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🌿 धनिया 🗓️ अक्टूबर–नवंबर 💧 2–3 सिंचाई

धनिया की खेती Coriander Cultivation

कम पानी, कम खाद और 110–130 दिन की फसल — पर उपज की पूरी कहानी दो बातों में है: बीज तोड़कर बोना, और फूल के समय पानी न चूकना।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 10 मिनट पढ़ें 📅 सितंबर 2026

गेहूं और चने के बीच की तीसरी फसल

🌱
4.5 किलो
बीज प्रति एकड़ (सिंचित)
💧
2–3
सिंचाई पूरी फसल में
🗓️
110–130 दिन
पकने में समय
📖

भूमिका

रबी में जो किसान गेहूं और चने के बीच एक तीसरी फसल ढूँढ़ता है, उसके लिए धनिया सबसे कम पूछा जाने वाला और सबसे कम लागत वाला विकल्प है। मध्य प्रदेश देश के सबसे बड़े धनिया उत्पादक राज्यों में है — गुना, राजगढ़, कुम्भराज और आसपास का पूरा इलाक़ा इसी फसल पर टिका है, और यहाँ की मंडियों में धनिया का अपना अलग बाज़ार है।

धनिया की सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी यही है कि इसे "बो दो, अपने आप हो जाएगा" वाली फसल मान लिया जाता है। सच यह है कि इस फसल की पूरी उपज दो बातों पर टिकी है — बुवाई से पहले बीज को दो हिस्सों में तोड़ा गया या नहीं, और फूल आने के समय पाला व तना-गलन से बचाव किया गया या नहीं। यह लेख अक्टूबर की तैयारी से लेकर मार्च की कटाई तक का पूरा कार्यक्रम देता है।


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⚖️

धनिया या गेहूं — किस खेत में क्या

यह फैसला उपज से नहीं, पानी और लागत से लेना चाहिए। धनिया की उपज क्विंटल में गेहूं से बहुत कम है, पर प्रति क्विंटल भाव कई गुना ऊँचा होता है और खर्च काफ़ी कम।

बातगेहूंधनिया
सिंचाई की ज़रूरत5–62–3
बीज दर प्रति एकड़40–50 किलोसिंचित में लगभग 4.5 किलो
उपज प्रति हेक्टेयरबहुत ज़्यादासिंचित 15–20 क्विंटल, असिंचित 7–9
पकने में समयलगभग 135–145 दिनलगभग 110–130 दिन
खाद का खर्चऊँचाकम
भावMSP से बँधाखुला बाज़ार, उतार-चढ़ाव वाला
बड़ा जोखिमपछेती गर्मीपाला और तना-गलन
💡
धनिया की दो कमाइयाँ हैं — हरी पत्ती और सूखा दाना। जिन खेतों से मंडी या शहर पास है, वहाँ पहली कटाई हरी पत्ती की बेचकर 40–50 दिन में नकद निकाला जा सकता है, और वही खेत बाद में दाने के लिए छोड़ा जा सकता है — बशर्ते पत्ती की कटाई एक बार से ज़्यादा न हो।

🌱

बुवाई — समय, बीज दर और सबसे ज़रूरी तैयारी

धनिया की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से नवंबर है। इस समय बोई फसल को पूरी सर्दी मिलती है, जो दाने की महक और वज़न दोनों के लिए ज़रूरी है। बहुत जल्दी बोने पर गर्मी में अंकुरण बिगड़ता है, और दिसंबर के बाद बोने पर फूल आते-आते गर्मी आ जाती है और दाना हल्का रह जाता है।

दशाबुवाई का समयबीज दर प्रति एकड़कतार की दूरी
सिंचितअक्टूबर के आख़िर – नवंबर के मध्यलगभग 4.5 किलो30 सेंटीमीटर
असिंचित (बारानी)अक्टूबर, नमी देखकरलगभग 8 किलो25–30 सेंटीमीटर
हरी पत्ती के लिएअक्टूबर से जनवरी, हर 15 दिन में10–12 किलो, छिटकवाँक्यारी में

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🧪

खाद — कितनी और कब

सिंचित धनिया के लिए आम सिफारिश 60 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फॉस्फोरस और 20 किलो गंधक प्रति हेक्टेयर की है। एक एकड़ में यह लगभग 24 किलो नाइट्रोजन और 16 किलो फॉस्फोरस बैठता है।

⚠️
ऊपर की मात्राएँ सामान्य सिफारिश हैं। असली मात्रा आपकी मिट्टी जाँच रिपोर्ट से तय होनी चाहिए, और राज्य के हिसाब से सिफारिश बदलती है — बोरी उठाने से पहले अपने कृषि विज्ञान केंद्र या ज़िले के कृषि विभाग से पुष्टि कर लीजिए। मुफ़्त मिट्टी जाँच की प्रक्रिया मिट्टी जाँच व सॉइल हेल्थ कार्ड में समझाई है।

💧

सिंचाई — दो पानी जो उपज तय करते हैं

धनिया में आम तौर पर 2–3 सिंचाई काफ़ी हैं, पर उनका समय बहुत सख़्ती से मायने रखता है।

सिंचाईबुवाई के कितने दिन बादक्यों ज़रूरी
पहली30–35 दिनशाखाएँ निकलने की अवस्था — पौधे की बनावट यहीं तय होती है
दूसरी60–65 दिनफूल आने पर — यह सबसे ज़रूरी पानी है, चूकने पर दाना नहीं बैठता
तीसरी85–90 दिनदाना भरने की अवस्था — ज़रूरत हो तभी, हल्की
💡
फूल आने पर भारी सिंचाई मत कीजिए। धनिया का पौधा ऊपर से हल्का और नीचे से पतला होता है — भारी पानी के बाद हवा चले तो पूरी फसल लेट जाती है, और लेटी फसल का दाना काला पड़कर भाव खो देता है।

🐛

तीन दुश्मन — तना-गलन, भभूतिया और माहू

धनिया में नुक़सान का लगभग पूरा हिस्सा इन्हीं तीन से आता है, और तीनों का समय अलग-अलग है।

समस्यापहचानकब आती है
तना-गलन (स्टेम गॉल)तने और डंठल पर फूली हुई गाँठें, पौधा टेढ़ादिसंबर–जनवरी, नमी वाले मौसम में
भभूतिया (पाउडरी मिल्ड्यू)पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसी परतजनवरी–फरवरी, सूखे-ठंडे दिन
माहू (चेपा)फूल और नई कोंपल पर हरे-काले गुच्छेफूल आने के समय
⚠️
कोई भी दवा लेने से पहले लेबल पर धनिया का नाम देखिए — हर दवा हर फसल के लिए स्वीकृत नहीं होती, और हरी पत्ती बेचनी हो तो प्रतीक्षा अवधि (PHI) का पालन और भी सख़्ती से करना पड़ता है। मात्रा और समय की पुष्टि अपने कृषि विज्ञान केंद्र से कीजिए।

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ये गलतियाँ कभी न करें


🚜

कटाई, सुखाई और भाव

धनिया मंडी में रंग और महक पर बिकता है, दाने के वज़न पर उतना नहीं। हरा-भरा, एक-सा रंग वाला माल ऊपर के भाव में जाता है और पीला-भूरा माल नीचे के।


🗓️

कब क्या करें

समयज़रूरी काम
सितंबर के आख़िरखेत की तैयारी, गोबर की सड़ी खाद मिलाना
अक्टूबरबीज तोड़ना, भिगोना, बीज उपचार; असिंचित खेत में बुवाई
नवंबर के मध्य तकसिंचित खेत में बुवाई; आधी नाइट्रोजन + पूरी फॉस्फोरस + गंधक
दिसंबर की शुरुआतपहली सिंचाई और बाक़ी नाइट्रोजन; निराई-गुड़ाई
दिसंबर–जनवरीतना-गलन और पाले पर नज़र; मौसम की चेतावनी देखते रहिए
जनवरीफूल की अवस्था — दूसरी सिंचाई; तेज़ कीटनाशक बिल्कुल नहीं
फरवरीदाना भरना; भभूतिया दिखे तो गंधक का छिड़काव
मार्च60–70% दाना रंग बदलते ही कटाई; छाया में सुखाई

निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — बुवाई से पहले बीज को दो हिस्सों में तोड़िए; यह मुफ़्त का काम है और पूरी जमावट इसी पर टिकी है। दूसरी — फूल के समय की सिंचाई मत चूकिए और उसी समय तेज़ कीटनाशक मत डालिए; दाना बैठने की पूरी कहानी इन्हीं दो हफ़्तों की है। तीसरी — कटाई जल्दी और सुखाई छाया में, क्योंकि धनिया का भाव रंग से तय होता है।

गेहूं की तुलना में धनिया कम पानी, कम खाद और कम दिन माँगता है — बस यह ध्यान और समय ज़्यादा माँगता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1धनिया की बुवाई का सही समय क्या है?
धनिया की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से नवंबर के मध्य तक है, क्योंकि इस समय बोई फसल को पूरी सर्दी मिलती है और दाने की महक तथा वज़न दोनों बेहतर रहते हैं। बहुत जल्दी बोने पर गर्मी में अंकुरण बिगड़ता है और दिसंबर के बाद बोने पर फूल आते-आते गर्मी आ जाती है, जिससे दाना हल्का रह जाता है। हरी पत्ती के लिए अक्टूबर से जनवरी तक हर 15 दिन में थोड़ा-थोड़ा बोया जा सकता है।
2धनिया में बीज दर प्रति एकड़ कितनी रखें?
सिंचित खेत में लगभग 4.5 किलो प्रति एकड़ और असिंचित (बारानी) खेत में लगभग 8 किलो प्रति एकड़ बीज लगता है। हरी पत्ती के लिए छिटकवाँ बुवाई में यह बढ़कर 10–12 किलो तक जाता है। कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर और बीज की गहराई 2–3 सेंटीमीटर रखिए।
3धनिया का बीज बोने से पहले तोड़ना क्यों ज़रूरी है?
धनिया का एक दाना असल में दो बीजों का जोड़ा होता है, और उसे हल्के हाथ से रगड़कर दो हिस्सों में अलग कर देने पर अंकुरण साफ़ तौर पर बेहतर और एक-सा होता है। साबुत दाना बोने पर जमाव पतला और असमान रहता है। इसके बाद बीज को 12–24 घंटे पानी में भिगोकर, छाया में सुखाकर बोने से अंकुरण और तेज़ होता है।
4धनिया में कितनी सिंचाई चाहिए और कब?
आम तौर पर 2–3 सिंचाई काफ़ी हैं — पहली बुवाई के 30–35 दिन बाद शाखाएँ निकलने पर, दूसरी 60–65 दिन बाद फूल आने पर, और तीसरी 85–90 दिन बाद दाना भरते समय, ज़रूरत हो तभी। इनमें फूल के समय वाली सिंचाई सबसे ज़रूरी है — यह चूकने पर दाना नहीं बैठता। भारी सिंचाई से बचिए, वरना हवा चलते ही फसल लेट जाती है।
5धनिया की उपज प्रति हेक्टेयर कितनी होती है?
वैज्ञानिक तरीक़े से उगाने पर सिंचित फसल से लगभग 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और असिंचित फसल से लगभग 7 से 9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दाना मिलता है। उपज गेहूं से कम है, पर प्रति क्विंटल भाव कई गुना ऊँचा और लागत काफ़ी कम रहती है, इसलिए तुलना क्विंटल में नहीं, प्रति एकड़ शुद्ध बचत में कीजिए।
6धनिया में तना-गलन (स्टेम गॉल) रोग का इलाज क्या है?
तना-गलन का सबसे भरोसेमंद उपाय रोग-रोधी किस्म और बुवाई से पहले बीज उपचार है, क्योंकि यह रोग बीज और मिट्टी दोनों से आता है और लग जाने के बाद दवा से बहुत कम फ़र्क़ पड़ता है। इसमें तने और डंठल पर फूली हुई गाँठें बनती हैं और पौधा टेढ़ा हो जाता है, आमतौर पर दिसंबर-जनवरी के नमी वाले मौसम में। नाइट्रोजन ज़्यादा देने से इसका ख़तरा और बढ़ता है।
7धनिया में खाद कितनी डालें?
सिंचित धनिया के लिए आम सिफारिश 60 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फॉस्फोरस और 20 किलो गंधक प्रति हेक्टेयर की है — यानी लगभग 24 किलो नाइट्रोजन और 16 किलो फॉस्फोरस प्रति एकड़। आधी नाइट्रोजन और पूरी फॉस्फोरस बुवाई के समय, बाक़ी नाइट्रोजन पहली सिंचाई पर दीजिए। गंधक छोड़िए मत — धनिया की महक और तेल की मात्रा उसी से जुड़ी है। असली मात्रा मिट्टी जाँच रिपोर्ट से तय होनी चाहिए।
8धनिया की कटाई कब करें और सुखाएँ कैसे?
कटाई तब कीजिए जब गुच्छों का 60–70 प्रतिशत दाना हरे से हल्के भूरे रंग में बदलने लगे — पूरा पीला होने का इंतज़ार करने पर दाना खेत में ही झड़ जाता है। सुबह जल्दी काटिए, जब ओस की नमी हो, और सुखाई हमेशा छाया में पतली परत में कीजिए। तेज़ धूप में दाने का हरा रंग उड़ जाता है और मंडी में भाव रंग से ही तय होता है।
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