🌾 कटाई, मड़ाई व चारा · Straw Baler
बेलर खेत में बिखरी पराली या भूसे को दबाकर गठरी बना देता है, जिससे उसे उठाना, ढोना और बेचना तीनों संभव हो जाते हैं — बिना गठरी बनाए पराली ढोना इतना महँगा पड़ता है कि ज़्यादातर किसान उसे जला ही देते हैं। गठरी बनी पराली गत्ता मिल, बायो-CNG प्लांट, ईंट भट्ठे और पशु चारे में बिकती है, यानी जो चीज़ जुर्माने की वजह थी वही आमदनी बन जाती है। बेलर से पहले खेत में रेक चलाना पड़ता है ताकि पराली एक लाइन में आ जाए — यह किराये में शामिल है या नहीं, यह ज़रूर पूछ लें।
रेंज सरकारी कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की रेट लिस्ट और किसानों से मिले किराये के आँकड़ों को मिलाकर बनाई गई है। यह अनुमान है, तय भाव नहीं — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से किराया घटता-बढ़ता है।
सरकार ने हर ब्लॉक में यंत्रों के किराया केंद्र बनाए हैं, जहाँ मशीनें बाज़ार से सस्ते किराये पर मिलती हैं। सरकारी FARMS ऐप पर अपने आसपास का CHC ढूँढकर सीधे बुकिंग की जा सकती है।
ज़्यादातर सौदे आज भी गाँव में ही होते हैं — पड़ोसी किसान, सहकारी समिति या FPO के पास। रेट पूछने से पहले ऊपर दी रेंज देख लीजिए, ताकि आपको पता हो कि सही दाम क्या है। सीज़न के पीक हफ़्ते से 8–10 दिन पहले बात कर लेना सबसे सस्ता पड़ता है।
कौन-सी मशीन आपके ब्लॉक में कहाँ उपलब्ध है और उस पर कितनी सब्सिडी चल रही है — इसकी सही जानकारी यहीं मिलती है। यंत्र खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी का हिसाब भी एक बार ज़रूर देख लीजिए।
स्ट्रॉ बेलर (गठरी मशीन) का किराया आमतौर पर ₹80–₹150 प्रति गठरी रहता है। अलग-अलग हिसाब से यह ₹80 से ₹2000 के बीच पड़ता है। यह अनुमानित रेंज है — इलाके, सीज़न, डीज़ल के दाम और मशीन की हालत से रेट बदलता है।
रेक (पराली इकट्ठा करने वाला) किराये में शामिल है या अलग। इसके अलावा मशीन की हालत खुद देख लें और रेट में क्या-क्या शामिल है — डीज़ल, चालक, ढुलाई — यह पहले ही साफ़ कर लें।
आमतौर पर ट्रैक्टर व चालक सहित होती है और डीज़ल मालिक का लगता है। यह हर मालिक के साथ बदलता है, इसलिए सौदा तय करते समय यही सबसे पहले पूछिए — किराये को लेकर सबसे ज़्यादा झगड़े इसी बात पर होते हैं।
धान व गेहूँ कटाई के तुरंत बाद में माँग सबसे ज़्यादा रहती है और तभी रेट भी चढ़ता है। उस दौर से 8–10 दिन पहले बुकिंग कर लेने पर मशीन भी मिलती है और किराया भी कम लगता है।