🌾 कटाई, मड़ाई व चारा · Reaper Binder
रीपर बाइंडर फसल काटकर उसकी गठरियाँ बाँध देता है, जिन्हें उठाकर खलिहान तक ले जाना आसान होता है। यह उस किसान की मशीन है जिसे भूसा चाहिए — कंबाइन दाना तो दे देती है पर भूसा खेत में बिखेर देती है, जबकि रीपर से काटी फसल की मड़ाई थ्रेशर से करवाने पर भूसा भी हाथ आता है। पशु पालने वाले किसान के लिए यह भूसा साल भर का चारा है, और अकेले उसकी क़ीमत अक्सर किराये के अंतर से ज़्यादा निकलती है। गिरी हुई फसल में यह कंबाइन से बेहतर काम करता है।
रेंज सरकारी कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की रेट लिस्ट और किसानों से मिले किराये के आँकड़ों को मिलाकर बनाई गई है। यह अनुमान है, तय भाव नहीं — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से किराया घटता-बढ़ता है।
सरकार ने हर ब्लॉक में यंत्रों के किराया केंद्र बनाए हैं, जहाँ मशीनें बाज़ार से सस्ते किराये पर मिलती हैं। सरकारी FARMS ऐप पर अपने आसपास का CHC ढूँढकर सीधे बुकिंग की जा सकती है।
ज़्यादातर सौदे आज भी गाँव में ही होते हैं — पड़ोसी किसान, सहकारी समिति या FPO के पास। रेट पूछने से पहले ऊपर दी रेंज देख लीजिए, ताकि आपको पता हो कि सही दाम क्या है। सीज़न के पीक हफ़्ते से 8–10 दिन पहले बात कर लेना सबसे सस्ता पड़ता है।
कौन-सी मशीन आपके ब्लॉक में कहाँ उपलब्ध है और उस पर कितनी सब्सिडी चल रही है — इसकी सही जानकारी यहीं मिलती है। यंत्र खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी का हिसाब भी एक बार ज़रूर देख लीजिए।
रीपर बाइंडर का किराया आमतौर पर ₹800–₹1500 प्रति एकड़ रहता है। अलग-अलग हिसाब से यह ₹800 से ₹1500 के बीच पड़ता है। यह अनुमानित रेंज है — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से रेट बदलता है।
बाँधने वाली सुतली किराये में शामिल है या अलग। इसके अलावा मशीन की हालत खुद देख लें और रेट में क्या-क्या शामिल है — डीज़ल, चालक, ढुलाई — यह पहले ही साफ़ कर लें।
आमतौर पर चालक सहित होती है और डीज़ल मालिक का लगता है। यह हर मालिक के साथ बदलता है, इसलिए सौदा तय करते समय यही सबसे पहले पूछिए — किराये को लेकर सबसे ज़्यादा झगड़े इसी बात पर होते हैं।
गेहूँ व धान कटाई में माँग सबसे ज़्यादा रहती है और तभी रेट भी चढ़ता है। उस दौर से 8–10 दिन पहले बुकिंग कर लेने पर मशीन भी मिलती है और किराया भी कम लगता है।