🌾 कटाई, मड़ाई व चारा · Chaff Cutter
चारा मशीन हरे चारे और सूखी पराली को छोटे टुकड़ों में काट देती है, जिससे पशु उसे पूरा खा जाता है और 20–25% चारा बर्बाद होने से बचता है। कटा चारा पचता भी बेहतर है, इसलिए दूध पर सीधा असर पड़ता है। यह छोटी मशीन है और इसका किराया सबसे कम है, इसलिए ज़्यादातर गाँवों में यह दिन या घंटे के हिसाब से आसानी से मिल जाती है। सुरक्षा इसमें सबसे बड़ी बात है — गाँवों में हाथ कटने के जितने हादसे होते हैं, उनमें चारा मशीन सबसे आगे है।
रेंज सरकारी कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की रेट लिस्ट और किसानों से मिले किराये के आँकड़ों को मिलाकर बनाई गई है। यह अनुमान है, तय भाव नहीं — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से किराया घटता-बढ़ता है।
सरकार ने हर ब्लॉक में यंत्रों के किराया केंद्र बनाए हैं, जहाँ मशीनें बाज़ार से सस्ते किराये पर मिलती हैं। सरकारी FARMS ऐप पर अपने आसपास का CHC ढूँढकर सीधे बुकिंग की जा सकती है।
ज़्यादातर सौदे आज भी गाँव में ही होते हैं — पड़ोसी किसान, सहकारी समिति या FPO के पास। रेट पूछने से पहले ऊपर दी रेंज देख लीजिए, ताकि आपको पता हो कि सही दाम क्या है। सीज़न के पीक हफ़्ते से 8–10 दिन पहले बात कर लेना सबसे सस्ता पड़ता है।
कौन-सी मशीन आपके ब्लॉक में कहाँ उपलब्ध है और उस पर कितनी सब्सिडी चल रही है — इसकी सही जानकारी यहीं मिलती है। यंत्र खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी का हिसाब भी एक बार ज़रूर देख लीजिए।
चारा काटने की मशीन का किराया आमतौर पर ₹150–₹300 प्रति घंटा रहता है। अलग-अलग हिसाब से यह ₹150 से ₹1000 के बीच पड़ता है। यह अनुमानित रेंज है — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से रेट बदलता है।
ब्लेड पर सेफ़्टी गार्ड लगा है या नहीं। इसके अलावा मशीन की हालत खुद देख लें और रेट में क्या-क्या शामिल है — डीज़ल, चालक, ढुलाई — यह पहले ही साफ़ कर लें।
आमतौर पर बिना चालक होती है और बिजली/डीज़ल किसान का लगता है। यह हर मालिक के साथ बदलता है, इसलिए सौदा तय करते समय यही सबसे पहले पूछिए — किराये को लेकर सबसे ज़्यादा झगड़े इसी बात पर होते हैं।
पूरे साल में माँग सबसे ज़्यादा रहती है और तभी रेट भी चढ़ता है। उस दौर से 8–10 दिन पहले बुकिंग कर लेने पर मशीन भी मिलती है और किराया भी कम लगता है।