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🗓️ बुवाई 1–25 नवंबर 📍 UP · पंजाब · हरियाणा · MP · बिहार 💧 CRI सिंचाई 20–25 दिन

गेहूं की उन्नत खेती Improved Wheat Cultivation — Sowing, Varieties & Irrigation

गेहूं की उपज लगभग पूरी तरह तीन फैसलों पर टिकी है — बुवाई किस तारीख को हुई, कौन सी किस्म लगी, और पहली सिंचाई कब दी गई। बाकी सब बाद में आता है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 9 मिनट पढ़ें 📅 जुलाई 2026

बुवाई की तारीख ही गेहूं की उपज तय कर देती है

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30–35 किलो
प्रति दिन देरी का नुकसान/हे.
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100 किलो
बीज दर प्रति हेक्टेयर
💧
20–25 दिन
पहली (CRI) सिंचाई
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भूमिका

गेहूं भारत की सबसे बड़ी रबी फसल है, और इसकी उपज लगभग पूरी तरह तीन फैसलों पर टिकी होती है — बुवाई किस तारीख को हुई, कौन सी किस्म लगी, और पहली सिंचाई कब दी गई। बाकी सब बातें बाद में आती हैं। जो किसान ये तीन काम ठीक कर लेता है, उसकी फसल औसत से हमेशा आगे रहती है।

सबसे बड़ी बात जो हर साल दोहराई जाती है और फिर भी छूट जाती है — देर से बोया गया गेहूं कभी पूरी उपज नहीं देता। नवंबर के बाद हर बीतता दिन उपज घटाता जाता है, क्योंकि दाना भरने के समय गर्मी आ जाती है और दाना सिकुड़ जाता है। दूसरी बड़ी बात — पहली सिंचाई (CRI अवस्था) गेहूं की सबसे कीमती सिंचाई है, और यह बुवाई के लगभग 20–25 दिन बाद देनी होती है, चाहे खेत में नमी दिख रही हो। इस लेख में बुवाई का सही समय, ICAR-IIWBR करनाल की नई किस्में, बीज दर, छह ज़रूरी सिंचाइयाँ और गुल्ली डंडा की समस्या — आसान हिंदी में।


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🗓️

बुवाई का सही समय — यहीं आधी उपज तय होती है

बुवाई की श्रेणीसमय (उत्तरी मैदान)क्या ध्यान रखें
अगेती (अर्ली) बुवाईलगभग 20 अक्टूबर – 5 नवंबरइसके लिए अलग, अगेती बुवाई वाली किस्में चुनें
समय पर (टाइमली) बुवाईलगभग 1 – 25 नवंबरसबसे अच्छी उपज इसी खिड़की में मिलती है
पछेती (लेट) बुवाई25 नवंबर के बाद, दिसंबर तकपछेती किस्म + बीज दर बढ़ाकर 125 किलो/हेक्टेयर
बहुत देर सेदिसंबर के अंत के बादउपज में भारी गिरावट — दूसरी फसल पर विचार करें
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देरी की कीमत रोज़ चुकानी पड़ती है। समय पर बुवाई की खिड़की निकलने के बाद हर दिन की देरी उपज घटाती जाती है — कृषि विश्वविद्यालयों के अनुसार यह नुकसान लगभग 30–35 किलो प्रति हेक्टेयर प्रतिदिन तक हो सकता है। कारण साफ है: देर से बोया गेहूं जब दाना भर रहा होता है, तब तक मार्च की गर्मी आ जाती है और दाना सिकुड़ जाता है। इसलिए अगर धान की कटाई में देर हो रही हो, तो खेत खाली होते ही तुरंत बुवाई की तैयारी रखें।

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किस्म का चुनाव — नई किस्में पुरानी से आगे हैं

ICAR-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR), करनाल से निकली नई किस्मों ने उत्तर-पश्चिमी मैदानों में तेज़ी से जगह बनाई है। इनकी सबसे बड़ी खूबी सिर्फ उपज नहीं, बल्कि पीले रतुआ (yellow rust) के प्रति बेहतर प्रतिरोध है — जो पुरानी किस्मों की सबसे बड़ी कमज़ोरी बन चुकी थी।

⚠️
किस्मों की अनुशंसा क्षेत्र (उत्तर-पश्चिमी मैदान, उत्तर-पूर्वी मैदान, मध्य क्षेत्र आदि), सिंचित/असिंचित दशा और बुवाई के समय के अनुसार अलग-अलग होती है, और सूची हर साल संशोधित होती है। बीज खरीदने से पहले अपने ज़िले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग से इस साल की अनुशंसित सूची ज़रूर लें, प्रमाणित बीज ही खरीदें और बिल रखें।

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बीज दर, दूरी और बीज उपचार

बातसमय पर बुवाईपछेती बुवाई
बीज दरलगभग 100 किलो/हेक्टेयरलगभग 125 किलो/हेक्टेयर
कतार से कतार दूरी20–22.5 से.मी.लगभग 18 से.मी.
बुवाई की गहराई5–6 से.मी.5–6 से.मी.
उद्देश्यपूरी बढ़वार का समय मिलता हैकम समय की भरपाई ज़्यादा पौध संख्या से

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छह ज़रूरी सिंचाइयाँ — और उनमें सबसे कीमती कौन सी

गेहूं में पानी की मात्रा से ज़्यादा ज़रूरी है पानी का समय। कुछ खास अवस्थाओं पर दी गई सिंचाई सीधे उपज बढ़ाती है, जबकि उन्हीं दिनों की चूक की भरपाई बाद में दस सिंचाइयों से भी नहीं होती।

अवस्थाबुवाई के बाद (लगभग)महत्व
ताज जड़ बनना (CRI)20–25 दिनसबसे ज़रूरी — यह चूकी तो पूरी फसल पिछड़ जाती है
कल्ले फूटना (टिलरिंग)40–45 दिनकल्लों की संख्या तय होती है
गाँठ बनना (जॉइंटिंग)60–65 दिनपौधे की लंबाई और मज़बूती
बाली निकलना / फूल आना90–95 दिनदाने की संख्या तय होती है
दूधिया अवस्था100–105 दिनदाने का भराव
दाना सख्त होना (डो)115–120 दिनदाने का वज़न
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पहली सिंचाई हल्की रखें। CRI अवस्था पर खेत में ज़्यादा गहरा पानी न भरें — इस समय पौधे की जड़ें उथली होती हैं और भारी सिंचाई से पौधे पीले पड़ जाते हैं तथा गिरने का खतरा बढ़ता है। हल्की, एकसार सिंचाई सबसे अच्छी है। पानी कम हो तो प्राथमिकता का क्रम याद रखें: पहले CRI, फिर बाली निकलने की अवस्था

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खरपतवार और पोषण


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ये गलतियाँ कभी न करें


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गेहूं का पूरा कैलेंडर

समयज़रूरी काम
सितंबर – अक्टूबरKVK से किस्म की सूची लें, प्रमाणित बीज खरीदें, मिट्टी की जाँच कराएँ
20 अक्टूबर – 5 नवंबरअगेती बुवाई (अगेती किस्मों के लिए)
1 – 25 नवंबरसमय पर बुवाई — बीज दर 100 किलो/हेक्टेयर, कतार 20–22.5 से.मी.
बुवाई + 20–25 दिनपहली (CRI) सिंचाई — सबसे ज़रूरी; इसके बाद खरपतवार नियंत्रण और यूरिया की दूसरी मात्रा
दिसंबर – जनवरीकल्ले और गाँठ अवस्था की सिंचाई; गुल्ली डंडा पर नज़र
जनवरी – फरवरीपीले रतुआ की निगरानी; बाली अवस्था की सिंचाई
फरवरी – मार्चदूधिया और दाना सख्त होने की सिंचाई; तेज़ हवा में गिरने से बचाव
मार्च – अप्रैलकटाई; भंडारण से पहले दाना अच्छी तरह सुखाएँ

निष्कर्ष

गेहूं में सबसे ज़्यादा उपज बढ़ाने वाले तीन काम लगभग मुफ्त हैं: नवंबर की खिड़की में बुवाई करना, बुवाई के समय से मेल खाती नई किस्म चुनना, और 20–25 दिन पर पहली (CRI) सिंचाई हल्की मात्रा में देना

गेहूं की फसल बुवाई की तारीख से ही जीत या हार तय कर लेती है — बाकी सब मेहनत उसके बाद की है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1गेहूं की बुवाई का सही समय क्या है?
उत्तरी मैदानों में समय पर (टाइमली) बुवाई की सबसे अच्छी खिड़की लगभग 1 से 25 नवंबर है; अगेती किस्मों के लिए 20 अक्टूबर से 5 नवंबर, और 25 नवंबर के बाद पछेती किस्म के साथ बुवाई की जाती है। देरी महँगी पड़ती है — कृषि विश्वविद्यालयों के अनुसार खिड़की निकलने के बाद हर दिन की देरी से लगभग 30–35 किलो प्रति हेक्टेयर तक उपज घट सकती है
2गेहूं की सबसे अच्छी नई किस्में कौन सी हैं?
ICAR-IIWBR करनाल की नई किस्मों में DBW 303 (करण वैष्णवी) — अगेती बुवाई, सिंचित दशा, औसत उपज लगभग 81 क्विंटल/हेक्टेयर — और DBW 327 (करण शिवानी) — गर्मी-सूखा सहनशील, औसत उपज लगभग 79 क्विंटल/हेक्टेयर — प्रमुख हैं; साथ ही HD 3386 और DBW 187 (करण वंदना) भी व्यापक रूप से अपनाई गई हैं। किस्म क्षेत्र और बुवाई के समय के अनुसार बदलती है, इसलिए अपने KVK से इस साल की सूची ज़रूर लें।
3गेहूं में पहली सिंचाई कब देनी चाहिए?
पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 20–25 दिन बाद, ताज जड़ बनने (CRI) की अवस्था पर देनी चाहिए — यह गेहूं की सबसे कीमती सिंचाई है और इसे चूकने की भरपाई बाद में नहीं होती। ध्यान रखें कि यह सिंचाई हल्की हो; इस समय गहरा पानी भरने से पौधे पीले पड़ जाते हैं और गिरने का खतरा बढ़ता है।
4गेहूं में बीज दर कितनी रखनी चाहिए?
समय पर बुवाई में लगभग 100 किलो प्रति हेक्टेयर और पछेती (देर से) बुवाई में लगभग 125 किलो प्रति हेक्टेयर बीज दर रखी जाती है। कतार से कतार की दूरी समय पर बुवाई में 20–22.5 से.मी. और पछेती में लगभग 18 से.मी. रखते हैं — देर से बुवाई में कम समय की भरपाई ज़्यादा पौध संख्या से की जाती है।
5गेहूं में कुल कितनी सिंचाई चाहिए और कौन सी सबसे ज़रूरी है?
सिंचित गेहूं में आमतौर पर छह ज़रूरी अवस्थाएँ होती हैं — CRI (20–25 दिन), कल्ले फूटना (40–45), गाँठ बनना (60–65), बाली/फूल (90–95), दूधिया (100–105) और दाना सख्त होना (115–120 दिन)। इनमें सबसे ज़रूरी पहली यानी CRI सिंचाई है; पानी की कमी हो तो प्राथमिकता क्रम है — पहले CRI, फिर बाली निकलने की अवस्था।
6गुल्ली डंडा (मंडूसी) की पहचान और नियंत्रण कैसे करें?
गुल्ली डंडा गेहूं जैसा ही दिखता है, पर इसकी पत्ती चिकनी होती है और आधार पर बैंगनी झलक दिखती है, जबकि गेहूं की पत्ती खुरदरी होती है। इसका सबसे बड़ा खतरा खरपतवारनाशी के प्रति प्रतिरोध है — इसलिए हर साल वही दवा दोहराने के बजाय अलग रासायनिक समूह की दवा लें, छिड़काव समय पर करें और फसल चक्र बदलें।
7देर से बुवाई करनी पड़े तो क्या करें?
तीन बदलाव करें — पछेती बुवाई के लिए बनी अलग (कम अवधि की) किस्म लगाएँ, बीज दर बढ़ाकर लगभग 125 किलो/हेक्टेयर करें, और कतार की दूरी घटाकर लगभग 18 से.मी. रखें। साथ ही धान की कटाई में देर हो रही हो तो ज़ीरो टिलेज / हैप्पी सीडर से बिना जुताई सीधी बुवाई पर विचार करें — इससे बुवाई कई दिन जल्दी हो जाती है।
8गेहूं में यूरिया एक साथ डाल दें या बाँटकर?
हमेशा बाँटकर — पूरी यूरिया एक साथ देने पर पौधा घना और मुलायम होता है, फसल गिरने (लॉजिंग) का खतरा बढ़ता है और नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा बहकर या उड़कर बर्बाद हो जाता है। नाइट्रोजन को बुवाई के समय और पहली-दूसरी सिंचाई के साथ बाँटकर देना सबसे अच्छा तरीका है, और मात्रा मिट्टी जाँच रिपोर्ट के आधार पर तय करें।
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