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⚗️ चौथा मुख्य तत्व 📍 तिलहन क्षेत्र 🗓️ बुवाई से पहले

गंधक (सल्फर) की कमी Sulphur Deficiency — Symptoms, Sources & Crop-wise Dose

सरसों का खेत पीला पड़ा, किसान ने यूरिया डाला, पीलापन नहीं गया। यह भारत के तिलहन क्षेत्र की सबसे आम कहानी है — और वजह लगभग हमेशा गंधक की कमी होती है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 10 मिनट पढ़ें 📅 अगस्त 2026

ऊपर की पत्ती पीली है या नीचे की?

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DAP में शून्य
गंधक नहीं मिलता
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ऊपर की पत्ती
यहाँ से शुरू होता है
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80–100 किलो
जिप्सम प्रति एकड़
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भूमिका

सरसों का खेत पीला पड़ रहा है। किसान यूरिया डाल देता है। पीलापन नहीं जाता — बल्कि कभी-कभी बढ़ जाता है। यह भारत के तिलहन क्षेत्र की सबसे आम कहानी है, और इसकी वजह एक ही होती है: समस्या नाइट्रोजन की नहीं, गंधक (सल्फर) की थी।

गंधक को "चौथा मुख्य पोषक तत्व" कहा जाता है — NPK के तुरंत बाद। यह तेल बनाता है, प्रोटीन बनाता है, और प्याज-लहसुन-सरसों की वह तीखी गंध भी इसी से आती है। पर भारत की मिट्टियों में इसकी कमी तेज़ी से बढ़ी है, क्योंकि किसान SSP छोड़कर DAP पर चले गए — और DAP में गंधक बिल्कुल नहीं होता। इस लेख में गंधक की कमी की पक्की पहचान, कौन सा स्रोत कब चुनें, फसलवार मात्रा, और वह एक गलती जो सबसे ज़्यादा दोहराई जाती है।


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पहचान — वह एक बात जो सब कुछ तय कर देती है

गंधक की कमी और नाइट्रोजन की कमी, दोनों में खेत पीला पड़ता है। दोनों दूर से बिल्कुल एक जैसे दिखते हैं। पर इन्हें अलग पहचानना सबसे ज़रूरी है, क्योंकि इलाज बिल्कुल अलग है — और गलत खाद डालने पर पैसा भी गया और फसल भी।

पहचाननाइट्रोजन (N) की कमीगंधक (S) की कमी
कहाँ से शुरू होता हैनीचे की पुरानी पत्तियों सेऊपर की नई पत्तियों से
नसों का रंगपत्ती पीली, पर नसें कुछ हरी रह सकती हैंपूरी पत्ती एक-सी पीली — नसें भी पीली
पत्ती का आकारसामान्य, बस पीलीछोटी, कड़ी, कभी-कभी ऊपर की ओर मुड़ी
तनासामान्यपतला, कठोर, कभी बैंगनी आभा
यूरिया डालने पर4–7 दिन में हरापन लौटता हैकोई सुधार नहीं, कभी-कभी बिगड़ता है
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कारण समझ लीजिए तो कभी नहीं भूलेंगे: नाइट्रोजन पौधे के अंदर एक जगह से दूसरी जगह जा सकती है, इसलिए पौधा कमी पड़ने पर उसे पुरानी पत्तियों से खींचकर नई पत्तियों को भेज देता है — और पुरानी पत्तियाँ पहले पीली पड़ती हैं। गंधक ऐसा नहीं कर सकता, इसलिए भूख नई पत्तियों पर पहले दिखती है।

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किन फसलों को गंधक सबसे ज़्यादा चाहिए

श्रेणीफसलेंगंधक का काम
सबसे ज़्यादा ज़रूरतसरसों, सूरजमुखी, तिल, मूंगफली, सोयाबीनतेल की मात्रा सीधे बढ़ाता है — कमी होने पर तेल घट जाता है
बहुत ज़रूरतप्याज, लहसुनतीखापन और गंध; भंडारण क्षमता भी बेहतर
ज़रूरतचना, अरहर, मसूर, मूंग, उड़दप्रोटीन बनाने में; गाँठों (नाइट्रोजन स्थिरीकरण) में मदद
सामान्य ज़रूरतगेहूं, धान, मक्का, गन्नाप्रोटीन और दाने की गुणवत्ता

सीधा नियम: जिस फसल से तेल निकलता है या जिसमें तीखापन-गंध होती है, उसे गंधक सबसे ज़्यादा चाहिए।


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गंधक के स्रोत — कौन सा कब चुनें

स्रोतगंधकसाथ में क्या मिलता हैकब चुनें
जिप्समलगभग 18%कैल्शियमसबसे सस्ता; ऊसर/क्षारीय ज़मीन में दोहरा फायदा
SSPलगभग 11%फॉस्फोरस, कैल्शियमजब फॉस्फोरस भी देना है — सबसे व्यावहारिक
अमोनियम सल्फेटलगभग 24%नाइट्रोजन (21%)जब नाइट्रोजन भी चाहिए; क्षारीय मिट्टी में उपयोगी
बेंटोनाइट सल्फरलगभग 90%कम मात्रा में ज़्यादा गंधक; ढुलाई कम, पर धीरे असर करता है
पोटाश सल्फेट (SOP)लगभग 17%पोटाशजब पोटाश भी चाहिए; महँगा
20:20:0:1313%N और Pतिलहन में आधार खुराक के रूप में सुविधाजनक
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बेंटोनाइट सल्फर के बारे में एक ज़रूरी बात: यह मौलिक (एलिमेंटल) गंधक है, जिसे मिट्टी के जीवाणु पहले सल्फेट में बदलते हैं — तभी पौधा उसे ले पाता है। इसमें कुछ हफ्ते लगते हैं। इसलिए इसे बुवाई से 15–20 दिन पहले मिट्टी में मिलाना सबसे अच्छा रहता है। खड़ी फसल में तुरंत असर चाहिए तो जिप्सम या अमोनियम सल्फेट बेहतर हैं।

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फसलवार मात्रा

नीचे मात्रा जिप्सम के हिसाब से दी गई है, क्योंकि वही सबसे आम और सबसे सस्ता स्रोत है। दूसरा स्रोत लेने पर उसकी गंधक-प्रतिशत के अनुसार मात्रा बदल जाएगी।

फसलजिप्सम प्रति एकड़ (लगभग)कब डालें
सरसों80–100 किलोआखिरी जुताई में मिलाकर, बुवाई से पहले
सूरजमुखी / तिल80–100 किलोबुवाई से पहले
सोयाबीन80–100 किलोबुवाई से पहले
मूंगफली100–120 किलोआधा बुवाई पर, आधा फूल आने पर (पेगिंग के समय)
प्याज / लहसुन80–100 किलोक्यारी तैयार करते समय
चना / अरहर / मसूर60–80 किलोबुवाई से पहले
गेहूं60–80 किलोबुवाई के समय (जहाँ मिट्टी जाँच में कमी हो)
⚠️
ये सामान्य संस्तुतियाँ हैं, आपके खेत की सिफारिश नहीं। गंधक की असली ज़रूरत मिट्टी जाँच से ही तय होती है — मृदा स्वास्थ्य कार्ड में गंधक की स्थिति अलग से लिखी होती है। बुवाई से पहले अपने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या ज़िला कृषि अधिकारी से अपने क्षेत्र की संस्तुति की पुष्टि कर लीजिए। ज़रूरत से ज़्यादा गंधक मिट्टी को अम्लीय बना सकता है।

🛠️

डालने का सही तरीका


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ये गलतियाँ कभी न करें


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निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — पीलापन ऊपर की नई पत्तियों से शुरू हुआ है तो वह गंधक है, नीचे की पुरानी से शुरू हुआ है तो नाइट्रोजन। यह एक पहचान हर साल हज़ारों रुपये बचा सकती है। दूसरी — तिलहन में DAP अकेला काफी नहीं; SSP लीजिए या जिप्सम अलग से डालिए। तीसरी — गंधक बुवाई से पहले, मिट्टी में मिलाकर दीजिए, ऊपर से बिखेरकर नहीं।

सरसों का पीला खेत हर बार यूरिया नहीं माँग रहा होता — अक्सर वह गंधक माँग रहा होता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1गंधक की कमी और नाइट्रोजन की कमी में फर्क कैसे पहचानें?
जगह देखिए। नाइट्रोजन की कमी में पीलापन नीचे की पुरानी पत्तियों से शुरू होता है; गंधक की कमी में ऊपर की नई पत्तियों से। वजह यह है कि नाइट्रोजन पौधे के अंदर एक जगह से दूसरी जगह जा सकती है और गंधक नहीं। दूसरी पक्की जाँच — यूरिया डालने पर नाइट्रोजन की कमी 4–7 दिन में सुधरती है, गंधक की कमी में कोई फर्क नहीं पड़ता।
2किन फसलों को गंधक सबसे ज़्यादा चाहिए?
तिलहन को सबसे ज़्यादा — सरसों, सूरजमुखी, तिल, मूंगफली, सोयाबीन — क्योंकि गंधक सीधे तेल की मात्रा बढ़ाता है। इसके बाद प्याज और लहसुन, जिनका तीखापन और गंध ही गंधक से आती है। फिर दलहन (प्रोटीन के लिए), और सामान्य ज़रूरत गेहूं, धान, मक्का व गन्ने में।
3गंधक का सबसे सस्ता स्रोत कौन सा है?
जिप्सम, जिसमें लगभग 18% गंधक और साथ में कैल्शियम मिलता है। ऊसर और क्षारीय ज़मीन में यह दोहरा फायदा देता है क्योंकि वहाँ जिप्सम मिट्टी सुधार का भी काम करता है। दूसरा व्यावहारिक विकल्प SSP है (11% गंधक), जब फॉस्फोरस भी देना हो।
4सरसों में कितना जिप्सम डालना चाहिए?
सामान्य तौर पर 80–100 किलो जिप्सम प्रति एकड़, आखिरी जुताई में मिलाकर, बुवाई से पहले। यह सामान्य संस्तुति है — सही मात्रा मिट्टी जाँच रिपोर्ट पर निर्भर करती है, जिसमें गंधक की स्थिति अलग से लिखी होती है। अपने KVK या ज़िला कृषि अधिकारी से क्षेत्र की संस्तुति की पुष्टि कर लें।
5क्या DAP से गंधक की ज़रूरत पूरी हो जाती है?
बिल्कुल नहीं — DAP में गंधक शून्य होता है। यही वजह है कि किसानों के SSP छोड़कर DAP पर जाने के बाद भारत की मिट्टियों में गंधक की कमी तेज़ी से बढ़ी है। तिलहन और दलहन में या तो SSP लीजिए, या DAP के साथ अलग से जिप्सम डालिए।
6बेंटोनाइट सल्फर कब डालना चाहिए?
बुवाई से 15–20 दिन पहले, मिट्टी में मिलाकर। यह मौलिक (एलिमेंटल) गंधक है, जिसे मिट्टी के जीवाणु पहले सल्फेट में बदलते हैं — तभी पौधा उसे ले पाता है, और इसमें कुछ हफ्ते लगते हैं। खड़ी फसल में तुरंत असर चाहिए तो जिप्सम या अमोनियम सल्फेट बेहतर विकल्प हैं।
7मूंगफली में गंधक कब देना चाहिए?
दो किश्तों में — आधा बुवाई के समय और आधा फूल आने पर (पेगिंग के समय)। मूंगफली के लिए यह समय इसलिए अहम है क्योंकि तब फली ज़मीन के अंदर बन रही होती है और उसे गंधक तथा कैल्शियम दोनों की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। जिप्सम दोनों एक साथ देता है।
8क्या गंधक हर साल डालना ज़रूरी है?
यह फसल चक्र पर निर्भर करता है। तिलहन-प्रधान चक्र में लगभग हर साल ज़रूरत पड़ती है, जबकि अनाज-प्रधान चक्र में 2 साल में एक बार भी पर्याप्त हो सकता है। सही जवाब मिट्टी जाँच से मिलता है — ज़रूरत से ज़्यादा गंधक मिट्टी को अम्लीय बना सकता है, इसलिए अंदाज़े से हर साल डालते रहना ठीक नहीं।
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