दीमक की कॉलोनी मिट्टी की ढकी सुरंगों में चलती है — यही वजह है कि पत्तियों पर किया छिड़काव इस कीट तक कभी नहीं पहुँचता।
दवा ज़मीन के नीचे जानी है, पत्तियों पर नहीं
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15–30%
बारानी खेत में पौधों का नुकसान
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4 मि.ली.
क्लोरपायरीफॉस प्रति किलो बीज
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बुवाई का दिन
इलाज का सही समय
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भूमिका
बुवाई के तीन हफ्ते बाद खेत में जगह-जगह पौधे पीले पड़ने लगें और हाथ से खींचने पर बिना जड़ के, मिट्टी से आसानी से बाहर आ जाएँ — तो वह पानी की कमी नहीं, दीमक है। गेहूं में दीमक का हमला हल्की और बलुई मिट्टी में सबसे ज़्यादा होता है, और बारानी खेतों में यह अकेला कीट 15 से 30 प्रतिशत तक पौधे उखाड़ देता है।
सबसे महँगी गलती यह है कि किसान दीमक दिखने के बाद दवा ढूँढ़ता है। दीमक ज़मीन के नीचे रहती है, इसलिए खड़ी फसल पर ऊपर से किया गया छिड़काव उस तक पहुँचता ही नहीं। इस कीट का असली इलाज बुवाई के दिन होता है — बीज उपचार में, जिसकी लागत प्रति एकड़ 50 रुपये से भी कम है। यह लेख वही पूरा क्रम देता है: पहचान, बुवाई से पहले की तैयारी, बीज उपचार की सही मात्रा, और खड़ी फसल में हमला हो जाने पर बचा हुआ इकलौता रास्ता।
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दीमक की पहचान — यह पानी की कमी नहीं है
गेहूं में दीमक का नुकसान अक्सर सूखे या खाद की कमी समझ लिया जाता है, और किसान एक सिंचाई या यूरिया की एक और किश्त पर पैसा लगा देता है। फर्क पहचानने के तीन पक्के तरीके हैं।
पौधा जड़ से कटा मिलेगा: पीले पौधे को हल्के से खींचिए। दीमक वाला पौधा बिना ज़ोर लगाए बाहर आ जाता है और उसकी जड़ें कटी या खोखली मिलती हैं। पानी की कमी वाला पौधा जड़ समेत मिट्टी पकड़े रहता है।
जड़ और तने पर मिट्टी की परत: दीमक अपने रास्ते पर गीली मिट्टी की सुरंग बना लेती है। उखाड़े हुए पौधे के तने के नीचे वाले हिस्से पर चिपकी मिट्टी की पतली नली इसी की निशानी है।
धब्बों में नुकसान: दीमक पूरे खेत में एक जैसी नहीं लगती — खेत में गोल-गोल टुकड़े सूखते हैं, जो हर सिंचाई के बाद बड़े होते जाते हैं। पानी की कमी का असर पूरे खेत या ढलान की ओर एक जैसा होता है।
कच्ची गोबर की खाद वाले खेत: जहाँ बिना सड़ी गोबर खाद डाली गई है या पिछली फसल की जड़ें-डंठल खेत में पड़े हैं, वहाँ दीमक की आबादी सबसे ज़्यादा मिलती है।
पहचान बिंदु
✅ स्वस्थ / पानी की कमी
❌ दीमक ग्रस्त
खींचने पर पौधा
जड़ समेत निकलता है, ज़ोर लगता है
बिना जड़ के आसानी से बाहर
जड़ की हालत
सफेद, भरी हुई
कटी, खोखली, अंदर मिट्टी भरी
नुकसान का फैलाव
पूरे खेत में एक जैसा
गोल धब्बों में, फैलता हुआ
सिंचाई के बाद
पौधा हरा हो जाता है
और ज़्यादा पौधे गिरते हैं
तने के नीचे
साफ
मिट्टी की सुरंग चिपकी हुई
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दीमक रहती कहाँ है — और इसीलिए स्प्रे काम नहीं करता
भारत में गेहूं को सबसे ज़्यादा नुकसान ओडोन्टोटर्मीस ओबेसस नाम की दीमक पहुँचाती है। यह ज़मीन के नीचे बड़ी कॉलोनी में रहती है, जिसका केंद्र एक रानी होती है और बाकी हज़ारों मज़दूर दीमक खाना ढूँढ़ने बाहर निकलती हैं। उन्हें रोशनी और सूखी हवा बर्दाश्त नहीं, इसलिए वे कभी खुले में नहीं चलतीं — मिट्टी की ढकी सुरंग बनाकर ही आगे बढ़ती हैं।
यही एक बात पूरा इलाज तय कर देती है। कीट पत्ती पर है ही नहीं, इसलिए पत्तियों पर किया गया कोई भी छिड़काव दीमक तक नहीं पहुँचता। दवा को या तो बीज के साथ ज़मीन में जाना होगा, या सिंचाई के पानी के साथ जड़ क्षेत्र तक उतरना होगा।
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दीमक मरा हुआ पौधा-अवशेष खाना पसंद करती है — गन्ने की जड़ें, धान का पुआल, कच्ची गोबर खाद, लकड़ी के टुकड़े। खेत में यह सब पड़ा हो तो कॉलोनी को खाना भी वहीं मिलता है और नई फसल पर हमला भी वहीं से शुरू होता है।
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बिना पैसे खर्च किए रोकथाम — बुवाई से पहले
दीमक की आबादी घटाने वाले सबसे असरदार काम मुफ़्त हैं, और दवा का खर्च इन्हीं से घटता है।
गोबर की खाद पूरी तरह सड़ी हुई ही डालें: कच्ची गोबर खाद दीमक का सीधा भोजन है। खाद कम से कम तीन-चार महीने पुरानी और भुरभुरी होनी चाहिए — गरम या बदबूदार खाद खेत में दीमक बुलाती है।
पिछली फसल के डंठल और जड़ें हटाएँ: धान या गन्ने के बाद खेत में बचे अवशेष कॉलोनी का ठिकाना बन जाते हैं। इन्हें निकालना या ठीक से सड़ाना दीमक का खाना काटने जैसा है। पराली प्रबंधन का यही एक और फायदा है।
गर्मी की गहरी जुताई: मई-जून में एक गहरी जुताई कॉलोनी की सुरंगें तोड़ देती है और तेज़ धूप में दीमक व अंडे नष्ट हो जाते हैं।
खेत के किनारे की बाँबी नष्ट करें: मेड़ पर या पेड़ के नीचे बनी दीमक की बाँबी पूरे खेत की कॉलोनी का घर होती है। उसे खोदकर रानी सहित नष्ट करना सबसे स्थायी उपाय है।
पर्याप्त नमी बनाए रखें: दीमक सूखी मिट्टी में तेज़ी से बढ़ती है। समय पर सिंचाई अपने आप हमला घटा देती है — बारानी खेत में हमला ज़्यादा होने का यही कारण है।
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बीज उपचार — असली इलाज यही है
दीमक के लिए सबसे सस्ता और सबसे भरोसेमंद उपाय बुवाई से पहले बीज पर दवा चढ़ाना है। पूरी लागत प्रति एकड़ 40 किलो बीज पर कुछ दर्जन रुपये पड़ती है, और यह पौधे को शुरुआती 30–40 दिन का पूरा कवच दे देता है — ठीक वही समय जब दीमक सबसे ज़्यादा पौधे उखाड़ती है।
दवा (तकनीकी नाम)
मात्रा प्रति किलो बीज
तरीका
क्लोरपायरीफॉस 20% EC
4 मि.ली.
1 लीटर पानी में घोलकर 1 किलो बीज पर, छाया में सुखाएँ
फिप्रोनिल 5% SC
6 मि.ली.
1 लीटर पानी में घोलकर बीज पर समान रूप से
थायोमेथॉक्सम 70% WS
1 ग्राम
हल्का पानी छिड़ककर बीज पर चिपकाएँ
तरीका सीधा है: बीज को पक्के फर्श या तिरपाल पर फैलाइए, दवा का घोल छिड़कते हुए फावड़े से पलटते जाइए ताकि हर दाने पर परत चढ़ जाए, फिर छाया में 2–3 घंटे सुखाकर उसी दिन बुवाई कीजिए। धूप में सुखाया गया उपचारित बीज अंकुरण खो देता है।
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क्रम याद रखिए — पहले फफूँदनाशक, फिर कीटनाशक, सबसे आखिर में जैविक कल्चर। अगर आप कंडवा के लिए फफूँदनाशक भी लगा रहे हैं तो वह पहले चढ़ेगा। जैविक कल्चर (पीएसबी/एज़ोटोबैक्टर) हमेशा आखिर में और सूखने के बाद, वरना रासायनिक दवा उसके जीवाणु मार देती है। पूरा क्रम बीज उपचार विधि वाले लेख में है।
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खेत उपचार और खड़ी फसल में हमला हो जाए तो
जिन खेतों में हर साल दीमक लगती है, वहाँ बीज उपचार के साथ-साथ मिट्टी उपचार भी किया जाता है। और अगर फसल खड़ी है और धब्बे बनने लगे हैं, तो एक ही रास्ता बचता है — दवा को सिंचाई के पानी के साथ जड़ों तक भेजना।
स्थिति
क्या करें
मात्रा
बुवाई से पहले, हर साल दीमक वाला खेत
क्लोरपायरीफॉस 20% EC को 50 किलो सूखी मिट्टी में मिलाकर आखिरी जुताई पर बिखेरें, फिर हल्की सिंचाई
3 लीटर प्रति हेक्टेयर (लगभग 1.2 लीटर प्रति एकड़)
वही, दानेदार दवा से
फिप्रोनिल 0.3% G खेत में समान रूप से बिखेरकर मिट्टी में मिलाएँ
लगभग 17.5 किलो प्रति हेक्टेयर (7 किलो प्रति एकड़)
खड़ी फसल में दीमक दिखने पर
क्लोरपायरीफॉस 20% EC को सिंचाई के पानी के साथ टपकाएँ (नाली में बूँद-बूँद)
प्रति एकड़ लगभग 1–1.2 लीटर, पानी चालू रहते हुए
खड़ी फसल वाला तरीका करते समय दवा को पानी के मुहाने पर धीरे-धीरे गिराना है, एक बार में नहीं, ताकि वह पूरे खेत में बराबर बँटे। यह उपाय बीज उपचार जितना असरदार कभी नहीं होता — यह सिर्फ़ नुकसान रोकने के लिए है, बचाने के लिए नहीं।
⚠️
ये सामान्य सिफारिशें हैं और राज्यवार पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज़ में मात्रा अलग हो सकती है। कोई भी दवा खरीदने से पहले डिब्बे पर छपा CIB&RC लेबल पढ़िए और नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से पुष्टि कर लीजिए। दवा हमेशा दस्ताने पहनकर घोलें, खाली डिब्बा खेत या नाले में न फेंकें।
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जैविक और देसी उपाय
बिवेरिया बैसियाना / मेटाराइज़ियम: ये फफूँद दीमक पर हमला करती हैं। 2.5 किलो प्रति एकड़ की दर से सड़ी गोबर खाद में मिलाकर 8–10 दिन रखिए, फिर खेत में बिखेरिए। असर धीमा है पर स्थायी रहता है।
नीम खली: बुवाई के समय 80–100 किलो प्रति एकड़ नीम खली मिट्टी में मिलाने से दीमक की आबादी घटती है और नाइट्रोजन भी धीरे-धीरे मिलती रहती है।
बाँबी में पानी और नीम: मेड़ की बाँबी खोदकर उसमें नीम की खली या नीम का पानी डालना कॉलोनी को उजाड़ देता है। रानी निकालकर नष्ट कर दें तो पूरी कॉलोनी खत्म हो जाती है।
फसल चक्र: लगातार गेहूं-धान चलाने के बजाय बीच में सरसों या चना लेने से दीमक का दबाव घटता है।
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ये गलतियाँ कभी न करें
खड़ी फसल पर पत्तियों पर स्प्रे करना — दीमक ज़मीन के नीचे है, ऊपर का छिड़काव पूरा पैसा बर्बाद है।
कच्ची गोबर खाद खेत में डालना — यह दीमक को दावत देने जैसा है; खाद पूरी तरह सड़ी होनी चाहिए।
उपचारित बीज धूप में सुखाना — अंकुरण गिर जाता है; हमेशा छाया में सुखाएँ।
बीज उपचार के बाद बीज महीनों रखना — उपचारित बीज उसी दिन या अगले दिन बो देना चाहिए।
जैविक कल्चर और रासायनिक दवा एक साथ मिलाना — कीटनाशक जीवाणु मार देता है; कल्चर हमेशा आखिर में।
बाँबी छोड़ देना — मेड़ की एक बाँबी हर साल पूरे खेत को फिर से संक्रमित करती रहेगी।
दीमक को पानी की कमी समझना — एक और सिंचाई नुकसान नहीं रोकती, अक्सर बढ़ा देती है।
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कब क्या करें — दीमक का पूरा कैलेंडर
समय
ज़रूरी काम
मई–जून (खाली खेत)
गहरी जुताई; मेड़ की बाँबी खोदकर नष्ट करें
अक्टूबर (बुवाई से 3–4 हफ्ते पहले)
सिर्फ़ पूरी सड़ी गोबर खाद डालें; पिछली फसल के अवशेष हटाएँ
बुवाई से 1 दिन पहले
बीज उपचार — क्लोरपायरीफॉस 4 मि.ली./किलो या फिप्रोनिल 6 मि.ली./किलो
ठूँठ और जड़ें खेत से निकालें — अगले साल का हमला यहीं तय होता है
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निष्कर्ष
तीन बातें याद रखिए। पहली — पीला पौधा खींचकर देखिए; बिना जड़ के निकले तो वह दीमक है, पानी की कमी नहीं। दूसरी — दीमक का असली इलाज बुवाई के दिन बीज उपचार है, बाद की कोई दवा उसकी बराबरी नहीं करती। तीसरी — कच्ची गोबर खाद और खेत में पड़े फसल अवशेष ही दीमक को बुलाते हैं।
दीमक ज़मीन के नीचे का दुश्मन है — उसे ज़मीन के नीचे ही रोकिए, ऊपर से छिड़ककर नहीं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1गेहूं में दीमक लगने पर कौन सी दवा डालें?
सबसे असरदार उपाय बुवाई से पहले बीज उपचार है — क्लोरपायरीफॉस 20% EC की 4 मि.ली. या फिप्रोनिल 5% SC की 6 मि.ली. प्रति किलो बीज। अगर फसल खड़ी है और दीमक लग चुकी है तो क्लोरपायरीफॉस 20% EC लगभग 1 लीटर प्रति एकड़ सिंचाई के पानी के साथ टपकाना ही एकमात्र रास्ता है, क्योंकि पत्तियों पर किया छिड़काव ज़मीन के नीचे बैठी दीमक तक पहुँचता ही नहीं।
2दीमक और पानी की कमी में फर्क कैसे पहचानें?
पीले पौधे को हल्के से खींचिए — दीमक वाला पौधा बिना जड़ के आसानी से बाहर आ जाता है, जबकि पानी की कमी वाला पौधा जड़ समेत मिट्टी पकड़े रहता है। दीमक का नुकसान खेत में गोल धब्बों में फैलता है और हर सिंचाई के बाद बढ़ता है, जबकि सूखे का असर पूरे खेत में एक जैसा होता है।
3गेहूं के बीज को दीमक से बचाने के लिए कैसे उपचारित करें?
एक किलो बीज पर 4 मि.ली. क्लोरपायरीफॉस 20% EC को 1 लीटर पानी में घोलकर छिड़कते हुए बीज पलटिए, ताकि हर दाने पर परत चढ़ जाए, फिर छाया में 2–3 घंटे सुखाकर उसी दिन बुवाई कीजिए। उपचारित बीज कभी धूप में न सुखाएँ — अंकुरण गिर जाता है।
4क्या खड़ी फसल में दीमक का छिड़काव किया जा सकता है?
पत्तियों पर छिड़काव बेकार है, क्योंकि दीमक ज़मीन के नीचे मिट्टी की सुरंगों में रहती है और कभी खुले में नहीं आती। खड़ी फसल में एकमात्र काम करने वाला तरीका है दवा को सिंचाई के पानी के मुहाने पर धीरे-धीरे टपकाना, ताकि वह पानी के साथ जड़ क्षेत्र तक उतरे।
5दीमक किन खेतों में ज़्यादा लगती है?
हल्की-बलुई मिट्टी, बारानी खेत, और वे खेत जहाँ कच्ची गोबर खाद या पिछली फसल के डंठल-जड़ें पड़ी हों — इन तीनों जगह दीमक सबसे ज़्यादा मिलती है। धान या गन्ने के बाद बोए गए गेहूं में खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि बचे हुए अवशेष कॉलोनी का सीधा भोजन बन जाते हैं।
6दीमक का जैविक इलाज क्या है?
बिवेरिया बैसियाना या मेटाराइज़ियम फफूँद 2.5 किलो प्रति एकड़, सड़ी गोबर खाद में 8–10 दिन मिलाकर खेत में बिखेरना सबसे प्रचलित जैविक उपाय है। इसके साथ 80–100 किलो प्रति एकड़ नीम खली मिलाना और मेड़ की बाँबी खोदकर रानी सहित नष्ट करना दीमक की आबादी स्थायी रूप से घटा देता है।
7क्या गोबर की खाद से दीमक लगती है?
कच्ची या अधूरी सड़ी गोबर खाद से हाँ — वह दीमक का सीधा भोजन है और खेत में कॉलोनी बुला लेती है। पूरी तरह सड़ी, भुरभुरी और ठंडी खाद से यह खतरा नहीं रहता, इसलिए खाद कम से कम तीन-चार महीने पुरानी होनी चाहिए।
8दीमक से गेहूं में कितना नुकसान होता है?
बारानी और हल्की मिट्टी वाले खेतों में दीमक 15 से 30 प्रतिशत तक पौधे उखाड़ देती है, और भारी हमले में पूरे-पूरे धब्बे खाली हो जाते हैं। नुकसान दो बार होता है — बुवाई के तुरंत बाद अंकुरित बीज पर, और फिर पकाई के समय जड़ कटने से पौधे गिरकर।
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