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🦠 खुरपका-मुँहपका 🗓️ टीका हर 6 महीने 🐄 गाय, भैंस, बकरी

खुरपका-मुँहपका रोग (FMD) Foot and Mouth Disease in Cattle

मुँह से लार, खुर में घाव और आधा रह गया दूध। इस रोग का इलाज नहीं है — बचाव का एक ही रास्ता है, और वह मुफ़्त है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 सितंबर 2026

इलाज नहीं है — इसलिए टीका ही पूरा इलाज है

🌡️
104–106°F
अचानक तेज़ बुख़ार
💉
हर 6 महीने
टीका — मुफ़्त
🐄
4 माह
बछड़े का पहला टीका
📖

भूमिका

पशु का मुँह से लार टपकना, चारा छोड़ देना, लंगड़ाकर चलना और दूध का अचानक आधा रह जाना — गाँव में इसे "मुँह-खुर आ गया" कहते हैं। इसका पूरा नाम है खुरपका-मुँहपका रोग (FMD — फुट एंड माउथ डिज़ीज़), और यह गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और सूअर — यानी दो खुर वाले हर पशु को पकड़ता है।

इस रोग के बारे में सबसे ज़रूरी बात यही है: इसका कोई इलाज नहीं है। दवा सिर्फ़ घावों को बिगड़ने से रोकती है, वायरस को नहीं मारती। बचाव का एक ही रास्ता है — हर छह महीने पर टीका, जो सरकार के पशुधन स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मुफ़्त लगता है। और नुकसान छोटा नहीं है: शोध अनुमानों में देश को इस एक बीमारी से हर साल लगभग ₹18,000–20,000 करोड़ का नुकसान बताया गया है, जिसका सबसे बड़ा हिस्सा घटा हुआ दूध है।


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यह रोग है क्या, और फैलता कैसे है

यह एक विषाणु (वायरस) से होने वाला रोग है। भारत में जो टीका लगाया जाता है वह वायरस के तीन प्रकारों — O, A और Asia-1 — के विरुद्ध बनता है, इसीलिए उसे त्रिसंयोजी (ट्राईवैलेंट) टीका कहते हैं।

💡
ठंड और नमी के मौसम में यह रोग ज़्यादा फैलता है, इसलिए टीकाकरण के दौर आमतौर पर बरसात के बाद और सर्दी से पहले, तथा दूसरा दौर वसंत में चलाए जाते हैं। आपके ज़िले में इस बार दौर कब है, यह अपने पशु चिकित्सालय से पूछ लीजिए।

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पहचान — स्वस्थ पशु और ग्रस्त पशु

पहचान बिंदु✅ स्वस्थ पशु❌ खुरपका-मुँहपका
बुख़ारसामान्यअचानक तेज़ बुख़ार, 104–106°F तक
मुँहसाफ़, चारा चबाता हैजीभ, मसूड़े और होंठ के अंदर छाले, फिर घाव
लारसामान्यतार जैसी लार लगातार टपकती है, चपचप की आवाज़
खुरसामान्य चालखुरों के बीच छाले-घाव, लंगड़ाना, खड़े होने में आनाकानी
चारा-पानीरोज़ जैसाखाना बंद, दर्द से जुगाली रुक जाती है
दूधसामान्यकुछ ही दिन में तेज़ गिरावट, कई पशु पूरी ब्यांत में वापस नहीं आते
बछड़ेचुस्तबिना छाले दिखे अचानक मौत — वायरस दिल पर असर करता है
⚠️
छोटे बछड़े-पाड़े इस रोग में सबसे ज़्यादा जान गँवाते हैं, और अक्सर मुँह या खुर में छाले दिखे बिना ही। इसलिए बाड़े में किसी बड़े पशु को मुँहपका हो और बछड़ा सुस्त लगे, तो इंतज़ार मत कीजिए — तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाइए।

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📉

असली नुकसान बीमारी के बाद शुरू होता है

ज़्यादातर बड़े पशु इस रोग से मरते नहीं — और यही बात इसे कम आँकने की वजह बन जाती है। पशु ठीक दिखने लगता है, पर धंधा उससे कभी पूरा नहीं उबरता।


💉

टीकाकरण — पूरा लेख इसी हिस्से के लिए है

खुरपका-मुँहपका से बचाव का इकलौता भरोसेमंद तरीका टीका है, और यह पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सरकार की ओर से मुफ़्त लगाया जाता है। इसका ख़र्च केंद्र सरकार उठाती है — गाँव में टीके के नाम पर पैसा माँगा जाए तो पशु चिकित्सालय में शिकायत कीजिए।

बातनियम
किन पशुओं कोगाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर — सभी
पहला टीकाबछड़े-पाड़े को 4 माह की उम्र पर
बूस्टरपहले टीके के लगभग एक महीने बाद
उसके बादहर छह महीने पर, जीवन भर
टीके से पहलेलगभग एक महीने पहले कृमिनाशक (पेट के कीड़ों की दवा) दिलवाइए
पहचानकान का टैग और पशु का पंजीयन — रिकॉर्ड इसी से जुड़ता है
रिकॉर्डटीके की तारीख़ पशु स्वास्थ्य कार्ड/पोर्टल पर दर्ज कराइए
ख़र्चकुछ नहीं — केंद्र सरकार वहन करती है

कार्यक्रम का असर आँकड़ों में दिखता है: सरकार के अनुसार अब तक 147 करोड़ से ज़्यादा टीके लगाए जा चुके हैं, लगभग 8 करोड़ पशुपालक इससे जुड़े हैं, और खुरपका-मुँहपका के प्रकोप 2019 के मुक़ाबले कई गुना घटे हैं। यह तभी काम करता है जब गाँव के सारे पशु टीका पाएँ — छूटा हुआ पशु पूरे गाँव के लिए खुला दरवाज़ा है।

⚠️
टीके का असर कुछ महीनों तक ही रहता है, इसलिए "पिछले साल लगवाया था" काफ़ी नहीं है। दौर की तारीख़, टीके की उपलब्धता और आपके ज़िले की व्यवस्था अपने नज़दीकी पशु चिकित्सालय या पशुधन सहायक से पूछकर तय कीजिए।

टीके के बारे में चार आम ग़लतफ़हमियाँ


🩹

बीमार पशु की देखभाल — दवा नहीं, सहारा

वायरस को मारने वाली कोई दवा नहीं है। जो कुछ किया जाता है वह पशु को दर्द, भूख और दूसरे संक्रमण से बचाने के लिए होता है, ताकि वह ख़ुद लड़ सके।

⚠️
अपने मन से एंटीबायोटिक या दर्द की दवा मत दीजिए। कोई भी घोल, मरहम या इंजेक्शन पशु चिकित्सक की सलाह और बताई गई मात्रा से ही इस्तेमाल कीजिए — दूध देने वाले पशु में दवा की निकासी अवधि (कितने दिन दूध न बेचें) का पालन भी ज़रूरी है। घरेलू नुस्ख़ों में तेज़ रसायन डालने से घाव और गहरा हो जाता है।

🛡️

बिना पैसे ख़र्च किए फैलाव रोकिए


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ये गलतियाँ कभी न करें


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कब क्या करें

कबक्या
बछड़े के 4 माह परपहला FMD टीका
उसके एक महीने बादबूस्टर ख़ुराक
हर छह महीनेदोहराव टीका — घर के हर पशु को
टीके से एक महीना पहलेकृमिनाशक दवा
नया पशु ख़रीदते ही21 दिन अलग, फिर झुंड में
रोग दिखते हीपशु अलग, चिकित्सालय को सूचना, नरम आहार
ठीक होने के बादकमज़ोरी और गर्मी न सह पाने पर चिकित्सक से जाँच

निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — इलाज नहीं है, दवा सिर्फ़ सहारा देती है। दूसरी — टीका हर छह महीने पर, और मुफ़्त है; एक बार लगवा देना काफ़ी नहीं। तीसरी — नुकसान बीमारी के बाद चलता है: गिरा दूध, गर्भपात और देर से गाभिन होना, जो सालों की कमाई खाते हैं।

खुरपका-मुँहपका उस दिन नहीं हारता जिस दिन इलाज शुरू होता है — उस दिन हारता है जिस दिन टीके का दौर आपके गाँव से बिना किसी छूटे पशु के गुज़र जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1खुरपका-मुँहपका रोग का टीका कब और कितनी बार लगवाना चाहिए?
पहला टीका बछड़े-पाड़े को 4 माह की उम्र पर, उसके लगभग एक महीने बाद बूस्टर, और फिर हर छह महीने पर जीवन भर। यह टीका सरकार के पशुधन स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मुफ़्त लगता है और इसमें गाय, भैंस, भेड़, बकरी तथा सूअर सभी शामिल हैं।
2क्या खुरपका-मुँहपका रोग का कोई इलाज है?
नहीं, इस रोग का कोई इलाज नहीं है — दवा सिर्फ़ घाव, बुख़ार और दूसरे संक्रमणों को संभालती है, वायरस को नहीं मारती। बचाव का इकलौता भरोसेमंद तरीका हर छह महीने पर लगने वाला टीका है।
3खुरपका-मुँहपका के लक्षण क्या होते हैं?
अचानक 104–106°F तक तेज़ बुख़ार, मुँह और जीभ पर छाले, तार जैसी लगातार टपकती लार, खुरों के बीच घाव और लंगड़ाहट, चारा छोड़ देना और दूध में तेज़ गिरावट। छोटे बछड़ों में छाले दिखे बिना भी अचानक मौत हो सकती है क्योंकि वायरस दिल पर असर करता है।
4क्या FMD का टीका मुफ़्त है?
हाँ, FMD का टीका पूरी तरह मुफ़्त है — इसका ख़र्च केंद्र सरकार वहन करती है और यह पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत लगाया जाता है। टीके के नाम पर पैसा माँगा जाए तो नज़दीकी पशु चिकित्सालय में शिकायत कीजिए।
5क्या गाभिन गाय-भैंस को खुरपका का टीका लगाया जा सकता है?
गाभिन पशु को टीके से बाहर रखना ग़लत है, क्योंकि रोग होने पर गर्भपात का ख़तरा टीके से कहीं बड़ा है। पशु की अवस्था बताकर पशु चिकित्सक की सलाह से टीका लगवाइए — फ़ैसला वही करेंगे।
6बीमार पशु को क्या खिलाएँ?
सूखा भूसा और खल घाव पर चुभते हैं, इसलिए दलिया, चावल का माँड़, गुड़ का पानी और मुलायम हरा चारा दीजिए। मुँह को हल्के एंटीसेप्टिक घोल से दिन में दो बार धोइए और खुर साफ़-सूखी जगह पर रखिए, ताकि घाव में मक्खी और कीड़े न पड़ें।
7नया पशु ख़रीदने पर कितने दिन अलग रखना चाहिए?
नया ख़रीदा पशु कम से कम 21 दिन अलग रखना चाहिए, चाहे वह देखने में पूरी तरह स्वस्थ लगे। मेले या बाज़ार से आया पशु ही बाड़े में रोग आने का सबसे आम रास्ता है।
8ठीक होने के बाद भी पशु का दूध पहले जैसा क्यों नहीं होता?
खुरपका-मुँहपका का सबसे बड़ा नुकसान बीमारी के बाद रहता है — कई पशु उस पूरी ब्यांत में पहले वाले दूध पर वापस नहीं आते, कुछ में गर्भपात या देर से गाभिन होने की समस्या रहती है, और कुछ गर्मी सहन नहीं कर पाते और हाँफते रहते हैं। इसी वजह से इस रोग का आर्थिक नुकसान इतना बड़ा आँका जाता है।
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