुविधा से ऋण के रूप में ली जा सकती है जिस पर 3% वार्षिक ब्याज छूट मिलती है। यह योजना 15,000 ड्रोन के लक्ष्य और ₹1,261 करोड़ के परिव्यय के साथ चलाई गई। ध्यान रहे, यह योजना व्यक्तिगत किसान के लिए नहीं, महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए है
5क्या व्यक्तिगत किसान को भी ड्रोन पर सब्सिडी मिलती है?
हाँ, पर अलग रास्ते से — व्यक्तिगत किसानों और कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए मदद कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM) के तहत आती है, और 30 नवंबर 2025 तक इसके अंतर्गत 2,122 ड्रोन स्वीकृत किए जा चुके थे। इसकी दर और शर्तें राज्य के हिसाब से बदलती हैं, इसलिए इस साल की स्थिति अपने ज़िले के कृषि विभाग से पूछिए। कोई बिचौलिया सब्सिडी दिलाने के नाम पर पैसा माँगे तो वह धोखा है।
6ड्रोन से छिड़काव किस ऊँचाई से करना चाहिए?
भारत की SOP के अनुसार ड्रोन को फसल की चोटी से लगभग 2–3 मीटर ऊपर रखकर छिड़काव किया जाता है। इससे ज़्यादा ऊँचाई पर बारीक बूँदें हवा में बह जाती हैं और पड़ोसी के खेत तक पहुँच सकती हैं, जिससे आपकी फसल पर आधी दवा ही पहुँचती है। इसी वजह से तेज़ हवा में छिड़काव नहीं करना चाहिए — सुबह जल्दी या शाम का शांत समय सबसे सही है।
7क्या ड्रोन हर कीट और हर फसल के लिए ठीक है?
नहीं — ड्रोन वहाँ बहुत अच्छा है जहाँ दवा पत्ती के ऊपर पहुँचानी है, और कमज़ोर वहाँ है जहाँ पत्ती के नीचे पहुँचानी है। इसलिए खरपतवारनाशी, फफूँदनाशक और ऊपर बैठने वाले कीटों पर यह बढ़िया चलता है, जबकि थ्रिप्स, सफ़ेद मक्खी और माहू जैसे नीचे छिपने वाले कीटों पर एक अच्छा नैपसैक अब भी बेहतर काम करता है। ज़मीन में डालने वाली दवाओं के लिए ड्रोन का उपयोग होता ही नहीं।
8ड्रोन से कोई भी कीटनाशक छिड़का जा सकता है?
नहीं — सिर्फ़ वही दवाएँ छिड़की जा सकती हैं जो CIB&RC से स्वीकृत हों और जिनके लेबल पर ड्रोन से छिड़काव की अनुमति तथा मात्रा लिखी हो। ड्रोन का घोल बहुत कम पानी में बहुत सांद्र होता है, इसलिए नैपसैक वाली मात्रा सीधे उसमें डाल देना फसल जलाने और अवशेष दोनों का रास्ता है। दवा खरीदते समय डिब्बे का लेबल पढ़िए और संदेह हो तो अपने कृषि विज्ञान केंद्र से पुष्टि कीजिए।
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