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🏛️ केंद्रीय योजना 🗓️ छह साल 📍 100 ज़िले

पीएम धन-धान्य कृषि योजना PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana

सालाना ₹24,000 करोड़ और 100 ज़िले — पर इसमें खाते में पैसा नहीं आता। यह 36 पुरानी योजनाओं को एक ज़िले में जोड़ने का ढाँचा है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 8 मिनट पढ़ें 📅 सितंबर 2026

यह नकद योजना नहीं, ज़िले की योजना है

💰
₹24,000 करोड़
हर साल, छह साल तक
📍
100
चुने गए ज़िले
🔗
36
योजनाएँ एक साथ जुड़ीं
📖

भूमिका

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना देश के उन 100 ज़िलों के लिए है जहाँ खेती का प्रदर्शन बाकी देश से पीछे है। इसका सालाना खर्च ₹24,000 करोड़ रखा गया है और यह छह साल चलेगी, यानी कुल लगभग ₹1.44 लाख करोड़। सरकार के अनुमान के अनुसार इससे करीब 1.7 करोड़ किसान प्रभावित होंगे।

पर इस योजना के बारे में सबसे ज़रूरी बात वह है जो सुर्खियों में नहीं आती: यह किसान के खाते में पैसा भेजने वाली योजना नहीं है। इसमें न कोई अलग आवेदन है, न कोई अलग किस्त। यह ग्यारह मंत्रालयों की 36 पुरानी योजनाओं को एक ही ज़िले में, एक ही योजना के तहत जोड़ने का ढाँचा है। इसका फायदा उन्हीं योजनाओं के रास्ते आता है — और इसीलिए किसान के लिए असली सवाल यह है कि उसके ज़िले में इसका मतलब क्या बदला। यह लेख यही बताता है।


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📋

एक नज़र में योजना

बातब्योरा
सालाना खर्च₹24,000 करोड़
अवधिछह साल, 2025-26 से शुरू
कितने ज़िले100
कितनी योजनाओं का मेल11 मंत्रालयों/विभागों की 36 योजनाएँ, साथ में राज्य की योजनाएँ
अनुमानित लाभार्थीलगभग 1.7 करोड़ किसान
निगरानी117 प्रदर्शन संकेतक (KPI), डैशबोर्ड पर मासिक समीक्षा
सीधा नकद हस्तांतरणनहीं — यह अभिसरण की योजना है

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100 ज़िले कैसे चुने गए

ज़िलों का चुनाव किसी राजनीतिक आधार पर नहीं, तीन नापे जा सकने वाले पैमानों पर हुआ है — और तीनों वही हैं जो खेती के पिछड़ेपन को सबसे सीधे बताते हैं।

इसके साथ एक और नियम है: हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश से कम से कम एक ज़िला शामिल किया गया है, और किसी राज्य को कितने ज़िले मिले, यह उसके शुद्ध बोए गए क्षेत्र और जोतों की हिस्सेदारी के अनुपात में तय हुआ है। यह पूरी सोच नीति आयोग के आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम से ली गई है, जिसने कुछ ऐसे ही पिछड़े ज़िलों में शिक्षा और स्वास्थ्य के आँकड़े सुधारे थे।

💡
अपना ज़िला सूची में है या नहीं — यह ज़िला कृषि अधिकारी के कार्यालय से या कृषि मंत्रालय की आधिकारिक घोषणा से ही पक्का कीजिए। सोशल मीडिया पर घूमती सूचियाँ अक्सर पुरानी या गलत होती हैं।

🎯

योजना करना क्या चाहती है

चुने गए ज़िलों में काम पाँच दिशाओं में होना है, और हर दिशा किसी न किसी मौजूदा योजना के पैसे से चलेगी।


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🏛️

ज़मीन पर यह चलेगी कैसे

योजना का ढाँचा ज़िले पर टिका है, दिल्ली पर नहीं — और यही इसकी सबसे बड़ी बात है।


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किसान के लिए इसका मतलब क्या है

चूँकि इसमें अलग से कोई आवेदन नहीं है, इसलिए किसान का काम आवेदन करना नहीं — उन योजनाओं में समय पर जुड़ जाना है जिनके ज़रिए यह पैसा आएगा

क्या कीजिएक्यों
ज़िला कृषि कार्यालय से पूछिए कि आपका ज़िला सूची में है या नहींपूरी बात इसी एक जवाब पर टिकी है
किसान रजिस्ट्री / किसान पहचान पत्र बनवाइएज़्यादातर योजनाओं का लाभ अब इसी पहचान से जुड़ रहा है
मिट्टी की जाँच कराइएउत्पादकता वाला हिस्सा इसी से शुरू होता है
किसान क्रेडिट कार्ड बनवाइए या नवीनीकरण कराइएकर्ज़ की पहुँच योजना के पाँच लक्ष्यों में से एक है
FPO या किसान समूह से जुड़िएभंडारण और बाज़ार वाले हिस्से का लाभ समूह को पहले मिलता है
ब्लॉक की किसान गोष्ठियों में जाइएज़िला योजना वहीं बनती है — और वहीं आपकी बात दर्ज हो सकती है
⚠️
इस योजना में कोई "रजिस्ट्रेशन फीस" नहीं है, न कोई अलग ऑनलाइन फॉर्म। अगर कोई व्यक्ति, वेबसाइट या ऐप आपसे धन-धान्य योजना में नाम जुड़वाने के नाम पर पैसा या OTP माँगे, तो वह धोखाधड़ी है। योजनाओं के नियम, राशि और सूचियाँ समय-समय पर बदलती हैं — कोई भी कदम उठाने से पहले अपने ज़िला कृषि कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से पुष्टि कर लीजिए। KrashiMitra किसी योजना का एजेंट नहीं है और न किसी आवेदन की गारंटी देता है।

⚖️

इस योजना से क्या उम्मीद न रखें


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ये गलतियाँ कभी न करें


निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — यह 100 पिछड़े कृषि ज़िलों के लिए है, हर ज़िले के लिए नहीं। दूसरी — इसमें खाते में पैसा नहीं आता; यह 36 पुरानी योजनाओं को एक ज़िले में एक साथ लाने का ढाँचा है। तीसरी — किसान का काम आवेदन करना नहीं, बल्कि किसान रजिस्ट्री, KCC, मिट्टी जाँच और FPO जैसी उन कड़ियों में जुड़ जाना है जिनके रास्ते यह पैसा उस तक पहुँचेगा

इस योजना में जो कागज़ पहले से तैयार रखेगा, फायदा उसी तक सबसे पहले पहुँचेगा।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1पीएम धन-धान्य कृषि योजना क्या है?
यह 100 ऐसे ज़िलों के लिए बनी योजना है जहाँ खेती की उत्पादकता, फसल सघनता और कर्ज़ की पहुँच राष्ट्रीय औसत से कम है, और इसका सालाना खर्च ₹24,000 करोड़ है जो छह साल तक चलेगा। यह नई योजनाओं की सूची नहीं है — यह 11 मंत्रालयों की 36 मौजूदा योजनाओं को एक ही ज़िले में, एक ढाँचे के तहत जोड़ने का कार्यक्रम है।
2क्या धन-धान्य योजना में खाते में पैसा आता है?
नहीं — यह नकद हस्तांतरण की योजना नहीं है और इसमें कोई अलग किस्त नहीं आती। इसका लाभ उन्हीं 36 योजनाओं के रास्ते मिलता है जो इसके तहत जोड़ी गई हैं, जैसे बीज, सिंचाई, भंडारण और ऋण से जुड़ी योजनाएँ — इसलिए किसान का काम उन योजनाओं में समय पर जुड़ना है।
3धन-धान्य कृषि योजना में आवेदन कैसे करें?
इस योजना में किसान के लिए कोई अलग आवेदन फॉर्म नहीं है। अगर कोई व्यक्ति, वेबसाइट या ऐप इसमें नाम जुड़वाने के नाम पर पैसा या OTP माँगे तो वह धोखाधड़ी है। सही रास्ता यह है कि किसान रजिस्ट्री बनवाइए, किसान क्रेडिट कार्ड और मिट्टी जाँच करा लीजिए, और ज़िला कृषि कार्यालय से पूछिए कि आपके ज़िले में इसके तहत कौन-से काम चल रहे हैं।
4100 ज़िले किस आधार पर चुने गए हैं?
तीन पैमानों पर — कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और कम ऋण वितरण। इसके साथ यह नियम भी रखा गया है कि हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश से कम से कम एक ज़िला शामिल हो, और किसी राज्य को कितने ज़िले मिलेंगे यह उसके शुद्ध बोए गए क्षेत्र तथा जोतों की हिस्सेदारी के अनुपात में तय हुआ है।
5धन-धान्य योजना का पैसा कितना और कितने साल का है?
हर साल ₹24,000 करोड़, छह साल तक — यानी लगभग ₹1.44 लाख करोड़ कुल, और यह 2025-26 से शुरू हुई है। सरकार के अनुमान के अनुसार इससे करीब 1.7 करोड़ किसान प्रभावित होंगे।
6इस योजना में मेरे ज़िले का नाम है या नहीं, कैसे पता करें?
अपने ज़िला कृषि अधिकारी के कार्यालय से या कृषि मंत्रालय की आधिकारिक घोषणा से — यही दो भरोसेमंद स्रोत हैं। सोशल मीडिया और मैसेज पर घूमती ज़िला सूचियाँ अक्सर पुरानी या गलत होती हैं, और उन्हीं के सहारे कई किसान ठगी का शिकार भी होते हैं।
7योजना का काम ज़िले में कौन तय करता है?
हर चुने गए ज़िले में एक ज़िला धन-धान्य समिति बनती है, जिसमें अधिकारियों के साथ प्रगतिशील किसान भी शामिल किए जाते हैं, और यही समिति अपने ज़िले की कृषि योजना बनाती है। प्रगति 117 संकेतकों के डैशबोर्ड पर हर महीने देखी जाती है और हर ज़िले के लिए एक केंद्रीय नोडल अधिकारी भी तय किया गया है।
8किसान इस योजना का ज़्यादा से ज़्यादा फायदा कैसे ले?
किसान रजिस्ट्री बनवाइए, किसान क्रेडिट कार्ड चालू रखिए, मिट्टी की जाँच कराइए और किसी FPO या किसान समूह से जुड़िए — क्योंकि योजना का पैसा इन्हीं कड़ियों से होकर किसान तक पहुँचता है। साथ ही ब्लॉक स्तर की किसान गोष्ठियों में जाइए, क्योंकि ज़िले की प्राथमिकताएँ वहीं तय होती हैं।
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