सरसों का खेत पीला पड़ा, किसान ने यूरिया डाला, पीलापन नहीं गया। यह भारत के तिलहन क्षेत्र की सबसे आम कहानी है — और वजह लगभग हमेशा गंधक की कमी होती है।
सरसों का खेत पीला पड़ रहा है। किसान यूरिया डाल देता है। पीलापन नहीं जाता — बल्कि कभी-कभी बढ़ जाता है। यह भारत के तिलहन क्षेत्र की सबसे आम कहानी है, और इसकी वजह एक ही होती है: समस्या नाइट्रोजन की नहीं, गंधक (सल्फर) की थी।
गंधक को "चौथा मुख्य पोषक तत्व" कहा जाता है — NPK के तुरंत बाद। यह तेल बनाता है, प्रोटीन बनाता है, और प्याज-लहसुन-सरसों की वह तीखी गंध भी इसी से आती है। पर भारत की मिट्टियों में इसकी कमी तेज़ी से बढ़ी है, क्योंकि किसान SSP छोड़कर DAP पर चले गए — और DAP में गंधक बिल्कुल नहीं होता। इस लेख में गंधक की कमी की पक्की पहचान, कौन सा स्रोत कब चुनें, फसलवार मात्रा, और वह एक गलती जो सबसे ज़्यादा दोहराई जाती है।
गंधक की कमी और नाइट्रोजन की कमी, दोनों में खेत पीला पड़ता है। दोनों दूर से बिल्कुल एक जैसे दिखते हैं। पर इन्हें अलग पहचानना सबसे ज़रूरी है, क्योंकि इलाज बिल्कुल अलग है — और गलत खाद डालने पर पैसा भी गया और फसल भी।
| पहचान | नाइट्रोजन (N) की कमी | गंधक (S) की कमी |
|---|---|---|
| कहाँ से शुरू होता है | नीचे की पुरानी पत्तियों से | ऊपर की नई पत्तियों से |
| नसों का रंग | पत्ती पीली, पर नसें कुछ हरी रह सकती हैं | पूरी पत्ती एक-सी पीली — नसें भी पीली |
| पत्ती का आकार | सामान्य, बस पीली | छोटी, कड़ी, कभी-कभी ऊपर की ओर मुड़ी |
| तना | सामान्य | पतला, कठोर, कभी बैंगनी आभा |
| यूरिया डालने पर | 4–7 दिन में हरापन लौटता है | कोई सुधार नहीं, कभी-कभी बिगड़ता है |
| श्रेणी | फसलें | गंधक का काम |
|---|---|---|
| सबसे ज़्यादा ज़रूरत | सरसों, सूरजमुखी, तिल, मूंगफली, सोयाबीन | तेल की मात्रा सीधे बढ़ाता है — कमी होने पर तेल घट जाता है |
| बहुत ज़रूरत | प्याज, लहसुन | तीखापन और गंध; भंडारण क्षमता भी बेहतर |
| ज़रूरत | चना, अरहर, मसूर, मूंग, उड़द | प्रोटीन बनाने में; गाँठों (नाइट्रोजन स्थिरीकरण) में मदद |
| सामान्य ज़रूरत | गेहूं, धान, मक्का, गन्ना | प्रोटीन और दाने की गुणवत्ता |
सीधा नियम: जिस फसल से तेल निकलता है या जिसमें तीखापन-गंध होती है, उसे गंधक सबसे ज़्यादा चाहिए।
| स्रोत | गंधक | साथ में क्या मिलता है | कब चुनें |
|---|---|---|---|
| जिप्सम | लगभग 18% | कैल्शियम | सबसे सस्ता; ऊसर/क्षारीय ज़मीन में दोहरा फायदा |
| SSP | लगभग 11% | फॉस्फोरस, कैल्शियम | जब फॉस्फोरस भी देना है — सबसे व्यावहारिक |
| अमोनियम सल्फेट | लगभग 24% | नाइट्रोजन (21%) | जब नाइट्रोजन भी चाहिए; क्षारीय मिट्टी में उपयोगी |
| बेंटोनाइट सल्फर | लगभग 90% | — | कम मात्रा में ज़्यादा गंधक; ढुलाई कम, पर धीरे असर करता है |
| पोटाश सल्फेट (SOP) | लगभग 17% | पोटाश | जब पोटाश भी चाहिए; महँगा |
| 20:20:0:13 | 13% | N और P | तिलहन में आधार खुराक के रूप में सुविधाजनक |
नीचे मात्रा जिप्सम के हिसाब से दी गई है, क्योंकि वही सबसे आम और सबसे सस्ता स्रोत है। दूसरा स्रोत लेने पर उसकी गंधक-प्रतिशत के अनुसार मात्रा बदल जाएगी।
| फसल | जिप्सम प्रति एकड़ (लगभग) | कब डालें |
|---|---|---|
| सरसों | 80–100 किलो | आखिरी जुताई में मिलाकर, बुवाई से पहले |
| सूरजमुखी / तिल | 80–100 किलो | बुवाई से पहले |
| सोयाबीन | 80–100 किलो | बुवाई से पहले |
| मूंगफली | 100–120 किलो | आधा बुवाई पर, आधा फूल आने पर (पेगिंग के समय) |
| प्याज / लहसुन | 80–100 किलो | क्यारी तैयार करते समय |
| चना / अरहर / मसूर | 60–80 किलो | बुवाई से पहले |
| गेहूं | 60–80 किलो | बुवाई के समय (जहाँ मिट्टी जाँच में कमी हो) |
तीन बातें याद रखिए। पहली — पीलापन ऊपर की नई पत्तियों से शुरू हुआ है तो वह गंधक है, नीचे की पुरानी से शुरू हुआ है तो नाइट्रोजन। यह एक पहचान हर साल हज़ारों रुपये बचा सकती है। दूसरी — तिलहन में DAP अकेला काफी नहीं; SSP लीजिए या जिप्सम अलग से डालिए। तीसरी — गंधक बुवाई से पहले, मिट्टी में मिलाकर दीजिए, ऊपर से बिखेरकर नहीं।
सरसों का पीला खेत हर बार यूरिया नहीं माँग रहा होता — अक्सर वह गंधक माँग रहा होता है।
मंडी भाव, सरकारी योजनाएं, बीज-खाद की जानकारी और फसल रोग उपचार — सब कुछ हिंदी में।
KrashiMitra.in पर जाएं →