पंजाब में गेहूं की बुवाई के लिए तैयार होता खेत — फॉस्फोरस और पोटाश का पूरा फैसला इसी दिन होता है।
बुवाई के दिन जो छूटा, वह पूरे सीज़न नहीं भरता
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1 बोरी
DAP प्रति एकड़, बुवाई पर
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85 किलो
कुल यूरिया प्रति एकड़
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20–25 दिन
पहली सिंचाई व टॉप ड्रेसिंग
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भूमिका
गेहूं की उपज का बड़ा हिस्सा उस दिन तय हो जाता है जिस दिन बुवाई होती है — क्योंकि फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा उसी दिन खेत में जानी है, बाद में डालने पर उनका आधा असर भी नहीं मिलता। यूरिया बाद में डाली जा सकती है, DAP नहीं। यही एक बात हर साल हज़ारों किसानों की जेब से पैसा निकाल लेती है।
दूसरी आम गलती यह है कि "बुवाई पर एक बोरी DAP और बाद में दो-तीन बोरी यूरिया" को हर खेत का जवाब मान लिया जाता है। असल में मात्रा बुवाई के समय, सिंचाई की सुविधा और मिट्टी — तीनों से बदलती है, और पछेती बुवाई में तो नाइट्रोजन जानबूझकर घटानी पड़ती है। इस लेख में एक एकड़ का पूरा हिसाब है — कौन सी खाद कितनी, किस दिन, और किस सिंचाई के साथ।
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सीधा जवाब — 1 एकड़ सिंचित गेहूं का पूरा हिसाब
समय से बोए गए सिंचित गेहूं की मानक सिफारिश 120:60:40 किलो NPK प्रति हेक्टेयर है। एक एकड़ में बदलकर यह इतना बनता है:
बुवाई के दिन (बेसल): 1 बोरी DAP (50 किलो) + 27 किलो पोटाश (MOP) + 33 किलो यूरिया — तीनों बीज के साथ कूँड़ में।
पहली सिंचाई पर (20–25 दिन, CRI अवस्था): 26 किलो यूरिया।
दूसरी सिंचाई पर (40–45 दिन): 26 किलो यूरिया।
यानी पूरे सीज़न में 1 बोरी DAP, करीब 85 किलो यूरिया (लगभग 2 बोरी) और 27 किलो पोटाश प्रति एकड़।
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DAP में 18% नाइट्रोजन भी होती है — एक बोरी से 9 किलो नाइट्रोजन मुफ़्त मिल जाती है। इसीलिए बुवाई वाली यूरिया 33 किलो है, आधी मात्रा 43 किलो नहीं। यह कटौती न करने वाला किसान हर एकड़ पर ज़रूरत से ज़्यादा नाइट्रोजन डाल रहा है।
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बुवाई वाली खाद सबसे ज़रूरी क्यों है
तीनों मुख्य तत्व मिट्टी में एक जैसा बर्ताव नहीं करते, और पूरा फर्क इसी बात से पैदा होता है।
फॉस्फोरस (P) चलता नहीं: यह मिट्टी में जहाँ गिरता है लगभग वहीं बँध जाता है। सतह पर बिखेरने से जड़ों तक पहुँचता ही नहीं — इसे बीज के पास, कूँड़ में जाना चाहिए। जड़ों का पूरा जाल इसी से बनता है।
पोटाश (K) भी बेसल में: यह तने को मज़बूती देता है और फसल गिरने से बचाता है। बाद में डालने का फायदा बहुत कम है।
नाइट्रोजन (N) बहती है: यही अकेला तत्व है जिसे किश्तों में देना ज़रूरी है, क्योंकि एक बार में दी गई नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा गैस बनकर उड़ता है या पानी के साथ बह जाता है।
⚠️
DAP बुवाई के बाद ऊपर से बिखेरने का लगभग कोई फायदा नहीं है। अगर बुवाई के दिन DAP नहीं मिल पाई, तो अगली सबसे अच्छी बात है उसे पहली सिंचाई से पहले हल्की गुड़ाई के साथ मिट्टी में मिला देना — बिखेरकर छोड़ देना नहीं।
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DAP का रास्ता या SSP का — दोनों का हिसाब
फॉस्फोरस DAP से भी मिल सकता है और SSP से भी। फर्क सिर्फ़ बोरियों की गिनती का नहीं है — SSP के साथ गंधक मुफ़्त मिलती है, DAP में गंधक शून्य है।
प्रति एकड़
DAP वाला रास्ता
SSP वाला रास्ता
फॉस्फोरस की खाद
1 बोरी DAP (50 किलो)
3 बोरी SSP (150 किलो)
कुल यूरिया
85 किलो
105 किलो
पोटाश (MOP)
27 किलो
27 किलो
गंधक मिली
0 किलो
लगभग 16 किलो
ढुलाई का बोझ
कम — 1 बोरी
ज़्यादा — 3 बोरी
हल्की और बलुई मिट्टी में, या जहाँ लगातार सिर्फ़ यूरिया-DAP चल रही हो, वहाँ गंधक की कमी आम है — ऐसे खेतों में SSP वाला रास्ता बेहतर पड़ता है। दोनों की पूरी तुलना SSP खाद गाइड में है।
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बुवाई के प्रकार से मात्रा कैसे बदलती है
गेहूं का प्रकार
सिफारिश (NPK किलो/हेक्टेयर)
प्रति एकड़ खाद
यूरिया की किश्तें
सिंचित, समय से (1–25 नवंबर)
120 : 60 : 40
1 बोरी DAP + 85 किलो यूरिया + 27 किलो पोटाश
3
सिंचित, पछेती (दिसंबर)
90 : 45 : 30
¾ बोरी DAP + 65 किलो यूरिया + 20 किलो पोटाश
2
बारानी / असिंचित
60 : 30 : 20
½ बोरी DAP + 43 किलो यूरिया + 13 किलो पोटाश
1 (पूरी बुवाई पर)
पछेती गेहूं में नाइट्रोजन कम क्यों? देर से बोई फसल को कम दिन मिलते हैं और गर्मी जल्दी आ जाती है। ज़्यादा नाइट्रोजन उस फसल को लंबा और मुलायम बना देती है, जिससे वह गिरती है और दाना सिकुड़ जाता है।
⚠️
ये सामान्य सिफारिशें हैं। असल मात्रा मिट्टी जाँच रिपोर्ट, किस्म और आपके राज्य के पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज़ से तय होनी चाहिए। बोरी खरीदने से पहले नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से एक बार पुष्टि कर लीजिए — राज्यवार सिफारिश अलग होती है।
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यूरिया की टॉप ड्रेसिंग — सिंचाई के साथ, पानी में नहीं
गेहूं की सबसे कीमती सिंचाई पहली है — बुवाई के 20–25 दिन बाद, जब ताजमूल यानी CRI जड़ें बनती हैं। यही यूरिया की पहली टॉप ड्रेसिंग का भी सही समय है, और दोनों को साथ चलाना है।
यूरिया पहले, पानी बाद में: सिंचाई से ठीक पहले यूरिया बिखेरिए, ताकि पानी उसे मिट्टी में उतार दे। भरे हुए खेत में डाली यूरिया ऊपर ही तैरती रह जाती है।
ओस सूखने के बाद डालिए: भीगी पत्तियों पर चिपके दाने पत्ती जला देते हैं और भूरे धब्बे बना देते हैं, जिन्हें अक्सर रोग समझ लिया जाता है।
दूसरी टॉप ड्रेसिंग 40–45 दिन पर: कल्ले निकलने के बाद वाली सिंचाई के साथ। यह वही किश्त है जो बालियों की संख्या तय करती है।
बाली निकलने के बाद यूरिया नहीं: उस अवस्था में नाइट्रोजन दाना नहीं भरती, सिर्फ़ फसल गिराती है और रतुआ जैसे रोग बढ़ाती है।
बुवाई पर, जाँच में कमी दिखने पर — कमी में पत्तियों पर पीली धारियाँ और बौनापन
गंधक (जिप्सम से)
40–50 किलो
बुवाई पर, हल्की मिट्टी में; SSP डाली हो तो अलग से ज़रूरत नहीं
गोबर की सड़ी खाद
2–3 ट्रॉली
बुवाई से 3–4 हफ्ते पहले, जुताई के साथ — मिट्टी की पकड़ बढ़ती है
पोटाश (MOP)
27 किलो
बुवाई पर — तना मज़बूत, फसल कम गिरती है
💡
जिंक और DAP एक साथ न मिलाएँ। दोनों को एक ही समय एक साथ मिलाकर डालने पर जिंक की उपलब्धता घट जाती है — जिंक सल्फेट को अलग से, बालू या सूखी मिट्टी में मिलाकर बिखेरिए।
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ये गलतियाँ कभी न करें
DAP की नाइट्रोजन न घटाना — एक बोरी DAP 9 किलो नाइट्रोजन देती है; उसे गिने बिना पूरी यूरिया डालना सीधे-सीधे ज़्यादा नाइट्रोजन देना है।
DAP ऊपर से बिखेर देना — फॉस्फोरस मिट्टी में चलता नहीं, इसलिए वह बीज के पास कूँड़ में ही जाना चाहिए।
भरे खेत में यूरिया डालना — यूरिया सिंचाई से पहले बिखेरनी है, पानी भरने के बाद नहीं।
पोटाश छोड़ देना क्योंकि "महँगी है" — पोटाश के बिना तना कमज़ोर रहता है और एक बेमौसम बारिश पूरी फसल बैठा देती है।
बाली आने के बाद यूरिया डालना — इस अवस्था में यह दाना नहीं भरती, सिर्फ़ पत्ती बढ़ाती है और रोग बुलाती है।
पछेती बुवाई में भी पूरी नाइट्रोजन डालना — देर से बोई फसल में यह उपज घटाती है, बढ़ाती नहीं।
🗓️
बुवाई से कटाई तक — खाद का पूरा कैलेंडर
समय
ज़रूरी काम
बुवाई से 3–4 हफ्ते पहले
गोबर की सड़ी खाद जुताई के साथ मिलाएँ
बुवाई का दिन
पूरी DAP व पोटाश और आधी यूरिया, बीज के साथ कूँड़ में
20–25 दिन (CRI)
पहली सिंचाई — उससे ठीक पहले 26 किलो यूरिया प्रति एकड़
दूसरी सिंचाई — उससे पहले 26 किलो यूरिया प्रति एकड़
60–70 दिन
बाली निकलना — अब नाइट्रोजन बंद, सिर्फ़ सिंचाई और रोग निगरानी
90–100 दिन
दाना भरना — दूध वाली अवस्था की सिंचाई न छोड़ें
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निष्कर्ष
तीन बातें याद रखिए। पहली — फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के दिन, कूँड़ में; बाद में डालने का फायदा नहीं। दूसरी — यूरिया तीन किश्तों में: बुवाई, पहली सिंचाई (20–25 दिन) और दूसरी सिंचाई (40–45 दिन)। तीसरी — DAP से मिली 9 किलो नाइट्रोजन हर बार घटाइए।
गेहूं में खाद का फैसला बुवाई के दिन ही पूरा हो जाता है — बाद की सारी मेहनत सिर्फ़ उसे संभालती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1गेहूं में 1 एकड़ में कितनी खाद डालनी चाहिए?
समय से बोए सिंचित गेहूं में 1 एकड़ पर 1 बोरी DAP (50 किलो), करीब 85 किलो यूरिया और 27 किलो पोटाश लगती है, जो 120:60:40 किलो NPK प्रति हेक्टेयर की मानक सिफारिश से निकलता है। DAP और पोटाश पूरी बुवाई के दिन कूँड़ में, और यूरिया तीन किश्तों में — बुवाई, पहली सिंचाई और दूसरी सिंचाई पर।
2गेहूं में यूरिया कब और कितनी बार डालें?
तीन बार — बुवाई के दिन लगभग 33 किलो, पहली सिंचाई पर (20–25 दिन) 26 किलो और दूसरी सिंचाई पर (40–45 दिन) 26 किलो प्रति एकड़। यूरिया हमेशा सिंचाई से ठीक पहले बिखेरिए ताकि पानी उसे मिट्टी में उतार दे; भरे हुए खेत में डालने पर वह ऊपर ही रह जाती है।
3गेहूं में DAP कितनी डालनी चाहिए?
सिंचित गेहूं में 1 एकड़ पर एक बोरी यानी 50 किलो DAP काफी है, और वह पूरी बुवाई के दिन बीज के साथ कूँड़ में जानी चाहिए। फॉस्फोरस मिट्टी में इधर-उधर चलता नहीं, इसलिए ऊपर से बिखेरी गई DAP का लगभग कोई फायदा नहीं मिलता।
4पहली सिंचाई पर कितनी यूरिया डालें?
एक एकड़ के लिए करीब 26 किलो यूरिया, बुवाई के 20–25 दिन बाद पहली सिंचाई से ठीक पहले। यह अवस्था ताजमूल यानी CRI कहलाती है और गेहूं की सबसे कीमती सिंचाई यही है — इसी समय जड़ों का असली जाल बनता है, इसलिए यह किश्त छोड़ना सबसे महँगा पड़ता है।
5पछेती गेहूं में खाद की मात्रा क्या रखें?
दिसंबर में बोए पछेती गेहूं में मात्रा घटाकर 90:45:30 किलो NPK प्रति हेक्टेयर कर दीजिए — यानी एक एकड़ पर लगभग तीन-चौथाई बोरी DAP, 65 किलो यूरिया और 20 किलो पोटाश, और यूरिया सिर्फ़ दो किश्तों में। देर से बोई फसल को कम दिन मिलते हैं, इसलिए ज़्यादा नाइट्रोजन उसे गिरा देती है और दाना सिकुड़ जाता है।
6बिना सिंचाई वाले (बारानी) गेहूं में कितनी खाद दें?
बारानी गेहूं में 60:30:20 किलो NPK प्रति हेक्टेयर — यानी प्रति एकड़ लगभग आधी बोरी DAP, 43 किलो यूरिया और 13 किलो पोटाश, और पूरी मात्रा बुवाई के समय नमी में। बाद में टॉप ड्रेसिंग का कोई मतलब नहीं, क्योंकि बिना पानी के यूरिया घुलेगी ही नहीं।
7गेहूं में गंधक और जिंक की ज़रूरत कब पड़ती है?
हल्की-बलुई मिट्टी में और उन खेतों में जहाँ सालों से सिर्फ़ यूरिया-DAP चल रही हो, वहाँ 10 किलो जिंक सल्फेट और 40–50 किलो जिप्सम प्रति एकड़ बुवाई के समय दिया जाता है। अगर आपने DAP की जगह SSP डाली है तो गंधक उसी से मिल जाती है, अलग से जिप्सम की ज़रूरत नहीं पड़ती।
8गेहूं में आखिरी बार यूरिया कब तक डाल सकते हैं?
दूसरी सिंचाई तक, यानी बुवाई के लगभग 40–45 दिन बाद तक। बाली निकलने के बाद डाली गई यूरिया दाना नहीं भरती — वह सिर्फ़ पत्ती बढ़ाती है, फसल को मुलायम बनाकर गिरा देती है और रतुआ जैसे रोगों का खतरा बढ़ा देती है।
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