जाड़े की मक्का की खड़ी फसल (उदयपुर, राजस्थान)। रबी की मक्का सिंचाई के भरोसे चलती है, बारिश के नहीं।
जाड़े की मक्का खरीफ से डेढ़ गुना देती है
🌽
44 क्विंटल
रबी की औसत उपज / हेक्टेयर
📉
27 क्विंटल
खरीफ मक्का की औसत उपज
💧
4–6
सिंचाई — रेशा और दाना भरने पर ज़रूरी
📖
भूमिका
मक्का को ज़्यादातर किसान खरीफ की फसल मानते हैं — बारिश में बोई, सितंबर में काटी। पर देश में मक्के की सबसे ज़्यादा उपज खरीफ में नहीं, रबी (जाड़े) की मक्का में निकलती है। खगड़िया, बेगूसराय, समस्तीपुर, पूर्णिया और कटिहार के किसान यही करते आ रहे हैं, और बिहार आज देश की सबसे बड़ी रबी मक्का पट्टी है।
अंतर छोटा नहीं है। रबी की मक्का की औसत उपज लगभग 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज होती है, जबकि खरीफ की मक्का लगभग 27 क्विंटल पर रहती है — और अच्छे प्रबंधन में रबी की फसल 60 से 80 क्विंटल तक जाती है। वजह यह है कि जाड़े में न बारिश फसल गिराती है, न कीट-रोग का उतना दबाव रहता है, और पानी आपके हाथ में रहता है। यह लेख रबी मक्का की बुवाई से बिक्री तक का पूरा तरीका देता है।
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⚖️
खरीफ मक्का और रबी मक्का — फ़र्क़ कहाँ है
बात
खरीफ मक्का
रबी मक्का
औसत उपज
लगभग 27 क्विंटल/हेक्टेयर
लगभग 44 क्विंटल/हेक्टेयर, अच्छे प्रबंधन में 60–80
पानी
बारिश के भरोसे
सिंचाई से — आपके हाथ में
फसल गिरना
तेज़ बारिश-हवा में आम
बहुत कम
फॉल आर्मीवर्म का दबाव
ज़्यादा
कम, पर शून्य नहीं
फसल अवधि
लगभग 90–100 दिन
लगभग 130–150 दिन (ठंड से धीमी बढ़त)
दाना सुखाना
बारिश में मुश्किल, नमी का जोखिम
मार्च–अप्रैल की धूप में आसान
लागत
कम
ज़्यादा — सिंचाई, खाद और बीज
💡
रबी मक्का महँगी फसल है — बीज संकर, खाद ज़्यादा, सिंचाई 4–6। इसे तभी लीजिए जब पानी का भरोसेमंद साधन हो। बिना सिंचाई की व्यवस्था के रबी मक्का बोना सबसे महँगी गलती है, क्योंकि इसकी उपज पूरी तरह समय पर मिले पानी से बनती है।
🗓️
बुवाई का समय — यही सबसे बड़ा फ़ैसला है
रबी मक्का की बुवाई 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच होती है। बिहार में धान कटने के तुरंत बाद, अक्टूबर के आख़िर से नवंबर के पहले पखवाड़े तक का समय सबसे उपयुक्त रहता है।
जल्दी बोई फसल (अक्टूबर मध्य): जमाव अच्छा होता है और फूल आने का समय ठंड के बाद पड़ता है — यही सबसे सुरक्षित खिड़की है।
देर से बोई फसल (नवंबर के बाद): दाना भरने का समय मार्च–अप्रैल की गर्मी में चला जाता है। तापमान बढ़ते ही दाना हल्का रह जाता है और उपज सीधे गिरती है।
धान की कटाई से तालमेल: जिन खेतों में धान देर से कटता है, वहाँ कम अवधि (90–105 दिन) की संकर किस्म चुनिए, ताकि फसल गर्मी से पहले निकल जाए।
🌱
बीज दर, दूरी और पौधों की संख्या
बात
सिफारिश
बीज दर (संकर)
20–25 किलो प्रति हेक्टेयर (8–10 किलो प्रति एकड़)
लाइन से लाइन
60–75 सेंटीमीटर
पौधे से पौधा
18–22 सेंटीमीटर
बीज की गहराई
4–5 सेंटीमीटर, नम मिट्टी में
पौधों की संख्या
70,000–75,000 प्रति हेक्टेयर (कटाई के समय तक)
बीज उपचार
बीजजनित रोगों के लिए फफूँदनाशक, लेबल के अनुसार
पौधों की संख्या ही उपज है: मक्का में एक पौधे पर आमतौर पर एक ही भुट्टा बनता है। खाली जगह की भरपाई बग़ल का पौधा नहीं करता — इसलिए जमाव कम रहने पर उपज सीधे उतनी ही घट जाती है।
छिटकवाँ बुवाई मत कीजिए: लाइन में बुवाई से निराई, खाद देना और सिंचाई तीनों आसान होते हैं, और पौधों की संख्या नियंत्रण में रहती है।
ठंड में जमाव धीमा होता है: रबी में अंकुरण 8–12 दिन तक ले सकता है। दो-चार दिन में अंकुर न दिखे तो घबराकर दोबारा मत बोइए।
किस्म का चुनाव क्षेत्र के हिसाब से: रबी के लिए मध्यम या कम अवधि (90–105 दिन) के संकर उपयुक्त रहते हैं। इस साल आपके ज़िले के लिए संस्तुत संकर कौन-से हैं, यह अपने कृषि विज्ञान केंद्र से पूछ लीजिए।
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🧂
खाद — मात्रा और बँटवारा
मक्का "भूखी" फसल है और रबी की मक्का सबसे ज़्यादा खाती है। पर पूरी नाइट्रोजन एक बार में डाल देना पैसा बहाना है — मक्का उसे चार बार में, अपनी बढ़त के हिसाब से माँगती है।
पोषक तत्व
मात्रा (प्रति हेक्टेयर)
नाइट्रोजन
120–150 किलो (संकर में कुछ राज्यों की संस्तुति 180 किलो तक)
फॉस्फोरस
60–75 किलो
पोटाश
40–60 किलो
जिंक सल्फेट
20–25 किलो (जहाँ जिंक की कमी दर्ज हो)
गोबर/कम्पोस्ट खाद
10–12 टन, अंतिम जुताई से पहले
कब
क्या दें
बुवाई के समय
पूरी फॉस्फोरस, आधी पोटाश, नाइट्रोजन का लगभग एक-चौथाई
घुटने की ऊँचाई (30–35 दिन)
नाइट्रोजन का सबसे बड़ा हिस्सा — यही अवस्था उपज बनाती है
झंडा-पत्ती निकलते समय (50–55 दिन)
नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा, बची हुई पोटाश
नर फूल व रेशा आने पर (60–65 दिन)
नाइट्रोजन की आख़िरी मात्रा
⚠️
ऊपर की मात्राएँ सामान्य संस्तुतियों की सीमा हैं और राज्य-दर-राज्य बदलती हैं। अपने खेत की मात्रा मिट्टी परीक्षण और अपने कृषि विज्ञान केंद्र/कृषि विभाग की सलाह से ही तय कीजिए। हर बार नाइट्रोजन खड़ी फसल में डालने के बाद हल्की सिंचाई ज़रूरी है, वरना यूरिया का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाता है।
💧
सिंचाई — चार अवस्थाएँ जो चूकनी नहीं हैं
रबी मक्का में आमतौर पर 4 से 6 सिंचाई लगती हैं। इनमें से दो अवस्थाएँ ऐसी हैं जहाँ पानी की कमी की भरपाई बाद में किसी भी तरह नहीं होती।
अवस्था
समय
क्यों ज़रूरी
जमाव के बाद
बुवाई के 15–20 दिन
जड़ का जमना
घुटने की ऊँचाई
30–35 दिन
तेज़ बढ़वार शुरू
नर फूल व रेशा (टैसलिंग-सिल्किंग)
55–70 दिन
सबसे नाज़ुक — यहाँ सूखा पड़ा तो दाना बनता ही नहीं
दाना भरना
85–100 दिन
दाने का वज़न यहीं बनता है
दाना सख़्त होना
110 दिन के बाद
हल्की सिंचाई, ज़रूरत पड़ने पर
🌱
जाड़े में सिंचाई का एक और फ़ायदा है — पाले वाली रात से पहले दी गई हल्की सिंचाई फसल को बचा लेती है, क्योंकि नम मिट्टी देर तक गर्मी छोड़ती है। पर मक्का में पानी खेत में खड़ा नहीं रहना चाहिए; जल निकासी का रास्ता खुला रखिए।
🐛
खरपतवार, कीट और कमी के लक्षण
पहले 30–40 दिन खरपतवार से खाली रखिए: मक्का शुरुआत में धीमी बढ़ती है और खरपतवार उसे दबा देता है। एक निराई-गुड़ाई 20–25 दिन पर और दूसरी नाइट्रोजन देने से पहले।
फॉल आर्मीवर्म: रबी में दबाव कम रहता है पर खेत देर से बोया हो या आसपास खरीफ की मक्का खड़ी हो तो नज़र रखिए। पत्तियों पर खिड़कीनुमा छेद और गोभ में लीद जैसा बुरादा इसकी पहचान है।
तना छेदक: गोभ का सूखना (डेड हार्ट) इसका लक्षण है। बुवाई समय पर हो तो दबाव कम रहता है।
जिंक की कमी: नई पत्तियों पर सफ़ेद-पीली धारियाँ मक्का में जिंक की कमी का सबसे आम लक्षण है। यह पूर्वी भारत की धान-मक्का पट्टी में बहुत आम है।
चूहे और नीलगाय: जाड़े में खड़ी अकेली हरी फसल यही होती है, इसलिए दबाव बढ़ जाता है। खेत की मेड़ साफ़ रखिए और शुरुआत में ही घेराव का इंतज़ाम कीजिए।
⚠️
कोई भी कीटनाशक ख़रीदने से पहले पैकेट पर मक्का का नाम और CIB&RC पंजीकरण देख लीजिए, और मात्रा लेबल के अनुसार ही रखिए। दुकानदार की मौखिक सलाह पर दो-तीन दवाएँ मिलाकर छिड़कना सबसे महँगा और सबसे कम असरदार रास्ता है।
💰
कटाई, नमी और बिक्री
रबी मक्का मार्च–अप्रैल में कटती है। यही वह जगह है जहाँ अच्छी फसल का पैसा बनता या बिगड़ता है।
नमी 14 प्रतिशत या उससे नीचे: इससे ऊपर नमी पर व्यापारी कटौती लगाता है और भंडारण में फफूँद का ख़तरा रहता है। मार्च–अप्रैल की धूप इसका सबसे सस्ता साधन है।
भुट्टा और दाना अलग-अलग सुखाइए: भुट्टा सुखाकर छीलने पर दाना कम टूटता है और रंग बेहतर रहता है — दोनों बात भाव पर असर डालती हैं।
बाज़ार समझिए: मक्का की माँग अब सिर्फ़ खाने की नहीं है — पोल्ट्री फ़ीड, स्टार्च और एथेनॉल तीनों इसे खींचते हैं। यही वजह है कि मक्के का भाव अब मौसम के साथ-साथ उद्योग की माँग से भी बनता है।
MSP का सच: खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2,410 प्रति क्विंटल तय है, पर धान-गेहूँ जैसी व्यापक सरकारी खरीद मक्के में नहीं होती। ज़्यादातर किसान मंडी या व्यापारी को बेचते हैं, इसलिए भाव देखकर बेचने की आदत ही असली बचत है।
⚠️
MSP, खरीद केंद्र और पंजीयन की शर्तें हर राज्य में अलग होती हैं और साल-दर-साल बदलती हैं। बेचने से पहले अपने ज़िले की मंडी समिति या खरीद पोर्टल से आज की स्थिति की पुष्टि कर लीजिए।
🚫
ये गलतियाँ कभी न करें
बिना पक्की सिंचाई के रबी मक्का बोना — रेशा आने के समय एक सूखा हफ़्ता पूरी फसल का दाना खा जाता है।
नवंबर के बाद बुवाई — दाना भरने का समय गर्मी में चला जाता है और उपज सीधे गिरती है।
पूरी यूरिया बुवाई पर डाल देना — मक्का उसे चार बार में माँगती है; एक बार में दी गई नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा बेकार जाता है।
पौधों की संख्या कम रखना — एक पौधे पर एक भुट्टा है, खाली जगह की भरपाई कोई नहीं करता।
जिंक की कमी को "पीलापन" मानकर और यूरिया डाल देना — नई पत्तियों की सफ़ेद-पीली धारियाँ नाइट्रोजन की नहीं, जिंक की कमी हैं।
गीला दाना बेच देना — 14% से ऊपर नमी पर कटौती तय है। दो दिन की धूप उस कटौती से सस्ती पड़ती है।
📅
कब क्या करें
समय
ज़रूरी काम
अक्टूबर की शुरुआत
खेत की तैयारी, गोबर खाद, संकर बीज और जिंक सल्फेट का इंतज़ाम
15 अक्टूबर – 15 नवंबर
बुवाई — लाइन में, नम मिट्टी में, बुवाई के समय की खाद के साथ
बुवाई + 15–20 दिन
पहली सिंचाई, खाली जगह भरना
बुवाई + 20–25 दिन
पहली निराई-गुड़ाई
बुवाई + 30–35 दिन
नाइट्रोजन की सबसे बड़ी मात्रा + सिंचाई
दिसंबर–जनवरी
पाले पर नज़र, ज़रूरत पर हल्की सिंचाई
बुवाई + 50–65 दिन
नाइट्रोजन की बची मात्रा; रेशा आने पर सिंचाई न चूकें
फरवरी–मार्च
दाना भरने की सिंचाई, कीट-निगरानी
मार्च–अप्रैल
कटाई, सुखाई, नमी 14% पर लाकर बिक्री
✅
निष्कर्ष
तीन बातें याद रखिए। पहली — समय: 15 अक्टूबर से 15 नवंबर, इसके बाद हर हफ़्ता दाने के वज़न में कटता है। दूसरी — पानी: रेशा आने और दाना भरने की सिंचाई किसी हाल में मत चूकिए। तीसरी — खाद का बँटवारा: नाइट्रोजन चार बार में, हर बार हल्की सिंचाई के साथ।
रबी की मक्का महँगी फसल है, पर यह देश की सबसे ज़्यादा उपज देने वाली मक्का भी है — बशर्ते पानी और खाद समय पर पहुँचे।
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❓
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1रबी मक्का की बुवाई का सही समय क्या है?
रबी मक्का 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच बोई जाती है, और बिहार में धान कटने के तुरंत बाद अक्टूबर के आख़िर से नवंबर के पहले पखवाड़े तक का समय सबसे उपयुक्त रहता है। नवंबर के बाद बोने पर दाना भरने का समय मार्च–अप्रैल की गर्मी में चला जाता है और उपज गिरती है।
2रबी मक्का में बीज कितना लगता है?
संकर मक्का में 20–25 किलो बीज प्रति हेक्टेयर यानी लगभग 8–10 किलो प्रति एकड़ लगता है। लाइन से लाइन 60–75 सेंटीमीटर और पौधे से पौधा 18–22 सेंटीमीटर रखकर कटाई तक 70,000–75,000 पौधे प्रति हेक्टेयर बनाए रखना ही असली लक्ष्य है।
3रबी मक्का की उपज कितनी होती है?
रबी मक्का की औसत उपज लगभग 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज होती है, जबकि खरीफ की मक्का लगभग 27 क्विंटल पर रहती है। अच्छे संकर, समय पर बुवाई और पूरी सिंचाई मिलने पर यह 60 से 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक जाती है।
4मक्का में यूरिया कितनी बार और कब डालें?
मक्का में नाइट्रोजन चार बार में दी जाती है — बुवाई के समय लगभग एक-चौथाई, घुटने की ऊँचाई (30–35 दिन) पर सबसे बड़ी मात्रा, झंडा-पत्ती (50–55 दिन) पर तीसरी और रेशा आने (60–65 दिन) पर आख़िरी। हर बार खड़ी फसल में डालने के बाद हल्की सिंचाई ज़रूरी है।
5रबी मक्का में कितनी सिंचाई चाहिए?
रबी मक्का में आमतौर पर 4 से 6 सिंचाई लगती हैं। इनमें दो अवस्थाएँ किसी हाल में नहीं चूकनी चाहिए — नर फूल और रेशा आने का समय (55–70 दिन) और दाना भरने का समय (85–100 दिन), क्योंकि यहाँ पड़ा सूखा बाद में किसी तरह भरपाई नहीं होने देता।
6मक्का का समर्थन मूल्य (MSP) कितना है?
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए मक्का का MSP ₹2,410 प्रति क्विंटल तय किया गया है। पर मक्के में धान-गेहूँ जैसी व्यापक सरकारी खरीद नहीं होती, इसलिए ज़्यादातर किसान मंडी या व्यापारी को बेचते हैं — बेचने से पहले अपने ज़िले का ताज़ा भाव देख लेना ज़रूरी है।
7मक्का बेचते समय नमी कितनी होनी चाहिए?
दाने की नमी 14 प्रतिशत या उससे कम होनी चाहिए। इससे ऊपर नमी पर व्यापारी कटौती लगाता है और भंडारण में फफूँद लगने का ख़तरा रहता है; मार्च–अप्रैल की धूप में दो दिन की सुखाई उस कटौती से बहुत सस्ती पड़ती है।
8मक्के की पत्तियों पर सफ़ेद-पीली धारियाँ क्यों पड़ती हैं?
नई पत्तियों पर सफ़ेद-पीली धारियाँ आमतौर पर जिंक की कमी का लक्षण हैं, नाइट्रोजन की नहीं। ऐसे में और यूरिया डालने से कुछ नहीं होता — बुवाई के समय 20–25 किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर देना और मिट्टी जाँच कराना सही रास्ता है।
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