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🗓️ 15 अक्टूबर – 15 नवंबर 📍 बिहार व पूर्वी भारत 🌽 मक्का

रबी मक्का की खेती Rabi (Winter) Maize Cultivation

देश की सबसे ज़्यादा उपज देने वाली मक्का बारिश में नहीं, जाड़े में उगती है। शर्त एक ही है — पानी आपके हाथ में हो।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 सितंबर 2026

जाड़े की मक्का खरीफ से डेढ़ गुना देती है

🌽
44 क्विंटल
रबी की औसत उपज / हेक्टेयर
📉
27 क्विंटल
खरीफ मक्का की औसत उपज
💧
4–6
सिंचाई — रेशा और दाना भरने पर ज़रूरी
📖

भूमिका

मक्का को ज़्यादातर किसान खरीफ की फसल मानते हैं — बारिश में बोई, सितंबर में काटी। पर देश में मक्के की सबसे ज़्यादा उपज खरीफ में नहीं, रबी (जाड़े) की मक्का में निकलती है। खगड़िया, बेगूसराय, समस्तीपुर, पूर्णिया और कटिहार के किसान यही करते आ रहे हैं, और बिहार आज देश की सबसे बड़ी रबी मक्का पट्टी है।

अंतर छोटा नहीं है। रबी की मक्का की औसत उपज लगभग 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज होती है, जबकि खरीफ की मक्का लगभग 27 क्विंटल पर रहती है — और अच्छे प्रबंधन में रबी की फसल 60 से 80 क्विंटल तक जाती है। वजह यह है कि जाड़े में न बारिश फसल गिराती है, न कीट-रोग का उतना दबाव रहता है, और पानी आपके हाथ में रहता है। यह लेख रबी मक्का की बुवाई से बिक्री तक का पूरा तरीका देता है।


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⚖️

खरीफ मक्का और रबी मक्का — फ़र्क़ कहाँ है

बातखरीफ मक्कारबी मक्का
औसत उपजलगभग 27 क्विंटल/हेक्टेयरलगभग 44 क्विंटल/हेक्टेयर, अच्छे प्रबंधन में 60–80
पानीबारिश के भरोसेसिंचाई से — आपके हाथ में
फसल गिरनातेज़ बारिश-हवा में आमबहुत कम
फॉल आर्मीवर्म का दबावज़्यादाकम, पर शून्य नहीं
फसल अवधिलगभग 90–100 दिनलगभग 130–150 दिन (ठंड से धीमी बढ़त)
दाना सुखानाबारिश में मुश्किल, नमी का जोखिममार्च–अप्रैल की धूप में आसान
लागतकमज़्यादा — सिंचाई, खाद और बीज
💡
रबी मक्का महँगी फसल है — बीज संकर, खाद ज़्यादा, सिंचाई 4–6। इसे तभी लीजिए जब पानी का भरोसेमंद साधन हो। बिना सिंचाई की व्यवस्था के रबी मक्का बोना सबसे महँगी गलती है, क्योंकि इसकी उपज पूरी तरह समय पर मिले पानी से बनती है।

🗓️

बुवाई का समय — यही सबसे बड़ा फ़ैसला है

रबी मक्का की बुवाई 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच होती है। बिहार में धान कटने के तुरंत बाद, अक्टूबर के आख़िर से नवंबर के पहले पखवाड़े तक का समय सबसे उपयुक्त रहता है।


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बीज दर, दूरी और पौधों की संख्या

बातसिफारिश
बीज दर (संकर)20–25 किलो प्रति हेक्टेयर (8–10 किलो प्रति एकड़)
लाइन से लाइन60–75 सेंटीमीटर
पौधे से पौधा18–22 सेंटीमीटर
बीज की गहराई4–5 सेंटीमीटर, नम मिट्टी में
पौधों की संख्या70,000–75,000 प्रति हेक्टेयर (कटाई के समय तक)
बीज उपचारबीजजनित रोगों के लिए फफूँदनाशक, लेबल के अनुसार

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खाद — मात्रा और बँटवारा

मक्का "भूखी" फसल है और रबी की मक्का सबसे ज़्यादा खाती है। पर पूरी नाइट्रोजन एक बार में डाल देना पैसा बहाना है — मक्का उसे चार बार में, अपनी बढ़त के हिसाब से माँगती है।

पोषक तत्वमात्रा (प्रति हेक्टेयर)
नाइट्रोजन120–150 किलो (संकर में कुछ राज्यों की संस्तुति 180 किलो तक)
फॉस्फोरस60–75 किलो
पोटाश40–60 किलो
जिंक सल्फेट20–25 किलो (जहाँ जिंक की कमी दर्ज हो)
गोबर/कम्पोस्ट खाद10–12 टन, अंतिम जुताई से पहले
कबक्या दें
बुवाई के समयपूरी फॉस्फोरस, आधी पोटाश, नाइट्रोजन का लगभग एक-चौथाई
घुटने की ऊँचाई (30–35 दिन)नाइट्रोजन का सबसे बड़ा हिस्सा — यही अवस्था उपज बनाती है
झंडा-पत्ती निकलते समय (50–55 दिन)नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा, बची हुई पोटाश
नर फूल व रेशा आने पर (60–65 दिन)नाइट्रोजन की आख़िरी मात्रा
⚠️
ऊपर की मात्राएँ सामान्य संस्तुतियों की सीमा हैं और राज्य-दर-राज्य बदलती हैं। अपने खेत की मात्रा मिट्टी परीक्षण और अपने कृषि विज्ञान केंद्र/कृषि विभाग की सलाह से ही तय कीजिए। हर बार नाइट्रोजन खड़ी फसल में डालने के बाद हल्की सिंचाई ज़रूरी है, वरना यूरिया का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाता है।

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सिंचाई — चार अवस्थाएँ जो चूकनी नहीं हैं

रबी मक्का में आमतौर पर 4 से 6 सिंचाई लगती हैं। इनमें से दो अवस्थाएँ ऐसी हैं जहाँ पानी की कमी की भरपाई बाद में किसी भी तरह नहीं होती।

अवस्थासमयक्यों ज़रूरी
जमाव के बादबुवाई के 15–20 दिनजड़ का जमना
घुटने की ऊँचाई30–35 दिनतेज़ बढ़वार शुरू
नर फूल व रेशा (टैसलिंग-सिल्किंग)55–70 दिनसबसे नाज़ुक — यहाँ सूखा पड़ा तो दाना बनता ही नहीं
दाना भरना85–100 दिनदाने का वज़न यहीं बनता है
दाना सख़्त होना110 दिन के बादहल्की सिंचाई, ज़रूरत पड़ने पर
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जाड़े में सिंचाई का एक और फ़ायदा है — पाले वाली रात से पहले दी गई हल्की सिंचाई फसल को बचा लेती है, क्योंकि नम मिट्टी देर तक गर्मी छोड़ती है। पर मक्का में पानी खेत में खड़ा नहीं रहना चाहिए; जल निकासी का रास्ता खुला रखिए।

🐛

खरपतवार, कीट और कमी के लक्षण

⚠️
कोई भी कीटनाशक ख़रीदने से पहले पैकेट पर मक्का का नाम और CIB&RC पंजीकरण देख लीजिए, और मात्रा लेबल के अनुसार ही रखिए। दुकानदार की मौखिक सलाह पर दो-तीन दवाएँ मिलाकर छिड़कना सबसे महँगा और सबसे कम असरदार रास्ता है।

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कटाई, नमी और बिक्री

रबी मक्का मार्च–अप्रैल में कटती है। यही वह जगह है जहाँ अच्छी फसल का पैसा बनता या बिगड़ता है।

⚠️
MSP, खरीद केंद्र और पंजीयन की शर्तें हर राज्य में अलग होती हैं और साल-दर-साल बदलती हैं। बेचने से पहले अपने ज़िले की मंडी समिति या खरीद पोर्टल से आज की स्थिति की पुष्टि कर लीजिए।

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ये गलतियाँ कभी न करें


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कब क्या करें

समयज़रूरी काम
अक्टूबर की शुरुआतखेत की तैयारी, गोबर खाद, संकर बीज और जिंक सल्फेट का इंतज़ाम
15 अक्टूबर – 15 नवंबरबुवाई — लाइन में, नम मिट्टी में, बुवाई के समय की खाद के साथ
बुवाई + 15–20 दिनपहली सिंचाई, खाली जगह भरना
बुवाई + 20–25 दिनपहली निराई-गुड़ाई
बुवाई + 30–35 दिननाइट्रोजन की सबसे बड़ी मात्रा + सिंचाई
दिसंबर–जनवरीपाले पर नज़र, ज़रूरत पर हल्की सिंचाई
बुवाई + 50–65 दिननाइट्रोजन की बची मात्रा; रेशा आने पर सिंचाई न चूकें
फरवरी–मार्चदाना भरने की सिंचाई, कीट-निगरानी
मार्च–अप्रैलकटाई, सुखाई, नमी 14% पर लाकर बिक्री

निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — समय: 15 अक्टूबर से 15 नवंबर, इसके बाद हर हफ़्ता दाने के वज़न में कटता है। दूसरी — पानी: रेशा आने और दाना भरने की सिंचाई किसी हाल में मत चूकिए। तीसरी — खाद का बँटवारा: नाइट्रोजन चार बार में, हर बार हल्की सिंचाई के साथ।

रबी की मक्का महँगी फसल है, पर यह देश की सबसे ज़्यादा उपज देने वाली मक्का भी है — बशर्ते पानी और खाद समय पर पहुँचे।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1रबी मक्का की बुवाई का सही समय क्या है?
रबी मक्का 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच बोई जाती है, और बिहार में धान कटने के तुरंत बाद अक्टूबर के आख़िर से नवंबर के पहले पखवाड़े तक का समय सबसे उपयुक्त रहता है। नवंबर के बाद बोने पर दाना भरने का समय मार्च–अप्रैल की गर्मी में चला जाता है और उपज गिरती है।
2रबी मक्का में बीज कितना लगता है?
संकर मक्का में 20–25 किलो बीज प्रति हेक्टेयर यानी लगभग 8–10 किलो प्रति एकड़ लगता है। लाइन से लाइन 60–75 सेंटीमीटर और पौधे से पौधा 18–22 सेंटीमीटर रखकर कटाई तक 70,000–75,000 पौधे प्रति हेक्टेयर बनाए रखना ही असली लक्ष्य है।
3रबी मक्का की उपज कितनी होती है?
रबी मक्का की औसत उपज लगभग 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज होती है, जबकि खरीफ की मक्का लगभग 27 क्विंटल पर रहती है। अच्छे संकर, समय पर बुवाई और पूरी सिंचाई मिलने पर यह 60 से 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक जाती है।
4मक्का में यूरिया कितनी बार और कब डालें?
मक्का में नाइट्रोजन चार बार में दी जाती है — बुवाई के समय लगभग एक-चौथाई, घुटने की ऊँचाई (30–35 दिन) पर सबसे बड़ी मात्रा, झंडा-पत्ती (50–55 दिन) पर तीसरी और रेशा आने (60–65 दिन) पर आख़िरी। हर बार खड़ी फसल में डालने के बाद हल्की सिंचाई ज़रूरी है।
5रबी मक्का में कितनी सिंचाई चाहिए?
रबी मक्का में आमतौर पर 4 से 6 सिंचाई लगती हैं। इनमें दो अवस्थाएँ किसी हाल में नहीं चूकनी चाहिए — नर फूल और रेशा आने का समय (55–70 दिन) और दाना भरने का समय (85–100 दिन), क्योंकि यहाँ पड़ा सूखा बाद में किसी तरह भरपाई नहीं होने देता।
6मक्का का समर्थन मूल्य (MSP) कितना है?
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए मक्का का MSP ₹2,410 प्रति क्विंटल तय किया गया है। पर मक्के में धान-गेहूँ जैसी व्यापक सरकारी खरीद नहीं होती, इसलिए ज़्यादातर किसान मंडी या व्यापारी को बेचते हैं — बेचने से पहले अपने ज़िले का ताज़ा भाव देख लेना ज़रूरी है।
7मक्का बेचते समय नमी कितनी होनी चाहिए?
दाने की नमी 14 प्रतिशत या उससे कम होनी चाहिए। इससे ऊपर नमी पर व्यापारी कटौती लगाता है और भंडारण में फफूँद लगने का ख़तरा रहता है; मार्च–अप्रैल की धूप में दो दिन की सुखाई उस कटौती से बहुत सस्ती पड़ती है।
8मक्के की पत्तियों पर सफ़ेद-पीली धारियाँ क्यों पड़ती हैं?
नई पत्तियों पर सफ़ेद-पीली धारियाँ आमतौर पर जिंक की कमी का लक्षण हैं, नाइट्रोजन की नहीं। ऐसे में और यूरिया डालने से कुछ नहीं होता — बुवाई के समय 20–25 किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर देना और मिट्टी जाँच कराना सही रास्ता है।
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